सुविचार – प्रतिशोध – बदला – बदलाव – परिवर्तन – 109

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ध्यान दें कि जब लोगों को वह नहीं मिलता जो वे आपसे चाहते हैं तो वे कैसे बदल जाते हैं.

Notice how people change when they don’t get what they want from you.

आप ख़ुद ही सोंचे कि आपने बातों के अतिरिक्त..

_ खुद को बदलने के लिए क्या प्रयास किए हैं.!!

आप दूसरों को नहीं बदल सकते, लेकिन खुद को बदलने के पूरे अवसर आपके हाथ में है.
लोग बदलते नहीं…बस अपनी ज़रूरत के हिसाब से दिखते हैं.!!
“परिवर्तन संसार का नियम है’ – यहाँ हमेशा एक जैसा रहे.. यह जरूरी नहीं.!!
बदलाव सबको नज़र आता है, वजह किसी को नहीं..!!
अगर आपका दिमाग पूरी तरह से पुरानी सोच से भरा हुआ है, तो आप जो बदलाव चाहते हैं,

_ उसे बनाने के लिए आपके दिमाग में नए विचारों का आना असंभव है.

समय के साथ हालात बदल जाते हैं,  इसलिए बदलाव में खुद को बदल लेना ही समझदारी है.

_ बदलाव कष्ट देता है, लेकिन जरुरी है !!

लोग दो ही कारणों से बदलते हैं :
_ या तो अनहोने बहुत कुछ सीख लिया होता है या फिर उन्हें बहुत बार चोट लगी होती है.!!
कभी सदियों में कुछ नहीं बदलता और कभी एक रात में सब कुछ बदल जाता है.!!
कहीं हम भी नएपन और बदलाव के चक्कर में भटकाव की स्थिति में तो नहीं गोते लगा रहे हैं..??
जिसके लिए खुद को बदलना चाहते हो, अगर वही बदल गया तो क्या करोगे..??
हम चाहे खुद को कितना भी बदल लें, कुछ लोगों के लिए हमेशा गलत ही रहेंगे.!!
बदलाव एक ऎसा माध्यम है, जो आप के भाग्य को भी नियन्त्रित करता है.

_ अगर आप अपने भाग्य को स्वयं नियन्त्रित करना नहीं सीखेंगे, तो आपके भाग्य को कोई और ही नियन्त्रित करने लगेगा.
_ इस बदलाव से आप पाएंगे कि एक पल में ही आपकी ज़िन्दगी को नया आयाम मिल गया.!!
बदलाव से मत डरो. आप कुछ अच्छा खो सकते हैं, लेकिन कुछ बढ़िया भी पा सकते हैं.

Don’t fear change. You may lose something good, but you may also gain something great.

स्थान परिवर्तन तरक्की के रास्ते खोलता है.
_ एक जगह पड़े-पड़े तो पानी भी सड़ जाता है.!!
ज़िन्दगी में बदलाव होंगे ही, होने भी चाहिएं ; जैसे अधिकतर लोग अपने मूल स्थान में नहीं रहते होंगे (जहाँ उनके दादा -परदादा रहते थे).

_ बदलाव जीवन का स्वभाव है ये कई वजह से होता है ; जैसे शादी के बाद लड़कियां कहीं और चली जाती हैं, कोई पढ़ने को बाहर चला जाता हैं, किसी को जॉब के लिए बाहर जाना पड़ता है.!
अपने बेहतर रूप में बदलने के सफर में कई चीज़ों और कई लोगों को अलविदा कहना पड़ता है. – “बदलाव हमेशा त्याग मांगता है”
जंजीरो में बँधे हम, खुश तो थे,

_ कौन है ये, जो बदलाव लाने जा रहा है !
_ आँखों को मीचे मजे में रहते थे,
_ कौन है जो सच दिखा रहा है !
सीखो अब ये सच गहरा, अपनी नींव को खुद मज़बूत रखना.

_ क्योंकि लोग बदलते हैं, हालात बदलते हैं, – पर अपने भीतर की रोशनी को जलाए रखना.!!
अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सब कुछ बदलना ज़रूरी नहीं है –

– यह ऐसे बदलाव लाने के बारे में है ..’जो मायने रखते हैं’.

दुनिया में लोग ज्यादातर दो ही चीज़ों की वजह से बदलते हैं,

_ या तो उन्हें सबक बहुत मिल जाते हैं या दर्द बहुत मिल जाता है.!!

