सुविचार – morning power – सुबह, सवेरा, भोर की ताकत – 089

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” सुबह की ताकत “

_ दिन की सबसे खूबसूरत शक्ल सुबह होती है. सुबहों का मैं हमेशा से दीदार करता रहा हूँ.
_ अब तक जहां- जहां रहा हूँ, वहां की सुबह बहुत अलग- अलग दर्शन देती रही है.
_कुछ ना कुछ नया हर जगह की सुबह से सीखने को मिलता है.
_हर सुबह को जीवन की नयी शुरुआत मान सकते हैं.
_कल से क्या मतलब. सुबह आपको आज का एहसास कराएगी.
_ अभी आज इसी समय में रहना सुबह होना है.
_ कल के काल में घटी नकारात्मकता से उबारना सुबह होना है.
_हर दिन एक नये जीवन का एहसास करना.
_ जैसे कि जो है वो आज से ही शुरू है, कल चाहे जैसा भी रहा हो, आज अच्छा ही होगा. इसका एहसास सुबह है.
_ऊर्जा का अनंत एकदिशीय प्रवाह जो सिर्फ आपको ताकतवर बनायेगा.
_ आप को कभी कितना भी कमजोर क्यों ना लगे, बस एक बार सुबह में डूब के देखिए
._प्रकृति की तेज बहती हवा में परिश्रम का स्नान सुबह करके देखिये,
_अपने नये होने का एहसास होगा आपको.
सुबह की ताज़गी महसूस करो.. क्योंकि ज़िन्दगी तो है.. हर लम्हा वासी हो ही रहा है.!
सुबह हो चुकी है, हवा में ताजगी है.. जैसे दिन मुझे भी ताज़ा रहने को कह रहा हो.!
अगली सुबह क्या होने वाला है और क्या नहीं _ यह सोने वाला भी जानता है क्या ?
_ शायद नहीं..!!
हर अंधेरा एक सवेरा लेकर आता है.. बस उस सवेरे तक ठहरने का साहस चाहिए.
**सुबह पार्क में बैठा सोच रहा हूँ —

कहाँ चूक गया मैं ?
_ ज़िंदगी ने जो दिया, उससे ज़्यादा शायद उम्मीदें थीं.
_ मेहनत और नतीजे के बीच एक ऐसी खाई है, जहाँ सपने गिरकर टूट जाते हैं.
_ अंत में —
_ ना जीत सुकून देती है, ना हार कोई मायने रखती है…
_ बस अधूरी ख्वाहिशें ही थका देती हैं.!!
**आज सुबह ठण्ड है, चाय पीते हुए सोच रहा हूँ..

_ एक कप चाय, और इस भीड़-भरे शहर से विदाई…
_ कैसे सब कुछ धीरे-धीरे टूट जाता है, बिना शोर किए, बिना बताये.
_ यह सिर्फ देह या दूरी की विदाई नहीं है,
बल्कि हर उस रिश्ते, हर जिम्मेदारी से भी विदाई है.
_ जो कभी आत्मा के ताने-बाने में गुँथी थी.
_ अब यह शहर बस एक स्मृति है.. – और स्मृतियाँ, भले चुभती रहें,
वे हैं.. – जिन्हें कोई समय, कोई कारण, कोई दूरी मिटा नहीं सकती.!!
आज सुबह कुछ नहीं किया, थोड़ा सा अपना सामान साफ किया, खाया पिया, आराम किया और कुछ देर एक किताब पढ़ी,

_ और सबसे बढ़िया.. कोई मैसेज- मेल नहीं देखी, ना जवाब दिया किसी का, सिस्टम को हाथ भी नहीं लगाया,
_ बस खुद में ही हूँ, दिमाग के मैन गेट पर ताला लगा लिया है ताकि कोई सरदर्दी ना हो, ना मिलना – किसी से ना बात करना, ना फोन ना कुछ, ना ज्ञान – ना विज्ञान
_ अभी शाम और रात बाकी है, यही जीवन ठीक है अब रोज इसे ही अपनाना होगा,
_ जिसे बात करना हो या कुछ काम हो टेक्स्ट कर दें, मन होगा तो जवाब दूंगा.. नहीं तो अपनी धुन में रहूंगा,
_ धीरे – धीरे मोबाइल और सब बंद, यही श्रेष्ठ है..
_ कभी – कभी ऐसा दिन भी होना चाहिए.!!
मेरी ज़िन्दगी का ..मेरा निजी पसंदीदा हिस्सा इसकी “सुबह” है.

_ “सुबह” के समय भी आपको बहुत सारे लोग दिखेंगे ..लेकिन सुबह के लोगों में एक अनोखी शांति का माहौल होता है.
_ न मोटर का शोर और न तेज़ आवाज़.
– हर ‘सुबह’ प्रकृति के उपहारों की याद दिलाती है, चाहे आप इसे कोई भी नाम दें’
_ हर सुबह यह सोचकर दुख होता है कि ..अगर एक दिन प्रकृति अपने प्राकृतिक तरीकों से काम करना बंद कर दे, ..तो हमारा जीवन कुछ ही क्षणों में लुप्त हो जाएगा.
_सुबह की रोशनी और हवा इतनी जीवंत और जीवन शक्ति से भरी होती है कि यह हजारों शानदार भोजन के बराबर होती है.
[The morning light and air is so alive and full of vitality that it equals the thousand splendid meals.]
_ जब भी आपको शांति की आवश्यकता होगी तो यह आपकी थेरेपी होगी.
[It will be your therapy whenever you need a calm.]
“सुबह और शांति”

___ ‘शांति ऐसी चीज़ है’ जिसे मैं खोना नहीं चाहता,
_ जो शांति मुझे ‘सुबह’ का साथ पाकर मिली..
_ सुबह की रोशनी और हवा जीवंत और जीवन शक्ति से भरपूर होती है.
_ ‘शांति’ जिसे मैं वर्षों से गलत लोगों से दूर रह कर..
_ और सही लोगों का साथ लेकर हासिल कर पाया हूं.
_ मैं अपनी पसंद को खोना नहीं चाहता,
_ मैंने लंबा समय लगा कर इसे हासिल किया है.
_ यही कारण है कि मुझे मेरी पसंद पर.. विश्वास इतना दृढ़ है.
— मैं अब अपनी शांति को खोना नहीं चाहता,
_ क्योंकि इसने मुझे एक उद्देश्य और जिम्मेदारी की भावना के साथ..
_ फिर से जीवन जीने की दिशा दी है.
_ ऐसा नहीं है कि मैं उसके बिना अपना जीवन नहीं जी रहा होता, लेकिन यह दिशाहीन होता,
_ मैं बस उन चीज़ों की तलाश में इधर-उधर भटकता रहता, जो अनावश्यक है.
_ मैं औरों की भांति अपना जीवन खोना नहीं चाहता, जिन्हें सही भी गलत लगता है.!!
– मैं कुछ न कुछ लिखता- पढ़ता रहता हूँ, किसी का ध्यान आकर्षित करने के लिए नहीं..
_ क्योंकि इससे मैं खुश महसूस करता हूँ..
_ बल्कि यह बताने के लिए कि.. मैं वह काम कर रहा हूं,
_ जो किसी ने मेरे लिए नहीं किया.!!
_ मैं अपने लिखने- पढ़ने की भावना को खोना नहीं चाहता;
_ यह एक ऐसी चीज है.. जिस पर मैं हमेशा विश्वास करता हूं..!!
_ शायद इसलिए कि.. मुझे मेरा जीवन इसी में मिलता है.!!
_ मैं अपनी मौलिकता [ originality] के साथ जीना चाहता हूँ..
_ और इसके अलावा, मैं खुद को खोना नहीं चाहता..
_ क्योंकि केवल.. मैं ही खुद को संभाल सकता हूं,
_ और मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता, कम से कम अब और नहीं..!!
सुबह-सुबह यूँ मन करता कि वक्त यहीं रुक जाए.

_इस सुबह की दोपहर कभी न हो.
_शामें जहां थकान, उलझनों, नींद, ज्यादा खा लेने का सबब है,
_ वहीं सुबहें… ताजगी, उमंग, नए विचार, भूख का प्रतिबिंब है.
_ पसंद है शाम, पर सुबह की चाह हमेशा रही..
_उम्मीद की एक छोटी सी किरण शाम रात के स्याह अंधेरे को छांट देती है.
_ सुबह सकारात्मक है… यह जीवन जीने के लिए बनी है.
आज झील किनारे टहलते हुए आसमान में पतंगें, हवाईजहाज, चील दिखाई दे रहीं थी,

_ ठण्ड के साथ खिली हुई धूप है, जिसे बस निहारते रहने को मन करता है, वही आंखों का सूकून है.
_ पहाड़, नदियों, झरनों से बातें करने की इच्छा हो रही थी,
_ लग रहा था मुझे भी कोई यूँ उड़ा कर उन तक पहुंचा दे !
_ यक़ीन मानिए.. मैं वह बिलकुल वह नहीं हूँ.. जिसे आप जानते हैं.!!
सुबह के 6:00 बजे हैं.

_ जो मुझे दिख रहा है, मुझे महसूस हो रहा है, बताऊं..
_ बस लिखूंगा… मुझे खुद नहीं मालूम कि क्यों और क्या लिखूंगा..
_ मौसम में हरा और सलेटी रंग का ..कॉम्बिनेशन..
_ यह जीवन के कई रंगों को जन्म देता है.
_ यह उत्साह को जन्म देता है,
_ यह मन की उमंग को जन्म देता है,
_ यह प्रसन्नता, वैभव, खुशहाली को जन्म देता है.
_ यह सिंबल है आने वाले दिनों की संपन्नता का..!!
_ अभी बालकनी में हूँ, सामने कुछ पछी नजर आ रहे हैं.
_ उछल कर कभी इस डाल पर तो कभी उस डाल पर चले जाते हैं..
_ और ऊपर आकाश में बादल इधर से उधर आ- जा रहे हैं..
– शीतल, मंद हवा चल रही है.. घनघोर घटा छायी है,
_इस छटा का आनंद वही ले सकता है, जो जल्दी उठता हो,
_जिसमें प्रकृति को ग्रहण करने की क्षमता हो.
__ अभी अभी कोई पछी की आवाज आई.
_ कोई बनावटी आवाज सुनाई नहीं दे रही.
_ सिर्फ कुछ पंछियों की आवाज है.
_ किसी ट्रैफिक या रसोई से बर्तन खड़कने की आवाज नहीं.
_ कानों में एक सीटी सी बज रही है, इतनी शांति की आदत नहीं इन कानों को..
_ मै भाग्यशाली हूं ..जो अक्सर ऐसी सुबह ..किसी ऐसी जगह होता हूं..!!
सुबह होने ही वाली है,

_ पेड़ों से चिड़ियों के कलरव की ध्वनि मेरे कानों को गुदगुदा रही है,
_ मेरे चारों और शांति है और मैं अकेला बैठा विचारमग्न हूँ,
_ कभी-कभार अव्यवस्थित मन घबरा उठता है,
_ ऐसे में मेरी डायरी के कोई पन्ने को पढ़ कर मुझे शांति की आश्वस्ति होती है,
_ विचलित मन को आराम सा मिलता है,
_ पढ़ते हुए ऐसा लग रहा है ..
_ जैसे मेरी आवाज़ को सुंदर शब्दों से बुन दिया गया हो..!!
**आज सुबह थोड़ी ठंड है, तिसपर आज बारिश भी मेहरबान है ..

