सुविचार – अपेछा- आशा – उम्मीद – उम्मीदें – 115

जब आप किसी से अपेछा नहीं रखेंगे, तो फिर आपको किसी से शिकायत भी नहीं रहेगी..

_ जो लोग शिकायत शून्य हैं, वे ही तो सहनशील हैं..!!

लोग आप से अच्छा बनने की उम्मीद तो करते हैं ; ख़ुद अच्छा बनने से परहेज़ है उन्हें..!!
मसला ये नहीं कि लोग परवाह क्यों नहीं करते, मुद्दा ये है कि हमें उनसे इतनी उम्मीद क्यों है !!
जब मन थक जाए, तो उम्मीद छोड़ना भी समझदारी है.!!
तुझे जैसे चलना है वैसे चल ज़िन्दगी, मैंने तो तुझसे हर उम्मीद ही छोड़ दी है !!
ज़िन्दगी से ज्यादा उम्मीद न रखो तो ज़िन्दगी अच्छी है, बहुत अच्छी है.!!
उम्मीद की किरण के सिवा कुछ नहीं यहाँ..

_ हमारे यहाँ रोशनी का यही इंतज़ाम है.!!

जितनी उम्मीदें कम रखोगे, उतना मन शांत रहेगा..
_ क्योंकि ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत अक्सर दर्द दे जाती है.!!
मन की शांति चाहिए तो ‘उम्मीद’ का दामन छोड़ दो ;

_ यही वो बोझ है जो इंसान को चैन से जीने नहीं देता.!!

खुद के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले दौर में खुद से नाउम्मीदी रखना ठीक बात नहीं है.!!
आशा, चाहे कितनी ही कम क्यों न हो, निराशा से बेहतर है..!!
अगर उम्मीदें दुख की वजह हैं तो जीने की वजह भी उम्मीदें ही हैं.
जिंदगी से ज्यादा उम्मीद न रखो तो जिंदगी अच्छी है, बहुत अच्छी है.!!
आशा बनाए रखिए.. क्योंकि हर नया सवेरा कुछ अनजानी खुशियां लेकर आता है.
“जिंदगी है तो उम्मीद ही उम्मीद है.!!”
हमनें उम्मीद बहुत लगा रखी है, फिर सोचते हैं कि दुःख की वजह क्या है.!!

_ जीवन बिना किसी से खास उम्मीद लगाए जीने का नाम है.!!

उम्मीदों की बैसाखी छोड़ो और अकेले चलो..

_ जो खुद से जुड़ता है, उसे दुनिया के मतलब से फर्क नहीं पड़ता.!!

कभी-कभी हम गलत लोगों से, सही उम्मीदें लगा बैठते हैं.!!
जब आप औरों से उम्मीद लगाना छोड़ देते हो तो फिर वो आपकी भावनाओं को ठेस कभी नहीं पहुँचा सकते.!!
जितना आप लोगों के लिए करते हो, अगर उतने की ही आप उनसे उम्मीद भी रखते हो तो.. आप हमेशा निराश ही होने वाले हो.!!
दूसरों से उम्मीद न रखें, क्योंकि जब कभी उम्मीद टूटती है तो बहुत ठेस पहुँचती है. _ किसी से लेने की इच्छा रखने के बजाय कुछ देने की सोचें, अधिक खुशी मिलेगी.
लोग ऐसे हैं कि एक गिलास पानी पिलाने का एहसान के बदले..

_ पूरा कुआं लेने की उम्मीद रखते हैं..!!

कभी-कभी भरोसा करना भी ज़रूरी होता है, पर पूरी उम्मीद किसी और से बाँध लेना.. _ यही हमारी सबसे बड़ी भूल बन जाती है.
जब सब कुछ ठीक नहीं हो तब भी न घबराएं,

_ बस आप को पता होना चाहिए कि.. टूटी उम्मीदों से चीजों को कैसे सुलझाना है.

कुछ जगह जिंदगी में कभी नहीं भरती, खाली रहती हैं, क्योंकि आपने उन्हें स्वयं बनाया है,

_ आप उन चीजों की उम्मीद कैसे कर सकते हैँ, जिन्हें आपने दूर धकेल दिया है ?

बिना किसी उम्मीद के.. साफ़ दिल के साथ हर चीज़ करते चले जाओ..

_ यकीन मानो आपको इस बात का ज़िंदगी में कभी अफ़सोस नहीं होगा.!!

सच कहकर किसी का दिल दुखाना बेहतर है..

_ बजाय उस झूठ के जो किसी को उम्मीद देकर अंत में तोड़ दे.!!

दुनिया अजीब है – लोग दुख में जीते हैं, फिर भी उम्मीद से भरे रहते हैं.
_ शायद इसी उम्मीद के सहारे ही यह खेल चलता रहता है.
दूसरों से उम्मीदें कम और खुद पर यकीन ज़्यादा रखें ; यही वो छोटा सा मंत्र है जो आपकी ज़िंदगी को सुकून भरा और बेहद हल्का बना देगा.!!
जब उम्मीदें अपनों से जुड़ी होती हैं, तब उनका टूटना सबसे ज़्यादा तोड़ता है,

_ और जब वो अपना अचानक पराया लगने लगे, तब अंदर से जो खालीपन पैदा होता है, उसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल होता है…!

अपनी असहाय अवस्था में, जब हमें कोई रास्ता नज़र नहीं आता, हम दूसरों के पास अपनी समस्या लेकर जाते हैं, इस उम्मीद में नहीं कि वह उसका समाधान कर देगा..

_ बल्कि इस उम्मीद में कि दिल की बात कह देने से हमारा मन हल्का हो जाएगा.!
_ समस्याओं के समाधान केवल बुद्धि से निकाले जाते हैं.. और कुछ समस्याओं के समाधान तो होते ही नहीं, समस्याओं को वहीँ छोड़ कर आगे बढ़ जाना ही एकमात्र निदान होता है.!!
उम्मीद से कम मिलने का दर्द मन में इस कदर समा जाता है कि हम कभी देख ही नहीं पाते कि हमें जरूरत से कितना ज्यादा मिला है,

_ ना जाने बदऩसीबी के इस लेवल में ये कैसी कशिश है कि हम खुशनसीब होते हुए भी खुद को बदनसीब मानने की जिद ठान लेते हैं…!!
उन सब चीजों को ना कहना ठीक है, जिनके साथ आप सहज नहीं हैं.

_ उन लोगों के शोर को ब्लॉक करना ठीक है, जो आपका भला नहीं करते हैं.
_ कभी कभी नकारात्मकता से खुद को अलग करना ठीक है.
_ अन्य लोगों की उम्मीदों के साथ बहुत अधिक फंस न जाएं..
_ आप स्वयं निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हैं..!!
लोग आपको तभी पसंद करते हैं.. जब आप उनकी उम्मीदों के मुताबिक रहते हैं.!!

_ जब संसार से हमे कुछ चाहिए होता है.. हम ढूँढने निकलते है ;
_ इस चक्कर में जिन्हें हमसे कुछ चाहिए होता है.. वह हमे ढूँढ लेते है.!!
हमारे बुरे वक्त में जो हमें उम्मीदें देते हैं, लेकिन जब बाद में वो गैर होने का अहसास कराने लगते हैं,

_ तब उन उम्मीदों का टूटना भी स्वाभाविक है,
_ तभी हमारा दिल दुखता है, लेकिन इससे उस इंसान कोई फर्क नहीं पड़ता,
_ क्योंकि अब वो आपके साथ वैसे नहीं, जैसे कभी हुआ करता था…!
वो लोग जो हमें उम्मीदें देकर करीब लाते हैं, वही जब अचानक परायेपन का एहसास कराने लगते हैं, तो उन उम्मीदों का टूटना स्वाभाविक है..

_ दिल भी वहीं आहत होता है, जहाँ उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया हो,
_ पर सच्चाई ये है कि इससे उस इंसान को कोई फर्क नहीं पड़ता,
_ क्योंकि अब वो पहले जैसा.. आपके साथ होता ही नहीं…!
पहले उम्मीद खत्म होती है, फिर शिकायतें खत्म हो जाती है.

_ उसके बाद खोने और पाने का मोह भी खत्म हो जाता है..
_ फिर कुछ नही बचता न रिश्ता, न किसी प्रकार का संबंध.. सबकुछ खत्म हो जाता है.!!
इंसानों से उम्मीद लगाना, रेगिस्तान में मछली पकड़ने जैसा है ;
_ आपको न मछली मिलेगी, न पानी, बस धूप मिलेगी.!!
मैंने जीना सीखा है.. उस सच्चाई के साथ.. जिसे लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं..

_ कि हर मुस्कुराहट के पीछे एक थकान होती है, हर मजबूती के पीछे कोई टूटा हुआ पल..
_ लोग कहते हैं उम्मीद ज़िंदा रखती है, पर मुझे तो लगता है उम्मीदें ही सबसे ज़्यादा तोड़ती हैं और मौत…?
_ वो तो बस एक विराम है इस लंबे असहनीय वाक्य का, जो जीवन कहलाता है अब ना डर बचा है, ना इनकार..
_ बस एक शांति है उस अनजाने अंधेरे के प्रति जिसे मैंने अपना कह दिया है…!
भरोसा ओर उम्मीद जीवन सही तरीक़े से बिताने के साधन हैं, पर कुछ लोग इसका दुरूपयोग अपने स्वार्थ के लिए करते हैं ना तो वो किसी के मन की व्यथा को समझते हैं, और ना ही उन्हें उनकी वजह से हुए परिणाम की फ़िक्र होती है..!
कई बार मीलों का सफर तय करने के बाद यह लगता है कि हमें इस सफर में होना ही नहीं चाहिए था…!

_ कभी-कभी लगता है हमारा जन्म हुआ ही इसलिए है ताकि हम औरों की उम्मीदों पर खरे उतर सकें..
_ औरों के सपने साकार कर सकें और औरों की इज़्ज़त बढ़ा सकें.!!
उम्मीद खुद से रखो, इंसान कब बदल जाए पता नहीं..!
_ जीवन में किसी के सहारे मत रहो, लोग ऐसी जगह साथ छोड़ेंगे कि आप यकीन भी नहीं कर पाओगे.!!
ज़िंदगी ऐसी ही है —
थोड़ी सी हँसी, थोड़ा सा संघर्ष, और बहुत सारी उम्मीद..
_ जो चलना नहीं छोड़ता, वही सबसे अलग नज़र आता है.!!
जब इंसान उम्मीद खो देता है, तब वो लड़ना छोड़ देता है शिकायत करना बंद कर देता है, कि चीज़ें ठीक हो सकती हैं, कोई सुन लेगा, कुछ बदल जाएगा..
_ पर जब वो विश्वास ही नहीं बचता कि कुछ बदलेगा, तब शिकायत भी चुप हो जाती है और यही चुप्पी पता नहीं कैसी होती है…!
“अब कोई उम्मीद नहीं है इस जमाने से..