सबसे अच्छा बदला, कोई बदला लेना नहीं है ;

_ आगे बढ़ें और उन लोगों की तरह न बनें, जिन्होंने आपको चोट पहुंचाई है !!

हमारे अंदर बेमिशाल बदलाव लाने की ताकत है,

_ हम अपने भीतर के जादू के बारे में नहीं जानते..

आप बाह्य दुनिया को कभी नहीं बदल सकते,

_इसलिए ख़ुद में सार्थक परिवर्तन कीजिए.!!

आप चाहे जितनी भी योजनाएं बना लें, अप्रत्याशित घटनाएं होंगी..

_ क्योंकि बदलाव जीवन का हिस्सा है, आपको हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा.!!

बदलते वक्त के साथ हमें वो चीजें भी छोड़नी पड़ती हैं, जो एक वक्त पर हमारे लिए सबसे अजीज थी,

_ वो साथ भी, जिसे हमने कभी अपने जीवन का सबसे खूबसूरत क्षण माना होता होता है.!

इंसान कि आदत होती है ..उसे हर चीज में एक समय बाद ..बदलाव की ललक होती है..!!
कोई आज तो कोई कल बदलता है, यकीन करो सब बदलते हैं.!!
बदलाव अगर हित में हो तो अवश्य बदल जाना चाहिए..!!
थोड़ा अपने आप को बदलिए.. थोड़ा अपने लिए, थोड़ा अपने आसपास वालों के लिए, थोड़ा उनके लिए जिन्हें आपसे उम्मीदें हैं , और थोड़ा उनके लिए जिन पर आप निर्भर हैं.. बहुत ज़्यादा नहीं, बस थोड़ा-सा..-  क्योंकि बदलाव बोझ नहीं, एहसास होना चाहिए.!!
ऊंचाई पर वही पहुँचते हैं, जो बदला लेने की नहीं बल्कि बदलाव लाने की सोचते हैं.

_ बदला मत लीजिए, बल्कि वृद्धि की ओर बढ़िए – सबसे अच्छा बदला यह नहीं है कि आप उन्हें वापस चोट पहुँचाएं;

_ सबसे अच्छा बदला यह है कि आप इतने सफल और खुश बन जाएं कि वे अब मायने नहीं रखते.!!

हमारी बुरी आदत है कि हम बदलाव को स्वीकार नहीं करते और पहले क्षण से ही आलोचना शुरू कर देते हैं.

_ जब हमें कोई चीज़ पसंद नहीं आती तो हम असल में उसके बुरे परिणाम की कामना करने लगते हैं ताकि हम अपनी बात साबित कर सकें.

किसी अप्रिय घटना के घटने के बाद बदला लेने के बजाय स्वयं को बदल लेना बदला लेने का ज्यादा सकारात्मक और रचनात्मक तरीका है.
किसी से बदला लेने का ख्याल छोड़ कर..

_ कुछ ऐसा करें कि आपको छोड़ने वाले को भी आपको खोने का अफ़सोस हो..!!

किसी व्यक्ति को क्षमा करना अथवा प्रतिशोध लेना,

_ इससे कहीं परे की अवस्था है उसको मन से उतार देना…!!!

बदला लेने में वक्त मत गंवाओ,
_ जो आपको चोट पहुंचाते हैं.. वो खुद अपने कर्म भुगतेंगे.!!
कुछ लोग कभी नहीं सुधरते.. वो अपने वृत्ति के गुलाम होते हैं.

_ “ऐसे लोग अपनी ही प्रवृत्ति की कैद में जीते हैं,
_ भले ही दुनिया बदल जाए — उनके भीतर का अंधकार वैसा ही रहता है.
_ हम बस इतना कर सकते हैं — उनसे दूरी रखकर अपनी रोशनी बचा लें.”
इस दुनिया में सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि _ मनुष्य जिस तरह जीना चाहता है _ वैसा लोग उसे जीने नहीं देते ;

_ इसलिए वह भी दूसरों से अपना बदला भुनाता है, वह भी दूसरों को उनकी मर्जी से जीने में पचास अड़ंगे लगाता है.
_यह खेल न जाने कब से जारी है !!
_ दुख-सुख, सफलता-असफलता, मिलन-विछोह सब क्षणिक है _लेकिन जब ये जीवन में घटते हैं तो _इनकी तीव्रता इतनी अधिक होती है कि _मनुष्य का मानसिक संतुलन डगमगा जाता है.
_ जिसने उस समय संतुलन साध लिया, जो हर परिस्थिति में सम रहा, समझ लीजिए _उसने जिन्दगी की बाज़ी जीत ली..!!
किसी एक माहौल में लंबे समय तक रहने के बाद जब इंसान दूसरे माहौल में जाता है, तो खुद को ढालने में थोड़ी परेशानी होना स्वाभाविक है,
_ आदतें सोच और दिनचर्या बदलने में समय लगता है, लेकिन यही बदलाव आगे चलकर नई समझ, बेहतर अनुभव और पहले से अच्छी चीज़ें भी साथ ले आता है बस थोड़ा धैर्य रखना होता है.!!
पता नहीं आदमी बदलाव क्यों चाहता है ? बदलाव सपनों में उलझा देता है..

