सुविचार – रोटी – Bread – 127

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कभी कहा जाता था, “मनुष्य केवल रोटी के सहारे जीवित नहीं रह सकता, रोटी चाहिए सिर्फ जीने के लिए, ना कि हम जी रहे हैं रोटी के लिए..

_ “हमारी और भी भूखें हैं” लेकिन आजकल महँगाई और पैसे की कमी को देखते हुए यह कथन बदल कर यूँ हो गया है,
_ “ऐसा कोई मनुष्य नहीं हो सकता जो रोटी के बिना जी सके.
_ पहले पेट तो भरे, बाद में और कुछ सूझेगा”
_ देखते-देखते रुपए का अवमूल्यन कुछ ऐसा हुआ कि रोटी अहम् मुद्दा बन कर रह गई.!!

सुविचार – आंसू – आँसू – रोना – 126

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#अगर आप रोना भूल गए हैं,🥕🥕🥕🌷💁 तो शायद आप जीना भूल गए, 🥕🥕

☺️आंसू अगर सच्चे हैं ,,🥕🥕🥕🥕🥕🥕🫂🥰 गहराई से आ रहे हैं,🥕🥕🥕

💁 तो आप को सुंदर कर जाएंगे..🥕

दुःख में स्वयं की एक उंगली आंसू पोंछती है, और सुख में दसों उंगलियां ताली बजाती है ;

_जब स्वयं का शरीर ही ऐसा करता है तो दुनिया से क्या गिला – शिकवा करना…

हम उनके लिए उतना नहीं रोते जो मर जाते हैं.

_ हम उनके लिए रोते हैं, जो हमें जिंदा मार जाते हैं..!!

उनके लिए क्या रोना, जो किसी और के लिए हंस रहे हों..!!
जो अपने आंसू खुद पोंछ सकता है ; उसे दुनिया में किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं.!!
खुद को इतना लाचार मत बनाओ कि कोई भी आकर आपकी आंखों में आंसू दे जाए.!!
अपने आंसू खुद पोंछना सीख लो,

_ क्योंकि दुनिया के कंधे हमदर्दी कम और मजाक ज्यादा देते हैं.!!

परिपक्व होने का अर्थ ये नहीं कि.. आप हृदय के घावों की असहनीय पीड़ा में रोना छोड़ दो..!!
बनावटी लोग पहले आपके आँसू पोंछेंगे, फिर उन्हीं आँसुओं की कहानी दुनिया को मज़े लेकर सुनाएंगे.. इसलिए संभल कर रहो.!!
जो इंसान अपने आंसू खुद पोंछना सीख जाता है,
_ वह भीतर से बेहद मजबूत हो जाता है.!!
सोचा ही नहीं कि जीवन में, ऐसे भी फ़साने होंगे.

_ रोना भी ज़रूरी होगा, आंसू भी छुपाने होंगे.
हम रोते हैं इसलिए नहीं कि हम कमजोर हैं, बल्कि इसलिए कि हमें समझ ही नहीं आता कि इसके आगे क्या किया जाए..

_ आँसू दरअसल उस विकल्पहीनता से उपजी विवशता है, जहाँ इंसान खुद से भी संवाद नहीं कर पाता, जहाँ सब कुछ होते हुए भी वो खुद को सबसे अकेला पाता है.!!!
हम जीतकर रो क्यों देते हैं.

_ वह आंखे,जो हमेशा लक्ष्य पर टिकी होती हैं..
_ जब लक्ष्य को प्राप्त करती हैं, तो छलक पड़ती हैं..
_ इन आंसुओं में गूंथे उसके संघर्ष रहते हैं,
_ उसने अपने लक्ष्य को पाने के लिए क्या क्या नही किया होगा..
_ ज़िन्दगी का सारा संघर्ष, इन आँसुओं के साथ बह उठता है..
_ जब कोई जीतकर रोता है, तब उसकी जीत में छिपी सच्चाई सामने आकर, उसकी गवाही देती है..
_ ये जीत.. उसके ख़ुद के सपनो की जीत है..
_ वह सपना, जो उसने ख़ुद देखा था..
_ जिस काम को पूरा करने में आपकी आंखों में आँसू आ जाए, वह काम सफ़लता है..
_ बहते आंसू तो काम एक सा करते हैं..
_ आपको थोड़ा हल्का कर देते हैं…!!
कुछ न किया तो इतना मिला, चलो अब कुछ किया जाए !

_ मूर्च्छा में जीते आए वर्षों, चलो अब होशपूर्वक जिया जाए !
_ जमाने ने इतना कष्ट न दिया, जितना हमने दुख निर्मित किया,
_ हँसने के मौके हजार थे, पर हमने रोना ही स्वीकार किया,
_ चलो अब आसूओं को रख गिरवी, कुछ मुस्कान उधार ले लें !
_ कलियाँ चूमें अम्बर घूमें, अजनबियों से प्यार ले लें.!!

