सुविचार – भाषा – 072

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शरीर की भाषा सबसे ज्यादा बोलती है.

_ भाषा शरीर का ऐसा अदृश्य अंग है, जिसमें इंसान का सब कुछ दिखाई देता है.!!

कोई भी भाषा को भाषा के ही रूप में प्रयोग करना चाहिए — मतलब, भाषा विचारों के आदान-प्रदान का साधन है. _बस !!

_सांकेतिक भाषा से भी विचारों का आदान प्रदान होता है. _ इसको निज-गौरव इत्यादि जैसी बातों से जोड़ना सही नहीं है.

मनोवैज्ञानिक बेंजामिन होर्फ के मुताबिक ” भाषा हमारे सोचने के तरीके को स्वरुप प्रदान करती है और निर्धारित करती है कि हम क्या- क्या सोच सकते हैं ?”

कहने का अर्थ यह है कि हमारे शब्द खुद ही भीतर और बाहर के एक परिवेश का जाल रचते हैं, इसलिए ख्याल रहे कि अपमानजनक लहजे और अश्लील शब्दों के साथ किया गया संचार एक चक्रव्यूह की तरह होता है. यह आपके आसपास नकारात्मकता का एक ऐसा जाल निर्मित कर देता है, जिसमें एक बार फंस जाने के बाद यह व्यवहार आपकी बोली और भाषा का हिस्सा बन जाता है. इससे लोगों की नजर में आपकी वैल्यू गिरती जाती है. अतः कोशिश यही होनी चाहिए कि आप इस दिखावटी आत्मविश्वास और कूल दिखनेवाली भाषाई बेहूदगी से बच कर रहें.

शब्दों को तहजीब का साथ न मिले तो अर्थ का अनर्थ होते देर नहीं लगती. इतना ही नहीं, भाषा की अभद्रता रिश्तों से लेकर माहौल तक, हर चीज में नेगेटिविटी भर देती है. गलत ढंग और गलत मंशा से कहे गये शब्द कुछ भी सही नहीं होने देते. अगर संवाद का तरीका गलत हो, तो कुछ सकारात्मक होने की उम्मीद ही कहां बचती है ? अतः यह समझना जरुरी है कि हमें केवल अपनी बात को कहना ही नहीं, बल्कि उसे सही ढंग से कहने की भी कला भी आनी चाहिए. इसकी बुनियाद है शब्दों की शालीनता.
अभद्र भाषा कहीं से भी प्रोग्रेसिव होने की निशानी नहीं है. सच तो यह है कि प्रोग्रेसिव विचारों का अश्लील और अभद्र भाषा से कोई लेना- देना नहीं. प्रोग्रेसिव या प्रगतिशील होने का अर्थ है – सही गलत का विवेक रखते हुए अपनी बात को दृढ़ता के साथ साझा करना और किसी का अपमान न करते हुए आत्मविश्वास के साथ अपनी बात कहना तथा अन्य लोगों के दृष्टिकोण का सम्मान करना. अतः अगर प्रोग्रेसिव होने के नाम पर आप अपनी जुबान बिगाड़ रहे हैं, तो संभल जाइए.
किसी को अभद्र भाषा से ठेस पहुंचा कर आप भी सिर्फ ईर्ष्या, द्वेष, असहजता, अपमान और रिश्तों में दूरियां ही पा सकते हैं. इससे सामनेवाले की नजरों में आपकी नकारात्मक छवि बनती है. बोलने का सही ढंग और मर्यादित शब्द आपके व्यक्तित्व की प्रभावी और पॉजिटिव इमेज की सौगात देते हैं. याद रखें, जो लोग मानसिक रूप से मजबूत होते हैं, वे लोग हमेशा सधे, संतुलित और संयमित शब्दों में ही अपनी बात कहते हैं.
अक्सर लोग तनाव हो या गुस्सा आने पर अमर्यादित शब्दों का उपयोग करते हैं. पर यह जरुरी तो नहीं कि तनाव या गुस्सा जाहिर करने का तरीका बिगड़े बोल ही हों. आप लिख कर, मौन रह कर, कहीं घूम कर आदि के जरिये भी अपने तनाव को कम कर सकते हैं. इसके लिए असभ्य शब्दों को संवाद में शामिल करना आपकी कमजोरी दर्शाता है. घर हो या दफ्तर, गालियां देकर या किसी का मजाक बना कर आप किसी भी तरह औरों से बेहतर साबित नहीं हो सकते. इस ख्याल को अपने मन से निकाल दें कि अभद्र शब्दों के उपयोग से आपकी छवि एक बेबाक, बिंदास और आधुनिक वक्ता की बनेगी. आपकी बात पर लोग गौर करेंगे या आप अपनी बात मनवाने में सफल होंगे. सच तो यह है कि होता इससे बिलकुल उल्टा है.
कुछ लोग शौकिया या फैशन के तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, जो कि आगे चलकर उनके धैर्य और समझ पर हावी होती है. अभद्र शब्द आपकी बातचीत में इतनी गहराई से जड़ें जमा लेते हैं कि फिर आपके सामने बच्चे हों या बड़े, घर हो या बाहर आप बिना सोचे- समझे इन शब्दों का इस्तेमाल करने लगते हैं. छोटी- छोटी बातों में धैर्य खोने लगते हैं. जिस तेजी से धैर्य और समझ खोती जाती है उसी तेजी से आक्रोश जताने के लिए ऐसे शब्द आपकी लाइफ स्टाइल का हिस्सा बन जाते हैं. इस कारण यह अभद्र भाषा आपसे जुड़े लोगों के मन को चोट पहुंचाने लगती है. लोग आपके साथ बातचीत ना करने की राह तलाशने लगते हैं. आपसे अपनी व्यक्तिगत बातें शेयर करना छोड़ देते हैं, कारण असभ्य या अश्लील व्यवहार किसी समस्या का हल नहीं होते. हाँ, नासमझी और नकारात्मकता से पूर्ण संवाद का यह तरीका आपके लिए नयी परेशानियां जरूर खड़ी कर देता है.
बात ज़बान से और तीर कमान से, निकल जाए तो वापस नहीं आते.

_ अपनी भाषा, व्यवहार, धारणाओं और आग्रहों पर नियंत्रण की पूरी कोशिश रहनी चाहिए.
_ कई बार अपनत्व के चलते हम किसी ‘अपने’ के लिए औरों से भिड़ पड़ते हैं, कभी-कभी तो दुश्मन तक बना बैठते हैं, और एक दिन हमारा वही ‘अपना’ उसी इंसान के साथ हँसी-ठिठौली करता पाया जाता है.
_ फिर आप कहीं के नहीं रहते.
_ ख़ुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं.
_ मनुष्य की निष्ठा, उसके सुखवाद और तुष्टीकरण के समानुपाती होती है.
_ स्थिर कुछ भी नहीं रहना है.
_ किसी के साथ अपनत्व निभाइये, ख़ूब निभाइये, मगर उसके शब्दोँ, भावों और मूल्यों पर आँख मूँदकर भरोसा मत कीजिए, वर्ना न केवल आप दुःखी होंगे, बल्कि किसी अपराध’बोध की गिरफ़्त में भी आ सकते हैं.
_ गतिमान होते हुए भी थोड़ा स्थिर रहिये, लिप्त होते हुए भी थोड़ा निर्लिप्त रहिये.!!
– Sahil Tyagi

सुविचार – पड़ोस – पड़ोसी – 071

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वो आज नाराज हैं, तो कल उन्हें मना लेंगे हम, _

_ पड़ोसियों से बोलचाल बन्द हो तो मोहल्ला नहीं बदला करते..!

