_ गलतियां इंसान से होती हैं.. पर गलतफहमियां, तब होती हैं जब हम आंखें मूंद कर, अपने कानों पर विश्वास कर लेते हैं.
__ गुजरा वक्त वापस नहीं आता और पैसे से तो बिल्कुल भी नहीं.
_ हर जानकारी सबको नहीं दी जाती क्योंकि हर कोई उसे समझने या संभालने के लायक नहीं होता.
_ सच कभी-कभी चुभता है, लेकिन झूठ वो ज़हर है जो धीरे-धीरे रिश्तों को मार देता है.
_ फर्जी लोगों की भीड़ से बेहतर है अकेले चलना क्योंकि वहां कम से कम सच्ची खुशी तो मिलेगी.
_ भीड़ में अच्छाई ढूंढोगे ? अरे भाई! अच्छे लोग तो भीड़ में टिक ही नहीं पाते.
_ जिस काम से तुम्हारे घर पर चूल्हा जलता है, उस पर शर्म कैसी ? मेहनत की कमाई हमेशा सबसे प्यारी होती है.
_ दौलत के आंकड़े बढ़ाने से ज्यादा ज़रूरी है, अपने कर्मों की किताब को साफ रखना.
_ समय खराब हो तो चिल्लाने से क्या होगा ? बेहतर है दिल को समझा लो, वरना तमाशा खुद का ही बनेगा.
_ 100 अच्छे कामों को भुला देती है एक गलती और यही सबसे बड़ी नाइंसाफी है.
_ दूसरों का सहारा बनने वाले लोग मजबूत होते हैं, शायद इसलिए खुद के दर्द में भी वो अकेले मुस्कुरा लेते हैं.
_ तुम्हारे बोले हुए शब्द लौटकर नहीं आते, इसलिए उन्हें परोसने से पहले ज़रूर चख लेना चाहिए.
_ गलती सुधारी जा सकती है, पर ग़लतफ़हमी अगर बन गई तो बहुत कुछ बिगाड़ सकती है.