सुविचार 163

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अविश्वास नकारात्मक शक्ति है, जब मस्तिष्क किसी बात पर सन्देह करता है तो वह ऎसे कारणों को खोज लेता है, जिनसे उस विश्वास को बल मिले.

 

सुविचार – एडजस्ट – Adjust – समायोजित करना – 162

एडजस्ट [Adjust] करना सीखिए..

_ सबकुछ हमारी इच्छा के अनुसार हो, ये जरुरी थोड़े है..
_ ये दुनिया केवल हमारे अकेले के लिए थोड़े बनी है, जो हम चाहेंगे वैसा ही होगा,
_ एडजस्ट [Adjust] करना सीखिए..
_ परिस्थिति के अनुसार ख़ुद को ढालना सीखिए,
_ अगर बात-बात पर खिन्नता अनुभव करोगे तो लोग हमें अपनी दुनिया से बाहर निकाल फेकेंगे ;
_ ये ज़िंदगी है, यहाँ ख़ुद को परिस्थिति अनुसार बदलना पड़ता है, एडजस्ट करना पड़ता है ;
_ इसलिए एडजस्ट [Adjust] करना सीखिए.!!

सुविचार – शब्द – शब्दों -161

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शब्दों को कोई भी स्पर्श नहीं कर सकता, पर शब्द सभी को स्पर्श कर जाते हैं.!!
“कुछ रास्ते शब्दों से शुरू होते हैं, और ख़ामोशी में चलकर रोशनी तक पहुँचते हैं”
शब्दों की अपनी तपन है, ये सुकून भी देते हैं और जला भी देते हैं.!!
शब्दों की आयु भले कम हो गई हो, लेकिन यदि उन्हें सही जगह बोया जाए तो वे एक दिन अवश्य फल देंगे.!!
जब इंसान के पास तर्क और संवेदना ख़त्म हो जाती है तब वह अपशब्दों का सहारा लेता है.!!
आपके शब्दों से पता चल जाता है कि आप भटके हुए हैं या संभले हुए.!!
शब्दों के शोर से बड़ा अपनी खामोशी का कद रखें ;

_ सादगी ही आपकी शख्सियत का असली वज़न है.!!

अपने शब्दों में ताकत डालें आवाज में नहीं,

_ क्यूंकि बारिश से फूल उगते हैं, बाढ़ से नहीं….

जो समझना चाहता है, कम शब्दों में भी समझ जाता है.
_ जो नहीं चाहता, उसे पूरी कहानी भी काफी नहीं होती.!!
जब कोई कहता है ‘आप कर लोगे’, ‘आप अच्छा करोगे’

_ इन छः शब्दों में छिपा होता होता है एक भरोसा..!!

“जो महसूस कर ले, उसे शब्दों की ज़रूरत नहीं,

_ और जो न समझे, उसे हज़ार तर्क भी कम पड़ जाते हैं.”

लोगों को उनकी हरकतों से समझना सीखो,

_ आप उनके शब्दों से बेवकूफ़ बनना छोड़ दोगे !!

आपके शब्द कितने भी महत्वपूर्ण क्यों ना हों,

_ सुनने वाला अपनी क्षमता के अनुसार ही समझेगा..!!

सोच-समझकर बोलिए.. क्योंकि शब्दों के ज़ख्म चाहे नज़र नहीं आते,

पर उनका असर उम्र भर रहता है.!!

शब्दों में इतनी आग होती है कि कभी-कभी खुद को भी आहत कर देते हैं.

_शब्दों में सिर्फ आग ही नहीं ठंडक और महक भी होती है, जो राहत पहुंचाते हैं..!!

शब्दो की परख नही होती है हमे, पर कई बार किसी न किसी वजह से वे अपनी तरफ खिंच लेते हैं

_ हमें पल्ले कुछ नहीं पड़ता पर फिर भी उन गहरे शब्दों को पढ़कर सुकून पा लेते हैं …!

शब्दों का भारीपन हर कोई झेल नहीं सकता,

_ इसीलिये वो ही शब्द मुँह से निकालें, जो आपको खुद के लिए अच्छे लगते हों.!!

शब्दों के प्रयोग में लहजे का भी ओहदा रखिए…

_ क्योंकि… शब्द आपके व्यक्तित्व को उजागर करते हैं !

_ और जहां आप मौजूद नहीं हैं …..वहां भी ये पूरी निष्ठा से आपका प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं..!!