सब छोड़ जाते हैं किसी ना किसी बहाने से..”
हमारा एक बड़ा जीवन परेशानियों और निराशा मे बीत जाता है..
– इसका एक बड़ा कारण उम्मीदें होती हैं..
– कुछ उम्मीदें हम खुद से पाले होते हैं और कुछ उम्मीदें हम दूसरों से रखते हैं..
– ज़्यादातर आपको यही समझाया जाएगा कि दूसरों से उम्मीदें न पालो, ये दुखदाई होता है,
– लेकिन मनुष्य होकर ऐसा लगभग असंभव है कि आप दूसरों से उम्मीदें न पालें.
– हर पल आपके आस पास आपके रिश्तेदार, मित्र, जीवनसाथी इत्यादि होते हैं और उनमे से कोई न कोई आपसे उम्मीदें या आप उनसे उम्मीदें रखते ही हैं.
– उम्मीदें रक्खे बिना जीवन संभव ही नहीं है.!!
_ तो उम्मीदें रखना दुखदाई होगा और उम्मीदें रक्खे बिना जी भी नहीं सकते..
_ तो ऐसे मे कोशिश ये कर सकते हैं कि अधिकतर उम्मीदें स्वयं से रक्खें न कि अन्य आस पास के लोगों से..
_ दुख समाप्त तो नहीं होंगे लेकिन कुछ कम अवश्य हो जाएंगे..
_ ऐसा कोई भी काम.. जो आप दूसरों से expect करते हैं.. उसको सोच कर देखें कि यदि वो आप स्वयं कर लेंगे तो क्या ज्यादा बेहतर नहीं होगा..
_ और यदि आपसे नहीं हो सकता तो क्या आप उस कार्य के न होने पर भी एडजस्ट कर सकते हैं.
_ उम्मीदें थोड़ी थोड़ी करके कम करते जाने से थोड़ा अकेलापन लग सकता है लेकिन जीवन एकदम सही हो जाएगा.!!
_ यदि जीवन में इंसान की आवश्यकता सीमित हो और किसी अन्य से कोई उम्मीद और अपेछा न करे तो बेहद _ खुश जीवन आराम से जीया जा सकता है..!!
–उसे कोई कैसे दुखी कर सकता है, जिसकी किसी से कोई उम्मीद ही ना हो !!
“उम्मीद का दिया”

_ एक घर मे पांच दिए जल रहे थे, एक दिन पहले दिए ने कहा – ‘इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगो को कोई कदर नही है तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं ‘ और वह दीया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया.
_ जानते है वह दिया कौन था ? वह दीया था उत्साह का प्रतीक.
_ यह देख दूसरा दीया जो शांति का प्रतीक था, कहने लगा, मुझे भी बुझ जाना चाहिए… निरंतर शांति की रोशनी देने के बावजूद भी लोग हिंसा कर रहे है और शांति का दीया बुझ गया.
_ उत्साह और शांति के दीये बुझने के बाद, जो तीसरा दीया हिम्मत का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया.
_ उत्साह, शांति और अब हिम्मत के न रहने पर चौथे दीए ने बुझना ही उचित समझा.
_चौथा दीया समृद्धि का प्रतीक था,, सभी दीए बुझने के बाद केवल पांचवां दीया अकेला ही जल रहा था.
_ हालांकि पांचवां दीया सबसे छोटा था.. मगर फिर भी वह निरंतर जल रहा था.
_ तब उस घर मे एक लड़के ने प्रवेश किया, उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ एक ही दीया जल रहा है, वह खुशी से झूम उठा … चार दीए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ, यह सोचकर कि कम से कम एक दीया तो जल रहा है.
_ उसने तुरंत पांचवां दीया उठाया और बाकी के चार दीए फिर से जला दिए.
_ जानते है वह पांचवां अनोखा दीया कौन सा था ? वह था उम्मीद का दीया ..
_ इसलिए अपने घर मे अपने मन मे हमेशा उम्मीद का दीया जलाए रखिये.
_ चाहे सब दीए बुझ जाए, लेकिन उम्मीद का दीया नही बुझना चाहिए.
_ ये एक ही दीया काफी है बाकी सब दीयों को जलाने के लिए ….
_ क्योंकि हमारे आज में जो उम्मीद जगती है.. वही उम्मीद हमारे भविष्य का निर्माण करती है.!!
– Neha Chandra

सुविचार – शिक्षा – 114

शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है, एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है.
जब आप सबकुछ गवा बैठे तो _ उससे प्राप्त शिक्षा को न गंवाएं.
” हमारे जीवन में जितनी आवश्यकता धन की है,उतनी ही शिक्षा का होना भी आवश्यक है ताकि हम अपने जीवन को बेहतर तरीके से जी सकें, सकारात्मक व लोकहित के कार्य कर सकें ….

_ सार, यह है कि जीवन के लिए दोनों महत्वपूर्ण है.!!

सुविचार – जोखिम – रिस्क – Risk – 113

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सीख कहीं से भी हासिल की जा सकती है, बशर्ते कि हम अपने मस्तिष्क के दरवाजों को खुला रखें.
सोचना आसान होता है, कर्म करना कठिन होता है, लेकिन सबसे कठिन कार्य अपनी सोच के अनुसार काम करना होता है.
अगर आप रिस्क उठाना नहीं जानते हो तो आप हमेशा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए नौकरी करते रहोगे, जो रिस्क उठाना जानता है.!!
जो लोग जल्दी शुरुआत करते हैं, शायद वे बस किसी बनी बनाई राह पर चल रहे होते हैं.

_ जो आप अपना रास्ता खुद बना रहे हैं, उन्हें जोखिम और साहस रखना होगा.
_ देर से शुरुआत करने वाला व्यक्ति जीवन में पीछे नहीं रह जाता.
_ आप बस देर से जागे हैं – और स्वेच्छा से जागना जबरदस्ती शुरू करने से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है.!!
अपने जीवन में जोखिम उठाएं ; यदि आप जीतते हैं, तो आप नेतृत्व कर सकते हैं ; _यदि आप हार जाते हैं तो आप मार्गदर्शन कर सकते हैं.

Take a risk in your life. If you win, you can lead. If you lose you can guide.

यदि आप सामान्य जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं, तो आपको सामान्य से समझौता करना होगा.

If you are not willing to risk the usual, you will have to settle for the ordinary.

बड़ी सफलता के लिए, आपको कभी-कभी बड़े जोखिम उठाने पड़ते हैं,

_ रिस्क लो या फिर अवसर गंवाओ..!

To achieve great success, you sometimes have to take big risks,_ Take the risk or lose the opportunity..!

सुविचार – सोशल मीडिया – Social Media – मोबाइल – Mobile – 112

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“OTP – आजकल भरोसा भी number से verify होता है.”
पर्सनल समस्याओं के लिए व्यक्तिगत समाधान की आवश्यकता है..

_न कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लिए,,!!

“टेक्नोलॉजी के इस जमाने में आज ज्ञान उंगली के टिप पर है.
_ फिर भी जो पीछे है, – कहीं न कहीं उनका ध्यान ही बिखरा हुआ है”
सोशल मीडिया के दौर में अपनी बात कहना आसान हो गया है.

_ बात को कहने और और बात करने में अंतर है.
_ बोलने से ज्यादा मायने रखता है सुनना.
__ सुनना, समझना और बोलना बात करने के जरूरी हिस्से हैं.
_ कई बार बिना शब्द बोले भी बात होती है.
__ भावनाओं को समझना, अनकही बातों को सुनना, बिना बोले भी साथ होने और समझने का अहसास करा पाना भी बात करने का एक खूबसूरत तरीका होता है.
_शायद सबसे खुबसूरत तरीका..
_ अच्छे से बात करना तमाम अवसादों का उपचार है.
_ बात करना सकारात्मकता का संचार है.
_ बात करिए, अपने लिए, किसी अपने के लिए, बेहतर समाज के लिए, इंसानियत के लिए.
जाओ, नकारात्मक लोगों को हटा दो, जो उन्होंने आपके साथ बुरा किया उसके बाद उन्हें भूल जाओ, अपनी मन की शांति और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए उन्हें अनदेखा करें,

_ अगर आपको जरूरत हो तो उन्हें अपने सोशल मीडिया (ओं) में ब्लॉक करें, और उन्हें इतनी बुरी तरह खुश न करें; कभी भीख मत मांग यह भी याद रखें: सब कुछ फिक्सिंग के लायक नहीं है.
_ इसके बजाय, इसे एक ताकत के रूप में करें- अपने आप को एक अंधेरे स्थान / स्थिति से बाहर निकालो जब दूसरे को आपके लिए वहां होना चाहिए था.
_ आत्म देखभाल या आत्म सम्मान के रूप में संबंधों को काटना सबसे अच्छी भावनाओं / निर्णयों में से एक है.
वो बुद्धिमान हैं जिन्होंने सोशल मीडिया का उपयोग अच्छा लिखने-पढ़ने में किया है,

_ वरना जाने कितने ही रील्स देखने में ही रह गए.!!

हम अपनी ज़िंदगी सिर्फ़ सामाजिक पहचान [सोशल रिकॉग्निशन] की वजह से जी रहे हैं..

_ बस आभासी फ्रेंड्स सोशल मीडिया पर, जिनके होने का कोई औचित्य भी नहीं शायद.!!
लोग फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर हलचल मचाते हैं और वाहवाही चाहते हैं,
_ लेकिन खुद धन्यवाद लिखना तक नहीं सीखते.!!
वे लोग जो हमें पसंद नहीं करते, वे किसी भी हालत में हमारी किसी भी पोस्ट को लाइक नहीं करेंगे, चाहे पोस्ट उन्हें कितनी भी पसंद आई हो.
जरूरी नहीं जो लोग दुनिया के सामने खुश दिखाई दे रहे हैं, वह खुश ही हैं.

_ अपने आसपास के लोगों का ख्याल रखिए,
_ खासकर उन लोगों का जो सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा खुश दिखाई दे रहे हों..
_ ऐसे शो कर रहे हो जैसे कि उनके जीवन में कोई प्राब्लम ही नहीं..!!
_ प्राब्लम होना प्राब्लम नहीं है, जीवन है तो दुःख तो होगा ही.. यह बहुत ही सामान्य है,
_ लेकिन उस दुःख को जाहिर नहीं कर पाना असामान्य है..!!
डिजिटल क्रांति के इस दौर में मोबाइल फोन हमारे जीने के तरीके को क्रांतिकारी ढंग से बदल रहा है.

_ कुछ लोग इसका फायदा उठा नॉलेज से संचालित और आनंद से भरा जीवन जीने की दिशा में बढ़ रहे हैं,
_ जबकि अधिकांश का अपने दिमाग पर नियंत्रण खत्म हो रहा है.
_ वे डोपामीन की ऐसी लत का शिकार बनते जा रहे हैं, जिसके बारे में उन्हें खुद कोई अहसास नहीं..
_ क्योंकि उन्हें लगता है कि वे तो जिंदगी का मजा लेते हुए जी रहे हैं.
_ मोबाइल उन्हीं के लिए शक्तिशाली है, जो उससे नॉलेज लेते हैं.
_ मनोरंजन करने वालों के लिए वह असल में और भी घातक हो गया है.
स्मार्टनेस के इस महान युग में मानवीय श्रम लगातार कम हो रहा है..