वह व्यक्ति वास्तव में अच्छा है, जिसका पड़ोसी उसे अच्छा मानता हो ..
एक अच्छे पड़ोसी में क्या – क्या गुण होते  हैं ?

Answer:

  • एक अच्छे पड़ोसी में एक दोस्त की तरह एक परिवार की तरह रहने के गुण होने चाहिए.
  • अच्छे पड़ोसी को अपने सामने वाले पड़ोसी की मदद के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए, _ कभी भी मना नहीं करना चाहिए.
  • पड़ोसी को हमेशा सभी त्योहार मिलकर मनाने चाहिए.
  • आपस में ऐसे रहना चाहिए जैसे लगे एक परिवार हो.
  • आपस में विश्वास होना भी बहुत बड़ा गुण है.
  • एक- दूसरे के घर का ध्यान रखना चाहिए.
  • किसी और की बातों में आ कर _ किसी का विश्वास करके _ लड़ाई नहीं करनी चाहिए.
पड़ोस सामाजिक जीवन के ताने-बाने का महत्तवपूर्ण आधार है, _ दरअसल पड़ोस जितना स्वाभाविक है, हमारी सामाजिक सुरक्षा के लिए तथा सामाजिक जीवन की समस्त आनंदपूर्ण गतिविधियों के लिए वह उतना ही आवश्यक भी है,

_ यह सच है कि पड़ोसी का चुनाव हमारे हाथ में नहीं होता, इसलिए पड़ोसी के साथ कुछ न कुछ सामंजस्य तो बिठाना ही पड़ता है.

पड़ोसियों से हमारा रिश्ता सामान्य होता है वे न तो हमारे घनिष्ठ मित्र होते हैं और न ही शत्रु _ परंतु फिर भी वे हमारे करीबी होते हैं.

_ जब आपको कोई मुसीबत होती है तो रिश्तेदार बाद में काम आते हैं सबसे पहले पड़ोसी ही काम आते हैं.

किसी पड़ोसी के यहा जाएं, तो उसके घर प्रवेश करने से पहले शालीनता से अनुमति अवश्य ले लें, _ _ जबरन आ धमकने वाले बिन बुलाए मेहमानों को कोई पसंद नहीं करता,,

_ जरूरत पड़ने पर अगर आपने पड़ोसी से उसकी कोई चीज मांगी है, तो वायदे के मुताबिक समय पर उसे लौटाने का ध्यान जरूर रखें.

मुश्किल के समय में सबसे पहले हमारे पड़ोसी ही हमारे काम आते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा, जब हम पड़ोसियों के साथ सामान्य शिष्टाचारों का ध्यान रखें.
अगर सबसे ज़रूरी कोई बात है तो आपस में मिलना है,_ चाहे वो दोस्त हों या पड़ोसी या कोई और लोग, _

_ दिलों में दूरियों के बढ़ने का एक ही कारण है और वो है कम मिलना या नहीं मिलना..

  • ” अपने पड़ोसियों से अनजान बनकर न रहें, उनसे बोलचाल रखें “
  • ” आपके पड़ोसी आपको तभी जानेंगे, जब आपका उनसे परिचय, बोलचाल होगा “
पड़ोसी होने से हम एक दूसरे के घरों में भी जाकर बैठ सकते हैं गली में भी चहल – पहल रहती है, _

पड़ोसी कोई भी छोटा बड़ा काम एक दूसरे के साथ मिलकर करते हैं, _ पड़ोसी होने से हमें कभी किसी प्रकार का खतरा नहीं रहता, _

वे हमारे दुःख सुख में सबसे पहले हमारे लिए खड़े होते हैं, _ _ पड़ोसी हमारी गैर मौजूदगी में हमारे घर की देखभाल भी करते हैं.

पड़ोसियों की मदद के लिए खुद आगे आएं, _

  • ” आप उनके काम आएंगे, तो वे भी जरूरत पड़ने पर आपके साथ होंगे “
पड़ोसियों के साथ अकड़ू न बनें, न ही डींग हाकें

– ” यदि आप पड़ोसियों को छोटा जताने की कोशिश करेंगे, तो वे आपको कभी पसंद नहीं करेंगे. “

घर से बाहर निकलते समय यह जरूर देख लें कि आपने आधे-अधूरे कपड़े तो नहीं पहन रखे हैं.

  • ” इससे आपके पड़ोसियों को अटपटा लग सकता है, _ सलीके से कपड़े पहनने पर वे आपकी तारीफ करेंगे और इस आदत से आप आगे भी सम्मान पाएंगे “
भूलकर भी पड़ोसियों के बारे में कोई अंट – शट बात न कहें.

  • ” बातें अक्सर घूम-फिरकर उसी तक पहुंच जाती हैं, जिससे संबंधित होती हैं, _ फिर सोचिए, वह आपके बारे में क्या सोचेगा ?
पड़ोसियों के यहां से कोई निमंत्रण आए और आप व्यस्त न हों तो उसमें अवश्य जाएं, _ अगर किसी वजह से न जा पाएं, तो क्षमा अवश्य माग लें.

  • ” आप ऐसा करेंगे, तो वे भी आपके निमत्रण पर सहर्ष आना पसद करेंगे “
 

सुविचार – राय – सलाह – 070

जब तक कोई सलाह मांगे नहीं, तब तक देना मत ; _

_और जब कोई सलाह मांगे, तो तभी देना, जब तुम्हारे जीवंत अनुभव से निकलती हो..

एक व्यक्ति जो लगातार आपकी सलाह मांगता है, फिर भी हमेशा आपके कहे के विपरीत काम करता है.

A person who constantly asks for your advice, yet always does the opposite of what you told them.

जिस व्यक्ति की सलाह का कोई मूल्य है, _ वह कभी बिना मांगे सलाह देता ही नहीं है..
सलाह देने वाले लोग होते हुए भी, _ अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है !!
समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि हमारा सलाहकार कौन है.
किसी की सलाह से रास्ते जरूर मिलते हैं, पर मंजिल तो खुद की मेहनत से मिलती है.
दूसरों की राय बदलने में वक्त बर्बाद मत करो,

_ अपना फोकस काम पर रखोगे तो नतीजे खुद जवाब देंगे.!!

सलाह देने सब आ जाते हैं, साथ देने के लिए कोई नहीं आता.
जब आप खुद को अपनाते हैं, तब दुनिया की राय की कोई चिंता नहीं रहती.!!

_ आपके जीवन का अपना कुछ मूल उद्देश्य है, सार्थक लक्ष्य है, आप केवल उस पर ध्यान दो,
_ लोग आपको पसंद करते हैं या नापसंद करते हैं या आपके लिए अपशब्द का प्रयोग करते हैं, या तारीफ करते है,
_ ये सब बात एक समय के बाद धूमिल हो जाती हैं..!!
लोग अक्सर अपनी राय, सलाह या जवाब देने में जल्दबाजी करते हैं,

_ लेकिन दूसरों के सवालों को सुनने या समझने में समय नहीं लगाते.!!

आपको ऐसी सलाह देने वाले बहुत कम मिलेंगे, जिससे आपका फायदा हो.

परंतु ऐसी सलाह देने वाले बहुत मिल जाएंगे, जिससे उनका अपना फायदा हो.

