सुविचार – जीवन क्या है ? – 217

‘जीवन क्या है ?’ ‘What is life ?’

_ ‘जब हम जन्म लेते हैं तो हमारे पास साँस होती है, नाम नहीं होता लेकिन जब मरते हैं तो नाम रहता है पर साँस नहीं होती ; साँस से नाम तक की यात्रा जीवन है.
_ साँसों को कायम रखने की जद्दोजहद ज़िंदगी है.’
जीवन क्या है ? इसकी सटीक परिभाषा कोई नहीं दे सकता.

_ हर कोई जीवन को अपने-अपने तरीके से समझता और समझाता है.
_ और रही गलतियों पर बददुआ मिलने की तो कभी कभी अच्छे बनने पर भी बददुआ मिल जाती है.!!
जब जीवन में ठहराव आता है, तो स्वभाव में चंचलता नहीं रहती, आसपास का शोर कम सुनाई देता है, आदमी खुद को सुख-दुःख से ऊपर उठा हुआ महसूस करता है.

_ हर ठहराव अकर्मण्यता का सूचक नहीं होता, कई ठहराव मुक्ति के द्योतक होते हैं.
– Manika Mohini
चाहे जीवन में सबकुछ खत्म हो जाए, फिर भी कुछ न कुछ बचा रह जाता है.

_ उस कुछ न कुछ के सहारे भी जीवन अच्छा-खासा जिया जा सकता है.
_ जो खो गया और जो बच गया, उसे भाग्य समझ कर जिए जाने का नाम ही जीवन है.
– Manika Mohini
जीवन का सबसे बड़ा रहस्य क्या है ?

_ हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि हम खुद को ही नहीं जानते ;
_ हम अपनी प्रकृति या मूल स्वभाव को ही नहीं जानते या फिर शायद जानते हुए भी अनजान हैं ;
__ जिस तरह हमें पता है कि पानी का स्वभाव तरल होता है, उसी तरह क्या हमें पता है कि मनुष्य का मूल स्वभाव क्या है ?
_ वास्तविकता के खिलाफ मत जाओ – आप हार जाओगे ;
_ क्योंकि किसी भी अनित्य वस्तु से चिपके रहने का तात्पर्य है कि कोई कितना अनजान और बेखबर होकर सिर्फ भ्रमों में जीता रहता है.!!
व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता और जीवन की तैयारियों में ही ‘जीवन’ बीत जाता है,
_ जिससे हम वास्तव में जीवन को कभी जी ही नहीं पाते है.!!
“जीवन को हल्के में मत लो, पर बोझ भी मत बनाओ.!!”
“जीवन जीते हुए चलो..” किसी एक ख्वाब के लिए रिश्ते, स्वास्थ्य या किसी भी चीज को छोड़ते हुए जाओगे तो कल वो मिल भी गया तो उसकी वेल्यू नहीं बचेगी.!!
परफेक्ट कोई भी नहीं होता और न ही इसकी उम्मीद करें,

_ दूसरे की गलतियों के बावजूद प्यार करना ही सही मायने में प्यार है.!!

जीवन कितना अनिश्चित है और कैसे कुछ पल में सब बदल जाता है.!!

_ कहीं घटता हैं कहीं बढ़ता है..
_ सच यही है.. जीवन संतुलन ढूंढने में खपता है.!!
जब हालात सबसे कठोर हों, तब जो भीतर टिके रहना सीख लेता है..
– वही सच में जीवन को जन्म देता है.!!
कभी जिन बातों पर गुस्सा आता था, जिन पर रो-रोकर रातें कटती थी

_ आज उन्हीं बातों पर हल्की-सी हँसी आ जाती है शायद यही तो जीवन है,
_ दर्द की गहराई को समय की नरमी में घुल जाना और इस बदलाव के लिए किसी चमत्कार की ज़रूरत नहीं होती
_ कभी-कभी बस किसी अपने के दो प्रेमभरे शब्द ही काफी होते हैं, जो भीतर की पूरी दुनिया बदल देते हैं.!!
जीवन का क्या ? यह तो चलता ही रहता है.

_ घटनाओं का क्या ? वे तो घटित होती ही रहती हैं.
_ घटनाओं के साथ हम कर भी क्या सकते हैं, वे होने के लिए स्वतंत्र हैं !
_ हमारी चिंता बस इतनी है कि जब वे घटित हों तो हम उनसे कैसे निपटेंगे.
_ वैसे भी, ज्यादा चिंता करने से होगा क्या ?
_ ठीक है, जब घटनाएँ घटित होंगी, हम उनसे निपटने का कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे.!!
ज़िंदगी बहुत छोटी है।🌀

हर दिन सिर्फ़ 24 घंटे मिलते हैं।
आखिर कितने घंटे– ⏰
दूसरों के दिमाग में
खुदको सही साबित करने में खर्च करुँ ?
सच तो यह है—✔️
हर बात साबित करना ज़रूरी नहीं।
ज़्यादातर तो बिल्कुल भी नहीं।
हम अपनी Valuable Energy–
किसी और की नज़रों में👀
सही दिखने के लिए खर्च करते हैं।
क्या हमारी ज़िंदगी इतनी सस्ती है ?
सच यह भी है—☝️
सब अपनी फिल्म के hero है।
हम उसमें सिर्फ side character।
जो उसने सोचा वो उसकी कहानी है।
जितना ज़्यादा साबित करोगे सोचेगा ?
इतना defend क्यों? कुछ गड़बड़ है।
ये गलत message देती है–
मेरी वैल्यू उसकी Opinion पर निर्भर है ?
लोग बिना proof के भी समझते हैं।
लेकिन वही जो सही में अपने हो।
जो नहीं वे कभी समझेंगे भी नहीं।
तो फिर बीच का रास्ता क्यों चुनना ?
लोगों को गलत सोचने दो।✔️
तुम बस अपना काम करो।✔️
क्योंकि–
तुम्हारी शांति, समय और खुशी—
किसी सफाई से कहीं ज़्यादा कीमती हैं।
और शायद–👍
Freedom का पहला step यही है—
यूं हर किसी को–💐
सब कुछ साबित करना छोड़ देना।
– Yu Hi

सुविचार – निर्णय – Decision – 216

जब आपको हर स्थान पर, पर्यटन स्थल पर, ऐतिहासिक स्थल पर पर निर्देशन चाहिए, तो फिर जीवन के लिए भी तो निर्देशक आवश्यक है.