_ परिणामतः व्यस्तता कम हो रही है, खालीपन बढ़ रहा है.
_ जिसकी वजह से सभी में धीरे धीरे ही सही मानसिक और शारीरिक परिवर्तन हो रहे हैं.
_ चौबीस घंटे का बड़ा भाग आजकल इंटरनेट के विभिन्न माध्यमों पे गुजर रहा है.
_ अब ये इंटरनेट हमारी आदत बन चुका है.
_ समय व्यतीत करना एक बड़ी समस्या है,
_ वर्तमान में किसी को इसका हल नहीं सूझ रहा है,
_ आपस में मिलना-जुलना, आना-जाना, चर्चा-परिचर्चा, आपसी संवाद और मेहमाननवाजी सब खत्म हो गया है.
_ परस्परता सामाजिकता भाईचारे में बहुत तेजी से कमी आई है,
_ भुगतान हमे हमारे बच्चों को अकेले रहकर करना पड़ रहा है.
_ अकेलेपन को खत्म करने के लिए लोगों को सिर्फ इंटरनेट ही दिखता है.
रिश्तें को जमाने से जितना आप छुपाकर रखोगे उतना ही अच्छा है,

_ वरना आजकल पता नहीं चलता कब, कौन, किस तरीके से आपका घर उजाड़ दे,
_ यहां सुंदर रिश्तें को तोड़ने में दो मिनट नहीं लगता,
_ लोग अपनी ख़ुद की जिंदगी संभाल नहीं पा रहे हैं,
_ ईर्ष्या भाव के कारण वो दूसरो की जिंदगी बर्बाद करने में तुले हुए हैं, इसलिए बचकर रहिए.
_ रिश्तों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ज्यादा शो ऑफ ना करें..!!
मैंने इस आभासी दुनिया [Social Media] में कई तरह के लोगों को देखा है, यहाँ अधिकतर चेहरों पर बुराई, स्वार्थ, ढोंग और स्वार्थी मुस्कान छाई रहती है.

_ लेकिन इन भीड़-भाड़ वाली अंधेरी दुनियाओं में कुछ ऐसे लोग भी हैं.. जो बिना शोर मचाए अच्छे हैं, और सिर्फ अच्छे ही नहीं, वे बहुत अच्छे हैं.!!
फैशन के चक्कर में लोग क्या क्या करते हैं.

_ खुद की जान से खिलवाड़ करने लगे हैं लोग..
_ एक फोटो और रील के चक्कर में अपनी पूरी लाइफ की रील बर्बाद कर रहे हैं.!!
इस आभासी दुनिया में किसी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना आसान है,

लेकिन उन रिश्तों को निभाना शायद अब मुश्किल हो गया है..
_ पहले लोग दिल से जुड़ते थे, अब स्क्रीन से जुड़ते हैं..
_ और जब बोर हो जाते हैं तो दूरी बना लेते हैं..
_ और फिर उसी इंसान को बदनाम करने में भी नहीं हिचकिचाते..
_ समझ नहीं आता लोग इतने निचले स्तर पर कैसे पहुँच जाते हैं.!!
खुद से दोबारा जुड़ें !

_ अपने फ़ोन को एयरप्लेन मोड पर रखें ! किसी दिन इसे आज़माएँ: उन सभी चीज़ों को बंद कर दें.. जिनमें आप डिजिटल रूप से व्यस्त रहते हैं.
_ असल दुनिया में चलकर देखिए —
_ लोगों से मिलिए, हवा में साँस लीजिए, धूप में बैठिए, किसी नई आदत को जगह दीजिए.
_ आप पाएँगे कि खुद से जुड़ाव स्क्रीन पर नहीं, हकीकत के ज़रिए महसूस किए जाते हैं, और खुद से जुड़ाव उनमें से एक है.
खुद से दोबारा जुड़ें..!
कभी सोशल मीडिया मन की हर बात कह देने की जगह लगता था..

_ अब वही जगह खाली-सी महसूस होती है.. ना वे लोग दिखते हैं, ना ये दुनिया पहले जैसी लगती है..
_ मन इससे ऊब चुका है, अक्सर सोचता हूँ, यहाँ वक्त क्यों गँवाते हैं..
_ फिर भी किसी एक-दो शख़्स की ख़ातिर इसे पूरी तरह छोड़ नहीं पाते.!!
अपने व्यक्तिगत जीवन [Personal Life] को निजी रखें.

1. सोशल मीडिया पर अपनी खुश शादी का विज्ञापन न करें.
2. सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की उपलब्धियों का विज्ञापन न करें.
3. सोशल मीडिया पर अपनी महंगी खरीददारी का विज्ञापन न करें.
वास्तविकता यह है.. हर कोई आपके लिए खुश नहीं होने वाला है.
4. आपके द्वारा प्राप्त अधिकांश “अच्छी” टिप्पणियां सिर्फ नकली हैं.
बुरी नजर ही लगेगी आप को और आपके परिवार को.. आप अपने जीवन में ईर्ष्यालु लोगों को आकर्षित कर रहे हैं.
5. आप नहीं जानते कि कौन आपकी तस्वीरों को सेव कर रहा है और आपके अपडेट की जाँच कर रहा है.
6. आपको वास्तव में इसे रोकने की जरूरत है, क्योंकि यह आपके जीवन, परिवार, शादी और कैरियर को बर्बाद कर सकता है.
सोशल मीडिया [Social Media] शैतान की आँखें, कान और मुंह है, शैतान के जाल में मत आना.
अपने निजी जीवन को निजी रहने दो.!!
कोई भी उतना सफल नहीं है _जितना इंस्टाग्राम उन्हें दिखाता है _और कोई भी उतना सुंदर नहीं है _जितना फोटो उन्हें दिखाते हैं.!!!

_और, किसी को भी हर दिन या हर हफ्ते अपनी तस्वीरें पोस्ट नहीं करनी चाहिए ; _जीवन में करने के लिए और भी महत्वपूर्ण काम हैं !
_यह हमेशा मायने नहीं रखता कि _”आप कैसे दिखते हैं”
_आप कैसे कार्य करते हैं _यह कहीं अधिक महत्वपूर्ण है !
_दूसरों का ध्यान _अपनी और आकर्षित किए बिना _अपना जीवन जिएं.”
मोबाइल की सबसे बड़ी देन क्या है ?

_ कभी इस बात पर विचार किया है ?
_ मोबाइल की सबसे बड़ी देन है टेंशन.
_ कोई हजार किलोमीटर दूर रह कर कमा रहा है.
_ घर से फ़ोन आता है बच्चे की अंगुली को चोट लग गई.
_ आज गाय ने दूध नही दिया.
_ आज आपकी माँ ने मुझे खरी खोटी सुनाई.
_ एक स्टेट्स लगा कर सौ जनो का एक साथ दिमाग खराब कर दो.
_ एक सोसल मीडिया पोस्ट डाल कर हजारों लोगों का एक साथ दिमाग खराब कर दो. _ रिश्तों मे धोख़ा ज्यादा होना भी मोबाइल की देन है.
_ रिश्ते टूटने का एक प्रमुख कारण भी मोबाइल है.
_ दो मिनिट मे सारी खबर रिश्तेदारों तक पहुँच जाती है.
_ जब मोबाइल नही था.. सचमुच मे टेंशन बहुत कम थी.!!
हमेशा अपने मोबाइल पर ही न बिज़ी रहें. जब परिवार के साथ हों या वॉक वगैरह पर जाएं, तो बेहतर होगा कि मोबाइल स्विच ऑफ कर दें.
अगर आप पड़े-पड़े बोर हो रहे या आपको लगता है कि मनोरंजन का साधन बस मोबाइल है तो आप गलत जीवन जी रहे,

_ इस आभासी दुनिया से निकलिए.. अपने मित्र यार रिश्तेदार परिवार के साथ थोड़ा वक्त बिताइए,
_ नए जगह पर जाइए प्रकृति से जुड़िए नदी तालाब के पास बैठिये, जानवरों पंछी के साथ खेलिए, फूलो को निहारिये,
_ आप देखेंगे कि आपको अच्छा महसूस होगा.!!
– Text Finger
📱 मोबाइल से दूर होने का अर्थ “मोबाइल छोड़ना” नहीं है,

_ बल्की उसका असंग रहकर उपयोग करना है.
🔍 Mobile: एक साधन है, साथी नहीं..
Mobile: अगर आपको जीवन से जोड़ने के लिए हो – जैसे सत्संग, विचार, अंतर-यात्रा — तो वो एक साधना का माध्यम बन जाता है.
_ लेकिन अगर मोबाइल आपका हंगामा, तुलना और तनाव में ले जाये —
तो वो ही साधन विघ्न बन जाता है.
✨:> मोबाइल एक दीपक बन जाता है – जब आप उसका उपयोग ज्ञान और शांति के लिए करते हैं.
_ आप उस दीपक के रोशनी में खुद को देख रहे हैं – इससे सुंदर क्या हो सकता है ?
📿 “साधन से आसक्ति नहीं, समर्पण चाहिए – चाहे वो मोबाइल हो या मंत्र”
आप मोबाइल से जीवन से जुड़ रहे हैं —
यह समझना और विवेक के साथ जीना ही डिजिटल स्लो लाइफ [digital slow life] है.!!
‘समाधान करिए’

“सुविधाजनक मोबाइल का सुरक्षात्मक उपयोग हो”
Have protective use of convenient mobile.
_ देखा जाय तो तकनीक [technology] अलादीन के चिराग की तरह है.
_ जिसके कारण महीनों का काम दिनों में होता है और घंटों का काम सेकंडों में..
_ वरना इसके बिना, जिन कामों को मात्र एक चुटकी में हो जाना था, उनमें इंसान पूरे-पूरे दिन लगा रहता था.
_ जिस कारण उसे कहीं घूमने, लोगों से मिलने या फुरसत के पल बिताने का समय ही नहीं मिलता था.
_ जब तक हमें तकनीक [technology] की सुविधा नहीं मिली थी, हम सोचते थे कि यदि हमें कोई ऐसा यंत्र मिल जाये जिससे हम इस एक काम को जल्दी-से-जल्दी कर लें तो कितना अच्छा हो,
_ तब हम बचे हुए समय में अपने अन्य बचे हुए कार्य कर सकेंगे.
_ और आज, हमें (जिन्हें) तकनीक [technology] की इतनी सुविधा मिल गई है कि अब हमारे पास, हमारे दादा-परदादा के मुक़ाबले काफी वक्त होता है.
_ अब हमारी सारी ज़रूरते तकनीक [technology] पूरी कर रहा है, और हम ?
_ हम इस बचे हुए समय का सदुपयोग कैसे करें ?
_ तो जहाँ हम कुछ अन्य ज़रूरी काम कर सकते थे, लेकिन नहीं करते.
_ अब उस समय को हम सिर्फ़ मनोरंजन में खर्च करते हैं.
_ कहते हैं न !! कि हासिल की गई वस्तुओं की फिर कद्र नहीं रहती.
_ और उन्हीं बेकद्र चीजों में एक नाम है मोबाइल/कम्प्यूटर का.
— मोबाइल जब हाथ में आया, लगा दुनिया मुट्ठी में आ गई है.
_ उफ ! कितना ज्ञान है इसमें, कितना हुनर भी, हाँ मनोरंजन भी.
_ कितना सगा सा, दोस्त सा, माता-पिता सा, गुरू सा, प्रेमी सा.
_ लेकिन नहीं, ये हमारे लिए ऐसा नहीं है.
_ ये हमारे लिए बंदर के हाथ लगे उस्तरे सा है.
_ जिससे हम स्वयम् को ही घायल कर ले रहे हैं,
_ क्योंकि हमारे पास इसके सही उपयोग की जानकारी नहीं है या फिर है भी तो,
_ हमें इसके दुरूपयोग के भयावह परिणाम का अंदाज़ा नहीं है.
_ ये किसी दीमक सा हमें अंदर से खोखला कर रहा है.
— मोबाइल
_ जिससे हम ज्ञान पा सकते हैं, नई भाषा सीख सकते हैं, कला सीख सकते हैं, _ आधुनिक उपकरणों को उपयोग में कैसे लायें ?
_ घरेलू कामों को कम समय में कैसे करें ? इसकी जानकारी पा सकते हैं.
_ जिससे कुछ रचनात्मकता सीख सकते हैं.
_ खेल सीख सकते हैं.
_ कठिन प्रश्नों के उत्तर पा सकते हैं.
_ योग, संगीत, पाककला, हस्तकला, चित्रकला आदि सीखकर अपने व्यक्तित्व में निखार ला सकते हैं.
_ वैसा नहीं करके, हम क्या करते हैं ?
हम सीखते हैं –
_ दूसरों की ज़िन्दगी में झांकना, किसी को बदनाम करना, और सबसे ज्यादा ऑनलाइन वीडियोगेम खेलना.
_ और फिर इतने आदी हो गये कि इस लत के कारण समय पर अपनी दैनिक दिनचर्या तक भूल गये.
_ परिवार, समाज से कट गये, शिक्षा या घर के कामों से मन हट गया.
_ शारीरिक रूप से पंगु बन गये.
_ साथ ही -मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, बेचैनी मुफ्त में.
_ इसके अलावा अनिद्रा, मानसिक तनाव, कमजोर याददाश्त, कॉग्निटिव क्षमताओं का घटना, मायोपिया (दूर की नज़र कमजोर), इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणों से हड्डियों में मौजूद मिनरल लिक्विड का समाप्त होना.
_ आर एफ विकिरण से ब्रेन ट्यूमर, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, ह्रदयरोग, कोशिकाओं में तनाव, आँखों में सूखापन, कंधे, गर्दन, सिर में दर्द आदि.
— वर्तमान समय में कम्प्यूटर व मोबाइल न सिर्फ़ जीवन का अंग बन गये हैं, बल्कि कई लोगों की जीविका भी इस पर निर्भर है.
_ इसलिए पूरी तरह से तो इस तकनीक का त्याग नहीं किया जा सकता है.
_ हाँ लेकिन संयम और समझदारी से इसका सीमित और सकारात्मक उपयोग ज़रूर किया जा सकता है.
— सबसे पहले तो – मोबाइल में समय निर्धारित करना चाहिए.
_ इसके साथ ही – कुछ अतिरिक्त गतिविधियों को अपने व्यवहार में शामिल कर उनकी आदत बनानी चाहिए.
_ जैसे – सुबह जल्दी उठकर प्रकृति के सानिध्य में रहना.
_ स्कूल या ऑफिस के बाद बचे हुए समय में कोई नई गतिविधि सीखना.
_ खेलना, लोगों से मिलना, अच्छे मित्र बनाना, डायरी लिखना आदि.
_ समाज, देश, दुनिया को जानने-समझने के लिए कुछ नया पढ़ना या देखना-सुनना.
_ ताकि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्परिणाम से बचा जा सके.
_ याद रखिये, हमारी सुरक्षा सबसे पहले हमारे हाथ है, सरकार, प्रशासन बाद में.
_ इसलिए उपर्युक्त समस्याओं से बचने के लिए कोई निबंध काम नहीं आएगा,
_ तो समाधान यही है.
सिर्फ़ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना इंसानों के लिए अच्छी बात नहीं है.

_ मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं, जानवरों से अलग, क्योंकि खाने-पीने और सोने के अलावा, वे अपने आस-पास के लोगों के व्यवहार से भी प्रभावित होते हैं.
_ इसके पास एक ऐसा मस्तिष्क है जो इसे सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से सोचने, अपने जीवन को बेहतर बनाने और उसे बर्बाद करने की क्षमता देता है.
_ लोगों से मिलना, यात्रा करना और लंबे समय तक एक ही जगह पर अकेले रहने से बचना अवसाद को कम करता है.
_ अगर आपको अजीब सा महसूस होने लगे तो उस जगह से थोड़ी देर के लिए हट जाएं, आपकी ऊर्जा बदल जाएगी और आपके विचार भी बदल जाएंगे,
_ इसलिए जब भी आपके मन में अजीब से विचार आएं तो अपनी जगह बदलने की कोशिश करें.!!
कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए … आपके दिमाग को मन्त्रमुग्ध करने के लिए हजारो अलग- अलग तरीके अपनाती है.

_ अपने आप को भीतर तक हम ना देख और झाँक सके _ उसके लिए दुनिया भर में सिस्टम बना हुआ है.
_ पूरी प्रणाली आपको आपके अंतर्ज्ञान से अलग करने के लिए डिज़ाइन की गई है. क्यों ?
_ डिस्कनेक्ट किए गए लोगों में हेरफेर करना आसान है.
_ टीवी, मूवी, मिडिया, पैसा, गाडी, मनोरंजन, इंटरनेट और अब वायरल होते रील, पोस्ट.
_ हम कब उस ” रील ” के दबोचे में रियल लाइफ के अपने खुद के वजूद से दूर हो गए और अब खुद के लिए ना वक्त रहा /ना वक्त रहेगा.
_ वक्त किसी और के सुपुर्द कर दिया है हमने ; Like, Share और subcribe के उफान ने उस प्रतिबिम्ब को मिटा दिया है जिसे “जीवन” कहा करते थे..
_ तकनीक अपने शबाब पर है और हम अपने चकनाचूर होने के कगार पर.
_ कई चीजे है दुनिया में जो महत्वपूर्ण हैं अब भी !
_ वायरल होना सबसे आसान है—‘सरल होना’ सबसे कठीन.
_ रियल लाइफ की जो चीज बिकी नही है उसे बस थामे रहिए.
_ बिक चुकी है तो वापस लीजिये… इत्ता दूर क्यो जाना ? !!
_ अपने जीवन का खुद ही मांझी बनिए ; तो जीवन ठीकठाक जगह में होगा.
_ मुझे लगता है..
जीवन की सच्चाइयों को ज़्यादातर इंसानों ने कब का छोड़ दिया है ; इसीलिए, सबकुछ आभासी प्रतीत होता है,
_ लेकिन जैसे-जैसे हम उस वास्तविकता की दुनिया में प्रवेश करते जाते हैं, धुंध छटने लगती है, जीवन में स्पष्टता आती जाती है.
_ यह पता चलता है कि हमें रुकना और ठहरना कहां है ;
_ हम इंसान सिर्फ़ भागने के लिए नहीं पैदा हुए हैं.!
हम इंसानों को अपने कहे गए अल्फाजों पर ध्यान रखना चाहिए

_ क्या पता कब कौन से शब्द हमारे जी का जंजाल न बन जाये
_ खासकर सोशल मीडिया के दौर में, जहां हमारी हर गतिविधि
कहीं न कहीं जाकर कैद होती है
_ हमारे लिखे शब्दों या कही गयी बातों का आधार बनाकर
कोई भी हमें अपने षडयंत्र का शिकार बना सकता है
_ यहां झूठे रिश्ते बनना आम बात है
_ इन झूठे रिश्तों के चक्कर में हम कब घनचक्कर बन जाये
_ ये किसी को भी पता नहीं चल सकता
_ कभी-कभी हम उन रिश्तों पर भी इतना अधिकार समझते हैं
_ जो असल में एक खोखला रिश्ता है
_ जो सिर्फ जरूरत के किये या जरूरत पूरा करने के लिए बनते हैं
_ फिर भावनाओं में बहकर बहुत कुछ कह भी जाते हैं
_ फिर जब उनको हथियार बनाकर कोई धमकी देने लगता है तो
कोई ब्लैकमेल करने लगता है
_ क्योंकि इज़्ज़त तो हर किसी को प्यारी है
_ खासकर उन इंसानों के लिए जिनके पास इज़्ज़त के सिवा कुछ भी नहीं
_ नए लोगों से भावनात्मक रिश्तें बनाने से बेहतर है कि
जो पुराने रिश्ते हैं उन्हीं को सहेजा व सम्भाला जाए
_ क्योंकि नए रिश्ते बनना हर किसी को पसंद है लेकिन
स्थिरता तो पुराने रिश्ते ही बनाएंगे,
_ जब किसी के संग धीरे धीरे रिश्ते पुराने होते हैं तो
वो स्थिरता व जटिलता खुद ब खुद आ जाती है
_ इसलिए भूल भुलैया में ना फँसकर सहज ज़िन्दगी गुज़ारे
_ अन्यथा इस चक्कर में काफी समझदार लोगों को फंसते देखा है……।।।
– हेसाम
ये कुछ लोग नहीं, कैमरे हैं..

_ जो गुप्त जगहों पर लगे हैं और हम पर नज़र रख रहे हैं.
_ आभासी दुनिया में बैठे ये कुछ लोग.. जो ज्यादातर तथाकथित अपने हैं..
सीसीटीवी कैमरों की तरह हैं,
_ कड़ी नज़र रखते हुए, हमारी कमियों को ढूँढ़ते हुए..
_ ये लोग नहीं, कैमरे हैं.!!
– तेज बीर सिंह सधर

सुविचार – संघर्ष – स्ट्रगल – Struggle – चुनौती – 111

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जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता ! ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं,

अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.

“जीवन स्ट्रगल (Struggle) नहीं, जीने के लिए था..

_ स्ट्रगल तब आता है, जब हम उसे गलत जगह से जीना शुरू कर देते हैं”

ज़िन्दगी struggle होने के लिए नहीं होती पर clarity के बिना वो स्ट्रगल बन जाती है.
कुछ लोग संघर्ष चुनते हैं, इसलिए नहीं कि उन के पास रास्ता नहीं है,

_ बल्कि इसलिए क्योंकि वो नए रास्ते तलाशना चाहते हैं ;
_ कुछ लोगों का यह साहस लाखों लोगों कि यात्रा के लिए प्रेरणास्त्रोत बनता है ;
_आपने अगर संघर्ष चुना है तो आप ख़ास हैं, बहुत ख़ास !!
संघर्ष के बिन व्यक्ति अपंग जैसा हो जाता है,

_ जीवन में कठिनाई का सामना न किया गया तो ..क्षमता से कम में ही गुजारा करना पड़ता है.
_संघर्ष के आने पर हम दुर्भाग्य मानने लगते हैं..
_ जबकि यह हमें तराशता है, परेशान नहीं..
_ कांटों भरे जीवन में सौगात के सुमन खिलाने का हुनर यूंही नही आता..!!
लोग आसान ज़िंदगी ढूँढते हैं, पर भूल जाते हैं कि संघर्ष तो सिर्फ उन खास लोगों को मिलता है जो चुनौतियों के लायक हैं.!!
परिवर्त्तन से डरना और संघर्ष से कतराना, मनुष्य की सबसे बड़ी कायरता है.
संघर्ष जब काफी लंबा हो जाता है तो बोझ बन जाता है.
लोग नकरात्मक चीज़ों की ओर जल्दी बढ़ जाते हैं.. क्योंकि तब उन्हें संघर्षपूर्ण दौर से निकलने के लिए वही आसान लगता है..
_ और सरल और सही रास्तों में से सरल रास्तों को चुनते हैं, किन्तु ये रास्ते कालान्तर में जीवन को मुश्किल बना देते हैं.. जिसका एहसास तब होता है.. जब बहुत देर हो चुकी होती है…!
“संघर्ष ही जीवन है” असली जीवन वही जिया _जिसने संघर्ष किया है ;

_जिन्दगी जीना भी एक कला है. _हर किसी को नही आती है यह कला..!!

_”सब आदतों का खेल है, कुछ आलस तो कुछ संघर्ष चुनते हैँ.”

उन सभी संघर्षों के लिए आभारी रहें जो आपने गुज़ारे हैं ; _ वे आप को मजबूत, बुद्धिमान और विनम्र बनाते हैं.