_ बालकनी में लगे गमलों में से फूलों कि मिलीजुली गंध मन को मदहोश करने को काफ़ी है,
_ इनके पास जाते ही अतींद्रिय [extrasensory] अनुभव होता है …
_ दवाओं और ध्यान के असर से अब सुख और दुख दोनों में मन थिर रहने लगा है,
_ साथ में अतिव्यस्तता कुछ सोचने का अवसर ही नहीं देती,
_ सुख, दुःख, सदभाव, लाभ, आनंद, उल्लास जैसी अनुभूति होती है.
_ अब न शिकवा, न गिला, न इंतज़ार न उम्मीद ..किसी चीज़ की जरूरत ही नहीं महसूस होती है..
_ अक्टूबर से फरवरी मेरा मौसम होता है,
_ तन के करीब, मन के करीब और जीवन के करीब ..
_ जब मैं अधिक जीवंत और अधिक खुश रहता हूं..
_ हर चीज़ के प्रति कृतज्ञ, हर चीज़ के प्रति प्रेम से भरा..
_ गर्मी मुझे नापसंद, इस मौसम में ..मैं जीवित नहीं रहता हूं, बस जीने का अभिनय करता हूं..
सुबह-सुबह खिले हुए फूल मुझे तेरी याद याद दिलाते हैं..

– सूर्य की चमक की पहली किरण के साथ तुम कितने सुंदर दिखते हो ;
_ मुझे आश्चर्य होता है कि ..मैंने कभी तुम्हारे सुबह के लुक की प्रशंसा कैसे नहीं की,
_ जबकि तुम बिल्कुल स्वाभाविक थे, सुंदर बनने की कोशिश नहीं कर रहे थे..
_ इस अनभिज्ञ दृष्टि ने मुझे झकझोर कर रख दिया कि.. भले ही मुझे पता नहीं हो कि अपना दिन कैसे बिताऊंगा,
_ फिर भी तू मुझे अपने साथ चाहता है.
_ ‘अपने दिन में एकमात्र चीज’ मैं इन पलों को बार-बार जीने में भाग्यशाली महसूस करता हूँ.
_ और मैं उन्हें फिर से जीने के लिए कुछ भी करूंगा, भले ही इसके लिए मुझे ऐसा व्यक्ति बनना पड़े..
_जो दुनिया की पहुंच से बाहर हो ..लेकिन हमेशा तेरे पास हो.
_ क्योंकि मुझे पता है ..तुम चाहोगे कि मैं तुमसे ऊपर रहूँ, जैसा कि तुमने हमेशा किया है.
— इसीलिए फूल मुझे तुम्हारी याद दिलाता है;
_ उन्हें कभी इसकी परवाह नहीं होती कि.. उनकी पत्तियाँ उनके ऊपर हैं,
_ क्योंकि अंदर से वे नहीं जानते थे कि.. यह उनके अपने भले के लिए है.
_ यह उन्हें सूरज की तेज़ किरणों से बचाने के लिए है;
यह सब उनके लिए ढाल बनने के बारे में है.
_ ठीक वैसे ही जैसे मैं तुम्हारे लिए था !!
आज सुबह 5:30 बजे पछियों की आवाज से मेरी आंख खुली..

_ मुझे लगा की ये मुझे बुला रहे हैं, बुला क्या चिढ़ा रहे हैं.
_ और उठकर देखा तो वे इस डाल से उस डाल डोल रहे थे,
_ यूँ लगा जैसे मुझसे कह रहे हों.. ठंड लग रही है क्या ? चाय बनवाऊं.? साथ में बिस्किट भी खा लेना..
_ यही तो है आप इंसानों का…
_ हमे देखो, न कफ़ न बलगम, न जोड़ों का दर्द न सांस फूलने की बीमारी, न पकाने का झमेला न स्वाद की चाहत…
— जाओ.. दिवाली आने वाली है,
_ फिर दिखावे करना..
_ हमारी न ईद न दिवाली… हमारे सिर्फ मौसम त्यौहार हैं,
_ जो असल में ईश्वर ने बनाए हैं.
_ जीवन आपसे कम है पर सुकून है.
_ हमने न सड़क बनाई न मशीनें, न जहाज.
_ शायद हमें जरूरत ही नहीं.
_ हमारे पास पासपोर्ट भी नहीं.
_ हमे किसी की इजाजत भी नहीं चाहिए.
—- वास्तव में उनकी की बातों में सच्चाई है.
_ इंसान ने विकास कर सब बर्बाद कर दिया.
_ परिंदों को न गठिया है न इन्हें स्ट्रोक आता है, और आता भी होगा तो इल्म नहीं.
_ हमने जान कर क्या उखाड़ लिया.
_ लालच बढ़ा, बीमारी बड़ी, समस्या बढ़ी, ईगो बढ़ी, प्रभुत्व बढ़ा… पर हमने अपनी स्वच्छंदता खो दी.
_ हमने अपना मूल खो दिया.
_ अब हम केवल जो सामान बनाया था, उसी को निभा रहे हैं.
_ पहले बीमारी बनाई, फिर उसका इलाज बनाया.
_ अब उस इलाज को अपना विकास बता रहे हैं..!!
आज सुबह उठा तो बाहर अँधेरा है ..पर बिल्कुल अंधेरा भी नहीं है.

_ लग रहा था हवा शीत और पारदर्शी है ..एकदम हल्की फूल जैसी..
_ बॉलकनी में खड़ा हूँ तो ठंडी हवा देह को छूती है और ऐसी मीठी सी सिहरन होती है..
_ जिसे कोई नाम नहीं दिया जा सकता..
_ बिना चिंता, बिना किसी तनाव के बॉलकनी से ठंड को महसूस करते हुए आसमान में धुंधले से दिखते तारों को देखते हुए सोचता हूं कि ..आख़िर सुख क्या है !!
_ इस मीठी, शीतल, निर्भार हवा में चुपचाप आकाश ताकना …क्या सुख नहीं है !
_ ..याकि अलग अलग फूलों की गंध को पहचानने की कोशिश करना सुख नहीं है !!
_ गंध की लिपि को आँखें बंद करके ही पढ़ा जा सकता है,
_ क्योंकि खुली आँखें तो रंग की लिपि में उलझ जाती हैं..
_ आस-पास लगे हजारों पेड़ों की गंध, उसके फूल पत्तों की गंध..
_ सारी गंध एकसाथ गड्ड मड़्ड होकर ..मन को सुख में डुबा देती हैं…,
— मन खुश है, संतुष्ट है, निहाल है,,,
_ क्योंकि यह उसके मन को भाने वाला मौसम है..
_ यह सर्दी का मौसम है…
ये सुबह होते ही नींद का खुल जाना,

_ कई ख्याल मंडराने लगे हैं दिल में,
_ वो ख्याल जो मुझे हर रात सपनों में जगाते रहते हैं…
_ ये घड़ी की टिक-टिक…जो सिर्फ रात को ही सुनाई देती है..
_ ये अँधेरा मुझे वक़्त का एहसास कराता है,
_ और मेरे और आपके बीच की दूरियां..
_ जहाँ मुझे सब कुछ सामान्य दिखता है,
_ जैसे सब आसपास ही घटित हो रहा है,
_ और वो बाहर खिड़की, जहां मेरी नजर अभी अभी गई है,
_ वहां से बहती हुई हवा ..कुछ समझा रही है मुझे..
_ कि किसी को जीवित रखना ..सिर्फ मेरा काम नहीं…
_ तुम्हारा भी योगदान होना चाहिए…
सुबह का जादू हकीक़त है, छलावा नहीं है..

_ ये खूबसूरत और मनमोहक है..
_ मैंने देखा है और महसूस किया है..
_ कि वाक़ई सुबह बेहद हसीन होती है,
_ मैंने महसूस किया है सुबह का स्वाद..
_ सब से आला और निराला होता है,
_ सुबह की हलचल एक अलग दुनियां का एहसास कराता है,
_ मैंने देखा है कि सुबह अपनी जेब में ज्यादा ही ताज़गी रखता है..
_ ये जो प्रकृति है ..ये हर पल जादू कर रही है,
_ ये हर पल अपनी खूबसूरती को और निखार रही है,
_ आपको हर पल बदलते हुए नजारे मिलते हैं,
_ हर जगह अपने आप में खूबसूरत है.. ये जादू है,
_ मैं हर वक्त इस जादुई दुनियां से घिरा रहना चाहता हूं,
_ इसमें जीना चाहता हूं.!!
” सुबह का जादू”

_ अब सुबह हो गई है, मगर यह सुबह धुंध लिपटी हुई है,
_ उजाला फैला तो सही, मगर उसकी ठंडक में सुकून है,
_ हवा कितनी सुंदर, कितनी शीतल है एकदम पारदर्शी और निर्भार..
_ दुआर पर सूखे पत्तों की कालीन बिछी है,
_ हवा के एक झोंके ने.. उन्हें उस डाल से बिलगा दिया.. जहां उनका जन्म हुआ था..
_ और चिड़ियों का इतना बोलना, लगता है ये आपस में बातें करती होंगी..
_ घासों की नोक पर ओस की बूंदे ऐसी ठिठकी हैं.. जैसे आंखों की कोर में ठहरे आँसू.. चमकती हुई, झिलमिलाती हुई..
_ अभी बस सूरज की किरणें निकलेंगी और इन बूंदों को अपने आंचल से पोंछ देंगी..
आज फिर सुबह हो गई..

