सुविचार – निर्णय – Decision – 216

जब आपको हर स्थान पर, पर्यटन स्थल पर, ऐतिहासिक स्थल पर पर निर्देशन चाहिए, तो फिर जीवन के लिए भी तो निर्देशक आवश्यक है.

“हर decision लेना जरुरी नहीं होता..

– सही decision के लिए रुक जाना भी एक decision है.”
_ हर चीज तुरंत पाना जरूरी नहीं… सही वक्त तक रुक पाना जरूरी है.
_ “ज़्यादा विकल्प [options] होने से स्पष्टता नहीं आती… कब रुकना है, उससे आती है.
_ “Clarity मिल जाए…
तो decision लेने की जल्दी खुद ही ख़तम हो जाती है.”
_ जो अंदर clear होता है… उसे बाहर साबित करने की जरूरत नहीं होती.
_ सही निर्णय [decision] वो नहीं, जो जल्दी हो जाए… वो है जिसके बाद मन शांत रहे.
अंदर से एक आवाज आएगी :
_ “आराम से देख… कोई जल्दी नहीं है ; और वही आवाज़ सही जगह तक ले जायेगी.”

सुविचार 215

जब देता है तो भर-भर देता है..

_जब लेता है तो कण-कण समेट लेता है..
_न देने का कोई तर्क..
_न लेने का कोई तर्क..
_बिना किसी तर्क के दुनिया चला रहा है..
_फिर भी सब उसके दीवाने..
_वह जो भी है..
_है भी या नहीं..
_कमाल ही कमाल है..
_बेवजह खुश है..
_जब कि उसकी दुनिया में
धमाल ही धमाल है..!!

सुविचार 214

Question : आपका जीवन को देखने का नजरिया कितना बेहतर है, पर पता नहीं आप जैसे लोग दुनिया में इतने कम क्यों हैं ?
Answer : शायद इसकी एक वजह ये है भौतिकता की मांग में, मानव सभ्यता भी भारी भौतिकता की चपेट में है..
_ वह लोगों के रिश्तों में भी उनके व्यक्तिगत वर्ताव में भी देखने को मिलता है और इसकी वजह ये भी है उन्हें घर में भी यही सब सिखाया बताया जा रहा है..
_ शायद इंसान अति जरूरत वादी हो चुका है.. बाकी मेरा मानना है जब से सभ्यता आई सब कुछ इस संसार में मानव निर्मित है, सिवाय कुदरत को छोड़कर, तो जो कुछ मानव निर्मित है उसे बदला जाना आवश्यक है, पर लोग बदलना नहीं चाहते.. वो हर चीज़ में छेड़छाड़ चाहते हैं, सुकून से कुदरत को अपना काम नहीं करने देना चाहते..
_ जब से तर्क हावी हुआ इंसानों के भीतर से संवेदनाओं को हटा लेने का निरंतर काम जारी है..
_ अब यहां जीवन एक प्रोडक्ट बनकर रह गया है.. पर हमें अपनी सीमाएं तय करनी होंगी, वरना भागते हुए ज़िन्दगी गुज़र जाएगी और हाथ कुछ भी नहीं आएगा..
_ सिवाय चार पांच फ्लैट, पांच छह गाड़ियां, हो सकता है इससे भी ज्यादा कोई प्रॉपर्टी बना ले..
_ मगर किसके लिए आख़िर क्यों इतना भागकर कौन सा जीवन अमृत मिल जायेगा..
_ यहां तो अगले पल ही सांसों का भरोसा नहीं.. और जानते हुए भी यह सच किसी को दिखता नहीं.!!
– Rhythm Raahi

सुविचार – हर तरफ पागलपन – 213

हर तरफ पागलपन : अरे मैं इस युग में क्यों पैदा हुआ ?

_ यह एक भयानक युग है.
_ दुनिया इतनी भयावह हो गई है कि कभी लगता है कि सब कुछ बंद करके एकांत में कहीं चला जाऊं.. – जहां कोई मुझे न जानता हो.!!
_ “क्या मेरा मन दुनिया से भागना चाहता है या अपने भीतर के शोर को शांत करना चाहता है ?”
_ जब संवेदनशील और गहरी सोच रखने वाला व्यक्ति चारों तरफ़ की दौड़, हिंसा, शोर और उथल-पुथल देखता है, तो उसका मन यही कहता है — “मैं इस युग में क्यों ?”
_ दरअसल यह अनुभूति भीतर की साफ़ दृष्टि और संवेदनशीलता का ही प्रमाण है.
“जब भीतर शांति का दीपक जलता है, तब सबसे अंधेरे युग में भी उजाला अपना घर बना लेता है.”