_ इसे आपको तोड़ने मत दो और इसे आप बनाने दो..!!

अभी तुम्हारे संघर्ष का समय है, अभी तुम्हे खामोश रहना है,

_ तुम्हारे लिये सब कुछ संभव है, यह तुम्हे सफलता के बाद कहना है..!!

जो कुछ भी संघर्ष के बिना आता है, वह मूल्यवान नहीं है..!!

संघर्ष इसे बताने लायक कहानी बनाता है.

ना संघर्ष खत्म होता है और ना ही शिकायतें,

_ धीरे धीरे जो खत्म हो रहा वो है उम्र.!!

कभी कभी संघर्ष करता हुआ व्यक्ति भी सबकी आंखों में चुभता है.!!
संघर्ष एक कालखंड [period of time] है और हर कालखंड का एक अंत है.
संघर्ष को सम्मान दीजिए, यकीन मानिए संघर्ष आपको सम्मानजनक जीवन देगा..!!
स्वयं से उलझना संघर्ष है, दूसरों में उलझना व्यर्थ है..!!
“ज़िम्मेदार बनें और परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने के लिए संघर्ष करें..!!”
“जीवन एक संघर्ष है”

_ अगर संघर्ष में खुशी ढूंढनी है तो इतनी मेहनत करो कि बदले में “तुम्हें नींद, चैन और भरपेट खाना मिल सके”
जब तक किसी के संघर्ष के दिन होते हैं कोई सहयोग नहीं करता और सफ़ल हो जाने के बाद क्रेडिट लेने सब आ जाते हैं.!!
संघर्ष में साथ देनेवाले बहुत कम लोग होते हैं..

_ लेकिन संघर्षों के बाद मिलने वाले सुख के दावेदार हर कोई बनना चाहते हैं.!!

अगर आपको लगता है कि आराम हराम है – तो समझ लीजिए कि आपको संघर्ष में ही सुकून मिलेगा.!!
दुर्भाग्य शाली हैं वे जिन्हें जन्म से सौभाग्य शाली समझा जाता है..

_ संघर्ष और पीड़ाएं ही परिमार्जित कर व्यक्ति का व्यक्तित्व बनाती है..

_ वरना जिन्हें खानदानी रूप से सब मिल जाता है ..वे खोखले ही रह जाते हैं..!!

जो आपके संघर्ष के अंधेरों में आपके साथ खड़ा नहीं था,

_ उसे आपकी जीत की चमक का हिस्सा बनने का कोई हक नहीं है.
_ उन्हें खामोशी से विदा करें और अपना रास्ता अलग कर लें,
_ क्योंकि नफरत का बोझ उठाकर आप अपनी अगली मंज़िल तय नहीं कर सकते.
_ अपनी सफलता का जश्न सिर्फ उनके साथ मनाएं, जो आपके बुरे वक्त में ढाल बनकर खड़े थे.!!
“जीवन में रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता, लेकिन हर मोड़ पर सीखने का एक नया अवसर छिपा होता है.

_ “सफलता केवल लक्ष्य नहीं है, बल्कि जीवन का असली अर्थ हर कदम पर छिपे संघर्ष में निहित है”
_ अपने आप पर विश्वास रखें, कठिन समय आपको मजबूत बनाएगा.
_ आगे बढ़ते रहें, क्योंकि हर नया दिन नई संभावनाएं लेकर आता है.
“जिद्दी बनिये,” हार मत मानिये.

_ अगर टूट गए तो वहाँ पहुँच जाओगे.. जहाँ से लौटना मुश्किल होता है.
_ जिंदगी जीना तालाब मे तैरना जैसा है.
_ अगर जीवित रहना है तो हाथ पैर हिलाते रहना होगा.
_ जिसने भी मुस्करा कर संघर्ष किया वो भवसागर तर गया.
_ जिसने संघर्षो से मुँह मोड़ा, उसने दुनिया छोड़ा.!!
हम सब अपनी-अपनी लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं.

_ कोई मोहब्बत के दर्द से उबर रहा है, तो कोई बेरोज़गारी की मार झेल रहा है.
_ कोई अपनी कमाई से खुश नहीं है, तो कोई अपने परिवार को खुश नहीं रख पा रहा है,, कोई अपनी बिगड़ती सेहत से दुखी है.
_ संकट तो है पर.. यही तो जीवन का संघर्ष है..
_ लड़ते रहिए – क्योंकि लड़ना ही जीवन है.. रुकना ही मृत्यु…!
जीवन में चुनौतियों से भागने के बजाय उनका सामना करना सीखें, उनसे भागकर आप उनसे मुक्त नहीं हो सकते.

_ इससे तो आपके जीवन में चुनौती और ज्यादा आएंगी इससे अच्छा है कि चुनौती का सामना करो.!!

जीवन की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि हर व्यक्ति अपनी जगह सही है, और असली संघर्ष सही और गलत के बीच नहीं बल्कि सही और सही के बीच ही होता है…!
हर उस बंदे से दूर रहें जो आपको ऐसा महसूस कराता हो कि ..आप उनके पैमानों पे ठीक नही बैठते, आपके विचार या बातें सही नही है,

_ क्योकि सिर्फ आप अपने हालात अपनी क्षमता, अपने संघर्ष और अपनी जीत या हार को जानते हैं,

_ आपकी सोच पे केवल आप का अधिकार होना चाहिये….

जो आपके संघर्ष में आपके साथ नहीं थे, जो आपको नज़रअंदाज़ करते थे और आपको ताने देते थे, आप अब कामयाब होने के बाद उन्हें अपनी खुशियों में भी बिल्कुल शामिल मत करना.!!
जब आप जो हो रहा है उसे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो जो हो रहा है उसका जवाब देने के तरीके को नियंत्रित करने के लिए स्वयं को चुनौती दें ; वहीं आपकी शक्ति है.

When you can’t control what’s happening, challenge yourself to control the way you respond to what’s happening. That’s where your power is.

सुविचार – अतीत, विगत, भूत, गत, बीता हुआ समय, गुज़रा हुआ कल, बीता हुआ कल, पहले का, Past – 110

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भविष्य के प्रति चिंता न केवल हमें वर्तमान को वैसा देखने से रोकती है जैसा वह है, बल्कि अक्सर हमें अतीत को पुनर्व्यवस्थित करने के लिए प्रेरित करती है.

A preoccupation with the future not only prevents us from seeing the present as it is but often prompts us to rearrange the past. – Eric Hoffer

सबसे बड़ा साहसी कार्य जो हम सभी को करना चाहिए, वह है अपने इतिहास और अतीत से बाहर निकलने का साहस रखना ताकि हम अपने सपनों को जी सकें.

The great courageous act that we must all do, is to have the courage to step out of our history and past so that we can live our dreams. – Oprah Winfrey

ये जानते हुए भी के अतीत में दुःख के कुछ गहरे धब्बे भी हैं,

_ हमारे भीतर अतीत के थोड़े से निर्मल सुख को वापस जी लेने की चाहना कभी ख़त्म नहीं होती.!!  – हेमन्त

जिसके वर्तमान जीवन के खेत में अतीत की फसल लहलहा रही है ;

_ उसमें सत्य का अज्ञात पौधा उगने से रहा..!!

“कभी उस जगह वापस मत जाना,

_ जिसे छोड़ना बहुत मुश्किल था.”

जब तक हम स्वयं को वर्तमान में रहने के लिए शिक्षित नहीं करते,

_ अतीत की छवियां वर्तमान में हस्तक्षेप करेंगी, जिससे भ्रम पैदा होगा.!!

**“हम अक्सर खोई हुई चीज़ों को इसलिए ढोते रहते हैं..

_ क्योंकि उन्हें छोड़ने का दर्द ज़्यादा होता है.
_ पर जैसे ही छोड़ना सीखते हैं, बोझ गायब हो जाता है और भीतर नई जगह बनती है – कुछ नया उगने की.!!”
हम अपने अतीत को बार-बार जीते हैं, शायद थोड़ा-बहुत बदलकर, अपनी सुविधा और आराम के अनुसार.. ;

_ और फिर कहते हैं : मेरे साथ बार-बार वही चीजें क्यों हो रही हैं ?
जीवन को एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसे मनुष्य अपनी स्मृति और रूढ़ियों के कारण अपनाने से इनकार कर देता है.
_ इसके परिणामस्वरूप उसका पूरा जीवन सड़ने लगता है, जो अतीत के मवाद से भरा होता है.
हमें वही बातें,वही चीज़ें, वही वक़्त, वही जगहें ज़्यादा अच्छी लगती हैं जो कभी अतीत में थीं..

_ अतीत हमें सुविधा देता है कि हम उसे चाहे जैसे प्रस्तुत कर सकते हैं, वर्तमान से बहुत कम लोग संतुष्ट होते हैं, बहुत कम लोगों का वर्तमान उनके मुताबिक़ होता है और भविष्य वह तो सदा अनिश्चित ही रहा है सो अपने दुख, अपने सुख को खोजने के लिए हमें अतीत की शरण में जाना ही पड़ता है..
_ जवानों को अपना बचपन ज़्यादा-ज़्यादा याद आता है तो बूढ़ों को जवानी..हालाँकि जब वह अपने उस दौर में थे तो अक्सर उससे पीछा छुड़ाने की सोचते..ऐसे ही दूर परदेस बसे लोगों को अपनी माटी की याद सताती है तो देश में रह रहे लोगों को पिछले गुज़रे बरस..
_ हमें अतीत हो चुके या होने की कगार पर पहुँचे रीति रिवाज, भोज्यपदार्थ, परम्पराएं अधिक लुभाती हैं हालांकि जब वह लोगों की सामान्य दिनचर्या में शामिल थीं तो लोगों ने प्रयास करके उन्हें बदल दिया..
बड़े शहरों में ग्रामीण थीम पर बड़े बड़े रेस्त्रां खुल रहे जहां लालटेनें होंगी, सूप होगा, चक्की होगी, कुंए होंगे, होंगी माटी की दीवारें..जब यह सहज,सुलभ थीं, आम जनजीवन का हिस्सा थीं हम इनसे उकताकर शहर भागे..शहर में अतीत की याद भुनाने के लिए ऐसे रेस्त्रां खोले..
_हम जिस शहर में रहते हैं, जिस जगह जीते हैं उस वक़्त उससे रूठे रूठे रहते हैं..बाद के बरसों में जब वह जगह छूट जाती है तब वह हमारे सपनों पर कब्ज़ा जमा लेती है..
_हम अपने उन क़रीबी रिश्तों को अधिक याद करते हैं, उनके लिए अधिक रोते हैं, उनकी अधिक बातें करते हैं जो अब नहीं हैं..और इस तरह हम बड़ी चालाकी से उनके साथ होने का लाभ उठाते हैं हालांकि जब हम उनके साथ थे उकताए से रहे..
_हमारा वर्तमान क्या इतना विपन्न होता है कि उसपर हम दस मिनट भी बात नहीं कर सकते और अतीत इतना सम्पन्न कि हमारी बातें ख़त्म ही न हों..
_जाने क्यों सारी वीरतायें, सारी सम्पन्नताएँ, सारी सुंदर सुधियां, सारी निर्मल छवियां हमने जादूगर रूपी अतीत के थैले से ही निकलते देखा, वर्तमान तो सबका रूखा-फ़ीका और उदास मजदूर सा ही दीखता है..
उम्र दराज़ लोग तो पुराने दिनों को सुनहरे दिन मानते ही हैं, पचास साठ वाले भी अक्सर एक लम्बी आह भरकर कहते मिलेंगे-“क्या ही अच्छा ज़माना था”

