सुविचार – कुछ ज़रूरी बातें – 235

🙏 *10 वर्षों में अधिकतम घरों की अर्थिक स्थिति बिगड़ने के प्रमुख कारण…* 🙏

*1. घर मे प्रत्येक सदस्य के पास स्मार्ट फोन, एवं प्रति वर्ष नया लाना।*

*2. जन्म दिन, मैरिज एनीवर्सरी में दिखावटी खर्चे।*

*3. जीवन शैली में बदलाव के कारण खर्चों का बेतहाशा बढ़ना।*

*4. बच्चों के स्कूल, ट्यूशन आदि शिक्षण खर्चों में वृद्धि।*

*5. व्यक्तिगत खर्चे, ब्यूटी पार्लर, सेलून, ब्रांडेड कपड़ा, पार्टी, गेट टूगेदर आदि।*

*6. सगाई, शादी आदि में प्रतिष्ठा की भूख के कारण होने वाले खर्चे।*

*7. लोन पर दिया जाने वाला ब्याज।*

*8. मेडिकल खर्चों में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी। कारण गलत खान पान।*

*इस तरह के बिना जरूरत के खर्चो के अनुरूप कमाई बढ़ नही रही है। परिणाम, तनाव तनाव तनाव।*

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*व्यापार आर्थिक मंदी में आगे कैसे बढ़े

*Government के आंकडे चाहे कुछ भी कहे, ये सच है की भारत मे आर्थिक मंदी शुरू हो चुकी हैं और ये सबसे बड़ी और सबसे लंबी चलने वाली मंदी हो सकती हैं .* *इससे बाहर निकलने के लिये हमे कड़े संघर्ष की ज़रूरत पड़नी ही है .*

*कुछ ज़रूरी बातें और कदम जिससे मंदी की मार कम की जा सकती हैं .*

*1) अपने खर्चे पर लगाम लगाये. चाहे व्यापार मे हो या व्यक्तिगत जीवन मे, फ़िज़ूल खर्च से बचे. बिना कारण यात्रा, trip या व्यापार के अनआवश्यक खर्च टाले .*

*2) किसी भी customer या client के बड़े order को double check करे. क्या वो भुगतान मे सक्षम है, इस समय आप सिर्फ़ वही order ले जो firm रह सकते हैं. outstanding आपका Budget बिगाड़ सकते हैं .*

*3) अपनी क्षमता के अनुसार ही काम या booking ले .*

*4) अपने stock का निरंतर जायज़ा ले और क्षमता और order के हिसाब से ही stock करे*

*5) व्यापार पर कडी और दैनिक नज़र रखे*

*6) After Sales Service पे ज़्यादा ध्यान दे, Regular Customer इस समय की सबसे बड़ी ताक़त रहेगी*

*7) भुगतान के लिए प्यार से और निरंतर call करते रहे*

*8) बेवजह की कानूनी झंझटो से खुद को दूर रखे. ये समय और पैसे की सबसे बड़ी बर्बादी हैं*

*9) अपने व्यापार के नियम और सिद्धांतो पे कायम रहे .*

*10) अपने परिवार के लिए कमाये और बचत करे .*

*11) शादियो और सामाजिक कार्यक्रमों पे कम खर्च करे. आगे और मौके आयेंगे, तब हम अपनी शान और मान दिखा सकते हैं, अभी टिक के खेलने का समय हैं .*

*12) सबसे मधुर सम्बन्ध बनाये रखें. कौन जाने आपके अच्छे व्यव्हार से आप को कौन Reference दे जाए .*

*13) अपने Products, व्यापार, Services, Market की Expertise निरंतर बढाते रहे.*

*14) Positive लोगों मे रहे. Negative लोगों से बचे. हमेशा मन को शान्त और संतुलित रखने पर ज़ोर दे .*

*15)अपने शरीर और मन को भरपूर समय दे. Exercise करे, अच्छा भोजन ग्रहण करे, अच्छी दिनचर्या follow करे. Medical के bills कम से कम करते जाये. ये बचत आप के बहोत काम आयेगी. अपनी Family के साथ Quality Time बिताये. आखिर इन्ही के लिये तो सब कुछ कर रहे हैं.* *एक वाजिब मार्जिन से काम करे कंपटीशन में सेल करके कोई इनाम नही मिलेगा*

*🙏बिना जरूरत के खर्चे कम करे। जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान की थी, है, और रहेंगी। इच्छाएं अनन्त है।*

सुविचार – हम अक्सर जो नहीं हैं, वैसा दिखने का स्वांग करते हैं. – 234

हम अक्सर जो नहीं हैं, वैसा दिखने का स्वांग करते हैं. यह स्वांग ही एक दिन हमें निगल जाता है. इसके बजाय अगर हम अपनी कमियों- कमजोरियों को स्वीकार करते हुए चलें, तो जीवन का सफ़र बड़े सकून से कट सकता है और लोगों का सहयोग भी भरपूर मिल सकता है.
उतार चढ़ाव तो जीवन के अभिन्न अंग हैं. उन से घबराने के बजाय उन का मुकाबला करना चाहिए. हम आखिर ऐसी गारन्टी ले कर चलते ही क्यों है कि दुःख हमारे पास फटकेगा ही नहीं और सुख हमेशा बाहें फैलाए खड़ा रहेगा.
झूठे वादे, कोरे आश्वासन व खोखली सहानुभूति से छणिक सामीप्य हासिल किया जा सकता है, परन्तु सच के सामने आते ही दूरी बढ़ जाती है.

