हम अक्सर जो नहीं हैं, वैसा दिखने का स्वांग करते हैं. यह स्वांग ही एक दिन हमें निगल जाता है. इसके बजाय अगर हम अपनी कमियों- कमजोरियों को स्वीकार करते हुए चलें, तो जीवन का सफ़र बड़े सकून से कट सकता है और लोगों का सहयोग भी भरपूर मिल सकता है.
उतार चढ़ाव तो जीवन के अभिन्न अंग हैं. उन से घबराने के बजाय उन का मुकाबला करना चाहिए. हम आखिर ऐसी गारन्टी ले कर चलते ही क्यों है कि दुःख हमारे पास फटकेगा ही नहीं और सुख हमेशा बाहें फैलाए खड़ा रहेगा.
झूठे वादे, कोरे आश्वासन व खोखली सहानुभूति से छणिक सामीप्य हासिल किया जा सकता है, परन्तु सच के सामने आते ही दूरी बढ़ जाती है.
सुविचार – वे प्रश्न, जिन पर हम रोज़ जीते हैं, लेकिन रुककर बहुत कम सोचते हैं.. – 233
वे प्रश्न, जिन पर हम रोज़ जीते हैं, लेकिन रुककर बहुत कम सोचते हैं..
_ मुझे लगता है, यही वे प्रश्न हैं.. जिन्हें इंसान हर दिन जीता है, लेकिन उन पर रुककर बहुत कम सोचता है.
कुछ ऐसे प्रश्न हैं :-
अगर कोई व्यक्ति इस एक प्रश्न पर भी ईमानदारी से विचार कर ले, तो उसके जीवन के कई निर्णय बदल सकते हैं.
_ मैं जो कर रहा हूँ, क्या सचमुच वही करना चाहता हूँ, या बस सबको करते देखकर कर रहा हूँ ?
_ क्या मैं जीने की तैयारी कर रहा हूँ, या सचमुच जी भी रहा हूँ ?
_ क्या मैंने घर खरीदा है, या घर ने मेरा जीवन खरीद लिया है ?
_ मैं पैसा कमा रहा हूँ, या पैसा कमाने की प्रक्रिया ही मेरा जीवन बन गई है ?
_ मुझे वास्तव में कितना पर्याप्त चाहिए ?
_ क्या मैं अपनी खुशी खरीद रहा हूँ, या सिर्फ़ अपनी इच्छाएँ बढ़ा रहा हूँ ?
_ क्या मुझे सचमुच इतनी चीज़ों की ज़रूरत है, या मैंने सिर्फ़ उनकी आदत बना ली है ?
_ मैं लोगों से प्रेम करता हूँ, या उनसे अपेक्षाएँ रखता हूँ ?
_ क्या मैं लोगों को जैसा वे हैं वैसा स्वीकार करता हूँ, या उन्हें अपनी अपेक्षाओं के अनुसार बदलना चाहता हूँ ?
_ मैं दूसरों की नज़रों में अच्छा दिखना चाहता हूँ, या अपनी नज़रों में शांत रहना चाहता हूँ ?
_ अगर मुझे किसी को कुछ साबित नहीं करना हो, तो मैं अपनी ज़िंदगी में क्या बदल दूँगा ?
_ मैं निर्णय अपने डर से ले रहा हूँ या अपनी समझ से ?
_ क्या मैं खुश रहने के लिए जी रहा हूँ, या पहले सब कुछ ठीक हो जाने का इंतज़ार कर रहा हूँ ?
_ मैं जो बचा रहा हूँ, उसका उपयोग कब करूँगा ?
_ अगर मेरे पास समय ही नहीं बचा, तो मैं यह सब किसके लिए इकट्ठा कर रहा हूँ ?
_ मैं अपने बच्चों के लिए संपत्ति छोड़ना चाहता हूँ, या उन्हें ऐसा जीवन-दर्शन देना चाहता हूँ जिससे वे स्वयं खड़े हो सकें ?
_ क्या मैं अपने अतीत को समझकर जी रहा हूँ, या उसी को बार-बार दोहरा रहा हूँ ?
– “क्या मैं जिस समस्या को हल करने में पूरी ज़िंदगी लगा रहा हूँ, वह सचमुच मेरी समस्या है भी, या मैंने उसे बिना जाँचे समाज से उधार ले लिया है ?”
– शायद इनमें से किसी एक प्रश्न का ईमानदार उत्तर भी
हमारे जीवन के कई फैसलों को बदल सकता है.
सुविचार 232
उन सारे विचारों को मन में न आने दें, जो आपको निराशा की गहरी खाइयों में धकेल के ले जाएँ. उन विचारों को आने दें, कि जिससे आप उत्साहित होकर संसार में अपना कर्त्तव्य कर सकें.
सुविचार – ऐसा क्यों (Why) ? विचार कीजियेगा ???? – 231
ऐसा क्यों (Why) ? विचार कीजियेगा ????
जिसकी आँखों में नींद है …. उसके पास अच्छा बिस्तर नहीं …
जिसके पास अच्छा बिस्तर है …….उसकी आँखों में नींद नहीं ….
जिसके मन में दया है ….उसके पास खर्च करने के लिए धन नहीं ….
जिसके पास खर्च करने के लिए धन है ….उसके मन में दया नहीं ….
जिन्हे कद्र है रिश्तों की … उन से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता …
जिनसे रिश्ता रखना चाहते हैं ….उन्हें कद्र नहीं है रिश्तों की ….
जिसको भूख है ………उसके पास खाने के लिए भोजन नहीं….
जिसके पास खाने के लिए भोजन है ………उसको भूख नहीं…
कोई अपनों के लिए…. रोटी छोड़ देता है…
कोई रोटी के लिए….. अपनों को छोड़ देता है….
ये दुनिया भी कितनी निराली है, कभी वक्त मिले तो सोचना..
सुविचार 230
जागो और देखो कि जीवन अत्यन्त छोटा है, यह अहसास कि जीवन छोटा है, आपके जीवन में गतिशीलता लाता है – अनचाही चीजें, विकर्षण और बाधाएं स्वतः ही छूट जाती हैं.
सुविचार – जिंदगी में कभी अफसोस मत कीजिए – 229
हमें किसी खास समय का इंतजार नहीं करना चाहिए..
_ बल्कि कोशिश करनी चाहिए कि हमारा हर एक पल खास बनें.!!
जिंदगी में कभी अफसोस मत कीजिए – अपने कर्मों को लेकर, अपने अतीत को लेकर और अपने वर्तमान को लेकर – बहुधा आम, अमरूद या मीठे फलों के लगाए हुए पौधे बड़े होकर बबूल या बेशर्म में तब्दील हो जाते हैं..
_ और आपको इन्हें देखकर दुख होता है कि आपका जीवन इन्हें पालते और पोसते हुए निकल गया और आप पछतावे में हाथ मलते रह जाते हैं.
_ बेहतर है कि अपने – आपसे एकाकार हो जाईए, आप जब अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख सकते,
_ तो बाहरी चीजों या वस्तुओं से बदलने की क्या और कैसी उम्मीद रखेंगे.!!
– Sandip Naik