_ हर रात यही सोचते बीत जाती है कि आखिर ‘मैं यहां क्यों हूं’
_ ज़िंदगी जैसे एक पुरानी, घिसी हुई फिल्म बन गई है,
_ जिसे देखने का मन नहीं करता, लेकिन रुक भी नहीं सकता !!
_ सुबह हो चुकी है..
_ बाहर लोग अपने-अपने काम में लग गए हैं,
_ लेकिन मैं अंदर ही अंदर कहीं अटका हुआ हूँ.
_ शायद खुद से, या शायद उस सवाल से जो हर सुबह मुझे घूरता है..
_ “आगे क्या ?”
सुबह हो गई है,

_ मैं एकांत में शांत बैठा हूँ और हर तरफ बस सन्नाटा है,
_ तभी दिमाग में कोई अनचाहा विचार आ गया, मैंने उसे पूरी शक्ति से भगाना चाहा और वो दोगुनी ताकत से मुझ पर हावी होता है,
_ मैं जब ऐसी बुरी स्मृति को भुलाना चाहता हूँ, और वो सब सामने ऐसे नाचता है..
_ जैसे आज की ही बात हो..
_ अंदर भावनाओं का भूचाल आ जाता है.. हृदय कचोटने लगता है..
_ उस बुरी स्मृति से निकलने की कई सालो की कोशिश क्षण भर में व्यर्थ हो जाती है, खैर !!
मैंने आज सुबह को महसूस किया, आरामदायक लेकिन ठंडा..!!

_ मैं कामना करता हूं कि यह हमेशा ऐसा ही बना रहे, क्योंकि मुझे इसी की जरूरत है.
_ मुझे एक शांतिपूर्ण जगह की जरूरत है,
_ जहां मैं अपना दिमाग बंद कर सकूं और जब चाहूं सो सकूं..
_ मैं जागकर.. लोगों में शांति की तलाश नहीं करना चाहता.
_ बहुत हो गया; मैंने यह किया है; यह मेरे लिए अच्छा नहीं है.
_ तो चलिए.. बस मैं तुम्हारी इतनी प्रशंसा करूंगा, जितनी पहले कभी किसी ने नहीं की.
_ लोग कहेंगे या तो मैं पागल हूँ या सुबह से प्यार करता है.
_ कोई भी सच हो सकता है.
_ आइए एक-दूसरे का ख्याल रखने और एक-दूसरे की शांति बनने के बारे में एक समझौता करें..!!
सुबह की पहली किरण जब आंखों में पड़ती है, तो सबसे पहले मैं सांस लेता हूं…फिर मुस्कुराता हूं.!

_ कारण ? बस इतना कि मैं हूं… मैं ज़िंदा हूं.
_ रात और सुबह के बीच एक पतली-सी डोर होती है, जो सबको पार नहीं करने देती.
_और मैं… खुली आंखों से यह नया दिन देख पा रहा हूँ.
_ क्या यह किसी चमत्कार से कम है ? “नहीं”
_ यह तो रोज़ मिलने वाला एक अनमोल तोहफ़ा है, जिसे हम अक्सर खोलना ही भूल जाते हैं
_ मैं चारों तरफ देखता हूं – कोई अपना दिख जाए तो उसकी तरफ मुस्कुराहट भेज देता हूं.
_ क्योंकि पता है, एक दिन आएगा जब या तो मैं नहीं रहूंगा, या वो नहीं रहेंगे.
_ उस दिन की उदासी से बचने का एक ही तरीका है, आज के साथ को पूरे दिल से जीना.
_ बाहर पेड़ों पर ओस टपक रही होती है,पत्तों पर हल्की धूप खेल रही होती है.
_ ये भी कल रात सोए थे, और आज मेरे साथ उठे हैं.
_ जीवन हर सुबह हमें चुपचाप यह कहता है, तुम्हारे पास एक और दिन है.
_ प्यार करने का, गले लगाने का, धन्यवाद कहने का, और हां… मुस्कुराने का..
_ कुछ नया सीखने का, अपने काम को कल से थोड़ा और बेहतर करने का,
_ और अपने सपनों को हकीकत के एक कदम और करीब लाने का।
_ क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा,
_ जब सुबह तो होगी… लेकिन हम नहीं होंगे.
_ इसलिए आज का दिन पूरे दिल से जी लो, जैसे यही तुम्हारी आख़िरी सुबह हो.!!
“सुबह खूबसूरत है” उठो, खिलो, चहचहाओ, जीवन एक भोर है.!

_ आसमान से खुशनुमा हवा आ रही है और इसे महसूस करते हुए..
_ मुझे फिर से बचकाना होने की याद आती है.
_ जब तुम नहीं होते तो.. मैं नहीं हंसता.
_ ऐसा नहीं है कि मेरे आसपास लोग नहीं हैं; वे हैं.
_ लेकिन मुझे उनके साथ अच्छा नहीं लगता;
_ शायद मैं उनके साथ जीवित महसूस नहीं करता.
_ मुझे तुम्हारे आसपास रहने की याद आती है,
_ जहां हम बिना घड़ी या विषय पर ध्यान दिए.. घंटों तक लगातार बात करते हैं.
_ हमारी बातें अनावश्यक हैं, लेकिन वे जीवन से भरपूर हैं.
_ तुम्हारी मौजूदगी में “मैं अकेले अपने साथ का आनंद भी उठाता हूँ,”
_ इस एहसास के साथ कि तुम यहां हो.!!
_ अब, मैं सब कुछ सिर्फ इसलिए करता हूं.. क्योंकि यह आवश्यक है;
_ कुछ भी करने में कोई मज़ा नहीं है. हर चीज़ समय की बर्बादी लगती है.
“मुझे नहीं पता कि यह कैसे काम करता है,
_ लेकिन मुझे लगता है कि मैं खुद से ज्यादा ‘सुबह’ और ‘आकाश’ से जुड़ा हुआ हूं.”
मैं आज सुबह ऐसी जगह बैठा हूं:

_ जो हर सुबह और शाम पक्षियों के गायन को सुनने के लिए बहुत शांत है.
_ एक ऐसी जगह जो मौसमों से भरी है, और मैं उनमें से हर एक के साथ खुद रह सकता हूं.
_ मैं बहुत ठंडी हवा के साथ अपनी सर्दियों का आनंद ले सकता हूं और फिर भी हर दोपहर सूरज देख सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मैं कभी भी, हर समय आकाश देख सकता हूं, और यह हमेशा की तरह सुंदर है.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे रोजाना चंद्रमा देखने को मिलता है,
_ यह एक ऐसी जगह है, जहां मुझे ख़ुशी ढूंढने के लिए भागना नहीं पड़ता;
_ वरना हर जगह हर कोई आता है और पूछता है कि.. मैं जीवन में क्या कर रहा हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मैं अपनी सुबह का उतना ही आनंद ले सकता हूं,
_ जितना मैं अपने दिन या रात का आनंद ले सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे हर शाम खूबसूरत सूर्यास्त देखने को मिलता है.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे भागदौड़ या कुछ न कुछ करना नहीं पड़ता.
_ बस बैठ सकता हूं, कुछ नहीं कर सकता और जीना चुन सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जो मेरे द्वारा देखी गई दुनिया से भी अधिक जीवंत है.!!
अभी सुबह होने वाली है, हुई नहीं है..!!

_ बालकनी के बाहर बल्ब की रोशनी में आस-पास का धुंधला दिख रहा है..
_ लेकिन मन में उजाला है.!
_ इस समय घरों में सब गहरी नींद सो रहे हैं, रब उनकी सुबह सुंदर करे.
_ अभी थोड़ी देर बाद सूरज दिखेगा.. और आंखें चमक जाएंगी,
_ अभी मन शांत है, बालकनी से आने वाली रोशनी और अंधेरे का खेल देख रहा हूँ.
_ पीठ हजार करवट सोते जागते थक चुकी है..
_ अब आँखों को ठंडक चाहिए.!!
_ आसमान से ओस झर रही है, हवा में ठंडक है..
_ आस-पास के दीखते पेड़ आश्वस्त कर रहे हैं.
_ अब मैं हूँ जमीन पर और मन आसमान पर..!!
सुबह-सुबह धरती पर सूर्य की किरणें बिखर रही हैं,

_ प्यासे पेड़-पौधों पर ओस की बूंदें टपक रही हैं,
_ पत्तियों पर ओस थिरक रही है..
_ चहुं ओर हरियाली महक रही है..
_ बहती हवा में रुनझुन सुनाई दे रही है..
_ डगमगाते मन में उम्मीद भर रही है..
_ याद दिला रही है ‘जीओ मस्ताना जीवन’
_ जी लो अपने आज को, अपने हासिल को..
_ अपना जीवन समझ, जी भरकर जी लो..
_ क्योंकि यह पल, हर पल न रहेगा..!!
**आज सुबह ठंड बहुत है..

_ मैं बालकनी में गया तो लगता है.. हवा जमा देगी मुझे,
_ लेकिन मेरे अन्दर का अलाव अचानक से दहक उठता है..
_ और मन करता है.. कोई जीवन भर की चुप्पी मुझमें उतर जाए..
_ बस किसी से कुछ भी न कहूं, कोई शिकायत न करूं, न किसी बात का रोना मुझे छूकर गुजरे..
_ तो मैं इस भाव से चुप बैठा रहूँ, कोरा और भावना शून्य हो जाऊं.!
_ अपनी नसों में उबलते हुए खून को, मस्तिष्क में दौड़ते हुए सवालों को और पैर में पड़ी जंजीरों को महसूस कर ही न पाऊँ.!!
_ अपने ज्ञान का पूरा भंडार खाली कर दूं,
_ बन जाऊं एक प्राण रहित-भाव रहित पत्थर का टुकड़ा..!!
आज सुबह हल्की-हल्की बारिश हो रही है,

_ सामने बादलों का झुंड दिख रहा है तो धुंधलका और बढ़ गया, कुछ साफ नहीं दिख रहा..
_ बारिश की बूंदों से मुझे परहेज नहीं, गालों पर बूंद के छींटे का अहसास हो रहा है..
_ बादलों की गड़गड़ाहट से मौसम में संगीत का एहसास हो रहा है..
_ मुझे भीगना पसंद है, ठंडे हाथों से चेहरे को पोंछने में अच्छा लगता है..
_ गीले पैरों से सामने न दिखते पहाड़ पर जाने को जी करता है..
_सर्द हवा, वो मसाला चाय… मेरे पास कुछ और वक्त होता तो यहीं रुक जाता..!!
“सुबह के गतिशील रंगों का संयोजन”

[“Combination of dynamic colors of the morning”]
… मानो रब आसमान के कैनवास पर हर रोज़ नया चित्र बनाता है.. हमको विस्मित करने के लिए !;
_ आसपास का सन्नाटा ऐसा लगता.. मानो सब कुछ थम गया हो और सिर्फ फुसफुसाहट सुनाई दे रही है..
_ मैं इतना हल्का महसूस कर रहा हूँ कि.. फुसफुसाहट धीमे स्वर में सुनाई दे रही है.. और बहती हवा में जैसे एक मिठास हो..!
_ ऐसा लगता है.. जैसे धरती और आकाश ने दूरियां मिटाकर एक-दूसरे को समेट लिया हो..
_ जब हम अच्छा महसूस करते हैं, तो शब्द कम पड़ जाते हैं ; आंखें भाषा बन जाती हैं.!!
मैं जब सुबह – सुबह नींद से जागता हूँ तो.. जो पहली याद जेहन में उभरती है वो ‘सुबह’ ही होती है.