मानसिकता ऐसी हो गयी है कि अगर किसी को अच्छी सलाह दी जाए, तब भी सामने वाला समझता है कि उन पर अपनी बातें थोपना चाहता है.!
सलाह उसकी मानो _ जो सहयोग भी करता हो ;

_ क्योंकि सलाह के बिना सहयोग का कोई मूल्य नहीं..

बुद्धिमान व्यक्ति को सलाह की जरुरत नहीं होती, _

_ और मूर्ख व्यक्ति आपकी सलाह मानेगा नहीं.

जिंदगी में सिर्फ दो लोगों की सलाह लेना :-

– पहला ऐसे लोग खुद कामयाब हुए हैं, ऐसे लोगों से आप सीख सकते हो कि क्या करना चाहिए,

– दूसरा ऐसे लोग जो बहुत नाकामयाब हुए है, ऐसे लोग से आप सीख सकते हो कि क्या नहीं करना चाहिए,

– ऐसे लोगों की कभी सलाह मत लेना जो Normal Life जीते हैं, जो कामयाब भी नहीं हैं और नाकामयाब भी नहीं हैं,

मतलब कुछ बड़ा करने की कोशिश ही नहीं की.

दूसरों से मिलने वाली सलाह को तुरंत भूल जाइए, क्योंकि किसी और को यह बताने देना कि आपको क्या करना है और क्या नहीं, अपने आप में सबसे बड़ी मूर्खता है.

_ जब कोई बात आपको अजीब लगे या उलझन में डाले, तो उसी पल अपने दिल और दिमाग की सुनिए और जैसा आपको सही लगे, वैसा कीजिए.!!
खुद को प्रेरणा देना, खुद को सलाह देना बहुत सुंदर परिकल्पना है. कैसी भी स्थिति आ जाए खुद को राय देना और अपनेआप से मशविरा करना बहुत सकारात्मक रिजल्ट दिलवा देता है.

पराजित वह होता है जो स्वयं से संवाद करना बंद कर देता है. माना कि जीवन की जद्दोजेहद बहुत सारी हैं और उन का कोई रूप हमें दिखाई भी नहीं दे रहा है पर अपने अंतर्मन से राय ले कर देखें, तमाम जटिलताएं सुलझ जाएंगी.

शुरुआत से जीवन के अन्त तक हमें क्या हासिल होगा, हमारा जीवन कैसा होगा, यह सब समय समय पर लिए जाने वाले हमारे निर्णयों पर निर्भर करता है. कोई भी निर्णय लेने से पहले आत्मविष्लेशण जरुर करें, जहाँ एक सही निर्णय ज़िन्दगी बना सकता है, वहीँ गलत फैसला ज़िन्दगी बिगाड़  भी सकता है.

कभी- कभी हम कुछ फैसले अपने बड़ों या आस पास के लोगों के दबाव में ले लेते हैं, जो भविष्य में हमारे लिए मुसीबत बन जाते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि हमें किसी की सलाह पर अमल नहीं करना चाहिए, पर हमें सलाह और दबाव में अन्तर करना आना चाहिए.

लोगों की मानसिकता ऐसी हो गयी है या फिर लोगों में आधुनिकता घर कर गयी है,

_ उन्हें यदि अच्छी सलाह दी जाए, तब भी वे सिर्फ वहीं तक समझ पाते हैं कि सामने वाला उन पर अपनी बातें थोपना चाहता है…!

हम जीवन के हर मोड़ पर औरों की राय लेते हैं, हमारे हर चुनाव पर उनकी छाप होती है.

_ हम चलते हैं के हिसाब से… सोचिए ! क्या हम वास्तव में आगे बढ़ रहे हैं या और पीछे जा रहे हैं ?
_ हम उनसे सलाह इसलिए लेते हैं, क्योंकि उनके पास जीवन का अनुभव ज़्यादा है, ‘नहीं’ केवल उम्र बढ़ जाने से अनुभव नहीं बढ़ते.
_ केवल बाल सफेद हो जाने से जीवन की समझ नहीं आ जाती.
_ बाल तो उम्र भर चार दिवारी में कैद रहने वाले व्यक्ति के भी पक जाते हैं.
_ ग़ौर से देखिए, आप जिनसे सलाह लेते हैं उन्होंने कितनी किताबें पढ़ी है, अपने कदमों से कितनी दुनिया नापी है, कितने दार्शनिकों, चिंतकों, विचारकों, वैज्ञानिकों को जाना-समझा है.
_ क्या वे नये अनुभवों के प्रति खुले रहते हैं ? क्या उनमें तर्क करने की क्षमता है ? क्या वे पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर स्वतंत्र चिंतन कर सकते हैं ?
_ क्या उनमें सच सुनने की हिम्मत है ? सच बोलने में उनकी ज़बान काँपती है या नहीं ?
_ केवल परम्परा को ढोने और भीड़ के पिछलग्गू होने से अनुभव नहीं आ जाते.
_आप सोच के स्तर पर आगे नहीं, पीछे, पीछे और पीछे… जा रहे हैं.
_ आपका मानसिक विकास नहीं, पतन, पतन और पतन… हो रहा है.
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— आदमी बड़ी उत्सुकता से दुनिया-जहान की बात करता है – वह दूसरे लोगों की बात करेगा, आस-पड़ोस की बात करेगा, राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, धर्म, संस्कृति, सभ्यता की बात करेगा.
_ लेकिन जैसे ही बात के केन्द्र में उसकी अपनी ज़िन्दगी को लेकर आओ – पूछो कि तुम जैसे जी रहे हो, क्या यह जीने का उत्कृष्ट तरीका है ?
_ तुम जो कर रहे हो, क्या यह करना सर्वथा उचित है ?
_ क्या तुम जो मानते हो, उसकी बुनियाद मजबूत है ?
_ क्या तुम जो सोचते हो, उसे ईमानदारी से परखा है ?
_ कभी सोचा है कि तुम इतना डरे हुए से, दबे हुए से क्यों रहते हो ?
_ क्या तुम्हें सच में लगता है कि तुम्हारा जीवन सार्थक है ?…
– वह इस कदर झुंझला जाता है, मानो दुनिया का सबसे खतरनाक मिसाइल उसकी ओर छोड़ दिया गया हो..
_ और आसपास उसकी पकड़ में जो भी चीज़ आती है, वह उससे अपनी सुरक्षा करने की भरपूर कोशिश करता है.
_ लेकिन उसे गहराई से यह पता होता है कि वह कितना भी हाथ-पाँव मार ले, वह अपने आप को नहीं बचा पाएगा.
_ अजीब स्थिति है उसकी – वह दुनिया-जहान के बारे में बहुत-कुछ जानता है,
_ लेकिन अपने बारे में कुछ भी नहीं जानता.
— Chhitij

सुविचार – शत्रु – दुश्मन – 069

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बहुत बार ऐसा होता है कि मित्र के मरने पर इतनी हानि नहीं होती, जितनी शत्रु के मरने पर हो जाती है. क्योंकि वह जो विरोध कर रहा था, वही आपके भीतर चुनौती भी जगा रहा था. वह जिसके विरोध और संघर्ष में आप सतत रत थे, वही आपका निर्माण भी कर रहा था.

साधारणतः देखने में ऐसा लगता है कि अगर आपका शत्रु मर जाए, तो आप ज्यादा सुख में होंगे; लेकिन शायद आपको पता न हो कि आपके शत्रु के मरते ही आपके भीतर भी कुछ मर जाएगा, जो आपके शत्रु के कारण ही आपके भीतर था.