सुविचार – आँख- आँखें – आँखों – नजर – नज़र – नज़रें – 125

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आँख बंद करके,  किसी की बात मानने से बेहतर है कि मुँह खोल कर बोलो और कान खोल कर समझो..
रख लो आईने हज़ार तसल्ली के लिए,, पर सच के लिए आंखें मिलानी पड़ेंगी..
जरूरतों को देखने के लिए अपनी आँखों का उपयोग करें, और उन्हें पूरा करने के लिए अपनी प्रतिभा का उपयोग करें.

Use your eyes to see the needs, and use your talents to meet them.

“दो दिखने वाली आँखों के अलावा भी _ कुदरत ने इंसान को कई आँखें दी है,

_ जरूरत इतनी ही है कि उनको खुला रखा जाये”

बहुत कुछ है जीवन में .. जो नजर आता है.. जो नज़र नहीं आता इसका मतलब ये नहीं कि वो नहीं है ..

_ उदाहरण के तौर पर हवा … और ऐसे ही हजार चीज होगी जिसे रब ने बनाया तो है जो हमें दिखाई नहीं देती.!!
सबके पास समान आंखें हैं, लेकिन सब के पास समान दृष्टिकोण नहीं..

_ बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती है.!!

जीवन में जब सब अच्छा ही अच्छा होता है तो हम अंधे बन जाते हैं,

_ उस वक़्त क्या ज़्यादा ज़रूरी है, वो साफ़- साफ़ नज़र नहीं आता.!!

कुछ ऐसा ख़ुद को बना लिया मैंने..

_ आँखों के आंसुओं को होठो की हँसी में छुपा लिया..!!

खाता मुंह है, झुकती आंखें हैं.

_ जिन आखों में झुकने की शर्मिंदगी हो, उन्हें खाने से डरना चाहिए.!!

ख़याल रखो कि तुम किस तरफ देख रहे हो.

_ क्योंकि जिनकी आँखें भटकती हैं, उनका मन भी भटकता है.!!

जिसने दूसरों की आँखें नम की हैं, उसके हिस्से में भी कभी ना कभी वही दर्द आता है, यही कर्म का फ़ैसला होता है.!!
तर्क किए बिना किसी बात को आँखें मूंद कर मान लेना भी एक प्रकार की गुलामी है.
जीवन उसका ही सुधरेगा, जो आँख बंद होने से पहले आँख खोल लेगा.
आपकी आँखें जो देखती हैं, वह हरदम सच नहीं हो सकता.
फेर लेते हैं सब के सब नज़रें, आप जब काम के नहीं रहते.!!
वो नज़रें सलामत रहे, जिन्हें हम अच्छे नहीं लगते..!!
चेहरे पढ़ने वाला नहीं, आँखें पढ़ने वाला ढूंढो.!!
अक्सर लोग ख़ुद से नज़र मिलाने से डरते हैं,

_ क्योंकि वहां जवाब नहीं सवाल होते हैं;
_ और अगर सवाल गहरे हो जाएं, तो पूरी ज़िन्दगी हिल सकती है.
_ इसलिए दुनिया की बातों में उलझे रहना आसान है,
_ “ख़ुद को असलियत से बचाने का तरीका”
_ “लोगों ने दुनिया जीत ली, पर अपने आप से हार गए – इसलिए उनके पास जानकारी तो है, पर जीवन नहीं.!!”
दूसरों की नज़रों से खुद को मत देखो.

_ तुम्हारे पास आँखें हैं; तुम अंधे नहीं हो.
_ और तुम्हारे पास अपने आंतरिक और बाहरी जीवन के तथ्य हैं.
_ तुम्हारी अपनी आँखें ही असली “मैं” का रास्ता है.!!
“मेरी आँखें चुप हैं… पर भीतर की दृष्टि सब काली लकीरें पढ़ लेती है”

“मेरी चुप्पी मेरी ताक़त है—
मैं कहे बिना भी सब पहचान जाता हूँ”
“मुझे किसी से मिलने में कोई आपत्ति नहीं,
_ पर मैं आँखों के पर्दों में छुपी चालाकियाँ पढ़ लेता हूँ.
_ मुंह पर कुछ कह नहीं पाता, यह मेरी खामोशी है..
_ लेकिन भीतर से मैं हर काली लकीर पहचान जाता हूँ..
_ मेरी चुप्पी कमजोरी नहीं, बल्कि मेरी गहराई है—
_ जो देखती है, समझती है, और चुपचाप याद रखती है”
“मैं चुप रह जाता हूँ, पर मेरी अंतर-दृष्टि उन काली लकीरों को पहचान चुकी होती है.”