_ मतलब यह कि हर पीढ़ी के लोग यही मानते हैं कि ‘पुराना ज़माना अच्छा था.’
_ इन लोगों की बात यदि हम सच मान लें तो गिरते गिरते दुनिया अब तक रसातल में पहुँच गई होती.
_ पर आँख घुमा कर देखो, आपको ऐसा नहीं लगता कि हम अपने पूर्वजों से बेहतर जीवन जी रहे हैं ?
समय के साथ हमारा नज़रिया और जीवन मूल्य बदल जाते हैं.
_ अतीत कितना भी खूबसूरत रहा हो, हमने जिन भी लोगों के साथ जिया हो, वह सारा संयोजन हमें फिर से मिल जाए..
_ तो भी हम उसे उसी पुराने रूप में एन्जॉय नहीं कर सकते..
_ क्योंकि हम एक अलग तरह ग्रो कर चुके होते हैं.
_ हम भले ही अतीत की पुरानी यादों में खो जाएं..
_ पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अतीत कि यादों के गलियारों में घूमना तो अच्छा लग सकता है..
_ पर यदि कोई हमें जादू से सचमुच वहां पहुंचा ही दे.. तो हमारा उस काल में जीना सरल नहीं होगा..
— क्योंकि लोगों की फितरत ही होती है कि पुरानी चीजों को पकड़े रहते हैं.
_ सामने जो होता है, उनसे संतुष्टि ही नहीं हो पाते हैं.
_ अपने जमाने में हम ये करते थे, हम वो करते थे..
_ ऐसा कह कह कर वर्तमान से शिकायत करना ही..
_ उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है.
_ ये सबसे बड़ी सच्चाई है कि अतीत और वर्तमान की कोई तुलना ही नहीं हो सकती है.
_ जो 10साल पहले हम जीते थे, वो चीज़ हमें आज नहीं मिल सकती.
_ लेकिन कहते हैं ना कि वक़्त कभी एक सा नहीं रहता !!
सबसे बेहतरीन और सुकून से भरे उन लोगो की ज़िंदगी होती है.. जो अतीत को याद नही रखते और न ही भविष्य के प्रति इतने ज्यादा संवेदनशील होते हैं..

_ वे लोग जो जीते हैं सिर्फ वर्तमान में.!!
यदि आप अतीत में जीते हैं और अतीत को यह परिभाषित करने देते हैं कि आप कौन हैं, तो आप कभी विकसित नहीं होंगे.
वर्तमान चाहे कितना सुखदायक हो, भविष्य चाहे कितना संभावनाशील हो, फिर भी कष्टपूर्ण अतीत हमारा पीछा नहीं छोड़ता.

_ हम न तो ‘आज’ में जीते हैं, न आने वाले कल के सपनों में, हम ज़्यादातर अतीत की वेदनाओं में जीते हैं.

अतीत में हमारे साथ बहुत सी अच्छी और बुरी चीजें गुजरी होती हैँ, और हम उन खट्टे मीठे अनुभवों से सीखते भी हैँ,

_ अगर हम उन गलतियों को न दुहराते हुए आगे बढ़ रहे हैँ तो सही रास्ते पर हैँ !!

अतीत की कुछ घटना भविष्य का भी सब कुछ बर्बाद कर देती है,

_ मन अतीत की स्मृतियों में ही कहीं उलझा रह जाता है,
_ रात होते ही एक गहरी उदासी छाने लगती है और फिर विचारों की रेखा पर मिटते कल्पना के चित्र मडराते हैँ,
_ और मैं एक कोना पकड़कर इन विचारों को शब्द देने लग जाता हूँ…!
अतीत में की गई किसी की एक ज़िद, आज हमारे वर्तमान को हिला सकती है.

_ वो ज़िद, जो कभी एक पल का आग्रह थी, वक़्त के साथ सवाल बनकर लौट आती है.
_ कभी-कभी वही एक फैसला आज की शांति छीन लेता है, और समझ आता है कुछ ज़िदें सिर्फ उस समय की नहीं होतीं, वे हमारे आज का सुकून भी छीन सकती है.!!
आज को आज और कल को कल ही रहने दीजिए;
_ कल को खींच कर अपने दिमाग में लाना भी सब ख़राब कर देता है.!!
किसी के जाने से जीवन नहीं रुकता.. बस इतना आगे बढ़ो कि आपको पीछे देखने की ज़रूरत ही ना पड़े.!!
अपने अतीत से आप कुछ सीखते हैं.. जिसका इस्तेमाल अपने भविष्य में करते हैं.

_ इन दोनों के बीच वाले वक्त यानि वर्तमान में हौसला न छोड़ें.!!
आपने काफ़ी समय बर्बाद किया, कोई बात नहीं..

_ आपने ग़लत लोगों की परवाह की, कोई बात नहीं..
_ आपने खुद को नज़रअंदाज़ किया, कोई बात नहीं..
_ आपने अपनी क़ाबिलियत पर शक किया, कोई बात नहीं..
_ अतीत आपके जीवन की परिभाषा नहीं है, लेकिन अब आप क्या करेंगे, यही मायने रखेगा..!
_ ख़ुद को और सबको माफ़ करें और ज़िंदगी को हमेशा सकारात्मकता के साथ जीने की कोशिश करें..!!
सबसे अच्छी और सुकून भरी जिंदगी उन लोगो की होती है,

_ जो अतीत को याद नही रखते और न ही भविष्य के प्रति इतने ज्यादा संवेदनशील होते है,
_वो जो जीते हैं सिर्फ वर्तमान को, वो लोग ही दुनिया के सबसे धनी इंसान है…!
अतीत खंडहर है, कूड़ा करकट है, वहां से केवल बू आ सकती है, सुगंध नहीं,
_ वर्तमान को अतीत से भी खूबसूरत बनाइए..
हमारे लगभग हर काम में निरंतर अतीत या भविष्य मौजूद रहता है.

_ और समय के इस निरंतर प्रवाह में, वर्तमान धीरे-धीरे हमसे दूर होता चला जाता है.
कुछ अतीत की बातों के वास्तविक अर्थ हमें भविष्य में पता चलते हैं..

_ इसलिए अपने जीवन के हर पल को खूबसूरत बनाएं..
_ क्योंकि यही आने वाले कल में अतीत का रूप लेंगे.!!
छोड़ जाने का निर्णय संपूर्ण और अंतिम होना चाहिए..

_ पीछे छोड़े हुए सब स्मृति-चिह्नों को मिटा देना चाहिए..
_ और उन औपचारिक रिश्तों के पुलों को नष्ट कर देना चाहिए,
_ किसी भी तरह की वापसी को असंभव बनाने के लिए.!!
जीवनपथ पर आगे बढ़ते जब कभी पलटता हूँ तो दिखते हैं सुदूर पीछे छूटे अनगिनत दृश्य..
_ जीवन कितनी दूर ले आया ! कितना कुछ रह गया, कितना कुछ फिसल गया !
_ क्या-क्या भूलूँ और क्या-क्या याद करूँ !
_ तथापि कुछ घटनाऐं ऐसी होतीं हैं ..जो हम आजीवन नहीं भूल पाते.
_ जब-जब दृष्टि डालिये, हृदय के कोमल कोनों में गरिमा के साथ मुस्कुराती हुई पाते हैं..!!
— अतीत की स्मृतियां बड़ी ही मधुर होती हैं, चाहे वह सुख में बीती हुई स्मृति हो या दुःख में, वे अपनी मिठास बनाए रखती हैं..
_ फिर जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है व्यक्ति उतना ही अतीत के दायरे में चक्कर लगाना शुरू कर देता है..
_ और याद करता कि कैसे औरों के फेर में उसकी खुद की इच्छाएं अधूरी रह गई थी…!
कभी कभी अतीत के पुराने फैसले, घटनाएं, दुखो को सोचकर मन विचलित तो होता है,

_ पर उसे ये कहकर टाल देता हूं कि जो होता है अच्छे के लिए होता है..
_ आशावादी बने रहने में कोई परेशानी नहीं है..
_ बशर्ते रब एक सीमित दायरे तक ही चीजों को अनुभव करने की शक्ति दे ‘चाहे वो बुरी हो या अच्छी’..!
दुनिया में बेहतर लोग मिल जाते हैं, बेहतर विकल्प भी टकरा ही जाते हैं..

_ बस दिल मानता नहीं.. क्योंकि हम किसी शख्स को नहीं, उस गुज़रे हुए वक़्त को मिस करते हैं..
_ वो मासूम भरोसा, वो सहज हँसी, वो बेफ़िक्र के दिन.. जो अब लौटते नहीं.
_ रिश्ते बदले हों या लोग, असल में हम अपने ही खोए हुए एहसास की तलाश में भटकते रहते है.!!
सबसे बेहतरीन और सुकून से भरी उन लोगो की ज़िंदगी होती है, जो अतीत को याद नही रखते और न ही भविष्य के प्रति इतने ज्यादा संवेदनशील होते हैं..

_ वे लोग जो जीते है सिर्फ वर्तमान को.!
जो लोग आपके अतीत से जुड़े हैं और जो जाने नहीं देते, उनके साथ निपटने का सबसे शक्तिशाली तरीका यह है कि आप वह व्यक्ति बनें, जिसे वे कभी फॉलो करने की हिम्मत न करें.

_ अपनी ज़िन्दगी को इतना ऊंचा उठा लें—आर्थिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से—कि जब भी वे आपको देखेंगे, उनका दिल पछतावे से डूब जाए.
_ वे यह उम्मीद करेंगे कि आप उसी बुरे हालात में होंगे, जैसे वे आपको छोड़कर गए थे,
_ ताकि वे अपनी विदाई को सही साबित कर सकें..
_ उन्हें वह संतोष मत दीजिए.. उनकी उम्मीदों से कहीं ऊंचे उठिए,
_ ऐसे तरीके से जो उन्होंने कभी कल्पना भी न की हो.
_ कभी-कभी, सबसे गहरी विद्रोह की क्रिया यह होती है कि आप बस इतना उत्कृष्ट बन जाएं, ताकि जो लोग यह सोचते थे कि वे आपके जीवन पर नियंत्रण रखते हैं, उन्हें यह साबित हो जाए कि वे गलत थे.
_ जब बात आपके मूल्य, गरिमा और भविष्य की रक्षा की हो—तो संकोच मत करें.
_ बेजोड़ आत्मविश्वास के साथ खड़े होइए..
_ न तो आप समझौता करें और न ही किसी ऐसे जीवन को स्वीकार करें, जिसे दूसरों ने आपके लिए तय किया हो.
_ कभी भी किसी को यह मत मानने दें कि उन्होंने आपकी कहानी लिखी है.
_ जो भी कीमत चुकानी पड़े, उस पृष्ठ को पलटें और ऐसा मोड़ लाएं, जो उन्हें चुप कर दे.
_ अपनी ज़िन्दगी को ऐसी जगहों तक ले जाइए, जो आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.
_ ऐसा अद्वितीय व्यक्ति बनिए, जिसे वे पहचान भी न सकें.
_ आखिरकार, आपको जो असाधारण जीवन आपने बनाया है, उसके लिए एकमात्र व्यक्ति जिसे श्रेय मिलना चाहिए, वह व्यक्ति आप ही हैं.
_ कभी भी किसी और को वह सम्मान न लेने दें.!!
— उन्हें पछताना होगा – शायद आज नहीं, शायद कल नहीं, लेकिन एक दिन वे पीछे मुड़कर देखेंगे और समझेंगे कि उन्होंने एक सच्चे व्यक्ति को एक अस्थायी खुशी के लिए खो दिया.!!
शायद अब मुझे अतीत के दरवाजों पे सर पटकना छोड़ देना चाहिए है.. और ताले लगा देने चाहिए अतीत के किवाड़ों पे..!