नकारात्मक सोच हर मर्ज की जड़ है. हम जिन्हें शत्रु समझते हैं, दरअसल वे व्यायामशाला के वो भार हैं, जो हमारे शरीर सौष्ठव को निखारने में मुख्य भूमिका का निर्वहन करते हैं. शत्रुविहीन व्यक्ति कभी आसमान नहीं छू सकता.

सकारात्मक सोच के सहारे आप बड़े- से- बड़े अवरोधों का सामना सुगमता से कर सकते हैं.

यदि आपका कोई दुश्मन नहीं है तो इसका अर्थ है कि आप उन जगहों पर भी ख़ामोश रहे _ जहाँ बोलना बहुत ज़रूरी था.
आपसे बड़ा शत्रु आपके जीवन के लिए और कोई भी नहीं हो सकता, खुद को खुद से बचाओ.!!
जब आपने किसी का हित किया हो और वही आपका दुश्मन बन गया हो..

_तो यूँ समझें कि ऐसे दुश्मन भी आप को ही निखारते हैं.!!

सुविचार – मूर्ख – मुर्ख – बेवकूफ – नासमझ – अक्ल – बेअक्ल – बेअकल – मंदबुद्धि – क्रैक होना – हिला होना – 068

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समझदार बोलता है क्योंकि उसके पास बोलने या बांटने के लिए अच्छी बातें होती हैं,

_ लेकिन एक बेवकूफ मात्र इसलिए बोलता है.. क्योंकि उसे कुछ न कुछ बोलना होता है.

लोगों को दिखाओ कि आप मूर्ख हो, आपको कुछ नहीं पता..

_ इससे आप उनके मनसूबे जान पाओगे.!!

जो भी बुद्धिमान व्यक्ति किसी मूर्ख के साथ बहस करता है, उसे नुकसान उठाना पड़ता है.

अगर हम परेशानियों से बचना चाहते हैं तो मूर्ख व्यक्ति से दूर ही रहना चाहिए और उसके साथ बहस करने की गलती नहीं करनी चाहिए.

जिस तरह से आकाश में मिट्टी उछालने पर, वह मुहँ पर ही गिरती है ; _उसी तरह से मूर्ख व्यक्ति, जब अच्छे लोगों के साथ, बुरा करने की कोशिश करते हैं तो _ उनका खुद का ही बुरा होता है ..!!
जिसे आपकी कोई बात समझ नहीं आए, फिर भी आप उसे समझाते जाएँ और मन में सोचते भी जाएँ कि यह मूर्ख मेरी बात नहीं समझ रहा तो, _ मूर्ख वह नहीं, आप हैं. “आप एक जड़बुद्धि के पीछे क्यों पड़े हैं ?”
सच्चे होने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि मूर्खो से मुक्ति जल्द ही मिल जाती है..

_ और मूर्खो को उनकी मूर्खता का सबसे बड़ा लाभ ये होता है कि..
_ उनके जैसे और कई मूर्ख उनको मूर्ख बनाने के लिए उनके निकट बने रहते हैं.!!
मूर्ख इंसान की जुबान ही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन होती है,

_ क्योंकि वो सुनने में कम और बोलने में ज़्यादा विश्वास रखता है.!!
बहस में ज्ञानी और सच्चे लोग अक्सर मौन हो जाते हैं, मूर्ख और झूठे लोग

खुद को सही साबित करने के लिए जरुरत से ज्यादा दलीलें पेश करते हैं.

अक्लमंद आदमी जो कुछ बोलता है, सोच समझ कर बोलता है.

बेवकूफ बोल लेता है, तब सोचता है कि वह क्या कह गया.

समस्या पैदा करने के लिए आपका मजबूत होना जरूरी नहीं है,

_ बस आपका मूर्ख होना जरूरी है.

मूर्ख होने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन जिद्दी होना

और इस बात पर जोर देना कि आपकी मूर्खता ज्ञान है, यह एक समस्या है.

पहला सिद्धांत यह है कि आपको स्वयं को मूर्ख नहीं बनाना चाहिए ;

_और आप सबसे पहले खुद को ही मूर्ख बनाते हैं.!!

मूर्ख से बहस कर आप जीत नहीं सकते, इसलिए उसे ही जीतने का घमंड पालने दो..

_ क्योंकि तर्क सिद्धांत वे मानते नहीं.!!

मूर्ख लोगों के साथ बहस करने के लिए जीवन बहुत छोटा है.

Life is too short to argue with stupid people.

मूर्ख होने के लिए कोई उम्र तय नहीं होती, आप किसी भी उम्र में मूर्ख हो सकते हैं.
मूर्ख व्यक्ति एक ही काम बार-बार करता है और अलग परिणाम की उम्मीद करता है.
[su_quoteमुर्ख लोग धैर्य रखना जानते ही नहीं हैं, कुछ न कुछ मुंह खोल कर बकवास करना ही है.!!][/su_quote]
“हर कोई आपको समझे, ये ज़रूरी नहीं…- पर खुद को समझना ज़रूरी है”
नासमझ- बेवकूफ चाहते हैं कि हर कोई “उनकी तरह सोचे”

The idiots wish everyone would think like them.

मूर्खों की संगति में सुखी रहने की बजाय, समझदारों के साथ दुखी रहना बेहतर है !!
मैंने मूर्खों की एक खासियत देखी है, उन्हें पूरा यकीन होता है कि वे बुद्धिमान हैं..
एक मूर्ख से समझदारी की बात करो तो वह आपको ही मूर्ख कहने लगेगा.!!
एक मूर्ख अपनी ज़िंदगी को अपनी मूर्खता से औऱ अधिक कठिन बना लेता है.!!
मूर्ख लोगों को अपना कीमती वक़्त ख़राब करने का मौक़ा देना छोड़ दो, खुश रहोगे !!
जो लोग अपने पाँव पर ख़ुद कुल्हाड़ी मारते हैं, उनसे ज्यादा मूर्ख कोई और नहीं.!!
मूर्ख इंसान दाने-पानी का इंतजाम किए बिना.. और सारे इंतजाम करता है.!!
बुद्धि से ही यह दुनिया चलती है, दिल के हाथों जीने लगे तो बेड़ा ग़र्क हो जाए.!!
अगर हमें अपनी मूर्खता का पता है तो हम बुद्धिमान व्यक्ति हैं.
बुद्धिमान का दुर्भाग्य मूर्ख की समृद्धि से बेहतर है.

The misfortune of the wise is better than the prosperity of the fool.

बेअक्लों की ख्वाहिश है, सब उनके जैसा सोचें.

Idiots wish everyone would think like them.

क्रैक होना, हिला होना, बावला, और मंदबुद्धि के बीच एक महीन-सा अंतर है.