सुविचार 124

ज़िन्दगी के 3 आसान नियम-

1. जो आप चाहते हो उसके पीछे नहीं भागोगे तो मंज़िल नहीं मिलेगी.

2. अगर आप कभी पूछोगे नहीं तो जवाब हमेशा “ना” ही रहेगा.

3. अगर आगे नहीं बढ़ोगे तो जहाँ थे, वहीँ रह जाओगे !!

सुविचार – वर्तमान – प्रेजेंट – इस समय – इस क्षण – 123

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अगर आप एक दिन को जीवन मान कर जी सको,

तो आप सम्पूर्ण जीवन को अत्यन्त मूल्यवान बना सकते हो.

वर्तमान में जीने का यही फायदा होता है कि हम भविष्य को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं होते.!!
वर्तमान में जीने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भविष्य की चिंता नही होती, क्योंकि वर्तमान से ही भविष्य बनता है _

_ वर्तमान में जीने का यही लाभ है की हम जीवन को जी रहे हैं. भुत और भविष्य के बारे में सोच कर हम जो जीते है उसे जीवन नहीं कहते हैं.

वर्तमान में जीने से हम एक एक क्षण का आनंद ले सकते हैं.

आप पास्ट और फ्यूचर की सोच में वर्तमान को इगनोर न करें.

हमें वर्तमान में रहना चाहिए. जो हो रहा है उसे अपना बैस्ट दो.

अक्सर बहुत दूर की चीजों की ओर आकर्षित होते रहने से पास की चीजें कब छूट जाती हैं, पता भी नहीं चलता,

_ इसलिए कई बार भविष्य की योजनाओं से ज्यादा जरूरी अपने वर्तमान को सहेजना होता है.!!
भाग कर आप अपना केवल स्थान बदल सकते हैं, वर्तमान स्थिति नहीं !!
“बस वर्तमान को याद रखें.”

_और सुन्दर बात यह है कि यदि आप सचमुच इस क्षण में हैं, तो आप सोच नहीं सकते; यह तकनीकी रूप से असंभव है.

_सोचना केवल अतीत या भविष्य में ही संभव है, वर्तमान में कभी नहीं.

_अतीत में मत गिरो ​​और भविष्य की ओर मत भागो.

_उस क्षण में रहो, वह क्षण जो अभी घटित हो रहा है.

_जब आप खा रहे हों तो खायें – और कुछ न करें.

_जब आप सुन रहे हों, तो सुनें- और कुछ न करें.

_जब आप चल रहे हों तो चलें और कुछ न करें.

_वर्तमान क्षण में बने रहें, जो गतिविधि आप अभी कर रहे हैं उसमें बने रहें.– वर्तमान सबके लिए एक समान है; इसका नुकसान सभी के लिए समान है; और यह स्पष्ट होना चाहिए कि एक संक्षिप्त क्षण ही वह सब कुछ है जो खो गया है.

_क्योंकि आप न तो अतीत को खो सकते हैं और न ही भविष्य को; जो आपके पास नहीं है उसे आप कैसे खो सकते हैं ?

_ “वर्तमान ही वह सब कुछ है” और जो आपके पास [अतीत या भविष्य] नहीं है, उसे आप खो नहीं सकते.

“खोया हुआ वर्तमान”

_ कभी-कभी जीवन हमें ऐसा आईना दिखाता है जिसमें हम खुद को खोजते-खोजते ही खो देते हैं.
_ बीते हुए कल की परछाइयाँ और आने वाले कल की धुंध — दोनों मिलकर आज की रोशनी को ढक देती हैं.
_ जब घटनाएँ भीतर की चमक को निगलने लगती हैं, तब हमें रुककर पूछना चाहिए —
“क्या मैं अभी यहां हूं… सच में ?”
_ जब हम इस पल की सच्चाई को महसूस करते हैं —
साँसों की गति, मन की हलचल, आसपास की खामोशी — तभी वर्तमान की नमी लौटने लगती है.
> “क्या मैं अपने वर्तमान को जी रहा हूँ, या बस सोचने की आदत में जी रहा हूँ ?”

सुविचार 122

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अगर आप किसी को धोखा देने में कामयाब हो जाते हैं,

तो ये मत सोचिए कि वो कितना बेवकूफ है,

बल्कि ये सोचिए कि उसे आप पर कितना विश्वास है.

हम चाहें तो केवल अपने लिए कोई दीप जला सकते हैं,

लेकिन उसकी रोशनी से यह आग्रह नहीं कर सकते

कि वह केवल मेरे लिए ही प्रज्वलित हो.

 

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