_ वक्त बदल गया, हालात बदल गए, इंसान बदल गए, पर सुबह अब भी नहीं बदली.
_ ‘सुबह’ अब भी पहले की ही तरह हर सुबह आती है.
_ मैं बालकॉनी के बाहर पेड़- पौधों पर फुदकती -चहचहाती चिड़ियों को निहारता रहता हूँ.. एक ख़ालीपन लिए.!!!
_ ‘सुबह’ मेरे पूरे जेहन में उतरकर खुशियाँ बिखेर देती है और एक मधुर एहसास से भर देती है..
_ ‘सुबह’ एक तुम्हीं तो हो.. जो हर हालात में हर जज्बात में और हर खयालात में साथ बनी रहती हो..!
_ मैं आगे बढ़ता रहा और कितना कुछ जिंदगी से गुजरता चला गया,
_ लेकिन तुम आज भी पूरी शिद्दत से मेरे साथ चल रही हो..
_ सुबह ने मेरी कितनी ही यादों को तह लगाकर मेरे अंदर समेट रखा है..
_ ना जाने कितनी मुलाकातें तुमने मुझमें दर्ज की हैं.
_ कैसे भूल सकता हूँ उन पलों को.. जब अपने एकांत से मैं थक जाता हूँ या परेशान हो जाता हूँ,
_ तब ‘सुबह’ मुस्कुराती हुई आती है और हौले से मेरे कानों में कहती है – पगले, परेशान क्यूँ होते हो ,मैं हूँ ना..!!!
_ “सुबह’ जिंदगी के अनगिनत पलों के ना जाने कितने एहसासों को मैंने तेरे संग जिया है.
_ कहने को तो बहुत कुछ है तुम्हारे बारे में.. लेकिन बस इतना कहूँगा सुःख हो या दुःख तुम हमेशा साथ रहना,
_ चुपके से सच्चे साथी की तरह एहसासों को समेटती रहती हो !!
बीते साल की उदासी आज नए साल की सुबह में उतर आई है,

_ मानों वह गुजरना ही नहीं चाह रहा हो.!
_ मन बीते साल की उदासी में खो कर ना जाने कहां भटक जाता है.
_ आज नए साल के आने पर लगता है कि..
_ जिन्दगी ने जो एकमुश्त एक साल दिया था, वह खत्म हो गया है।
_ बाहर कोहरा अपनी बाहें फैलाकर दिन के उजाले को ढ़क लेना चाहता है,
_ बाहर सबकुछ बदल रहा है, हवाएँ सर्द होती जा रही हैं और धूप नर्म..
_ मौसम की सर्द रातें लम्बी हो चली हैं..
_ ये लम्बी राते उस बुढ़ापे की तरह होती हैं, जो खत्म होने का नाम ही नहीं लेता..
_ दिन जवानी के दिनों की तरह सिमटता जा रहा है..
_ जिन्दगी मे उतार पर तो रिश्ते की गर्माहट भी कमजोर होने लगती है और भावनाएं जम कर ठहर सी जाती हैं.
_ प्रकृति बदल रही है, लेकिन मन ठहरा है.
_ ऐसा लगता है जैसे.. मुझे नया या पुराना जो भी साल हो.. इस से कोई लेना देना नहीं है.
_ जिसने जीवन की नश्वरता को स्वीकार कर लिया हो..
_ बीतता साल प्रतीक है उतरान का, ढ़लान का, अवसान का..
_ जीवन के पड़ाव पर ठहर कर आगे बढ़ने का संकेत है..!!
—- कुछ भी नया नहीं लगता..!!!
_ और ना ही लगता है कि अरे ये क्या हुआ कैसे हुआ,
_ मन पीड़ाओं और तमाम सुखों की अनुभूतियों से ऊपर उठकर उपेक्षा के गर्त में इस कदर डूब चुका होता है कि..
…. ना ही यह चौंकता है ना ही आतंकित और ना ही अचंभित, बस जो भी है अच्छा है.!!
मुझे ढलता हुआ सूरज बहुत पसंद है,

_ आसमाँ में दूर तक फैली हुई लालिमा आँखों को सुकूँ से भर देती है,
– इसे देख कर ऐसा लगता है जैसे शाम ने दिन भर की थकान से खामोशी की चादर ओढ़ ली हो
— ताकि.. फिर सुबह किसी सूरजमुखी के फूल जैसे खिल सके…!!
देर से उठकर सुबह को छोटा मत करो, या उसे अयोग्य कामों या बातों में बर्बाद मत करो; _ इसे जीवन की सर्वोत्कृष्टता के रूप में, कुछ हद तक पवित्र के रूप में देखें.

_शाम बुढ़ापे की तरह है: हम सुस्त, बातूनी, मूर्ख हैं. _ हर दिन एक छोटा सा जीवन है: हर जागता और उठता हुआ एक छोटा सा जन्म, हर ताज़ा सुबह एक छोटी सी जवानी, हर आराम और नींद के लिए जाता हुआ एक छोटी सी मौत.- Arthur Schopenhauer

Do not shorten the morning by getting up late, or waste it in unworthy occupations or in talk; look upon it as the quintessence of life, as to a certain extent sacred. Evening is like old age: we are languid, talkative, silly. Each day is a little life: every waking and rising a little birth, every fresh morning a little youth, every going to rest and sleep a little death. – Arthur Schopenhauer

पक्षियों की चहचहाहट और हवा की फुसफुसाहट के साथ जागना हमेशा सुखदायक होता है, जब आप जागते हैं तो आप कैसे जागते हैं ? क्या आप मौन में जागते हैं, या क्या आप प्रश्नों और करने वाली चीजों की एक सूची के साथ जागते हैं ?

जागने के बारे में मुझे जो सबसे खूबसूरत चीज पसंद है, वह है इससे निकलने वाली खामोशी ; सुबह में, मेरे पास कोई प्रश्न या कोई खोज नहीं है; इसलिए, मैं हमेशा इस क्षण में हूं.

सुबह हमेशा इस बात की याद दिलाती है कि मैं अपनी प्राकृतिक अवस्था में कैसा हूं ; _ अक्सर जब मुझे नहीं पता कि क्या करना है, तो मैं सुबह के क्षण में खुद के बारे में सोचता हूं, और उस शांति की स्थिति से, मुझे हमेशा एक प्रतिक्रिया मिलती है जो सांस लेने या हवा के रूप में स्वाभाविक होती है ;

सुबह हमेशा एक गहरी, अधिक वास्तविक स्वयं की भावना में प्रवेश करने का अवसर बनाती है ;  _ तो, इस तरह सुबह की शुरुआत हुई..

जिनको गहरी नींद नहीं आती वो समझ पाते हैं कि दुनिया में सुबह से अच्छा कुछ होता ही नहीं.!!
आप जिस तरह से अपने दिन की शुरुआत करते हैं, उससे आपके बाकी दिन पर बहुत फर्क पड़ता है.

_सुबह जल्दी उठने और सुबह अच्छा मूड रखने से आप पूरे दिन खुश महसूस करेंगे ;
_ भोर की शांति आपके दृष्टिकोण में अद्भुत आकर्षण का भाव ला सकती है.
_ भोर दिन का सबसे सुंदर और शांत समय होता है ; जैसे ही सुबह की हवा आपके चेहरे पर आती है, पक्षियों की गुनगुनाहट सुनने की शांति और दुनिया को रोशनी से भरते देखना आत्मा में एक अकथनीय आशा और शांति लाता है.
_ “सुबह की रोशनी दिन भर के काम के लिए आपकी भावना और उत्साह को नवीनीकृत कर देती है.”
_ “भोर एक नए और आशापूर्ण दिन को जन्म देते हुए चमकती है.”
_ “भोर सभी के लिए एक ताजगी लेकर आती है.”
रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो,
_ सवेरा एक वादा निभाता है.. फिर से लौट आने का.!!
चटख सुबहों के बाद मटमैली दोपहरें भी देखने की आदत डाल लेनी चाहिए दिल को.!!

सुविचार – सब्र – सबर – 088

हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है. उत्साह मनुष्य को कर्मों में प्रेरित करता है और उत्साह ही कर्म को सफल बनाता है.
कभी किसी का दिल ना दुखाओ, क्योंकि अगर उसने सब्र कर के _

_ रब पर छोड़ दिया तो तुम्हारे लिए कहर बन जायेगा..

सब्र का घूंट दूसरों को पिलाना कितना आसान लगता है, _

_ लेकिन जब खुद को पीना पड़ता है तब कतरा कतरा जहर लगता है..

ज़िन्दगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है, _

_ मैंने हर शख्स को यहाँ, खुशियों का इंतज़ार करते देखा है !!

सब्र की एक बात बहुत अच्छी है, _

_ जब आ जाता है, __ तो किसी की तलब नही रहती..

सहने वाले को अगर सब्र आ जाए तो _

_ कहने वाले की औकात दो टके की रह जाती है.

जरूरी नही की किसी की बद्दुआएं ही आपको तबाह करे,

_ किसी का सब्र भी आपको बर्बाद कर सकता है,,

किसी के सब्र की अत्यधिक परीक्षा नहीं लेनी चाहिए,

_ कोई भी तिनका आखिरी तिनका हो सकता है.

सब्र और सहनशीलता कोई कमजोरियां नहीं होती हैं, _

_ ये तो अंदरूनी ताकत है जो केवल मजबूत लोगों में होती है.

हम इंसान बड़े अजीब हैं, कुछ ना मिले तो सब्र नहीं करते _

_ और अगर मिल जाये तो फ़िर उसकी कद्र नहीं करते.