_ “हिला होना” अर्थात् बार-बार अपना प्रचार करना.. मैं तो ये हूँ, मैं तो वह हूँ, मैं सब कुछ हूँ.
_ “क्रैक” वह होता है जो समय, स्थान और माहौल नहीं देखता है और अपने काल्पनिक शत्रु की निंदा करने लगता है.
वह घर की लड़ाई बीच बाज़ार में लाता है.
_ “बावला” वह जो जगत को मिथ्या समझता है और अपने कल्पना लोक में विचरण करता है.
_ “मंदबुद्धि” ऐसा नमूना है जो कर्म तो करेगा नहीं.. लेकिन हवाई क़िले बनाएगा राजमहल में रहने के..
_ उसकी चौकड़ी उसे बेवक़ूफ़ बनाती है और वह बनता है.
_ यह आदमी रात और दिन में फ़र्क़ नहीं कर पाता.
_ ये सब नमूने हमारे आस-पास मौजूद हैं, तलाश करिए और मज़े लीजिए.!!
साधारण मूर्ख ठीक हैं; आप उनसे बात कर सकते हैं, और उनकी मदद करने का प्रयास कर सकते हैं.

_ लेकिन आडंबरपूर्ण मूर्ख-लोग _ जो मूर्ख हैं और इसे हर जगह छिपा रहे हैं और लोगों को प्रभावित कर रहे हैं कि _ वे इस सब दिखावटीपन के साथ कितने अद्भुत हैं-
_ मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता !
_ एक साधारण मूर्ख जालसाज़ नहीं होता; एक ईमानदार मूर्ख बिल्कुल ठीक है.
– लेकिन एक बेईमान मूर्ख भयानक होता है !
मूर्ख वह है जो अहंकार, मैं को जन्म देता है।

मूर्ख हमेशा बहस जीतता है.
_ बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा मूर्ख से सहमत होता है.
_ मूर्ख वह है जो विचारों के जाल में फँस जाता है और मान लेता है कि यही परम सत्य है.
_ बुद्धिमान व्यक्ति को न कुछ साबित करना होता है और न ही कहीं जाना होता है.
_ मूर्ख हमेशा कोई न कोई व्यक्ति बनता रहता है.
_ बुद्धिमान व्यक्ति न कुछ होता है और न कुछ.
_ मूर्ख हमेशा अंतहीन ध्वनि प्रदूषण का बकबक करने वाला होता है.
_ बुद्धिमान व्यक्ति शांत और मौन रहता है.
_ मूर्ख हमेशा अतीत में जीता है.
_ बुद्धिमान व्यक्ति बस वर्तमान और वर्तमान में जीता है.!!
जिस क्षण आप किसी मूर्ख व्यक्ति को समझाने की कोशिश करते हैं, आप उसी जगह प्रवेश कर जाते हैं.. जहाँ वे रहते हैं.

_ मूर्खता सत्य की परवाह नहीं करती, बस अपने अंधेपन से चिपकी रहती है.
_ आप हज़ार तथ्य लाएँ, लेकिन उनकी आँखें पहले ही बंद हो चुकी हैं.
_ कभी भी अपनी जीवन ऊर्जा किसी को समझाने में बर्बाद मत करो.
_ सत्य को किसी को साबित करने की ज़रूरत नहीं है..
_ सत्य कोई बहस नहीं, बल्कि एक अनुभव है.
_ अगर सामने वाला तैयार और इच्छुक है, तो एक शब्द भी उसे समझा सकता है.
_ अगर वे तैयार नहीं हैं, तो हज़ार शास्त्र भी निरर्थक होंगे.
__ अगर किसी का दिल खुला है, तो वह आपकी लौ से जल उठेगा.!!
अगर किसी ने दो बार अपनी लापरवाही और असंवेदनशीलता से आपको दुखी किया हो और आप तीसरी बार उस पर भरोसा करते हैं, तो गलती उसकी नहीं, आपकी है.

_ क्योंकि वह तो दो बार अपनी प्रवृत्ति का परिचय दे ही चुका था.
_ अब तीसरी बार मूर्ख बनना आपने खुद चुना है.!!
किसी मूर्ख व्यक्ति को समझाना बहुत मुश्किल होता है.

_ आप दिन को दिन कहेंगे, वह कहेगा, नहीं, यह रात है और रात, रात, रात कहता रहेगा.
_ आप अपना सिर धुनिए, पर मूर्ख से जीत नहीं सकेंगे.!!

– Manika Mohini

“मूर्ख कौन है ?”

_ मूर्ख वह है जो मानता है कि दुनिया को उसकी ज़रूरत है… कि उसके बिना, सब कुछ बिखर जाएगा.
_ सच तो यह है कि दुनिया को कोई परवाह नहीं है.
_ कल सूरज उगेगा, नदियाँ बहती रहेंगी, सूरज और प्रकृति की तो बात ही छोड़िए,
_ जिस ऑफिस में आप काम करते हैं, उसे भी आपकी परवाह नहीं है.
_ आज आप महीने के सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी हैं और अगले महीने आपको नौकरी से निकाल दिया जाएगा, इसलिए नहीं कि कंपनी घाटे में जा रही है, बल्कि इसलिए कि उनका मुनाफा 20% से घटकर 19.99% हो गया है.
_ और लोग: वे हँसेंगे और रोएँगे, आपके साथ या आपके बिना..
_ आज आप मरेंगे, कल वे कोई और रास्ता खोज लेंगे..
_ यह उनकी गलती नहीं है, समस्या यह है कि आपने खुद को बहुत ज़्यादा महत्व दे दिया है.
_ आप उनके जीवन में वह नायक नहीं हैं.. जो आप सोचते हैं.
_ यह सोचना कि दुनिया आपका सम्मान करती है, अहंकार का सबसे गहरा भ्रम है.
_ “दुनिया पूरी है”.. यह आपसे पहले भी थी, आपके बाद भी रहेगी.
_ बुद्धिमान व्यक्ति अस्तित्व या किसी भी चीज़ से महत्व की माँग नहीं करता.
_ वह बस उसका हिस्सा बन जाता है..
_ बहते रहो – जैसे एक बूँद सागर में पिघल रही हो,
_ न ज़रूरी, न अनावश्यक – बस अभी में मौजूद रहो.
_ अपने बीते हुए कल से सीखो और आज जियो.!!
_ “यह बहुत ही प्रासंगिक है ! दुनिया को वाकई हमारी ज़रूरत नहीं है, हम तो बस उसका एक छोटा सा हिस्सा हैं.”
– SACHIN
एक मित्र ने अभी कहा कि आज अक्ल दाढ़ निकलवाई डॉक्टर के कहने पर, तकलीफ हो रही है तो मैंने जवाब दिया – “इस मामले मैं बहुत सुखी हूँ, न अक्ल दाढ़ आई, ना आने-जाने या निकालने का दर्द है, पूरा जीवन यूंही बगैर अक़्ल के निकल गया”

_ सच कहूँ तो अपनी मूर्खता में ही मैं बहुत खुश हूँ,
_ जीवन और सब सुख-दुख के पल निकल ही गए रोते-झीकते हुए,
_ हालांकि एक लंबा समय अपनी शर्तों, अपने सिद्धांतों, और उसूलों पर, किसी से कोई अपेक्षा ना करते हुए, बगैर कोई सुरक्षा के, सारी उम्र बेहद कम पैसे, गुजारे लायक न्यूनतम सुविधाओं और नगण्य परिलब्धियों और किन्हीं संसाधनों के बिना अकेले निकालना मुश्किल था, पर बहुत मजा आया,
_ जीवन में खूब बदनामी झेली, ताने, निंदा, जूते, गाली, ठोकरें, धोखे, बदहाली, जिल्लत, प्यार और बहुत कम सम्मान मिला, ज्यादा खोया और थोड़ा सा पाया जीवन में..
_ अब पलटकर देखता हूँ तो लगता है, एक सामान्य जीवन ऐसा ही होता है, ना किसी से अपेक्षा रखी कोई, ना नोबल की आस और ना किसी से चरित्र प्रमाण पत्र लिखवाया,
_ जो मिला – उसको अपनी गठरी में बांधकर चलता चला आया और कोई रंजो गम नहीं,
_ एक औसत बुद्धि वाला व्यक्तित्व जिसे भली भांति ज्ञात था कि ना अपुन न्यूटन है ना आइंस्टीन, बस कुल मिलाकर संतुष्ट हूँ,
_ इस मोड़ पर रूपया नहीं पर संतोष है,
_ आगे का नहीं पता, पर अब अकेले रहने, चलने और अपने एकांत में जीने की हिम्मत बढ़ गई है.
_ मैं पगडंडियों से चलकर आया हूँ तो सड़कों की हिम्मत नहीं कि पाँवों पर छाले कर दें,
और हो भी जायेंगे तो इतने काँटे है पगों में कि छालों के लिए जगह नहीं है.!!
– Sandip Naik