_ क्योंकि कई लोग जो बहुत दुआ मांगा करते थे मेरे लौटने की..
_ पर अब उन्हें लगता है कि एक वक़्त के बाद मुझे नहीं लौटना चाहिए…!!
‘जिंदगी में दर्द है, दर्द में जिदंगी है’

_ कौन किसको पूछ रहा है यहां, हर इंसान खुद में मगन है.
_ दिखावे में जिंदगी जीना सबसे व्यर्थ रास्ता होता है.
_ मैं कई दिनों से खुद को बदलने की कोशिश कर रहा हूं,
_ परंतु ‘अतीत’ है कि मुझसे अलग होने का नाम ही नहीं लेता है.
_ अब आंखों के आंसू सूख चुके हैं, ख़ैर… बची हुई जिदंगी जी लूंगा अब..!!!
अतीत की स्मृतियां बड़ी ही मधुर होती है चाहे वह सुख में बीती हुई स्मृति हो या दुःख में, वे अपनी मिठास बनाए रखती है..

_ फिर जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है व्यक्ति उतना ही अतीत के दायरे में चक्कर लगाना शुरू कर देता है..
_ और याद करता कि कैसे औरों के फेर में उसकी खुद की इच्छाएं अधूरी रह गई थी…!
दुःखद स्मृतियाँ भुलाए नहीं भूलतीं, और सुखद स्मृतियों को याद करना पड़ता है..

_ हम अपने सुख से शायद सुखी न हों, पर दुःख से अवश्य दुःखी हो जाते हैं..
_ सिर्फ मनुष्य को ही कल्पना की शक्ति मिली है.. पर हमने उसका उपयोग नहीं, दुरुपयोग किया है..
_ हम भविष्य नहीं गढ़ते बस बीते हुए कल की स्मृतियों में उलझे रहते हैं.!!
जब आप एक मानसिकता [Mindset] बनाने की कोशिश करते हैं, तो आपको अपनी पिछली सोच को बदलना होगा और नया नज़रिया अपनाने के लिए उसे पीछे छोड़ना होगा.
_ यह खुद को ठीक करने की एक प्रक्रिया [process to heal] है. _ मानसिकता और विचार प्रक्रिया में बदलाव के लिए बहुत ज़्यादा आंतरिक परिश्रम की ज़रूरत होती है, और उससे भी ज़्यादा, कुछ शारीरिक परिश्रम की। चाहे जो भी हो, आपको करना ही होगा.!!
याद रखें, जीवन एक निरंतर प्रवाह है.

_ कुछ भी अंतिम नहीं है, कुछ भी पूरा नहीं है.
_ जिस क्षण आपको लगता है कि आप पहुँच गए हैं, आपने बढ़ना बंद कर दिया है.
_ विकसित होते रहना.. हर पल पुराने के लिए मरना है,
_ जो आप थे उसे छोड़ देना.. ताकि आप वह बन सकें.. ‘जो आप बन रहे हैं.
हमें दुःख तब नहीं होता जब कुछ बुरा होता है,

_ बल्कि तब होता है जब हम उस बुरे को स्वीकार नहीं कर पाते..
_ जब वर्तमान की सच्चाई आँखों के सामने होती है, मगर दिल बार-बार बीते हुए कल में भटकता है
_ हम जानते हैं अतीत को बदला नहीं जा सकता,
_ वो लोग, वो पल, वो फैसले सब गुजर चुके हैं,
_ पर फिर भी भीतर से एक आवाज़ आती है काश मैंने ऐसा न किया होता, काश वो रुक जाता, काश वक़्त थोड़ी मोहलत और दे देता..
_ यही काश हमारे दुःख का असली कारण बन जाता है…!
मुझे अतीत कि यादों से डर लगता है.. क्योंकि वो “वो” यादें ताज़ा कर देती हैं.. जिन्हें मैं भूलने की कोशिश कर रहा हूँ.

_ वो उस इंसान को नहीं, बल्कि साथ बिताए वो पलों को वापस लाती हैं.. जिन्हें हम भूलना चाहते हैं.
_ यादें किसी को भूलने की हमारी सारी कोशिशों को नाकाम कर देती हैं.
_ आइए अतीत के ज़ख्मों से, उन यादों से जो हमारे काम की नहीं हैं, उस व्यक्ति से जिसे हमारे प्यार की परवाह नहीं थी, भर जाएँ और एक बेहतर भविष्य बनाएँ जहाँ हम खुश हों.!!
बीते हुए कल की राख कुरेदने से हाथ काले ही होते हैं..

_ मन की शांति इसी में है कि पुरानी बातों को वहीं छोड़कर, एक नई उम्मीद के साथ धीरे से आगे बढ़ा जाए.!!
कहीं न कहीं लोग अपने अतीत से इतने जकड़े होते हैं..
_ जिसकी वजह से वो अपने भविष्य को खूबसूरत नहीं बना पाते.!!
अतीत बस एक आंखों पर पट्टी है जो वर्तमान में सब कुछ ढक देती है..
_ और उन चीजों के लिए दर्द ढूंढती है जो हमें अभी मिली हैं.!!
मायूसी के साथ अपने अतीत के बारे में सोच कर वक्त बर्बाद मत करो..
_ बल्कि आशा के साथ अपने आज को जियो..!!
आपके गुज़रे कल को आपकी कोई जरूरत नहीं,
_ लेकिन आप के आज को आप की बहुत जरूरत है.!!
बीते लम्हों को पकड़ कर रोना बंद करो,
_शायद आज की सुबह आपको वो सब देने आई है जो कल आपसे छिन गया था.!!
अतीत यात्रा करने के लिए एक अच्छी जगह है लेकिन निश्चित रूप से रहने के लिए एक अच्छी जगह नहीं है.
यदि आप हर समय अतीत के बारे में सोचते हैं तो आपका कल बेहतर नहीं हो सकता.
वर्तमान को तभी समझा जा सकता है, जब हमने अतीत की गलतियों से कुछ सीखा हो.!!
जब रब आपको एक नई शुरुआत देता है तो अतीत की पुरानी गलतियों को मत दोहराओ..!!
अतीत की स्मृतियों से वर्तमान के चित्र उकेरेंगे तो भविष्य का रंग खराब ही होगा..!!
जो बीत गया सो बीत गया यार, अब कोई नई बात कर.!!
हर “पत्थर दिल” “इंसान” के पीछे उसका “बेरहम अतीत” होता है.!!
हमें अतीत की बातें याद रह जाती हैं, वही पल-पल चुभाती हैं.!!
किसी को उसके बीते कल से मत आंकिए..
_ इंसान सीखता है, बदलता है और धीरे-धीरे आगे बढ़ जाता है.!!
काश…हम अतीत में पीछे जा सकते.. कुछ बदलने नहीं…

_ कुछ चीज़ों को दोबारा महसूस करने..!!

उस अतीत से बाहर निकलें जो आपको रोक रहा है.

_ उस नई कहानी में कदम रखें ..जिसे आप बनाना चाहते हैं.

यदि अतीत अतीत बन गया है, तो इसके पीछे कोई कारण अवश्य है.

_ यदि अतीत वर्तमान में आ रहा है, तो उसका विनाश निश्चित है, क्योंकि यह प्रकृति के नियम के विरुद्ध है.

पीड़ादायी अतीत की स्मृतियों के साथ चिपके रहने से हमारे आत्मविश्वास,आत्मसम्मान और मानसिक लचीलेपन पर काफी दबाव पड़ता है.

_ यह धीरे-धीरे हमें थका देता है और अवसाद की स्थिति भी तैयार कर सकता है.
_ जब हम उन्हें जाने देते हैं तो हम इस मानसिक दबाव को दूर कर सकते हैं.
_ परिणामस्वरूप, हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है, आत्मसम्मान मजबूत होता है और हम जीवन के तनावों के विरुद्ध अपने लचीलेपन का पुनर्निर्माण करना शुरु कर देते हैं.!!
किसी के आने या चले जाने से जिंदगी नही रुकती.

_ स्कूल मे जब पढ़ते थे तब कोई दोस्त टीसी लेकर दूसरी स्कूल मे चला जाता था..
_ तब ऐसे लगता था जैसे दुनिया ही खत्म हो गई हो, मगर धीरे धीरे उसके बिना रहना आ जाता था.
_ फिर कॉलेज के दोस्त छूटे तब भी ऐसा ही लगता था.
_ उसके बाद भी अजीज लोगों के छुट्ने का सिलसिला खत्म नही होता.
_ कमाने जाओ तो मोहल्ले के दोस्त छूटते है.
_ सबसे ज्यादा प्यार करने वाले दादा दादी भगवान को प्यारे हो जाते है फिर माता पिता भी साथ छोड़ जाते हैं.
_ मगर हम जीना थोड़े छोड़ देते है.
_ ये जिंदगी है जनाब इसमें अपनो का आना और जाना लगा रहता है.
_ अंत तक साथ कोई नही निभाता..
_ इसलिए जो चला गया उसे भूलना सीखो.!!
जूलिया रॉबर्ट्स ने एक बार कहा था, “जब लोग आपको छोड़कर चले जाएं, तो उन्हें जाने दीजिए.

आपकी तक़दीर कभी भी उन लोगों से जुड़ी नहीं होती जो आपको छोड़ते हैं, और इसका मतलब यह नहीं है कि वे बुरे लोग हैं.
इसका मतलब है कि उनका आपके जीवन में एक भूमिका थी जो अब समाप्त हो गई है.”
_ ये शब्द हमें एक सच्चाई याद दिलाते हैं, जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं – कि हर व्यक्ति जो हमारे जीवन में आता है, वह हमेशा के लिए नहीं रहता.
_ लोग हमारे जीवन में विभिन्न कारणों से आते हैं, हमें कुछ सिखाने, अनुभव साझा करने या किसी खास दौर में हमारा साथ देने के लिए..
_ लेकिन जब वे जाते हैं, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि उनकी भूमिका हमारे सफर में पूरी हो गई है, और अब हमारे रास्ते अलग हो गए हैं.
_ जिन लोगों को हमें जाने देना होता है, उनके साथ जुड़ा रहना हमारी वृद्धि में रुकावट डालता है और हमें अपनी पूरी तक़दीर में आगे बढ़ने से रोकता है.
_ यह किसी को नकारने या दोष देने का सवाल नहीं है, बल्कि यह समझने का है कि हमारी कहानी उनके बिना भी आगे बढ़ सकती है.
_ कभी-कभी उनका जाना नए अवसरों, गहरे रिश्तों और खुद के नए पहलुओं की खोज का रास्ता खोलता है.
_ छोड़ना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन यह आपके जीवन के अगले चरण में जाने के लिए जरूरी है.
_ यह उस रिश्ते के महत्व को कम नहीं करता जो आपने कभी साझा किया, क्योंकि हर मुठभेड़ का मूल्य है, जो आपको आकार देती है और आपकी वृद्धि में मदद करती है.
_ लेकिन जब कोई चला जाता है, तो इसका मतलब है कि अब उनका और आपका रास्ता एक साथ नहीं मिल रहा.
_ उनका जाना आपको आपके जीवन की कहानी में एक खलनायक नहीं बनाता, बल्कि यह सिर्फ यह दर्शाता है कि उनकी भूमिका अब स्वाभाविक रूप से समाप्त हो गई है.
_ जब आप छोड़ने का बोझ हटाते हैं, तो आप उन लोगों के लिए जगह बनाते हैं..
_ जो आपके जीवन में बने रहेंगे और उसे सार्थक तरीके से समृद्ध करेंगे.
_ हार मानना छोड़ने का नहीं, बल्कि स्वीकृति का एक कृत्य है – जीवन के प्रवाह को अपनाना, यह समझना कि हर कोई हमारे साथ हर मंजिल तक नहीं पहुंचने के लिए नहीं होता.
_ याद रखें, आपकी तक़दीर आपकी है.
_ कोई भी इसे आपसे नहीं छीन सकता, और कोई भी उस रास्ते पर नहीं चल सकता जो आपके लिए निर्धारित किया गया है.
_ इसलिए, जब कोई व्यक्ति जाता है, तो विश्वास रखें कि यह आपके सर्वोत्तम भले के लिए है.
_ वे आपकी कहानी का हिस्सा थे, लेकिन अब बाकी का लेखन आपके लिए है, और इसमें और भी बड़ी संभावनाएँ हैं.!!
बीता हुआ कल सिर्फ यादों में होना चाहिए, आपकी आज की मुस्कान में नहीं.

