सुविचार – जिंदगी में कभी अफसोस मत कीजिए – 229

हमें किसी खास समय का इंतजार नहीं करना चाहिए..

_ बल्कि कोशिश करनी चाहिए कि हमारा हर एक पल खास बनें.!!

जिंदगी में कभी अफसोस मत कीजिए – अपने कर्मों को लेकर, अपने अतीत को लेकर और अपने वर्तमान को लेकर – बहुधा आम, अमरूद या मीठे फलों के लगाए हुए पौधे बड़े होकर बबूल या बेशर्म में तब्दील हो जाते हैं..

_ और आपको इन्हें देखकर दुख होता है कि आपका जीवन इन्हें पालते और पोसते हुए निकल गया और आप पछतावे में हाथ मलते रह जाते हैं.
_ बेहतर है कि अपने – आपसे एकाकार हो जाईए, आप जब अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख सकते,
_ तो बाहरी चीजों या वस्तुओं से बदलने की क्या और कैसी उम्मीद रखेंगे.!!
– Sandip Naik

सुविचार 228

कठिनाईयाँ जब आती हैं तो कष्ट देती हैं, पर जब आती हैं तो, आत्मबल का ऎसा उत्तम पुरस्कार दे जाती हैं, जो उन कष्टों और दुःखों की तुलना में हजार गुना ज्यादा मूल्यवान होती है.

सुविचार – बेहतर – बेहतरीन बातें – 227

बेहतरीन बाते

१. इबादत के वक़्त अपने दिल को क़ाबू मे रखो.

२. किसी के घर जाओ तो आँख को क़ाबू मे रखो.

३. किसी महफ़िल मे जाओ तो ज़बान पे क़ाबू रखो.

४. जब खाने बैठो तो पेट को क़ाबू मे रखो.

५. अपनी नेकियाँ और दूसरों की बुराई भूल जाओ.

६.  रब और मौत को हमेशा याद रखो.

जब तक आप बेहतर बनने की कोशिश नहीं करेंगे, तब तक कुछ भी बेहतर नहीं होगा.!!

_ हमारा ध्यान अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में ले जाने पर होना चाहिए.!!

अच्छा ही काफी नहीं है, आप को बेहतर बनना है..

_ बेहतर [ Better ] होने के लिए, _कड़ी मेहनत करनी पड़ती है..!!

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कुछ भी कहता है, उनकी बकवास मत समझो.!

_ क्योंकि आप उनसे बेहतर हैं, उनसे तेज़ हैं और आप बहुत बेहतर दिखते हैं.!!

विशेष रूप से उसे ही विशेष मानो, जो आपको बेहतर बनाए ;

_ फ़ालतू चीजें सिर्फ और सिर्फ आपको भटकाने के लिए ही होती हैँ.!!

कई बार जो कुछ आप चाहते हैं, वह आपको नहीं मिलता.

_ लेकिन अंततः जो आपको मिलता है, वो उससे बेहतर होता है.. जो आप चाहते थे.!!

सुविचार 226

हमारा अहंकार ही है जिस के कारण हमें अपनी आलोचना सुन कर दुःख होता है.

 

 

सुविचार 225

हमारी सोच हमारा भविष्य तय करती है, हमारी दुनिया तभी बदलेगी जब हमारी सोच बदलेगी.

 

सुविचार 224

लोग आपके बारे में क्या कहते हैं, यह आपके लिए महत्वपूर्ण नहीं है. महत्वपूर्ण यह है कि उनकी बातों को आप किस रूप में लेते हैं.

 

 

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