सुविचार – युवा – जवान – Young – 211

युवा होने का कोई सम्बन्ध उम्र से नहीं है, युवा होना चित्त की अवस्था है.

_ जो युवा देश और समाज की गली सड़ी व्यवस्था का, झूठी धार्मिक मान्यताओं का, पाखंडों का, रूढियों का, अन्धविश्वास का, धार्मिक व सामाजिक बुराइयों का विरोध नहीं करता, वो युवा होकर भी युवा नहीं है, वो तो बुढ़े से भी गया गुजरा है, उससे देश और समाज का कोई भला नहीं हो सकता.
_ युवा वो है जो देश और समाज की इन गली सड़ी व्यवस्थाओं का विरोध करे,
_ इनके विरुद्ध आवाज बुलंद करे. देश और समाज को नयी दिशा दे,
_ दुनिया के साथ अपने देश और समाज को प्रतिस्पर्धा में शामिल करें, चुनौतियों का सामना करे.
नई-नई और तार्किक बातें सीखने की ललक जब तक आपके अंदर रहेगी..
तब तक आप ऊर्जावान और युवा रहेंगे..- अन्यथा आप बूढ़े और ढुल्लू हैं.!!
** काश मैं अपने 20 साल पर ये बातें जान पाती **

।। आज का लेख युवाओं को समर्पित ।।
इस लेख के माध्यम से मैं युवा वर्ग को संदेश देना चाहती हूं।
कहते हैं ना हमेशा दूसरों की गलतियों से सीखना चाहिए, मेरे खुद के अनुभव से जीवन की कुछ सच्चाइयां ।
1. काश समाज के दबाव के बजाय खुद हिम्मत दिखाकर अपना करियर चुन पाते तो अपना बेस्ट दिया होते आज स्थिति कुछ और होती ।
2. जब आपके आसपास के लोग आपको हर वक्त नीचे खींचने लगे तो समझ जाओ कि आप वह कर रहे हैं जो बाकी लोग नहीं कर सकते ।
3. काश यह बात पता होती की उम्र में बड़ा इंसान हमेशा सही सलाहकार हो यह जरूरी नहीं,
पके बाल हमेशा बुद्धिमान होने का कोई ठोस प्रमाण हो ये ज़रूरी नहीं ।
4. फालतू के बहस झगड़े में न पड़कर शांत रहकर आगे बढ़ गए होते हर बात का जवाब देना जरूरी नही था …फिजुल की बहस हमेशा नीचे ही ले जाती है ।
5. आलोचकों का जवाब देना समय की बर्बादी है, ज्यादातर लोग आपकी बुराई इसलिए करते है क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं आप उनसे बहुत आगे ना निकल जाएं ।
6. जब आप किसी से मिलते है तो जिस तरीके से वो आपसे बातचीत करते हैं वो पर्याप्त है ये बताने के लिए वह इंसान कैसा है । संगत हमेशा अच्छे सोच वालो से करिए ।
7. पैसा ,गाड़ी बंगला सुखी जीवन का पैमाना नहीं बल्कि जीवन की उच्चतम सफलता स्वस्थ रहना और मानसिक शांति है ।
8. ईश्वर हमेशा उनकी मदद करता है जो दिलों जान से अपने काम में लगे रहते हैं ।
उस supernatural power पर विश्वास करते हुए अपना 100% consistency के साथ मेहनत को दिया होता और रोज बनाई गई छोटी छोटी योजनाओं पर अमल की होती तो परिस्थितियां कुछ और होती।
9. छोटी छोटी असफलताओं से घबराएं नहीं होते ।
10. अपनी जवानी में उन बेहूदा चीजों को प्राथमिकता नहीं दिए होते जिसका बाद के जीवन में कोई उपयोगिता ही नहीं रह जाती ।
फालतू की चीज़ों में व्यर्थ समय नहीं गवांना चाहिए था ।
– Divya Meera “अर्क”
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