_ कभी-कभी हम अतीत की गलतियों, दर्द या रिश्तों को इतना पकड़े रहते हैं कि आज की खुशियों का स्वाद ही खो देते हैं.
_ लेकिन सोचिए—क्या वो सिचुएशन या इंसान अब भी आपके जीवन पर हक रखते हैं ? असल में नहीं..
_ आपके पास आज है, यही असली गिफ्ट है.
खुद को याद दिलाइए:
_ मैं अतीत को छोड़ रहा हूँ.
_ मैं आज की खुशी जी रहा हूँ.
_ मैं अपने वर्तमान को प्यार और शांति से भर रहा हूँ.
_ बीते कल को वहीं रहने दें.. जहाँ उसका स्थान है.
_ आज को जिएं, मुस्कान को बचाएं.!!
अगर हम अपने अतीत में झांककर देखें कि हमने किस मोड़ पर अपने रास्ते बदले थे, आखिर वो कौन से मौड़ थे जहां से हमने खुद को बदला था तो हम पाएंगे कि वो सारे मोड़ अक्सर किसी न किसी दुखद वाकये से जुड़े होते है..

_ कुछ ऐसे वाकये जिन्होंने हमें अंदर तक झझकोर कर रख दिया था, हमें कोई न कोई निर्णय लेने पर मजबूर किया था..
_ कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है कि हमेशा बदलाव की शुरुवात किसी दुखद वाकये से होती है फिर चाहे किसी ने हमसे कुछ बुरा कहा हो या फिर किसी ने हमारा कुछ बुरा किया हो..
_ असलियत यह है कि जब हमारे साथ सब कुछ अच्छा हो रहा होता है तब हम किसी गहरी नींद में होते है.
_ इतनी गहरी नींद में कि हमें उसकी कोई अच्छाई दिखाई ही नही पड़ती.
_ यही वजह है कि हम किसी दूसरे की अच्छाई को कोई तवज्जो भी नही देते और न ही कभी उसकी प्रशंसा करते हैं.
_ हम अपने अतीत की अच्छी यादें अक्सर भूल जाते है.
_ हमारी यह गहरी नींद केवल और केवल तभी टूटती है जब हमारे साथ कुछ बुरा होता है और तब हम अचानक से इतने क्रियान्वित हो जाते है कि उस बुरे हादसे को ज़िन्दगी भर नही भुला पाते..
_ ऐसा नही की हमारे साथ हमेशा सब कुछ बुरा ही होता है, बल्कि सच यह है कि हमें केवल बुरा ही याद रह जाता है, बाकी की हर अच्छाई हम भूल जाते हैं..
_ हमारी यही सारी समस्यायों की जड़ है, हम बुराई का इतना ज्यादा अभ्यास करते हैं कि वो हमेशा के लिए हमसे चिपक जाती है और हम उसके प्रभाव से कभी भी मुक्त नही हो पाते..
_ क्योंकि सामने वाले कि अच्छाई के वक़्त हम गहरी नींद में होते है.. इसलिए कभी उसे तवज्जो नही देते, कभी उसकी चर्चा नही करते और न ही कभी उसका अभ्यास करते हैं..
_ शायद यही वजह है कि किसी दूसरे की मुट्ठी भर कमियां भी उसकी हज़ारों लाखों अच्छाईयों पर भारी पड़ती है.
_ उसकी कमियों के लिए हम उसे ज़िन्दगी भर दोष तो देते हैं परंतु उसकी अच्छाइयां भूल जाने की आदत हमें कभी दिखाई नही पड़ती..!
तुम नदी को नहीं पकड़ सकते, मेरे दोस्त.

_ तुम चाहे जितना प्रयास करो—लेकिन यह तुम्हारी उंगलियों से फिसल जाएगी.
_ सब कुछ बदल रहा है…यह सांस, यह शरीर, यह कहानी जो तुम खुद को सुनाते रहते हो.
_ लेकिन फिर भी, हम पकड़ कर रखते हैं.
_ पुराने नामों को, पुराने दर्द को, उन लोगों को जो पहले ही चले गए हैं, हमारे उन संस्करणों को जो अब मौजूद भी नहीं हैं.
_ हम यह सब अपने सीने में पत्थरों की तरह ढोते हैं.
_ सोचते हैं कि अगर हम कसकर पकड़ेंगे, तो यह हमें सुरक्षित रखेगा.
_ लेकिन सच्चाई यह है—यह हमें भारी बनाता है.
_ पानी को देखो.
_ यह मौसम से नहीं लड़ता.
_ सर्दी आती है—यह बर्फ बन जाता है.
_ गर्मी आती है—यह भाप बन जाता है.
_ मानसून में, यह दहाड़ता है.
_ चुपचाप, यह धुंध बन जाता है.
_ कोई नाटक नहीं.. कोई सवाल नहीं.. बस बदलाव..!
_ इसलिए यह बहता है.. इसलिए यह जीवित रहता है.
_ और हमें देखो-हम हर मोड़ पर अटक जाते हैं.
_ “ऐसा नहीं होना चाहिए था”
_ “इस व्यक्ति को नहीं जाना चाहिए था”
_ “यह दर्द यहाँ नहीं होना चाहिए था”
_ लेकिन नदी चट्टान पर रोती नहीं है.
_ यह झुक जाती है.
_ यह दूसरा रास्ता खोज लेती है.
_ स्थिर पानी.
_ अभी भी बह रही है.
_ अभी भी जीवित है.
_ छोड़ देने का मतलब हार मान लेना नहीं है.
_ इसका मतलब है-बस.
_ पुरानी कहानी को घसीटना बंद करो.
_ जो पहले से है उसका विरोध करना बंद करो.
_ कभी-कभी छोड़ देना बस साँस छोड़ना है.
_ कभी-कभी यह बस इतना कहना है, “ठीक है, मुझे नहीं पता..
_ लेकिन मैं फिर भी चलूँगा”
_ छोड़ दो जैसे बर्फ पिघल कर वसंत में आती है.
_ नरम – शांत – कोई लड़ाई नहीं.
_ आप यहाँ वैसे ही रहने के लिए नहीं हैं.
_ आप यहाँ घुलने और फिर से बनने के लिए हैं.
_ पानी की तरह..
_ जीवन की तरह..
_ मैं यहाँ कोई नया ज्ञान नहीं बता रहा हूँ, बल्कि आपको तथ्यों की याद दिला रहा हूँ.!!
— SACHIN
जिन लोगों को अतीत वर्तमान से अधिक भव्य और गौरवशाली दिखायी देने लगे और भविष्य दिखायी देना बन्द हो जाये तो समझ लेना चाहिए कि वो बूढ़े हो चुके हैं.

_ इस तरह की बीमारी.. जिसमें बुढ़ापे का जवानीलेवा हमला किसी भी उम्र मे हो जाता है, विशेष रूप से जवानी में भी हो सकता है.
_ अगर चिलम या शराब उपलब्ध न हो तो उस वक़्त इन लोगों को अतीत की यादों और फ़ैंटेसी में डूबे रहने में ही मज़ा आने लगता है,
_ क्योंकि ये थके-हारों का अंतिम आश्रय-स्थल होती है.
_ जैसे कुछ बहादुर और मेहनती लोग अपनी परिश्रम की शक्ति से अपना भविष्य अपने आप बुनते हैं,
_ इसी तरह अतीतजीवी अपने विचारों से अपना अतीत बुनते रहते हैं.
_ ये अतीत की नफरती यादें.. कटीले पेड़ों की तरह सिर्फ़ दूसरों के काँटे चुभाने या किसी दिन आग की भट्टी में जलते हुए इधर-उधर आग छिटकाने का काम कर रही होती हैं.
_ कभी-कभी पूरा समाज तक अपने ऊपर अतीत का कंबल ओढ़े नशे में धुत्त पड़ा रहता है.
_ अगर ग़ौर किया जाये तो इण्डियन सब-कांटिनेंट का असल विलेन अतीत ही है.
_ जो लोग वर्तमान में जितने बोद्धिक स्तर पर पिछडे, और मूर्ख होते हैं..
_ उन्हें अपना अतीत उतना ही अधिक उज्ज्वल और दुहराये जाने योग्य दिखायी पड़ता है.
_ हर परीक्षा और कठिनाई की घड़ी में वो अपने अतीत की ओर उन्मुख होते है और अतीत भी वो नहीं, जो वस्तुतः था,
_ बल्कि वो जो उन्होंने अपनी इच्छानुसार कल्पनाशीलता के ज़रिए गढ़ लिया होता है.!!
– Krishna Choudhary
हम जो फैसले लेते हैं, जो रास्ते चुनते हैं, और जिन बातों पर यक़ीन करते हैं, उनमें से ज़्यादातर हमारी परसेप्शन [धारणा] यानी सोचने देखने के तरीके से आते हैं.

_ परसेप्शन [perception] कोई सीधी-सादी चीज़ नहीं है.
_ ये बनती है, बिगड़ती है, बदलती है…
_ और अक्सर हमें खुद भी नहीं पता होता कि हम किसी चीज़ को वैसे ही क्यों देखते हैं.
_ एक ही माँ के जुड़वाँ बच्चे, एक ही घर, एक ही माहौल, फिर भी दोनों का ज़िंदगी को देखने का नज़रिया बिल्कुल अलग..
_ कोई दुनिया को मौक़ा समझता है, कोई बोझ..
_ इसका मतलब है, हालात एक जैसे हों, तब भी सोच एक जैसी हो, ज़रूरी नहीं.
_ हम पूरी ज़िंदगी नई नई धारणाएँ बनाते रहते हैं.
_ कभी पुरानी सोच में थोड़ा सुधार करते हैं, कभी उसे पूरी तरह नकार देते हैं.
_ और सच ये है कि जब तक उस विश्वास में बदलाव न आए, जिस पर हमारी सोच टिकी है, तब तक “परसेप्शन बदल गया” कहना अक्सर खुद से झूठ बोलना ही होता है.
_ अपने ईगो को तोड़ना, अपनी दीवारें गिराना, अपने पुराने यक़ीन छोड़ना, इसमें कोई शर्म नहीं है, अगर वो आपको थोड़ा और इंसान बना दे, पहले से थोड़ा और सच्चा.!!
– Krishna Choudhary
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