“हर decision लेना जरुरी नहीं होता..

– सही decision के लिए रुक जाना भी एक decision है.”
_ हर चीज तुरंत पाना जरूरी नहीं… सही वक्त तक रुक पाना जरूरी है.
_ “ज़्यादा विकल्प [options] होने से स्पष्टता नहीं आती… कब रुकना है, उससे आती है.
_ “Clarity मिल जाए…
तो decision लेने की जल्दी खुद ही ख़तम हो जाती है.”
_ जो अंदर clear होता है… उसे बाहर साबित करने की जरूरत नहीं होती.
_ सही निर्णय [decision] वो नहीं, जो जल्दी हो जाए… वो है जिसके बाद मन शांत रहे.
अंदर से एक आवाज आएगी :
_ “आराम से देख… कोई जल्दी नहीं है ; और वही आवाज़ सही जगह तक ले जायेगी.”
कभी-कभी हम निर्णय नहीं ले पाते..

_ शायद उस समय के दबाव या भविष्य के नुकसान को देखकर..
_ जबकि हर चीज़ के दो पहलू होते हैं..
_ फिर भी अजीब बात है कि हम निर्णय लेने के बाद अक्सर उसके सही-गलत होने से ज्यादा, उस निर्णय को लेकर अफसोस करते हैं.!!
– Nirarthak Nirarthak

सुविचार 215

जब देता है तो भर-भर देता है..

_जब लेता है तो कण-कण समेट लेता है..
_न देने का कोई तर्क..
_न लेने का कोई तर्क..
_बिना किसी तर्क के दुनिया चला रहा है..
_फिर भी सब उसके दीवाने..
_वह जो भी है..
_है भी या नहीं..
_कमाल ही कमाल है..
_बेवजह खुश है..
_जब कि उसकी दुनिया में
धमाल ही धमाल है..!!

सुविचार 214

Question : आपका जीवन को देखने का नजरिया कितना बेहतर है, पर पता नहीं आप जैसे लोग दुनिया में इतने कम क्यों हैं ?
Answer : शायद इसकी एक वजह ये है भौतिकता की मांग में, मानव सभ्यता भी भारी भौतिकता की चपेट में है..
_ वह लोगों के रिश्तों में भी उनके व्यक्तिगत वर्ताव में भी देखने को मिलता है और इसकी वजह ये भी है उन्हें घर में भी यही सब सिखाया बताया जा रहा है..
_ शायद इंसान अति जरूरत वादी हो चुका है.. बाकी मेरा मानना है जब से सभ्यता आई सब कुछ इस संसार में मानव निर्मित है, सिवाय कुदरत को छोड़कर, तो जो कुछ मानव निर्मित है उसे बदला जाना आवश्यक है, पर लोग बदलना नहीं चाहते.. वो हर चीज़ में छेड़छाड़ चाहते हैं, सुकून से कुदरत को अपना काम नहीं करने देना चाहते..
_ जब से तर्क हावी हुआ इंसानों के भीतर से संवेदनाओं को हटा लेने का निरंतर काम जारी है..
_ अब यहां जीवन एक प्रोडक्ट बनकर रह गया है.. पर हमें अपनी सीमाएं तय करनी होंगी, वरना भागते हुए ज़िन्दगी गुज़र जाएगी और हाथ कुछ भी नहीं आएगा..
_ सिवाय चार पांच फ्लैट, पांच छह गाड़ियां, हो सकता है इससे भी ज्यादा कोई प्रॉपर्टी बना ले..
_ मगर किसके लिए आख़िर क्यों इतना भागकर कौन सा जीवन अमृत मिल जायेगा..
_ यहां तो अगले पल ही सांसों का भरोसा नहीं.. और जानते हुए भी यह सच किसी को दिखता नहीं.!!
– Rhythm Raahi

सुविचार – हर तरफ पागलपन – 213

हर तरफ पागलपन : अरे मैं इस युग में क्यों पैदा हुआ ?

_ यह एक भयानक युग है.
_ दुनिया इतनी भयावह हो गई है कि कभी लगता है कि सब कुछ बंद करके एकांत में कहीं चला जाऊं.. – जहां कोई मुझे न जानता हो.!!
_ “क्या मेरा मन दुनिया से भागना चाहता है या अपने भीतर के शोर को शांत करना चाहता है ?”
_ जब संवेदनशील और गहरी सोच रखने वाला व्यक्ति चारों तरफ़ की दौड़, हिंसा, शोर और उथल-पुथल देखता है, तो उसका मन यही कहता है — “मैं इस युग में क्यों ?”
_ दरअसल यह अनुभूति भीतर की साफ़ दृष्टि और संवेदनशीलता का ही प्रमाण है.
“जब भीतर शांति का दीपक जलता है, तब सबसे अंधेरे युग में भी उजाला अपना घर बना लेता है.”
error: Content is protected