_ जो बदलाव नहीं चाहता वो यथार्थ [हकीकत] में जीता है.
_ आदमी है तो दैनिक दिनचर्या के काम करेगा, रोज नींद लेगा, मकानों में रहेगा, दुकानों-ऑफिस में काम करेगा, और क्या कर लेगा ?
कोई किसी के कहने से नहीं बदलता..

_ दरअसल, किसी को बदलने की ज़रूरत ही क्यों हो ?
_ बेहतर तो यही है कि आप खुद को बदलें.
_ आप बदलेंगे — जग बदल जाएगा”
_ बात सुनने में शायद आसान न लगे, पर हक़ीक़त यही है –
_ जब हम खुद को बदलते हैं, तो संसार बदल जाता है.
_ और जब संसार बदलता है, तो ज़िंदगी आसान हो जाती है.!!
हम लोग भी अजीब हैं, हमारा ज़्यादा समय दूसरों को बदलने में जाता है.

_ पर जब वो बदल जाता है तो हम चिल्लाते हैं कि यह बदल गया.
_ क्योंकि वो हमारे मन के मुताबिक नहीं बदला होता.
_ और अगर हमारे कहने अनुसार बदल भी जाता..
_ तो कुछ दिन बाद फिर उसको बदलने की कोशिश में लग जाते हैं.!!
लोगों का बदलना अब मेरे लिए नया नहीं है, कौन इंसान किस मोड़ पर, किस छोर पर, किस तरह बदलेगा, किस तरह तोड़ेगा.. अंदाजा लग जाता है,

_ पर हम भी अब उसी मोड़ से अपनी नई राहों का इंतज़ाम पहले से तय करके चलते हैं.!!
– रिदम राही

सुविचार – Quotes about Saving Animals – जानवर – जानवरों को बचाना, “जीवों को उनका अधिकार दो” – 108

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“पक्षी जगत पर्यावरण का सूचक होता है, _

अगर वे मुसीबत में हैं तो हमें समझ लेना चाहिए कि हमारे भी वो बुरे दिन दूर नहीं.”

मानवता की सच्ची नैतिक परीक्षा, उसकी मौलिक परीक्षा… उन लोगों के प्रति उसके दृष्टिकोण में शामिल है जो उसकी दया पर निर्भर हैं: जानवर. – Milan Kundera

Humanity’s true moral test, its fundamental test…consists of its attitude towards those who are at its mercy: animals. – Milan Kundera

निहत्थे जानवरों को अंग-भंग और मृत्यु के अधीन करना पूरी तरह से अनुचित है, ताकि कोई कंपनी नेल पॉलिश के नए शेड या नए, बेहतर कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट का विपणन करने वाली पहली कंपनी बन सके.

यह क्रूर है, यह क्रूर है, यह अमानवीय है, और अधिकांश लोग इसे नहीं चाहते हैं. — Abigail Van Buren

It is totally unconscionable to subject defenseless animals to mutilation and death, just so a company can be the first to market a new shade of nail polish or a new, improved laundry detergent.

It’s cruel, it’s brutal, it’s inhumane, and most people don’t want it — Abigail Van Buren

जानवरों से प्यार करें: भगवान ने उन्हें बिना किसी परेशानी के विचार और आनंद की मूल बातें दी हैं. _उनके आनंद को परेशान मत करो, उन्हें परेशान मत करो, उन्हें उनकी खुशी से वंचित मत करो, _भगवान की मंशा के खिलाफ काम मत करो.

_हे मनुष्य, पशुओं से श्रेष्ठ होने का घमंड मत कर; वे पाप रहित हैं, और आप, अपनी महानता के साथ, पृथ्वी पर अपनी उपस्थिति से उसे अपवित्र करते हैं, और अपने बाद अपनी बेईमानी के निशान छोड़ जाते हैं – अफसोस, यह हम में से लगभग हर एक के लिए सच है !

