सुविचार 242

जब मन सजग, सहज और रचनात्मक रहेगा, तो आपको हर परिस्थिति का समाधान नज़र आएगा.

सुविचार 241

कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए प्रसन्न नहीं दिखाई देता कि उसे कोई परेशानी नहीं है, बल्कि इसलिए प्रसन्न रहता है कि उसका जीने का दृष्टिकोण सकारात्मक है.

सुविचार – सामने वाले को बदल डालो..- 240

एक बार संख्या 9 ने 8 को थप्पड़ मारा

8 रोने लगा…
पूछा मुझे क्यों मारा..?
9 बोला…
मैं बड़ा हु इसीलए मारा..
सुनते ही 8 ने 7 को मारा
और 9 वाली बात दोहरा दी
7 ने 6 को..
6 ने 5 को..
5 ने 4 को..
4 ने 3 को..
3 ने 2 को..
2 ने 1 को..
अब 1 किसको मारे
1 के निचे तो 0 था !
1 ने उसे मारा नहीं
बल्कि प्यार से उठाया
और उसे अपनी बगल में
बैठा लिया
जैसे ही बैठाया…
उसकी ताक़त 10 हो गयी..!
और 9 की हालत खराब हो गई.
जिन्दगीं में किसी का साथ काफी हैं,
कंधे पर किसी का हाथ काफी हैं,
दूर हो या पास…क्या फर्क पड़ता हैं,
“अनमोल रिश्तों”
का तो बस “एहसास” ही काफी हैं !
बहुत ही खूबसूरत लाईनें..
किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!
डरिये वक़्त की मार से,
बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..!
अकल कितनी भी तेज ह़ो,
नसीब के बिना नही जीत सकती..
बीरबल अकलमंद होने के बावजूद,
कभी बादशाह नही बन सका…!!”
“ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो,
ना ही तुम अपने कंधे पर सर
रखकर रो सकते हो !
एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है! इसलिये वक़्त उन्हें दो जो
तुम्हे चाहते हों दिल से!
: शानदार बात
बदला लेने में क्या मजा है
मजा तो तब है जब तुम
सामने वाले को बदल डालो..

सुविचार – आसान नहीं है.. किसी को भीतर से जगाना.!! – 239

कोई भी जागना नहीं चाहता.. अगर कोई आपको गहरी नींद से जगाने की कोशिश करे, तो आप पहले तो जागना ही नहीं चाहेंगे..

_ फिर भी, अगर कोई आपको जगाए, तो आप उसकी गर्दन पकड़ लेंगे.
_ आसान नहीं है- किसी को भीतर से जगाना.!!

सुविचार 238

क्या जीवन सिर्फ काम, धन और सामाजिक मान्यता तक सीमित होना चाहिए ?

_ नहीं, जीवन सिर्फ काम, धन और सामाजिक मान्यता तक सीमित नहीं होना चाहिए.
_ ये सब साधन हैं — जीवन का सार नहीं.
_ सच्चा जीवन तब शुरू होता है जब आप भीतर के अर्थ को महसूस करना शुरू करते हैं —
जब आप यह पूछते हैं कि “मैं क्यों जी रहा हूँ ?”
_ जब आप प्रेम, शांति, सृजन, और आत्मिक संतुलन की दिशा में बढ़ते हैं.
_ धन और मान्यता बाहर की दुनिया में सम्मान दिला सकते हैं,
_ पर संतोष, सुकून और गहराई भीतर के जीवन से ही आती है.!!
जीवन को सहज और सरल बनाओ. बनावटीपन अपने अन्दर मत आने दो,

_ क्योंकि दिखावे से ही अशान्ति पैदा होती है और इन सबसे बचकर चलने से आनन्द आता है.!!

सुविचार – सुविधा, Facility – 237

**हमें सुविधाएं तो सारी चाहिये.
_ लेकिन न तो उसकी तैयारी करते हैं न कुछ सोचते हैं.!!
**’सुविधा बदलती है’, लेकिन समझदार वही है, जो हर साधन को जीवन के अनुकूल बना ले.
**सुविधा (Facility)

_ आज का इंसान सुविधा से घिरा हुआ है…
_ हर काम आसान हो गया है…
_ लेकिन अजीब बात यह है कि
_ जीवन उतना ही उलझता जा रहा है.
👉 पहले लोग कम में भी संतुष्ट थे.
👉 आज सब कुछ होते हुए भी कमी महसूस होती है.
_ क्यों ?
_ क्योंकि
_ सुविधा बाहर बढ़ी है…
_ लेकिन अंदर की स्थिरता कम हो गई है.
_ हम जीवन को आसान बनाने के चक्कर में, उसे गहरा जीना भूल गए हैं.
👉 हर चीज instant चाहिए.
👉 हर feeling जल्दी बदलनी है.
👉 हर discomfort से भागना है.
लेकिन सच यह है –
_ जो चीजें हमें grow करती हैं… वो अक्सर uncomfortable होती हैं.
– सुविधा धीरे-धीरे हमें कमजोर बना देती है.
👉 patience कम हो जाता है.
👉 सहने की क्षमता घट जाती है.
👉 छोटी-छोटी बातों में disturb होने लगते हैं.
🌱– सही balance क्या है ?
_ सुविधा गलत नहीं है…
_ लेकिन उस पर depend हो जाना गलत है.
👉 सुविधा का use करो..
👉 लेकिन खुद को उसके बिना भी capable रखो.
🌿 Final truth
_ “सुविधा जीवन को आसान बना सकती है… लेकिन मजबूत नहीं बनाती”
देखें “क्या मैं सुविधा का उपयोग कर रहा हूँ… या सुविधा मुझे चला रही है ?”
error: Content is protected