सुविचार – 5–5–5 फार्मूला [Formula] – 222

5–5–5 फार्मूला

खुद से पूछो :
क्या ये बात 5 दिन बाद महत्वपूर्ण [important] होगी?
5 महीने बाद ?
5 साल बाद ?
_ अगर जवाब “नहीं” है, तो अभी भी इतना टेंशन [tention] लेने की जरूरत नहीं है.
– जो कुछ भी अभी मुझे डिस्टर्ब [Disturb] कर रहा है क्या वो 5 साल बाद भी मेरा सुकून छीन पाएगा ?
– हर छोटी बात को बड़ा बनाना भी एक आदत है… और उसे छोड़ देना भी.
Decision Making Formula :
किसी भी फैसले [decision] से पहले 5 चीजें लिखो :
Fayda
Nuksaan
Long-term impact
Emotional effect
Kya ye mere values se match karta hai ?
कभी-कभी जो बात 5 साल बाद भी याद रहती है…वो टेंशन [tension] नहीं, अधूरा अनुभव होता है.

_ इसलिए कभी ये भी पूछिए : “क्या मैं इस पल को पूरा जी रहा हूं, या सिर्फ विश्लेषण कर रहा हूं ?
मैं प्रकृति में जा कर विस्तार [Expand] हो रहा हूँ…या समझ से बच कर हल्का हो रहा हूँ ? दोनों अलग चीज़ें हैं.
अगर कल सुबह मेरी आंख न खुले… तो क्या मैं आज का दिन इस तरह जी रहा हूं.. ‘जैसा जीना चाहिए’ ?

सुविचार 221

वर्त्तमान में हम जो कुछ हैं, अपने विचारों के ही कारण हैं और भविष्य में जो कुछ भी बनेंगे, वह भी इन्ही के कारण.

 

सुविचार – सुलझना – 220

सुलझना जटिल प्रक्रिया है, उलझना बड़ा आसान है.

_ सुलझाव के लिए जागृति चाहिए, होश चाहिए, सचेतना चाहिए.
_ इसके विपरीत जरा सी असावधानी हुई कि उलझे ही उलझे..
_ उलझन को सुलझाने में पीड़ा महसूस होती है, उलझन में पड़े रहने की आकांक्षा उठती है…यह होश ही नहीं रहता कि उलझते उलझते हम किस गर्क में आ गए हैं.
_ नीम बेहोशी में चले कि उलझे…होश में आने से डरते हैं,
_ हम इसलिए भी डरते हैं कि नीम बेहोशी में हमारे उलझने को हमारे होश में आते ही हम पर थोप दिया जाएगा…हजारों लांछन लगाए जाएंगे…उपहास उड़ाया जाएगा.
_ इसकी चिंता छोड़ ही देनी चाहिए…जो बीत गया बेहोशी में…उसे छोड़ ही दो…जो घटित हो गया हमारे अध्यान में उसे जाने ही दो.
_ राह में चलते हुए न जाने कितनी दफा हम भटक ही जाते हैं…
_ भटक जाना परेशानी नहीं है…भटक कर वहीं खड़े हो जाना परेशानी है…।
_ कई बार मार्ग में हम गिर पड़ते हैं…गिर पड़ना मुसीबत नहीं है…गिरकर न उठ पाना मुसीबत है.
_ अपने उलझन का सिरा पकड़िए…कठोर हाथों से नहीं…बिल्कुल नर्म स्पर्श के साथ…आहिस्ता आहिस्ता सुलझाइए….
_ कुछ समय बाद ही आपके बेहोशी…आपके अध्यान की उलझन सुलझने लगेगी।।
– अविनाशराही

सुविचार 218

हम में से कई लोग एक- दूसरे को देख कर मुस्कुराते हैं, लेकिन दिमाग में एक- दूसरे के बारे में अच्छा नहीं सोचते हैं. हमें लगता है कि सामने वाला हमारे चेहरे को पढ़ सकता है, बुरी बातों को सुन सकता है, लेकिन हमारे दिमाग में क्या चल रहा है, यह उसे थोड़े ही पता है. वह हमें नुक़सान कैसे पहुंचायेगा ?

लेकिन सच तो यह है कि आपके द्वारा सोची गयी हर बात, वह चाहे अच्छी हो या बुरी, ब्रह्माण्ड में जाती है और उस व्यक्ति से टकरा कर आपके पास उसी रूप में वापस आती है.

हमारे आस पास के कई लोग ग़लत काम करते हैं, हो सकता है कि उन्हें सज़ा भी न मिले. लेकिन क्या इस बात को देखते हुए, हम भी ग़लत काम करें. खुद की तुलना और से न करें, आप तो बस अपना काम करते जाएँ.

सुविचार – जीवन क्या है ? – 217

‘जीवन क्या है ?’ ‘What is life ?’

_ ‘जब हम जन्म लेते हैं तो हमारे पास साँस होती है, नाम नहीं होता लेकिन जब मरते हैं तो नाम रहता है पर साँस नहीं होती ; साँस से नाम तक की यात्रा जीवन है.
_ साँसों को कायम रखने की जद्दोजहद ज़िंदगी है.’
जीवन क्या है ? इसकी सटीक परिभाषा कोई नहीं दे सकता.