सुविचार – वे प्रश्न, जिन पर हम रोज़ जीते हैं, लेकिन रुककर बहुत कम सोचते हैं.. – 233

वे प्रश्न, जिन पर हम रोज़ जीते हैं, लेकिन रुककर बहुत कम सोचते हैं..

_ मुझे लगता है, यही वे प्रश्न हैं.. जिन्हें इंसान हर दिन जीता है, लेकिन उन पर रुककर बहुत कम सोचता है.
कुछ ऐसे प्रश्न हैं :-
अगर कोई व्यक्ति इस एक प्रश्न पर भी ईमानदारी से विचार कर ले, तो उसके जीवन के कई निर्णय बदल सकते हैं.
_ मैं जो कर रहा हूँ, क्या सचमुच वही करना चाहता हूँ, या बस सबको करते देखकर कर रहा हूँ ?
_ क्या मैं जीने की तैयारी कर रहा हूँ, या सचमुच जी भी रहा हूँ ?
_ क्या मैंने घर खरीदा है, या घर ने मेरा जीवन खरीद लिया है ?
_ मैं पैसा कमा रहा हूँ, या पैसा कमाने की प्रक्रिया ही मेरा जीवन बन गई है ?
_ मुझे वास्तव में कितना पर्याप्त चाहिए ?
_ क्या मैं अपनी खुशी खरीद रहा हूँ, या सिर्फ़ अपनी इच्छाएँ बढ़ा रहा हूँ ?
_ क्या मुझे सचमुच इतनी चीज़ों की ज़रूरत है, या मैंने सिर्फ़ उनकी आदत बना ली है ?
_ मैं लोगों से प्रेम करता हूँ, या उनसे अपेक्षाएँ रखता हूँ ?
_ क्या मैं लोगों को जैसा वे हैं वैसा स्वीकार करता हूँ, या उन्हें अपनी अपेक्षाओं के अनुसार बदलना चाहता हूँ ?
_ मैं दूसरों की नज़रों में अच्छा दिखना चाहता हूँ, या अपनी नज़रों में शांत रहना चाहता हूँ ?
_ अगर मुझे किसी को कुछ साबित नहीं करना हो, तो मैं अपनी ज़िंदगी में क्या बदल दूँगा ?
_ मैं निर्णय अपने डर से ले रहा हूँ या अपनी समझ से ?
_ क्या मैं खुश रहने के लिए जी रहा हूँ, या पहले सब कुछ ठीक हो जाने का इंतज़ार कर रहा हूँ ?
_ मैं जो बचा रहा हूँ, उसका उपयोग कब करूँगा ?
_ अगर मेरे पास समय ही नहीं बचा, तो मैं यह सब किसके लिए इकट्ठा कर रहा हूँ ?
_ मैं अपने बच्चों के लिए संपत्ति छोड़ना चाहता हूँ, या उन्हें ऐसा जीवन-दर्शन देना चाहता हूँ जिससे वे स्वयं खड़े हो सकें ?
_ क्या मैं अपने अतीत को समझकर जी रहा हूँ, या उसी को बार-बार दोहरा रहा हूँ ?
– “क्या मैं जिस समस्या को हल करने में पूरी ज़िंदगी लगा रहा हूँ, वह सचमुच मेरी समस्या है भी, या मैंने उसे बिना जाँचे समाज से उधार ले लिया है ?”
– शायद इनमें से किसी एक प्रश्न का ईमानदार उत्तर भी
हमारे जीवन के कई फैसलों को बदल सकता है.

सुविचार 232

उन सारे विचारों को मन में न आने दें, जो आपको निराशा की गहरी खाइयों में धकेल के ले जाएँ. उन विचारों को आने दें, कि जिससे आप उत्साहित होकर संसार में अपना कर्त्तव्य कर सकें.

 

सुविचार – ऐसा क्यों (Why) ? विचार कीजियेगा ???? – 231

ऐसा क्यों (Why) ? विचार कीजियेगा ????

जिसकी आँखों में नींद है …. उसके पास अच्छा बिस्तर नहीं …

जिसके पास अच्छा बिस्तर है …….उसकी आँखों में नींद नहीं ….

जिसके मन में दया है ….उसके पास खर्च करने के लिए धन नहीं ….

जिसके पास खर्च करने के लिए धन है ….उसके मन में दया नहीं ….

जिन्हे कद्र है रिश्तों की … उन से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता …

जिनसे रिश्ता रखना चाहते हैं ….उन्हें कद्र नहीं है रिश्तों की ….

जिसको भूख है ………उसके पास खाने के लिए भोजन नहीं….

जिसके पास खाने के लिए भोजन है ………उसको भूख नहीं…

कोई अपनों के लिए…. रोटी छोड़ देता है…

कोई रोटी के लिए….. अपनों को छोड़ देता है….

ये दुनिया भी कितनी निराली है, कभी वक्त मिले तो सोचना..

सुविचार 230

जागो और देखो कि जीवन अत्यन्त छोटा है, यह अहसास कि जीवन छोटा है, आपके जीवन में गतिशीलता लाता है – अनचाही चीजें, विकर्षण और बाधाएं स्वतः ही छूट जाती हैं.
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