अगर जिन्दगी में कुछ बुरा हो तो थोड़ा सब्र रखना, _

_ क्यूँकि रोने के बाद हँसने का मजा ही कुछ और होता है.

सबर कर बन्दे मुसीबत के दिन भी गुज़र जायेंगे…

_ हसी उड़ाने वालो के भी चेहरे उतर जायेंगे..

सब कुछ मिला है हमको फिर भी सबर नहीं, _

_ बरसों की सोचते हैं पल की खबर नहीं..

जब सहने वाला सब्र करना सीख जाए,

_ तब कहने वाले की अहमियत खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है.!!

सब्र कर बन्दे ..मुसीबत के दिन गुजर जायेंगे !!

_ आज जो तुझे देख के हंसते हैं, वो कल तुझे देखते रह जायेंगे !!

गुस्सा अकेला आता हैं, मगर हमसे सारी अच्छाई ले जाता हैं !

_ सब्र भी अकेला आता हैं, मगर हमें सारी अच्छाई दे जाता हैं !!

जो सब्र के साथ इंतजार करना जानते हैं, _

_ उनके पास हर चीज़ किसी ना किसी तरीके से पहुँच जाती है.

पलकों की हद से टूट कर मेरे दामन पे आ गिरा…

_ एक आँसू मेरे सब्र की तौहीन कर गया….

वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता !!!

सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता !!!

” जो तेरे पास है उसी में सबर कर, और उस की कदर कर, _

_ यहां तो आसमान के पास खुद की जमीन नहीं ”

सब्र की चादर ओढ़िए..

_बुरे वक्त के बाद ही अच्छे दिनों की रौशनी आती है.!!

सब्र की जड़ें चाहे जैसी भी हों, इसके फल सदैव मीठे होते हैं.

जो खोया है उससे भी बेहतरीन पायेंगे, _सब्र रख दिन तेरे भी आयेंगे.
जो लोग सब्र करते है… __ या तो वो जीत जाते हैं या सीख जाते हैं.
सब्र कोई कमज़ोरी नहीं होती, ये वो ताकत है, जो सब में नहीं होती !!
ज़िन्दगी में कुछ रास्ते सब्र के होते हैं और कुछ रास्ते सबक के..!!
सबर रखो, समय का न्याय सबसे सटीक होता है..
_ और उसे किसी गवाह की भी जरूरत नहीं पड़ती.!!
सब्र रखो हर चीज़ आसान होने से पहले ” मुश्किल ” होती है.
सब्र के लिए इतना काफी है कि हम इस क्षण में जीवित हैं.
” सब्र करना ” दुनिया के सामने रोने से __ बेहतर है..
मिल जाए तो शुक्र करो, _ ना मिले तो सब्र करो.
वांछित के लिए बेसब्र न होने की कला और अवांछित को दूर करने की कला यदि आप सीख लें तो आप हमेशा खुश रहेंगे.!!
समझ न आया ऐ जिंदगी तेरा ये फलसफा, _ एक तरफ कहती है _ सबर का फल मीठा होता है

_ और दूसरी तरफ कहती है वक़्त किसी का इंतजार नहीं करता…

जिंदगी को धीरे धीरे करीब से जाना तो पता चला कि जिंदगी सब्र के सिवा कुछ नहीं..

_ किसी ने किरदार पर उंगली उठाई तो सब्र, कोई बिछड़ गया तो सब्र, कोई रूठ गया तो सब्र कुछ माँगा और वो ना मिला तो सब्र..!!
जब कोई सब कुछ देखते हुए भी चुप रहे___तो उसे बार-बार इतना परेशान न करें कि वह आपके लिए नासूर बन जाए !!

_क्योंकि समय के साथ सब्र टूट जाता है !!

सबर आने तक का खेल है सब..

_ना फिर किसी से मिलने की ख़ुशी रहती है और ना किसी से बिछड़ने का गम.!!

ये ज़िंदगी एक सफ़र है,

इस सफ़र में सबर रख के चल,

जो कहना है तुझको वो कह के ही उठ,

ना दिल में ज़रा भी कसर रख के चल,

खिंचा आए ”काबा” जहाँ सर झुके,

तू सज़दे’ में इतना असर रख के चल…….

सुविचार – मृत्यु – मौत – काल – 087

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शुक्र कीजे कि मौत है वरना ज़िन्दगी से हमें बचाता कौन – Shakir Dehlvi
मरने वाले के साथ मरा नहीं जाता,
_ पर अहाने-बहाने उसके लिए कोई रीत निभा कर उसके साथ जीने को महसूस किया जा सकता है.!!

– Manika Mohini

तबियत देने लगी है रोज इशारे, क्यों न सफ़र के लिए सामान समेटा जाए.!!
एक दिन कहानी बन कर रह जाएंगे हम सब, कोशिश करें कि कहानी अच्छी रहे.!!
ये इतना घमंड किस बात का है, मालूम है ?
_ एक वक़्त आएगा जब शरीर को स्थिर हो जाना होगा, उस क्षण से पहले आपने क्या किया होगा, क्या नहीं किया होगा- सब व्यर्थ रह जाएगा.
_ कोई भी बात मायने नहीं रखेगी, बस अचानक से आप ख़त्म सब कुछ ख़त्म.!!
मौत हमेशा द्वार पर खड़ी है.. जितनी देर बचे रहे.. उसी को हम जिंदगी कह कर काम चला लेते हैं.!!
मृत्यु बुढ़ापे तक सीमित नहीं, मृत्यु हर उम्र में मौजूद है.!!
एक दिन विशिष्ट से तुच्छ हो जाएंगे, मैं, आप, हम सब विलुप्त हो जाएंगे.!!

_ जो लोग चले जाते हैं — वो पलट कर कहाँ आते हैं ?

वो सब जा चुके हैं जिन्हें तुम जानते थे, जो तुम्हें जानते थे..

_ अब तुम्हें भी चलना चाहिए अब वक़्त बर्बाद मत करो और जब मुझे होश आएगा,

तब तक मैं भी किसी वक़्त में ख़त्म हो चुका रहूँगा…!
चाहे जितना उड़ लो.. बस दो दिन की ज़िन्दगी है दो दिन का मेला.!!
अपनी आंखों को आश्चर्य से भर लें, फिर दुनिया देखें,

_ऐसे जिएं जैसे कि “एक दिन, आप इस दुनिया को छोड़ देंगे”;
_ यह किसी भी सपने से ज्यादा शानदार है..!!
कुछ सवाल उम्रभर अनसुलझे ही रहते हैं ; और इंसान खाली हाथ पैदा होता है,
_ पर जाता हमेशा अपने अनकहे दर्द और रहस्यों की गठरी लेकर ही है.!!
हम पैदा होते हैं खाली हाथ और जाते भी वैसे ही हैं,

_ जो इस सत्य को जान लेता है, वह कभी घमंड नहीं करता.!!
हमें लगता है कि आम तौर पर लोग सोचते हैं कि वे मरने से डरते हैं,

_ लेकिन वास्तव में लोग जीने से अधिक डरते हैं.!!

कल की जिसे थी फ़िक्र वो आज चल बसा..!

_ इसलिए आज में जी लो यारों.. कल का किसी को क्या पता..!!

काल के आगे सभी लाचार हैं, ज़िन्दगी का एक कोना दर्द से भरा होता है..

_ फिर भी जीने की जिद में ज़िन्दगी मुस्कुराती ही रहती है.

कई लोग सोचते हैं कि वे आरामदायक जीवन जीने के लिए काम कर रहे हैं,

_ जबकि वास्तविकता में, वे आरामदायक मृत्यु पाने के लिए काम कर रहे हैं !!

कोई इंसान मर जाए तो उसकी कीमत बढ़ जाती है;

_ अगर वह जिंदा रह गया तो दुनिया उसे जिंदा रहने की सजा देती है..!!

अगर आपको पता चल गया ना कि लोग कितनी जल्दी मरने वालों को भूल जाते हैं,

_ तो आप लोगों को प्रभावित करने के लिए जीना बंद कर दोगे..!!

जब हमारा कोई करीबी मरता है तो हमें दुख होता है, लेकिन जब कोई पराया मरता है तो हमें उतना दुख नहीं होता.

_ यानी दर्द की वजह मौत नहीं, बल्कि संबंध होते हैं.!!

आजकल भावनाएँ भी अजीब हो गई हैं,
_ किसी इंसान की मौत की खबर अब मन को नहीं छूती, बस एक पल की खामोशी और फिर वही दिनचर्या.!!
किसी की मृत्यु के बाद उसके बारे में ओछी बातें कहना, मृतक को ओछा नहीं बनाता..

_ चाहे इंसान ओछा रहा हो या महान, मृतक सिर्फ दो ही चीज़ें डिज़र्व करता है श्रद्धांजलि या मौन.!!
जब लोग जीवित रहते हैं लोगों को मुगालता रहता है कि वह सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं.. कि वह नहीं होंगे तो उनका घर, उनका परिवार, उनका कार्य स्थल सब अनाथ हो जाएंगे, बर्बाद हो जाएंगे..!

_ पर कटु सत्य यह है कि कुछ लोगों को छोड़ दें तो आपके होने न होने से कहीं कुछ भी नहीं रुकता, न बर्बाद होता है..
_ जीवन की सबसे अच्छी या सबसे बुरी बात यही है कि यह चलता रहता है, किसी के साथ भी, किसी के बिना भी..!!
जीते जी तो हम आदमी को भुला कर रखते है,

_ उसके दुख सुख की कभी जानकारी भी नहीं लेते, मर जाने पर बड़ा याद करते है.
_ काश ! हम जिंदा आदमी की परवाह करनी सीख जाय तो मरने का इतना अफसोस भी न हो.!!
उस व्यक्ति के लिए जीवन में कुछ भी भयानक नहीं है जो यह जान लेता है कि मृत्यु में कुछ भी भयानक नहीं है.

There is nothing terrible in life for the man who realizes there is nothing terrible in death.

यदि मरने के बाद मृत्यु आपको कोई पीड़ा नहीं पहुँचाती है, तो अब उसके भय को आपको पीड़ा पहुँचाने की अनुमति देना मूर्खता है.

If death causes you no pain when you’re dead, it is foolish to allow the fear of it to cause you pain now.

अच्छे से जीने की कला और अच्छे से मरने की कला एक ही है.

The art of living well and the art of dying well are one.

मुझे मौत से क्यों डरना चाहिए ?