_ हर कोई जीवन को अपने-अपने तरीके से समझता और समझाता है.
_ और रही गलतियों पर बददुआ मिलने की तो कभी कभी अच्छे बनने पर भी बददुआ मिल जाती है.!!
जब जीवन में ठहराव आता है, तो स्वभाव में चंचलता नहीं रहती, आसपास का शोर कम सुनाई देता है, आदमी खुद को सुख-दुःख से ऊपर उठा हुआ महसूस करता है.

_ हर ठहराव अकर्मण्यता का सूचक नहीं होता, कई ठहराव मुक्ति के द्योतक होते हैं.
– Manika Mohini
जीवन का सबसे बड़ा रहस्य क्या है ?

_ हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि हम खुद को ही नहीं जानते ;
_ हम अपनी प्रकृति या मूल स्वभाव को ही नहीं जानते या फिर शायद जानते हुए भी अनजान हैं ;
__ जिस तरह हमें पता है कि पानी का स्वभाव तरल होता है, उसी तरह क्या हमें पता है कि मनुष्य का मूल स्वभाव क्या है ?
_ वास्तविकता के खिलाफ मत जाओ – आप हार जाओगे ;
_ क्योंकि किसी भी अनित्य वस्तु से चिपके रहने का तात्पर्य है कि कोई कितना अनजान और बेखबर होकर सिर्फ भ्रमों में जीता रहता है.!!
व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता और जीवन की तैयारियों में ही ‘जीवन’ बीत जाता है,
_ जिससे हम वास्तव में जीवन को कभी जी ही नहीं पाते है.!!
“जीवन को हल्के में मत लो, पर बोझ भी मत बनाओ.!!”
“जीवन जीते हुए चलो..” किसी एक ख्वाब के लिए रिश्ते, स्वास्थ्य या किसी भी चीज को छोड़ते हुए जाओगे तो कल वो मिल भी गया तो उसकी वेल्यू नहीं बचेगी.!!
परफेक्ट कोई भी नहीं होता और न ही इसकी उम्मीद करें,

_ दूसरे की गलतियों के बावजूद प्यार करना ही सही मायने में प्यार है.!!

जब हालात सबसे कठोर हों, तब जो भीतर टिके रहना सीख लेता है..
– वही सच में जीवन को जन्म देता है.!!
कभी जिन बातों पर गुस्सा आता था, जिन पर रो-रोकर रातें कटती थी

_ आज उन्हीं बातों पर हल्की-सी हँसी आ जाती है शायद यही तो जीवन है,
_ दर्द की गहराई को समय की नरमी में घुल जाना और इस बदलाव के लिए किसी चमत्कार की ज़रूरत नहीं होती
_ कभी-कभी बस किसी अपने के दो प्रेमभरे शब्द ही काफी होते हैं, जो भीतर की पूरी दुनिया बदल देते हैं.!!
जीवन का क्या ? यह तो चलता ही रहता है.

_ घटनाओं का क्या ? वे तो घटित होती ही रहती हैं.
_ घटनाओं के साथ हम कर भी क्या सकते हैं, वे होने के लिए स्वतंत्र हैं !
_ हमारी चिंता बस इतनी है कि जब वे घटित हों तो हम उनसे कैसे निपटेंगे.
_ वैसे भी, ज्यादा चिंता करने से होगा क्या ?
_ ठीक है, जब घटनाएँ घटित होंगी, हम उनसे निपटने का कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे.!!
ज़िंदगी बहुत छोटी है।🌀

हर दिन सिर्फ़ 24 घंटे मिलते हैं।
आखिर कितने घंटे– ⏰
दूसरों के दिमाग में
खुदको सही साबित करने में खर्च करुँ ?
सच तो यह है—✔️
हर बात साबित करना ज़रूरी नहीं।
ज़्यादातर तो बिल्कुल भी नहीं।
हम अपनी Valuable Energy–
किसी और की नज़रों में👀
सही दिखने के लिए खर्च करते हैं।
क्या हमारी ज़िंदगी इतनी सस्ती है ?
सच यह भी है—☝️
सब अपनी फिल्म के hero है।
हम उसमें सिर्फ side character।
जो उसने सोचा वो उसकी कहानी है।
जितना ज़्यादा साबित करोगे सोचेगा ?
इतना defend क्यों? कुछ गड़बड़ है।
ये गलत message देती है–
मेरी वैल्यू उसकी Opinion पर निर्भर है ?
लोग बिना proof के भी समझते हैं।
लेकिन वही जो सही में अपने हो।
जो नहीं वे कभी समझेंगे भी नहीं।
तो फिर बीच का रास्ता क्यों चुनना ?
लोगों को गलत सोचने दो।✔️
तुम बस अपना काम करो।✔️
क्योंकि–
तुम्हारी शांति, समय और खुशी—
किसी सफाई से कहीं ज़्यादा कीमती हैं।
और शायद–👍
Freedom का पहला step यही है—
यूं हर किसी को–💐
सब कुछ साबित करना छोड़ देना।
– Yu Hi
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