Love animals: God has given them the rudiments of thought and joy untroubled. Do not trouble their joy, don’t harrass them, don’t deprive them of their happiness, don’t work against God’s intent.

Man, do not pride yourself on superiority to animals; they are without sin, and you, with your greatness, defile the earth by your appearance on it, and leave the traces of your foulness after you – alas, it is true of almost every one of us ! – Fyodor Dostoevsky

मनुष्य – जो अन्य जानवरों को गुलाम बनाते हैं, बधिया करते हैं, उन पर प्रयोग करते हैं और उन्हें मार डालते हैं – उनमें जानवरों को दर्द महसूस न होने का दिखावा करने की प्रवृत्ति समझ में आती है.

यदि हमें उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार झुकाना है, उन्हें अपने लिए काम करना है, उन्हें पहनना है, उन्हें खाना है, तो इंसानों और ‘जानवरों’ के बीच एक तीव्र अंतर आवश्यक है – बिना किसी अपराधबोध या अफसोस के परेशान करने वाले भाव के.

यह हमारे लिए अनुचित है, जो अक्सर अन्य जानवरों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार करते हैं कि हम यह तर्क दें कि केवल मनुष्य ही पीड़ित हो सकते हैं. अन्य जानवरों का व्यवहार ऐसे दिखावे को विशिष्ट बनाता है. वे बिल्कुल हमारे जैसे ही हैं. – Carl Sagan

Humans — who enslave, castrate, experiment on, and fillet other animals — have had an understandable penchant for pretending animals do not feel pain.

A sharp distinction between humans and ‘animals’ is essential if we are to bend them to our will, make them work for us, wear them, eat them — without any disquieting tinges of guilt or regret.

It is unseemly of us, who often behave so unfeelingly toward other animals, to contend that only humans can suffer. The behavior of other animals renders such pretensions specious. They are just too much like us.

– Carl Sagan

जो जानवर तुम खाते हो वे वे नहीं हैं जो दूसरों को खाते हैं; तुम मांसाहारी पशुओं को नहीं खाते, तुम उन्हें अपना आदर्श मानते हो.

आप केवल मीठे और कोमल प्राणियों के लिए भूखे हैं जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, जो आपका अनुसरण करते हैं, आपकी सेवा करते हैं, और उनकी सेवा के पुरस्कार के रूप में आपके द्वारा खाए जाते हैं. – Jean-Jacques Rousseau

The animals you eat are not those who devour others; you do not eat the carnivorous beasts, you take them as your pattern. You only hunger for the sweet and gentle creatures which harm no one, which follow you, serve you, and are devoured by you as the reward of their service. –

Jean-Jacques Rousseau

आप यह कैसे कह सकते हैं कि आप आध्यात्मिक रूप से विकसित होने की कोशिश कर रहे हैं, बिना यह सोचे कि उन जानवरों का क्या होता है जिनकी जान लोलुपता के नाम पर बलि चढ़ा दी जाती है ? – Oprah Winfrey

How can you say you’re trying to spiritually evolve, without even a thought about what happens to the animals whose lives are sacrificed in the name of gluttony ? – Oprah Winfrey

मवेशियों पर विचार करें, जो आपके पास से गुजरते हुए चरते हैं.

_ वे नहीं जानते कि कल और आज का क्या मतलब है, वे उछलते-कूदते हैं, खाते हैं, आराम करते हैं, पचाते हैं, फ़िर से उछलते हैं, और इसी तरह सुबह से रात तक दिन–प्रतिदिन, उसकी ख़ुशी या नाराज़गी से बंधे रहते हैं, और इस प्रकार न तो उदास होते हैं और न ही ऊबते हैं.
~फ्रेडरिक नीत्शे
जानवरों को कहीं आने जाने की हड़बड़ी नहीं है, यह न अपने भूत से हैरान हैं न भविष्य से आशंकित, न इन्हें कुछ जोड़ना है न घटाना…!!
जानवर पेट भरकर सो जाते हैं, पेड़ ऑक्सीजन देकर खुश हो लेते हैं,

_ पर इंसान ? उसे बिना किसी चुल्ल के चिल ही नहीं पड़ती.
“पशु” कोई चीज़ नहीं हैं बल्कि जीवित जीव हैं, _

_ जो हमारी करुणा, सम्मान, दोस्ती और समर्थन के योग्य हैं.”

ध्यान से पंछियों को देते हो दाना – पानी _

_ इतने अच्छे हो तो _ पिंजरे से रिहा कर दो ना..