सुविचार – बुद्धि – बुद्धिमान – बुद्धिमानी – समझ – समझना – समझदार – समझदारी – 067

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बुद्धिमान …

जो बात के मर्म को तुरंत समझ लेता है, सुनने योग्य बातों को एकाग्र चित्त होकर सुनता है, और व्यर्थ की बातों में  रूचि नहीं रखता है, खूब सोच विचार के ही कोई काम शुरू करता है, हाथ में लिया काम अधूरा नहीं छोड़ता, जो बिना पूछे किसी को सलाह नहीं देता, वो बुद्धिमान है !!!!

समझदार बनने के तीन रास्ते हैं..

_ किताबें — किसी का पूरा जीवन अनुभव कुछ पन्नों में दे देती हैं.
_ फ़िल्में — कल्पना को आकार देती हैं.
_ सफ़र — मन, संस्कार और समझ — को विस्तार देता है.!!
हम बुद्धि से नहीं समझेंगे तो और कैसे समझेंगे ?

_ समझने का काम ही बुद्धि का है..
_ शरीर का और कौन-सा अंग समझ सकता है ?
_ बुद्धि न होती तो न कुछ जान सकते न समझ सकते ?
समझदार लोग विचार ना मिलते हुए भी एक दूसरे के विचारों की कद्र करते हैं ना ही कोई हस्तक्षेप करते हैं, _

_ नज़रअन्दाज़ भी ऐसे करते हैं की दूसरे को बुरा ना लगे और इन्ही विचारों के साथ अपनी जिंदगी का पूरा समय हंसी ख़ुशी व्यतीत कर जाते हैं !

बुरे लोग तो सिर्फ़ शोर मचाते हैं, पर जब एक समझदार और सुलझा हुआ इंसान बिगड़ता है, तो वो सीधा ‘Game Over’ करके ही दम लेता है.!!
किसी को सुनना और उसे समझना दो अलग-अलग चीजें हैं.

_ सुनना तो मात्र शब्दों को ग्रहण करना है, लेकिन समझना उससे कहीं आगे जाता है—यह किसी के भावनाओं, अनुभवों और अनकहे शब्दों को महसूस करने की कला है.
_ हर इंसान अपने मन की गहराइयों को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाता.
_ कई बार डर, संकोच, या शब्दों की कमी के कारण लोग अपने दिल की बात पूरी तरह कह नहीं पाते.
_ उनकी चुप्पी, उनके हावभाव, या उनके शब्दों के बीच की खामोशी में बहुत कुछ छिपा होता है.
_ अगर हम केवल सुनने तक सीमित रहते हैं, तो हम शायद उस अनकहे को miss कर दें.
_ सुनना शुरुआत है, लेकिन समझना वह कदम है जो सच्चे संवाद और रिश्तों को बनाता है.!!
किसी बात से जब आपका दम घुटने लगे और उनसे जुड़े सवालों के जवाब किसी के पास भी न हो..

_ क्योंकि आप पूछना ही नही चाहते.. तो ऐसी हकीकत को झूठ समझ के आगे बढ़ जाने में ही समझदारी है.!
बुद्धिमान वे हैं, जो अपने अमूल्य जीवन की एक- एक घडी का सदुपयोग करना जानते हैं.
जब भीतर की समझ गहरी होती है,- तो बाहर की बेकार बातें प्रभावी नहीं होती.”
साधारण योग्यता को बुद्धिमानी से काम में लाने पर ही प्रशंसा प्राप्त होती है.
जिसे समझ आता है, वो समझाता नहीं ;

_ वो बस अपनी समझ को व्यक्त करता है.!!

जिन बातों से समझा और सीखा जा सकता है,

_ वो सब पहले से ही लिखा जा चुका था.!

“समझदार वही, जो सवालों में नहीं उलझता, बल्कि ख़ुद जवाब बनकर जीता है.”
शायद हम आज न समझें, लेकिन ऐसा न हो कि जब समझें, तब देर हो चुकी हो.!!
जो चीज समझ आ जाती है… उसे बार-बार सुनाने की जरूरत नहीं पड़ती.
“हर बात समझने के बाद, फिर उसे जीना भी चाहिए.”
“यदि आप बुद्धिमान लोगों के साथ चलते हैं, तो आप भी बुद्धिमान बनेंगे और मूर्खों के साथ ही सदा उठेंगे-बैठेंगे तो आपका मानसिक तथा बुद्धिमता का स्तर और सोच भी उन्हीं की भांति हो जाएगी..!!”
किसी को कुछ समझाने से पहले यह अवश्य समझ लें कि दूसरा व्यक्ति आपकी बात समझने में सक्षम है या नहीं,

_ क्योंकि यदि घड़े में छेद हो तो उसमें पानी डालना व्यर्थ है.!!
अपने आप को बुद्धिमान कहने वालों को भी अच्छा जीवन नहीं जीते देख..

_खीझ /दर्द /दुःख होने लगता है.!

गुस्से में लिए फैसले अक्सर पछतावे की गूँज छोड़ जाते हैं ;

_ समझदार वही है.. जो शोर में भी अपने मन को ठंडा रखना जानता है.!!

बुद्धि ही मनुष्य को नवीन परिस्थितियों को ठीक से समझने और उसके साथ अनुकूलित (adapt) होने में सहायता करती है.
हम हर बात का कोई न कोई निष्कर्ष ढूँढ़ने लगते हैं.

_ जबकि कुछ बातें सिर्फ महसूस करने के लिए होती हैं, समझने के लिए नहीं.!!
समझदार होना एक सज़ा भी है, क्योंकि आपको हर उस व्यक्ति से निपटना होगा..

_जिसके पास समझदारी नहीं है.!!

चतुर [Clever] होने से बुद्धिमान [Wise] होना बेहतर है.

_ एक चतुर व्यक्ति कर तो बहुत कुछ सकता है लेकिन एक बुद्धिमान व्यक्ति वही करेगा जो सही है.!!
मेरे हिसाब से बुद्धिमान होना बहादुरी नहीं बल्कि सजा भी है.