यदि मैं हूं तो मृत्यु नहीं है.

यदि मृत्यु है, तो मैं नहीं हूँ.

मुझे उस चीज़ से क्यों डरना चाहिए _जिसका अस्तित्व तभी हो सकता है _जब मैं नहीं हूँ ?

मौत के सामने हम लाचार हैं, मजबूर हैं.

_ कोई कितना भी ताकतवर हो, मज़बूत हो वो मौत को नहीं टाल सकता है.
_ बस एक लम्हा आएगा और सब ख़त्म.._ कोई कुछ नहीं कर सकता, कोई किसी को बचा नहीं सकता.
_ये दुनिया फरेब है, ये रिश्ते धोखा हैं._ हकीकत सिर्फ़ ओ सिर्फ़ मौत है, जो सच है.!!
क्षमा करें, लेकिन जब आप मरेंगे तो आपके घर वाले एक ही दोपहर में आपके सारे सामान को कूड़ेदान में फेंक देंगे ;

_वे जल्द से जल्द उस सामान से घर को साफ़ कर देंगे ;
_ वे आपका कबाड़ नहीं चाहते..
—- कुल मिलाकर वे आपका घर और पैसा चाहते हैं ;
_ कड़वी सच्चाई है, लेकिन सच है __ इसलिए _ उनके लिए इसे बचाने का बहाना न बनाएं.
जिंदगी क्या है, मौत क्या है ?

_ दरअसल हर चीज़ व्यर्थ ही है..
_ अच्छा किया जाए तब भी और बुरा किया जाए तब भी,
_ मृत्यु के बाद सब कुछ यहीं धरा रह जाता है, क्योंकि मृत्यु के आगे सब बराबर हो जाते हैं.
_ इसलिए शायद बिना अच्छाई-बुराई के फर्क में उलझे जीवन जी लेना चाहिए.!
आप निर्वस्त्र आये थे आप निर्वस्त्र ही जायेंगे.

_ आप कमज़ोर आये थे आप कमज़ोर ही जायेंगे.
_ आप बिना धन-संपदा के आये थे आप बिना धन-संपदा के ही जायेंगे.
_ आपने पहला स्नान भी स्वंय नहीं किया आपका अंतिम स्नान भी आप स्वंय नहीं कर पायेंगे, यही सच्चाई है..
_ फिर किस बात का इतना अभिमान किस बात की इतनी नफरत.
_ किस बात की इतनी दुर्भावना, किस बात की इतनी खुदगर्जी.
_ इस धरती पर हमारे लिए बहुत ही सीमित समय है, और हम इन मूल्यहीन बातों में बर्बाद कर रहे हैं.!!
जीवन तो जैसे तैसे सामाजिकता ढ़ोते बीत रहा पर अपनी मृत्यु के लिए मैं बहुत सख़्ती से अपने घरवालों को कहूँगा कि मेरे मरने के बाद शोक संदेश, मृतक भोज और तेरह दिन का टिटिम्मा नहीं करें..

_ मेरी मुक्ति के लिए कोई उपाय करने की ज़रूरत नहीं..
_ क्योंकि जिसपल मेरी मृत्यु होगी मेरी आत्मा उसी पल लोगों से और लोग मुझसे मुक्त हो जाएंगे..
==मैं पलटकर झांकने नहीं आऊंगा,
_क्योंकि मैंने देख लिया है कि परिवार और कुछ नजदीकी लोगों को छोड़कर किसी को भी आपके होने न होने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता..
_हो सकता है कि मेरी बात लोगों को असंवेदनशील लगे पर आजकल शोक को भुनाना ट्रेंड में है..
_अब शोक लोगों को स्तब्ध, अवाक नहीं करता ..बल्कि वह लोगों को न केवल मुखर बना रहा बल्कि नए नए प्रयोग करने को भी उकसा रहा,
तुम्हारे शोकोत्सव से ज़्यादा भव्य मेरा शोकोत्सव है यह चलन में है..
_तेरहवीं में पूरा परिवार एक रंग के कपड़े पहनेगा..दर्ज़नों प्रकार के पकवान बनेंगे..सेल्फ़ी ली जाएगी..मृतक की तस्वीर के इर्द गिर्द की सजावट इतनी भव्य होगी कि जयमाल का स्टेज शरमा जाए..
_स्त्रियाँ पूरे मेकअप में होंगी.. पुरुष उसी तल्लीनता और निश्चिन्तता से राजनीति ,खेल और मौसम पर चर्चा करते हुए ठंडा/गर्म पेय पियेंगे ..जैसे वह ऑफिस,नुक्क्ड़ या किसी अन्य पार्टी में जाने पर करते हैं..
_कुछ लोग वीतरागी की तरह फ़ोन चलाते हुए खाना शुरू होने का इंतज़ार करेंगे..
_बस बच्चे अपने सहज स्वाभाविक रूप में दौड़ते, भागते, खेलते, खाते दिखेंगे..
— यहाँ शोक में गरिमा नहीं होती _ख़ासकर स्त्रियों को देखता हूँ कि ..वह मृतक के घर यह जांचती हैं कि ..कौन कितना चीखकर विलाप किया,
_आप मौन विलाप नहीं कर सकते ..क्योंकि उसमें उन्हें मज़ा नहीं आता..
_ वह आपको रोते चीखते, बेहोश होते देखने को आतुर रहेंगी..
_कई जगह मैंने देखा कि ..मृतक के जीवित रहते उसके नज़दीकी रिश्ते से भले बातचीत तक बन्द रही हो ..पर उसके मरते ही वे बेहोश हो जाते हैं,
_कई तो ऐसे चीखेंगे कि ..आसमान थर्रा उठे और पांच मिनट बाद ही सब ऐसे सामान्य हो जाएंगे ..जैसे कुछ हुआ ही नहीं,
_किन्तु जैसे ही कोई नया रिश्तेदार, नातेदार आया नहीं कि ..फ़िर गगनभेदी चीखें उठने लगेंगी और मृतक के बच्चे कोने में सहमे यह सब तमाशा देखते रहेंगे..
— रिश्तेदार जिस निस्पृह भाव से तिलक बरीक्षा में ऐन मौके पर जीमने पहुंचते हैं, ..उसी तटस्थता से वह तेरहवीं में भी एकदम ठीक समय पर आते हैं,
_रस्मन बातचीत और भोजन के बाद सब निकल लेते हैं..
_पीछे शोक में, थकन में, चिंता में डूबा परिवार अकेला बचता है..
_माँ, बाप, भाई को खोने के समय हमने यह देख लिया कि किसी को हमारी फ़िक्र नहीं थी,
_फ़िक्र थी तो यह कि कब यह संयुक्त परिवार टूटकर बिखरेगा ..क्योंकि परिवार के स्तंभ ढह चुके थे..
— हालांकि लोग मृतक भोज की प्रशंसा यह कहकर कहते हैं कि ..यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई ..ताक़ि लोग तेरह दिन इतने व्यस्त रहें कि ..वह अपने दुख को भूले रहें..
_पर अपने माता पिता, पति या पत्नी अथवा बच्चे को खोने के बाद इतनी अधिक सामग्रियों को इकट्ठा करना, इतनी रस्मों को निभाना एक प्रकार की क्रूरता है..
_ दान के राशन, बर्तन, कपड़े, गहने को कहीं नाऊ झगड़ रहा कहीं पंडित..
_कोई न बुलाये जाने पर नाख़ुश है तो कोई परोसा न मिलने पर नाराज़..
_इन सब व्यवहार से वितृष्णा होती है..
_लोग आ रहे, लोग जा रहे तो बस इसलिए कि ..लोकाचार की बही में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवा सकें ..न कि इसलिए कि ..वह आपके दुख से दुखी हैं..
नोट- यह सार्वभौमिक सत्य नहीं है ..बस समाज के बदलते व्यवहार पर एक टिप्पणी मात्र है.
अगर कल आप मर जाते हो तो अंतिम संस्कार में आपके रिश्तेदार चाय पी के चले जाएंगे.

_ एक हफ्ते में ही ऑफिस वाले आपकी पोजीशन के लिए कैंडिडेट ढूंढने लग जाएंगे।
_ दो दिन तक कुछ दोस्तों की इंस्टा स्टोरी में रहोगे.. उसके बाद सबकी अपनी अपनी लाइफ चालू हो जाएगी।.
_ आपका पार्टनर भी आपसे आगे बढ़ जाएगा.
_ आपकी फैमिली भी कुछ टाइम बाद फिर से नॉर्मल हो जाएगी.
_ कुछ पल का मातम फिर हंसते लगेंगे लोग – जीना सीख जाते हैं, किसी के बिना मरते नहीं है हम.
_ आपके म्युचुअल फंड को क्लेम करने नॉमिनीस फॉर्म भरेंगे.
_ डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए लाइन में लगेंगे.
_ दुनिया चलती रहेगी..- जैसे चल रही है.
_ धीरे-धीरे आपके परिवार को भी आपकी नामौजूदगी की आदत हो जाएगी.
_ “जो कह रहे थे मर जाएंगे तुम्हारे बिना” देखना उन्हें कितनी जल्दी किसी और से मोहब्बत हो जाएगी.
_ जहां धड़कन रूकी.. वहां आपका नाम भी खत्म.
_ कुछ लोग जिनको आप अजीज समझते हो.. वह आपके अंतिम दिन भी नहीं आएंगे.
_ कुछ लोग तुम्हारी तारीफ के पुल बांध रहे होंगे और कुछ लोग अभी भी आप पर हंस के चले जाएंगे.
_ आप आंगन में पड़े होंगे और बातें पॉलिटिक्स की चल रही होगी,
_ आपको किस डायरेक्शन में लेटाना है.. इस बात पर बहस हो रही होगी.
_ लोग खाना खाकर चले जाएंगे.. किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
_ आप इतने जरूरी नहीं थे.. किसी के लिए.. तब सब पता चलेगा ;
_ इसलिए खुद के लिए जीया करो – किसी और के लिए नहीं.
_ किसी के चले जाने से दुनिया नहीं रुकती..
_ लोग चले जाते हैं.. फिर बस तस्वीर देखकर याद करते हैं लोग – याद में रखना बंद कर देते हैं.
_ तो आज से अपनी खुशी के लिए काम करो.. अपने लिए जियो.
_ खुद को प्रायोरिटी दो.. नहीं तो दूसरों को खुश करते-करते मर जाओगे.!!
अगर हम मृत्यु को ठीक से पहचान लें, तो इस पृथ्वी पर वैर का कारण न रह जाए.
_ जहां से चले जाना है, वहां वैर क्या करना ?
_ जहां से चले जाना है, वहां दो घड़ी का प्रेम ही कर लें.
_ जहां से विदा ही हो जाना है, वहां गीत क्यों न गा लें, गाली क्यों बकें ?
_ जिनसे छूट ही जाना होगा सदा को, उनके और अपने बीच दुर्भाव क्यों पैदा करें ?
_ कांटे क्यों बोए ? थोड़े फूल उगा लें, थोड़ा उत्सव मना लें, थोड़े दीए जला लें !
_ वास्तव में यही सच्चा धर्म है इस पृथ्वी का और उसके मनुष्य का.
_ जिस व्यक्ति के जीवन में यह स्मरण आ जाता है कि मृत्यु सब छीन ही लेगी; यह दो घड़ी का जीवन, इसको उत्सव में क्यों न रूपांतरित करें !
_ इस दो घड़ी के जीवन को प्रार्थना क्यों न बनाएं ! पूजन क्यों न बनाएं !
_ झुक क्यों न जाएं-कृतज्ञता में, धन्यवाद में, आभार में! नाचें क्यों न, एक-दूसरे के गले में बांहें क्यों न डाल लें !
_ मिट्टी मिट्टी में मिल जाएगी.
_ यह जो क्षण-भर मिला है हमें, इस क्षण-भर को हम सुगंधित क्यों न करें !
_ इसको हम धूप के धुएं की भांति क्यों पवित्र न करें, कि यह उठे आकाश की तरफ, ईश्वर की गूंज बने !
– OSHO
जीवन अपने हिसाब से जिएं, यूँ तो जीवन छोटा लगता है, महज साठ – सत्तर बरस की यात्रा – जो सभ्यता के बरक्स बहुत कम कालावधि है, पर जब जीने को हम उतरते है तो एक – एक पल भारी होता है,