बेजुबान हैं फिर भी, सब समझ जाते हैं, _

_ जानवर हैं तो क्या, दोस्ती ये भी निभाते हैं..

पशुओं में भावनाएं होती हैं, वे मनुष्य के मन की बात समझ सकते हैं.

_ वे सिर्फ़ मुस्कुरा नहीं सकते, हंस नहीं सकते.!!

बेजुबानों से भी हमदर्दी करना ना भूलो, ये बगैर लफ़्जों के दुआएं देते हैं.
पेड़ तो कट गया पर बात तो ताल्लुक की थी, बैठे रहे जमीं पर वो परिंदे रात भर..!!
जहाँ जगह मिली _ वहीँ सर रख के सो गए,

_ जानवरों ने खुदा से _ कभी शिकायत नहीं की..

जानवर, हम मनुष्यों की तरह ही जीवित जीव हैं, जो कि बोल नहीं सकते लेकिन उनके अंदर प्रेम, कृतत्रता और वफादारी को समझने की शक्ति काफी बेहतर होती है।

वे एक इंसान के अच्छे दोस्त भी हो सकते हैं। एक जानवर से मनुष्य को उसकी वफादारी और प्रेम करने के गुण को सीखने की आवश्यकता है अर्थात जानवर हमारी करुणा और सम्मान के योग्य हैं।

इसलिए हम सभी को जानवरों के प्रति नरम होना चाहिए और उनकी जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए। वहीं जानवरों को भी हम इंसानों की तरह पीड़ा मुक्त जीवन जीने का का अधिकार है।

जानवरों के साथ संचार अंतरंगता चरित्र की अच्छाई से जुड़ा हुआ है ; इस तरह से कि यह पुष्टि की जा सकती है, निश्चित रूप से, जो कोई भी जानवरों के लिए क्रूर है _ वह एक अच्छा व्यक्ति नहीं हो सकता है.
जो लोग किसी भी जीव को अपनी थाली में परोसते हैं, वे न जाने कैसे उनका दर्द नहीं देख पाते..!!
अब हमें जानवरों की तरह जीने की जरूरत है.

What we need is now is to live like animals.

1. पशु धन का संचय नहीं करते हैं: उनमें से कुछ जो जमा करते हैं वह भोजन है और यह आवश्यकता है ; _ _ जबकि हम फालतू की चीजें जमा कर लेते हैं ; _ हम उपभोक्तावाद और भौतिकवाद के भ्रम में जीते हैं.

1. Animals do not accumulate wealth: What a few of them accumulate is food and that’s necessity. While we accumulate unnecessary things. We live in the fallacy of consumerism and materialism.

2. जानवर इकोलॉजिकल हैं: वे प्रकृति के साथ एक रहते हैं ; _ सभ्यता और विकास के नाम पर प्रकृति के लिए यथासंभव विनाशकारी तकनीकों का आविष्कार करने के विपरीत, उनका हर कार्य प्रकृति का परिरक्षक है.

2. Animals are ecological: They live one with nature. Every action of them is preservative of nature as opposed to us inventing as many destructible technologies as possible to the nature in the name of civilization and development.

3. जानवरों के पास दिमाग होता है: और वे इसका इस्तेमाल करना जानते हैं ; _ उन्हें पता है कि कितना खाना है, कितना सोना है, कितना प्यार करना है और कितना नफरत करना है ; _ उनका संतुलित जीवन है.

3. Animals have brains: And they know how to use it. They know exactly how much to eat, how much to sleep, how much to love and how much to hate. They have a balanced life.

4. जानवर घड़ी देखने वाले नहीं होते: ये घड़ी से नहीं अपने शरीर से प्रतिक्रिया करते हैं ; _ कोई नौकरी 9-5 नहीं है, केवल सप्ताहांत पर कोई मज़ा नहीं है ; _ वे तनावग्रस्त नहीं हैं; मधुमेह, दिल का दौरा, रक्तचाप की समस्या आदि से पीड़ित नहीं हैं ; _वे जीने के लिए जीते हैं.

4. Animals are not clock watchers: They react to their body not to the clock. No job is 9-5, no fun only on weekends. They are not stressed; do not suffer with diabetes, heart attacks, blood pressure problems etc. They live to live.

5. जानवरों को औपचारिक रूप से शिक्षित नहीं किया जाता है : हमारी शिक्षा हमें सिखाती है कि पृथ्वी को कैसे नष्ट किया जाए और फिर हम सौर मंडल में चंद्रमा और अन्य सितारों पर कैसे जा सकते हैं और ज्ञात और अज्ञात आकाशगंगाओं को नष्ट करने का प्रयास कर सकते हैं.