_ क्योंकि बुद्धिमान लोग न तो दूसरों पर क्रोध कर सकते हैं.. और न ही चिल्ला सकते हैं.
_ क्योंकि हम जानते हैं कि अगले व्यक्ति ने जो कहा या किया..
_ वह क्यों कहा या किया..!
_ क्योंकि हम तुरंत अपने आप को अपनी जगह से स्थानांतरित कर उसकी तरफ से सोचने लगते हैं..!!
दुनिया में बहुत भीड़ है – आपको अपने लिए इतनी समझ होनी चाहिए कि.. क्या अपने पास रखना है और क्या छोड़ देना है.!!
कभी-कभी सबसे गहरा जवाब होता है “कुछ नहीं”,
_ जिसे समझने के लिए दिमाग की नहीं, बल्कि दिल की जरूरत होती है.!!
नासमझी में दुनिया हसीन लगती थी, समझदारी ने Reality दिखाकर जीना हराम कर दिया.!!
बहुत सुंदर होते हैं वो लोग..- जो समझते भी हैं और समझाते भी हैं.!!
लोगों की समझ या तो मुझसे कम है या फिर मेरी समझ से परे है.

_ जो समझ को समझ रहे हैं, वे उसे अपने जीवन में लागू कर रहे हैं.!!
मूर्ख अफवाह फैलाता है, चापलूस उसे बढ़ाता है और बुद्धिमान उसका अंत करता है.!!
जिन स्थितियों में हम जी रहे होते हैं, उन स्थितियों की समझ उन स्थितियों से बाहर निकल आने के बाद आती है.!!
समझदारी सभी जगह काम नहीं आती, आती तो अफ़सोस क्यों होता

_ अफ़सोस कर रहे हैं ग़लती कर-कर के, और जबकि बार-बार ग़लती कर ही रहे हैं तो कहाँ गयी समझदारी,
_ समझदार कम बना करिए.. अफ़सोस भी कम ही होगा…!!
समझदार होने की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि, हम खुद ही अपनी धारणा बना लेते हैं,

_ लेकिन ये ग़लत है कि हम सामने वाले को अपनी ही धारणा को पालन करने को कहें,
_ सबकी अपनी सोच समझ होती है, किसी पर भी अपने विचार थोपने नहीं चाहिए.!!
कुछ लोग समझदारी के नाम पर सिर्फ यह चाहते हैं,
_ आप सहन करना सीख लो और वो वैसे ही रहेंगे.!!
असल में समझदार कहलाने का मतलब.. अक्सर ये होता है कि लोग आपकी भावनाओं, तकलीफ़ों और उलझनों को स्वतः ही नज़रअंदाज़ कर देते हैं..

_ सबको लगता है कि आप अपने आप ही सब संभाल लेंगे, आपको ज़्यादा समझाने की ज़रूरत नहीं..
_ लेकिन हकीकत ये है कि समझदार इंसान को भी समझे जाने की उतनी ही चाह होती है.. जितनी किसी और को..
_ फर्क सिर्फ इतना है कि वो अपनी कमी-कसूरी या दर्द को ज़ाहिर कम करता है, दबा देता है और यही उसका सबसे बड़ा अकेलापन बन जाता है…!
किसी भी व्यक्ति का चाल-चरित्र सदैव एक सा रह पाना बहुत मुश्किल होता है.

_ समयानुसार परिवर्तन आना प्राकृतिक नियम है और यह नियम घर-बाहर समान रूप से लागू होता है.
_ न कोई सदैव शिखर पर रह सकता है और न ही धरातल पर..
_ समझदारी इसी में है कि हम सब जीवन की इस कटु सच्चाई को समय रहते समझ लें.!!
समझदार लोगों से अक्सर कहा जाता है की तुम तो समझदार हो, चुप रहो और यही बात उन्हें बार-बार ठगती है.!!
_ समझदार होना सच में कई बार सबसे बड़ा पागलपन बन जाता है,
_ क्योंकि समझदारी हमें दूसरों के लिए झुकना सिखाती है,
_ खुद को रोकना, खुद को समझाना सिखाती है..
_ हम हालात को समझ लेते हैं, लोगों की मजबूरियाँ समझ लेते हैं,
_ पर इसी समझ के बोझ तले अपनी ही बातें दबा देते हैं.!!
बुद्धिमान व्यक्ति मूर्ख को पहचान सकता है _ क्योंकि वह बुद्धिमान है _ दूसरी ओर,

_ एक मूर्ख एक बुद्धिमान व्यक्ति को नहीं पहचान सकता _ क्योंकि वह मूर्ख है.

हममें इतनी चतुराई अवश्य होनी चाहिए कि दूसरों के द्वारा हमारे खिलाफ़ चली गई चालों को हम पहचान सकें और उन्हें निस्तेज कर सकें.

_ हम दूसरे को मारें नहीं लेकिन यदि दूसरा हमें मार रहा है तो हमें अपना बचाव करना आना चाहिए.. “यही बुद्धिमानी है”
किसी के लिए अच्छा करना हमेशा सही होता है, पर जब वही अच्छाई किसी की नजर में हमारी कमजोरी या बेवकूफी बन जाए, _ तो वहां सिर्फ अच्छा होना काफी नहीं, थोड़ा समझदार और सीमाएं तय करना भी जरूरी हो जाता है.!!
समझदार व्यक्ति बड़ी से बड़ी बिगड़ती स्थितियों को दो शब्द प्रेम के बोलकर संभाल लेते हैं,, हर स्थिति में संयम और बड़ा दिल रखना ही श्रेष्ठ है.
समझदारी उम्र बढ़ने से नहीं, ज़िंदगी की ठोकरों और कड़े संघर्षों से आती है.!!
इज्जत वहाँ दी जाती है जहाँ सामने वाला समझदार हो,
_ अकड़ रखने वालों से तो बस दूरी ही बेहतर है.!!
समझदार लोग शोर नहीं मचाते..
_ जहां उनका आदर खत्म होता है, वहां से वे चुपचाप विदा ले लेते हैं.!!
कई ऐसे होते हैं, जिनकी उम्र तो बढ़ जाती है.. मगर समझ वही की वही रह जाती है.
_ क्योंकि वो सिर्फ़ उम्र से बड़े होते हैं समझ से नहीं..!!
जो समझाने से भी वक्त रहते नहीं समझे, उन्हें वक्त सब कुछ सिखा देता है,
_ फिर वो गिरते हैं उन्हें ख़ुद उठना पड़ता है.!!
हर टूटे हुए टुकड़े को जोड़ना आपकी ज़िम्मेदारी नहीं..
_ कभी-कभी समझदारी इसी में होती है कि आप खुद को बचाने के लिए पीछे हट जाएं.!!
हर जगह बुरा हाल है..  समझ में नहीं आता कि ये लूट किसलिए है ?
_ क्या रब का ज़रा भी ख़ौफ़ नही है ?
बुद्धिमान लोग हर चीज़ पर सवाल उठाते हैं, _

_ मूर्खों के पास हर बात का जवाब होता है !!

जो समझ गया उसका जीवन निखर गया..

_ जो समझाने में उलझ गया वो बिखर गया.!!
यदि आप औसत बुद्धि से थोड़ा भी ऊपर हैं,

_तो आपमें लोगों को गंभीरता से परखने की प्रवृत्ति होगी.!!

हर मौके पर बोलना बुद्धिमानी नहीं होती,

_ जो समय और स्थिति को समझकर बोलता है, वही समझदार होता है.!!

दुनिया में समझदार वही है जो सुनता ज्यादा है और बोलता कम..

_तभी तो वो दूसरों से आगे निकल जाता है.!!

हर किसी की समझ को ध्यान में रखकर कुछ नहीं लिखा जाता,

_ बल्कि समझने के लिए व्यक्ति को समझ विकसित करनी पड़ती है.!!