_ इसमें हम हर किसी को खुश नहीं रख सकते, हर किसी को नाराज नहीं कर सकते,
_हम हर किसी के हीरो या हीरोइन नहीं बन सकते – ना ही किसी के खलनायक भी
_ एक टेढ़ा – मेढ़ा रास्ता है – धूल, कंकड़, गुबार और अंधड़ से भरा हुआ और बस गुजरना है – अपनी इच्छाओं को पूरा करते हुए या त्याग करते हुए
_ अपने आप से बार बार कहता हूँ कि एक ही जीवन है – बगैर किसी की अपेक्षा पर खरे उतरे या किसी बड़ी महत्वकांक्षा को पूरी करने के ख्वाब को संजोए – बस जी लो, अपने पसंद की कर लो,
_ यदि तुम्हे लगता है कि यह करने से खुशी मिलती है, या संतुष्टि तो कर लो एक बार अपनी वर्जनाएं और डर छोड़कर..
_ मरते समय छाती पर कोई तमगा होगा तो भी धू – धू कर जल जाएगा, बस यह याद रहेगा कि इसने जीवन कैसे जिया, जीवन को कैसे आनंदित भाव से पूर्ण किया – बाकी सब तो माया है,
_ हम जानते ही है, सब छोड़ दो यश, कीर्ति, पताकाएं और वो सब जो जीने से रोकता है.
– Sandip Naik
जिस दिन तुम मृत्यु को प्राप्त होगे उस दिन लोग तुम्हारा नाम भूल जायेंगे और तुम्हें अर्थी के नाम से संबोधित करेंगे। चारों तरफ़ तुम्हें उस घर से श्मशान ले जाने हड़बड़ी मची होगी, जिस घर को तुमने कभी बहुत शिद्दत से बनाया था। जो लोग तुम्हारे जीते जी तुमसे कभी मिलने नहीं आये वो भी औपचारिकता निभाने आयेंगे और इंतज़ार करेंगे कि जल्दी जल्दी सब हो और वो लौटकर वापस जाएं।
फ़िर तुम्हारा अंतिम संस्कार हो जाएगा और तुम्हारी चिता की राख ठंडी होने से पूर्व लोगों के आँसू सूख जाएंगे। जब लोग श्मशान से लौटकर आएंगे तो तुम्हारे परिवार के लोग उनके चाय नाश्ते के इंतज़ाम में जुट जाएंगे। तुमसे संबंधित सभी चीज़ों को घर से बाहर कर दिया जाएगा और धीरे -धीरे लोग अपने कामों में व्यस्त हो जाएंगे और धीरे धीरे तुम्हें भूल जाएंगे।
तुम जब तक जीवित हो तभी तक तुम सोच रहे हो कि सब अपने हैं मगर वास्तविकता यह है कि यह सब अस्थाई है। जिस दिन तुम चले जाओगे, उस दिन के बाद तुम्हारे अपने घर में भी तुम्हारा जिक्र कभी नहीं किया जाएगा क्योंकि अब तुम्हारा अस्तित्व समाप्त हो चुका है और तुम किसी के किसी भी काम नहीं आने वाले हो। यही संसार का सत्य है इसे समझ लो और रिश्तों के मोह से बाहर निकलकर अपने जीवन का आनंद लो।
– Mayank Mishra

सुविचार – प्रतिक्रिया – रिएक्ट – React- 085

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जब भी विपरीत परिस्थिति आपके सामने आए, दो मिनट रुक कर सोचें कि

मेरी कौन- सी प्रतिक्रिया मुझे सही दिशा में ले जाएगी.

इंसान के असफल होने का एक प्रमुख कारण _

_उसका बिना सोचे समझे _ प्रतिक्रिया देने की आदत है.

जब आप प्रतिक्रिया करने से पहले रुकते हैं तो _

_ आप दस गुना अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं..

शांत होकर सोचने से हर समस्या का समाधान मिल जाता है.

जीवन में आगे बढ़ने के लिए किसी भी बात पर तुरंत रिएक्ट करने की जगह.. सोच- विचार कर प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

जीवन एक बड़ी यात्रा है, अतः हमें हर किसी को जवाब देने की..

_ और प्रत्येक चीज़ पर प्रतिक्रिया करने की कोई जरुरत नहीं है,,

_ जिस यात्रा का चुनाव हमने स्वयं किया हो, उसके उतार चढ़ाव हमें ही स्वीकारने होंगे..!!

किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लोभ को यदि कुछ वक़्त के लिए टाल दिया जाए, तो बाद में सोचने पर अपनी तुच्छता/महत्वहीनता को आसानी से स्वीकार किया जा सकता है.

_ क्योंकि जब हम लोगों को समझने लगते हैं तो शांत होने लगते हैं.!!

सुविचार – पर्व – त्यौहार – उत्सव – उल्लास – हर्षोल्लास दिवस -समारोह – फेस्टिवल- Festival – 084

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जिस दिन आपने खुल कर के अपनी जिंदगी जी ली बस वही त्यौहार है…

..बाकी सब कैलेंडर की डेट्स हैं…

** कोई भी उत्सव इतना खास नहीं होता, अच्छे से जीया गया जीवन ही खास होता है..!!

_ जिंदा रहना सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर मुझे अपने कपड़े या अन्य चीजें किसी और खास मौके के लिए क्यों बचाकर रखना चाहिए ?
“ज़िंदगी ही जब सबसे बड़ा अवसर है, तो हर दिन को खास मानकर जीना भी एक समझदारी है –
कल के लिए बचाया गया ‘आज’ अक्सर अधूरा रह जाता है.”
_ अक्सर हम जीवन को भविष्य के किसी “परफेक्ट दिन” के लिए रोक देते हैं,
और आज को बस रिहर्सल मानकर निकाल देते हैं.
_ अगर सच में मान लें कि ‘जिन्दा रहना ही सबसे बड़ा अवसर है, तो फिर –
अच्छे कपड़े “किसी दिन” नहीं, आज के लिए हैं,
पसंदीदा जूते किसी समारोह के लिए नहीं, आज की चाल के लिए हैं, महक किसी को दिखाने के लिए नहीं, खुद को महसूस कराने के लिए है.
_ हम चीज़ें बचाकर इसलिए रखते हैं.. क्योंकि भीतर कहीं डर होता है –
“कहीं ये पल ज़ाया न हो जाए”
_ पर सच्चाई उलटी है –
पल चीज़ों के लिए नहीं होते, चीज़ें पलों के लिए होती हैं.
_ जो जीवन को टालता है,
वह धीरे-धीरे खुद को भी टालने लगता है.
_ और एक दिन समझ आता है – हमने सब संभाल कर रखा था… सिर्फ़ जीना भूल गए थे.
_ आज अगर जी रहे हो, तो आज ही अवसर है.
_ बाकी सब सिर्फ़ तारीख़ें.!!
त्यौहार ख़त्म हो गए हैं अब, अब सिर्फ तारीखें बची हैं.!!
जीवन एक यात्रा है, और यह यात्रा अकेले नहीं की जाती.. इसे उत्सव बनाइए..!

_ जब किसी के साथ हैं, तो सिर्फ़ शारीरिक रूप से ही नहीं, मन का साथ दीजिए.. क्योंकि असली साथ वही है.!!

उत्सव का कारण कभी भी और हर समय बनाया जा सकता है.
जीवन सुंदर है उन लोगों के कारण _ जो साधारण खुशियों को बड़े उत्सवों में बदलने की कला जानते हैं.
प्रसन्न रहना, संतुष्ट रहना, शांत रहना, उत्साहित रहना, जीवन उत्सव के रंग हैं.

इसलिए हर पल को जी भरकर जीओ, हर दिन महोत्सव है.

जब हम सार्थक जीवन [meaningful life] जीते हैं, तो हमें किसी उत्सव का इंतजार नहीं करना पड़ता,

_ हमारे जीवन की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि एक उत्सव [celebration] होती है.!!
पहले त्यौहार में उतना थोड़ा भी बहुत ज्यादा होता था,

_ _ अब बहुत ज्यादा में उतना बहुत की खुशी गुम सी है..!!

लोग अगले ही दिन भूल जाते हैं कि कल कोई उत्सव भी था..

_ लोग कितने प्रतिबद्ध [Committed] हैं अपने-अपने दुखों में लौटने के लिए.!!

त्यौहार, पर्व, उत्सव, चाहे उनका ताल्लुक देश से हो या व्यक्तिगत खास अवसरों से, जीवन में खुशियाँ लाते हैं.

हमें ये खुशी के अवसर कभी नहीं छोड़ने चाहिए..