सुविचार 160

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जिन लोगों का मन पवित्र नहीं होता, उन का कोई भी कर्म पवित्र नहीं होता.- जुन्नैद

 

सुविचार – घमंड – घमण्ड – अहंकार – 159

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केवल शक्तिशाली ही आत्मसमर्पण कर सकता है
_ कमज़ोर व्यक्ति जीवन से लड़ता है.
_ जब हमारे अंदर हीन भावना होती है, तो हम आसानी से नाराज़ हो जाते हैं और जो कुछ भी हम खुद को समझते हैं, उसकी रक्षा के लिए एक मजबूत अहंकार/पहचान का निर्माण करते हैं.

Only the powerful can surrender
A weak person fights life.
When we have some inferiority complex, then we easily get offended & build a strong ego/identity to protect whatever little we think we are.
“जब भीतर की समझ गहरी होती है, तो बाहर की कई बातें अपने-आप हल्की लगने लगती हैं..- यह अहंकार नहीं, विकास है.!!”
जब आपको अपनी अच्छाई पर इतना घमंड होने लगता है कि आप बार-बार उसकी प्रशंसा खुद ही करते हैं,

_ तब आपको एहसास नहीं हो रहा होता कि यह स्तुतिगान लकड़ी का वह रंदा है..
_ जिससे बुरादे की तरह आपकी अच्छाई धीरे-धीरे खुद-ब-खुद झड़ती जा रही है.
_ बात सिर्फ इतनी है कि आप इस बुरादे के ढेर पर खुद खड़े हैं और उसे देख नहीं पा रहे.!!
कई अहंकारी लोग समझते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है,
_ और जितना उन्हें पता है, उससे आगे वे जानना नहीं चाहते.

_ ऐसी सोच के बाद उनकी ज़िन्दगी रुक जाती है और वे ठहरे हुए जल की भाँति सड़ाँध मारने लगते हैं.
_ स्वभाव में Flexibility लचीलापन न होने के कारण वे अधिक लोगों द्वारा पसंद नहीं किए जाते.
_ वे केवल स्वपूजा में लीन रहते हैं और अपने इर्द-गिर्द चाटुकार किस्म के लोगों को रखना पसंद करते हैं.
_ ऐसे लोगों की पहचान करके उनसे बचना ज़रूरी है..
_ वरना हमारी ज़िन्दगी उनकी चाटुकारिता में निकल जाएगी..
_ और हम सड़ाँध बन कर रह जाएंगे.!!
जीवन में कुछ लोगों का साथ छोड़ना पड़ता है,

_ घमंड के लिए नहीं अपने आत्मसम्मान के लिए..!!

“अहंकार पुरानी बातों को पकड़ता है, जबकि प्रेम और क्षमा वर्तमान में जीना सिखाते हैं.

_ अपनी गरिमा को किसी की कड़वी बातों का मोहताज न होने दें.
_ उड़ने के लिए हल्का होना ज़रूरी है !”
लोग आपको अहंकार तब दिखाते हैं, जब आप खुद को उनसे कम आंकने लगते हैं.!!
हमारे इर्द गिर्द कुछ इंसान गुरूर में रहते हैं.

_ उनका अपना कुछ खास नहीं…. घमंड फ़र्जी… गुरूर दूसरे के भरोसे का.!!

वो इंसान कभी सच में बड़ा नहीं बन सकता, जिसका दिल अहंकार से भरा हो..

_ क्योंकि विनम्रता ही सच्चा सम्मान दिलाती है.!!

जिन्हें खुद को बनाने में एक वक़्त लगा हो, वो घमंड नहीं आत्मविश्वास रखते हैं.!!
जब तक आप दूसरों को प्रभावित करना चाहते हैं, समझो आप अहंकार में हो.!!
ज़िंदगी कुछ बूंदों जितनी ही है..

_ ऐसे में अहंकार पालना तो खुद को डुबाने जैसा है.!!

तूफ़ान में कश्तियाँ और घमंड में हस्तियाँ डूब जाती हैं.!!
मत कर घमंड, एक दिन तुझे भुला दिया जाएगा,

_ हवा में उड़ते तिनके की तरह तू कहीं दूर खो जाएगा.!!

लोग कीचड़ से बचकर चलते हैं कि कहीं कपड़े गंदे ना हो जायें..

_ और कीचड़ को घमंड हो जाता है कि लोग उससे डरते हैं.

लोगों के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर घमंड मत करना,

_ क्योंकि लोग बदल बहुत जल्दी जाते हैं.

सुविचार – मुनाफा – लाभ – प्रॉफिट – Profit – घाटा – Loss – 158

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चाय में मक्खी गिरे तो चाय फेंक देता है,

_ घी में मक्खी गिरने पर मक्खी निकाल फेंकता हैं,
_ इंसान घाटा मुनाफा देख कर ही सिद्धांतों का ढोंग करता हैं..!!
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