जीवन में सभी महत्वपूर्ण चीजें जैसे पानी, जमीन, भोजन और आश्रय सबसे महंगा हो गया है क्योंकि “नैतिक मूल्य”, शिक्षा और कौशल हम हर दिन प्राप्त कर रहे हैं.

5. Animals do not get educated formally: Our education teaches us how to destroy the earth and then how can we go to moon and other stars in the solar system and try to destroy the galaxies known and unknown. All the important things in life such as water, land, food, and shelter have become the most expensive due to the “moral values”, education and skills we are getting every day.

सुविचार 107

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मनुष्य के सभी कार्य इन सातों में से किसी एक या अधिक वजहों से होते हैं…..

… मौका, प्रकृति, मज़बूरी, आदत, कारण, जूनून व इच्छा.

सुविचार 106

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वृछ कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए,

वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है.

जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर,

क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है….

 

सुविचार – जॉब [ Joining Others business ], नौकरी, Job, कार्यभार, कोई काम जिसके लिये तनख्वाह मिलती हो. – 105

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घर कहीं, जॉब कहीं, अपने कहीं, सपने कहीं !!
“जॉब, पैसा, घर – सब काम के हैं,
_ पर जीवन तब व्यवस्थित होता है.. जब अंदर शांति हो, और बाहर जरुरत भर साधन हो”
इसे नसीब ही तो कहेंगे, बिना पढ़े-लिखे लोग लाखों में खेलते हैं और पढ़े-लिखे जॉब की तलाश में संघर्ष करते हैं.!!
जॉब करने वालों के घर कहीं, अपने कहीं और सपने कहीं..

_ बस इंसान इसी में उलझने सुलझने में अपनी ज़िन्दगी गुजार देता है..!!

अधिकांश लोगों को वह माहौल पसंद नहीं आता _जिसमें वे काम करते हैं,

_फिर भी वे अपने परिवार के बारे में सोचकर जॉब नहीं छोड़ पाते.!!

“ज़िंदगी बसर करने के लिए कोई जॉब या कोई काम मायने नहीं रखता,

_ जब तक कि वो मन का न हो … उसमें संतुष्टि भाव न हो या उससे खुशी न मिले !;”

जिंदगी एक ही मिली है.. हमें विस्तार क्यों नहीं करना चाहिए..?

_ मेरा एक ही फंडा है,
_ अगर जीवन जीना है तो पसंद का काम करो.. जो आपको खुशी देता है,
_ और अगर गुजारनी है तो.. अनेकों काम हैं दुनियां में..!!
_ “तो जियो ना एक ही जिंदगी है”
बहुत से काम ऐसे हैं जो हमारी रुचि के नहीं होते, फिर भी हम करते हैं.

_ करते हैं क्या, करने पड़ते हैं.
_ कई बार नौकरी अपने मन की नहीं मिलती, योग्यता किसी अलग विषय में हासिल की होती है,
_ रोज़ी-रोटी कमाने के लिए काम कुछ और करना पड़ता है.
_कई बार साथ जीने के लिए अच्छे लोग नहीं मिलते, फिर भी उन्हें निभाना पड़ता है.
_ कई बार लगता है, यह ज़िन्दगी जीने के लायक नहीं, तब भी हमें जीना पड़ता है.
_ जीवन के इस मंत्र को अपना लो कि जो अरुचिकर है, जिसे बदला न जा सके,
_ या तो उसे स्वीकार कर लो या छोड़ दो..!!
अजीब कश्मकश है ” कोई नौ से पांच की जॉब के लिए परेशान है,

_ तो कोई नौ से पांच की जॉब से परेशान है !!

*बढ़िया पैकेज की जॉब के अलावा भी जीवन में बहुत कुछ है, जिसे किया जा सकता है और करते हुए शान से जिया जा सकता है*
जब काम करना ही है तो उसमें बेचारगी का रोना क्यों ?…. क्यों ना खुशी-खुशी किया जाए..

_ खुशी से काम करने से काम के साथ-साथ खुद के साथ भी न्याय होता है.!!

सुविचार 104

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अपनी जुबान से कभी इतने कड़वे शब्द मत बोलो, कि कभी वापस लेने पड़े तो खुद का ही जायका ख़राब हो जाए.
जीभ सुधर गई तो जीवन सुधरने में देर नहीं लगती है.
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