_ जब हम इन्हें सेलिब्रेट करते हैं तो हमारे ख़ुशी के पल बढ़ जाते हैं.

किसी भी पर्व, त्यौहार या ख़ास अवसर में ऐसा कुछ न करें ..जिससे किसी की या आपकी ही ज़िंदगी तबाह हो जाए.

_ आप ख़ास अवसर को मनाएं, पूरे हर्षोल्लास से मनाएं.
_ लेकिन सावधानी का साथ ..एक पल को भी न छोड़ें.
_ जीवन अनमोल है, और ज़रा-सी लापरवाही जीवनभर का दर्द दे सकती है.
अब तो सभी त्यौहार हर साल आते हैं, चुपके से गुजर जाते हैं, _ऐसा क्यों हो रहा है   पिछले कई वर्षों से ?

पहले अपनी भीनी-भीनी खुशबू छोड़ कर जाते थे.

_ और अब ? अब क्या हो गया है जो यह त्यौहार पहले जैसे नहीं रहे ?

अब तो त्योहारों पर बधाई और शुभकामनाएँ लेने-देने का व्यवहार बच गया है, जो थोड़ी-बहुत खुशी दे जाता है ; _ चलिए, इसी खुशी को मना लूँ मैं..!!

_ त्यौहार खत्म होने के बाद के लम्हें को झेलना काफी कष्टकारी होता है.. खैर,

_ हम सभी जानते है कि जीवन में खुशियों का पल क्षण भर के लिए आता है.!!

त्योहारों के मायने बदल गए हैं, लोग बदल गए हैं, रिश्ते बदल गए और खुशियाँ तो ख़ैर.!
एक मेरे बचपन के त्यौहार थे..

_ अब तो जिंदगी की भागदौड़ ने सबकुछ खत्म कर दिया है…
_ जो प्रेम आपस में बचपन में था,, वो बड़े होने पर न जाने कहां खो जाता है…
_ क्या सच में हम समझदार होते हैं,, या बेवकूफ बनते चले जाते हैं…
_ मगर वो बचपन के त्यौहार काफी पीछे छूट चुके हैं..
_ अब तो त्योहारों पर बधाई और शुभकामनाएँ लेने-देने का व्यवहार बच गया है.!!
_ अब तो ऐसा लगने लगा है कि ये दिन आया ही क्यों.. और जब आ ही गया तो जल्दी बीत क्यों नहीं रहा.. _ फिर लगने लगता है कि ये फेस्टिवल जश्न के लिए नहीं आते.. बल्कि ये याद दिलाने आते हैं कि अब खुशी भी अजनबी लगने लगी है.!!
अब तो किसी भी फेस्टिवल का नाम सुनते ही अजीब सा एहसास होने लगता है,
_ और न जाने क्यों मेरे अंदर एक बेचैनी सी पैदा हो जाती है.

_ वो नीरस आवाज़ें अब मेरे कानों में मिठास नहीं लातीं, हँसी और खुशी का शोर अब बोझिल सा लगता है.
_ ऐसा लगता है मानो हर कोई बस खुशी, प्यार और अपनापन का अभिनय कर रहा है.
_ मुझे नहीं पता कि मुझे किससे नफ़रत है: लोगों से या इन रस्मों के पीछे छिपे झूठे सुकून से..
_ मैं बस इतना जानता हूँ कि मेरा दिल अब इन बंधनों को नहीं, सिर्फ़ सच्चे जुड़ाव को चाहता है.!!
ना पहले जैसी खुशी है न पहले जैसे लोग न पहले जैसा समय.. 
_ जैसे जैसे समय बीत रहा.. भावनाएं निर्जीव होती जा रही हैं.!!
हिन्दुओं में इतने त्यौहार होते हैं (अन्यों का पता नहीं) कि सब मनाने बैठो तो आदमी जीवन में और कुछ कर ही नहीं सकता..

_ करने लायक रहता ही नहीं..
_ किसी के पास इतना समय कहाँ है ?
_ हम सिर्फ़ जन्माष्टमी, होली, दिवाली मनाते हैं.!!
पर्व- त्योहार होते रहना चाहिए..

_ नहीं तो निगेटिविटी और नीरसता आ जायेगी।
_ और कितने लोगों के आमदनी पर फ़र्क पड़ने लगेगा;
_ हर समय पर्व- त्यौहार का ध्यान रहता है,
_ बड़ी बड़ी कम्पनियां ही नहीं छोटे मोटे धन्धे वालों को भी इन्तजार रहता है,
_ पर्व- त्यौहार का कि थोड़ा ज्यादा और महंगी बिक्री होगी और कुछ पैसे बच जायेंगे।
_ त्यौहार के बहाने ही सही कपड़े और श्रृंगार के सामान के साथ कुछ जरूरी सामान भी आ जायेगा..!!
_ जश्न की उम्मीद ही जिन्दगी को जीने के लिये सबसे मजबूत कड़ी है, _ वरना तो बेरंग जिन्दगी जीने के कोई मायने नहीं.!!!
कोई भी दिवस हो, कोई भी कार्यक्रम हो ..उसमें लगने वाला समय ..आटे में नमक जितना होना चाहिए,

_ यानी मुख्य कार्य कभी बाधित न हो ..इसका खयाल रखना चाहिए..
_त्योहार, दिवस, पर्व मनाइए …पर ध्यान रहे इसे गौण [secondary] और जीवन को प्रमुख स्थान दें..
..बाकी बड़ी बड़ी बातें, तर्क करने के लिए कुछ भी कहा जा सकता है..
_ अपवादों की बात नहीं करिए, अधिकतर क्या हो रहा ..उसपर विचार करिए न !!…
— हमें न गरीबी चाहिए और न ही अमीरी;
_हमें हमारे लिये सुविधाजनक जीवन चाहिए.!!
त्योहारों को मनाना हमारी परम्परा है लेकिन अब उनमें आवश्यक परिवर्तन ज़रूरी हैं.

पानी, दूध, अनाज, विद्युत ऊर्जा [ इलेक्ट्रिक ] या पेट्रोल- डीज़ल की बर्बादी और पर्यावरण की अशुद्धता- ऐसी समस्या है,

_जिस पर हम यदि गंभीर नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी हमारी लापरवाही को भुगतेगी.

_हमें अपने ‘साक्षर’ नहीं, सुशिक्षित होने का व्यवहार करना चाहिए.

_एक कहावत है- `बचाया हुआ यानी कमाया हुआ.’

उत्सव क्या है ? एक दिन का उल्लास ;

_ हम खुश ना होकर भी खुश होने और दिखने का अभिनय कर रहे होते हैं.
_ “जिससे भी बात करो तो सब परेशान जैसे कि इस दुनिया में कोई खुश हैं ही नहीं..”
__लेकिन जब आपकी ज़िंदगी में कुछ ऐसे किरदार हों _ जाने अनजाने में वो आपको उस अपनेपन का एहसास करा दें, जो खून के रिश्ते ताउम्र नहीं करा पाते..
_ तो समझिए वही दिन उत्सव है और हर दिन उल्लास..!!

सुविचार – संगीत – Music – 083

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संगीत आत्मा को रोजमर्रा की जिंदगी की धूल से धो देता है.
जो भारी कोलाहल में संगीत को सुन सकता है, वह महान उपलब्धि को प्राप्त करता है.
बाहर का संगीत तब ही महत्वपूर्ण है..

_ जब वो तुम्हें ” तुम्हारे अंदर के संगीत की याद दिलाए “

संगीत सुनना मानसिक और आत्मिक रूप से किसी से जुड़ने जैसा है.

अधिकांश समय, हम संगीत सुनते हैं क्योंकि यह हमें शांत करता है या हमारी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को पूरा करता है.

लेकिन कभी-कभी, संगीत अन्य चीजों के लिए भी बहुत उपयोगी होता है – किसी ऐसे व्यक्ति में रुचि दिखाने के लिए जिसे हम पसंद करते हैं या प्यार करते हैं,

हमारी आत्मा को शांत करने के लिए इसे सुनना, हमें दूसरी जगह ले जाना और हमारी समस्याओं को दूर करना..!!

इसके अलावा, जहाँ हम अपने विचारों को नहीं सुन सकते, केवल महसूस कर सकते हैं और इसका आनंद ले सकते हैं.

आजकल लोगों ने गाना- संगीत सुनना ही बंद-सा कर दिया है,

_ लोग तनावपूर्ण जीवन के इतने आदी हो गए हैं कि वे उन रुचियों को भूल गए हैं..
_ जो कभी उन्हें खुशी देती थीं.!!
कुछ गाने-म्यूजिक हमारे दिलो-दिमाग़ में ऐसे बस जाते हैं मानो हमारी ही अधूरी कहानी का हिस्सा हों.
_ वो वक़्त-बेवक़्त हमारी ज़बान पर आते हैं, कभी किसी पुराने दर्द को छू जाते हैं, तो कभी एक अजीब सा सुकून दे जाते हैं.
 _ न जाने क्यों, पर कुछ धुनें शब्दों से ज़्यादा हमें समझती हैं.
संगीत भी दवा का काम करता है बहुत बार..

_ जब मन भारी हो, उदास हो, हताश हो, और जब खुशी से पागल हो तब भी …!

🎶Music Therapy🎶

“जब सुर और ताल से मन शांत हो, तो शरीर अपने आप ठीक होने लगता है.”
_ “Music सिर्फ सुनने की चीज नहीं, बल्कि एक उपचार है जो दिल और दिमाग दोनों को छू लेता है.”

जीवन संगीत है,  सुर से बजाओगे तो बहुत अच्छा है, मधुर है.

Life is music. When this music is played in a melodious manner, it is pleasing and sweet.

“संगीत में अस्तित्व के हर शानदार पहलू को उत्साहित रूप से व्यक्त करने की क्षमता है, जबकि डाउनबीट पर उस पीड़ा को व्यक्त करने की क्षमता है जो एक इंसान समय की क्षणभंगुर प्रकृति और जीने और मरने की रहस्यमय यातना को समझने पर अनुभव करता है.

संगीत जीवन के प्रतीकों और चरणों, अस्तित्व और गैर-अस्तित्व दोनों को संप्रेषित करने की अपनी क्षमता में अकेला है.

“Music has the ability to express in the upbeat every brilliant aspect of existence, while on the downbeat convey the anguish that a human being experiences when apprehending the fleeting nature of time, and the mysterious torture of living and dying.

Music stands alone in its ability to communicate the symbols and phases of life, both being and nonbeing.” – Kilroy J. Oldster

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