समझदार लोग बखूबी जानते हैं कि.. उन्हें ख़ुद को नासमझ कहाँ दिखाना है.!
अधिकतर लोगों को कम बुद्धिमान लोग पसंद आते हैं,

__क्योंकि उन्हें अधिक बुद्धिमान लोगों से चिढ़ होती है..!!

समझदारी इसी में है कि वक्त और नसीब को लेकर घमंड ना किया जाए..

_ क्योंकि हर रात के बाद सबकी सुबह आती है.!!

सब को समझाने वाला एक दिन ख़ुद ही समझ जाता है ;

_ बात कोई नहीं मानता, बात का बुरा सब मान जाते हैं..!!

आपको वो सभी चीजें सीखनी चाहिए जो आपको कभी नहीं सिखाई गईं,

_तभी आपकी समझ बढ़ती है.

जल्दबाज़ी में चीज़ों को ठीक करने की कोशिश कभी मत करो..

_ जब आप सोचने समझने की स्थिति में होंगे तो हर चीज़ ख़ुद ब ख़ुद ठीक हो जाएगी.!!

अगर किसी को समझाना चाहते हो, तो ये बात जानना जरूरी है, कि सामने वाला आपकी बात, समझने के लायक है भी या नहीं..

_ क्योंकि, घड़े में अगर छेद हो, तो पानी डालना, व्यर्थ जाता है.!
समझदारी यही है जो ख़ुद को ज्यादा समझदार समझे, समझने दो..

_ आप ख़ामोश रहो बस..

बस इतना समझदार बनना है कि,

“मेरा वो मतलब नहीं था..” का मतलब समझ सकूं.!!

इस छोटी सी जिंदगी का बस इतना सा सार है..

_बेवकूफ बना रहता है जो ..वो यहां समझदार है.

आपको दिमाग होने का भुगतान नहीं किया जाता है,

_ आपको केवल बुद्धिमानी से उपयोग करने का पुरस्कार मिलता है.

_ इसे बेकार मत छोड़ो – अपने दिमाग का इस्तेमाल करो.

कुछ बातें समझाने पर नहीं, बल्कि खुद पर बीत जाने पर ही समझ आती है.
जीवन बहुत विचित्र है, इसलिये समझदार लोगों को गुंजाइश लेकर हमेशा चलना चाहिए.!!
जैसे जैसे आप बुद्धिमान होते जाते हैं, _ वैसे वैसे आप के पास लोगों का जमाव कम होता जाता है.
समझदार इंसान दूसरों के जीवन में ताक-झाँक नहीं करता, वह दूसरों की निजता का सम्मान करता है.
जिसे हमारी कोई बात समझ नहीं आए, फिर भी हम उसे समझाते जाएँ और मन में सोचते भी जाएँ कि यह मूर्ख मेरी बात नहीं समझ रहा, तो मूर्ख वह नहीं, हम हैं, जो एक जड़बुद्धि के पीछे पड़े हैं.!!
कई बार जानने और लगातार सीखते रहने की हमारी आदत ही वो चीज़ बन जाती है जो मुश्किल हालात में हमें सबसे बड़ा फायदा दिला देती है..

_ क्योंकि जो इंसान सीखना नहीं छोड़ता, वह हर परिस्थिति में कुछ न कुछ समझ लेता है और वही समझ कई बार रास्ता भी बना देती है.!!
सबसे समझदार व्यक्ति वह होता है, जिसके आँख कान खुले हैं _ पर मुंह बंद है !!
बुद्धिमान वही होता है जो जानता है कि उसे मूर्ख कब दिखना है.!!
ज़िन्दगी ने समझदार बना के सिर्फ समझौते करना सिखाया है..
जीवन की त्रासदी यह है कि हम बहुत जल्दी बूढ़े हो जाते हैं और बहुत देर से बुद्धिमान होते हैं.

Life’s tragedy is that we get old too soon and wise too late.

“एक बुद्धिमान व्यक्ति एक ही पहाड़ी से दो बार नहीं गिरता”
“A wise person doesn’t fall down the same hill twice.”
“बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी अपने पैर के लिए एक कदम भी लंबा नहीं लेता है”
“The wise man never takes a step too long for his leg.”
“मूर्ख को कुछ कहना होता है,
_ एक बुद्धिमान व्यक्ति के पास कहने के लिए कुछ होता है”
“A fool has to say something. A wise person has something to say.”
“एक बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा एक रास्ता खोजेगा”
“A wise person will always find a way.”
“संकट की घड़ी में बुद्धिमान लोग सेतु बनाते हैं और मूर्ख लोग बांध बनाते हैं”
“In the moment of crisis, the wise build bridges, and the foolish build dams.”
“बुद्धि के बिना ज्ञान रेत में पानी के समान है”

“Knowledge without wisdom is like water in the sand.”
“केवल एक बुद्धिमान व्यक्ति ही एक कठिन समस्या का समाधान कर सकता है”

“Only a wise person can solve a difficult problem.”
“बुद्धि आग की तरह है _ लोग इसे दूसरों से लेते हैं”
“Wisdom is like fire. People take it from others.”
“बुद्धिमान व्यक्ति का हृदय निर्मल जल के समान शान्त रहता है”
“The heart of the wise man lies quiet like limpid water.”
“बुद्धि रातोंरात नहीं आती”

“Wisdom does not come overnight.”
असहमति में चुप रहना ही बुद्धिमानी है.
The wisdom lies in remaining silent in disagreement.
जरूरत से ज्यादा समझदारी इंसान को स्वार्थी बना देती है, उसके भीतर से सादगी और सरलता मिटा देती है,,

_ फिर हर जगह हर रिश्ते को वो संदेह भरी दृष्टि से देखने लगता है, जिससे उसकी आंतरिक ख़ुशी भी मिट जाती है..
_ इसलिए हर चीज़ जान लेना जीवन के उन पलों को भी इंसान से छीन लेता है जो उसके ना जानने तक उसे खुशनुमा लगते थे,,
_ बहुत सारी चीजें अज्ञात ही रहें तो अच्छा है ताकि कुछ बातों के उनसे संबंधों के एहसास बने रहें और इंसान उनमें ढला रहे..
_ जीवन के लिए ये बहुत उपयोगी है..!!
– रिदम राही
तुम समझदार हो, कह कह के ये दुनिया हमसे हमारे तमाम हक़ छीन लेती है.

_ तुम समझदार हो तो वो सब छोड़ते जाओ जो तुम्हारा था.
_ तुम समझदार हो तो तकलीफ़ होने पर रोने का हक़ छीन लिया जाता है.
_ तुम समझदार हो तो रिएक्ट करने का हक़ भी छीन लिया जाता है.
_ तुम समझदार हो तो कुछ मांग नहीं सकते.
_ तुम समझदार हो तो अपनी तकलीफ़ कह नहीं सकते, क्योंकि किसी और को बुरा लग सकता है.
_ तुम समझदार हो तो चुप रहो.
_ और एक दिन समझदार इंसान इतना ख़ामोश हो जाता है कि उसी ख़ामोशी में ख़त्म हो जाता है.
_ और फिर हमारे आसपास वाले कहते हैं अरे वो तो चुप ही रहती/रहता था..
_ कुछ कहती/कहता ही नहीं थी, कुछ पता ही नहीं चलता था.
_ ख़ैर समझदारी का मतलब ख़ुद को ख़त्म कर देना है.
– Nida Rahman
 
 
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