| Dec 26, 2013 | सुविचार
झूठ बोलने वाला शुरू में प्रभाव जमा लेगा, मगर बाद में विश्वास खो देगा.
अधिकतर लोग आत्ममुग्धता और आत्ममहानता के भ्रम में जीते हैं.
_ वे सोचते हैं, जितना उन्होंने सीख लिया, समझ लिया, उतना काफी है.
_ लेकिन ज़िन्दगी हमें हर पल नए से नया सीखने-समझने के अवसर प्रदान करती है.
_ हर मोड़ पर जैसे एक नया रहस्य खुलता नज़र आता है.
_ जीवन सबसे बड़ा शिक्षक है.
_ बस, हम अपनी चेतना की आँखें खुली रखें.
– Manika Mohini
जिन्हें आत्मा की शांति मिल जाए, उन्हें दुनिया का कोई भ्रम डिगा नहीं सकता.!!
झूठ बोलने वाले पर तब भी विश्वास नहीं किया जाएगा, जब वह सच भी बोले.
A liar will not be believed, even when he speaks the truth.
जब तक आप स्वयं को अपने झूठे विचारों की जेल से मुक्त नहीं कर लेते तब तक आप कभी भी स्वतंत्र नहीं होंगे.
You will never be free until you free yourself from the prison of your own false thoughts.
कोई कितना भी जोर लगा ले, _ गलत को सही साबित नही कर सकता _
__ झूठ आखिर झूठ ही रहता है ..!!
अधिक कल्पनाएं मन को खाली कर जाती है,
_ मन कुछ बेहतर सोच ही नहीं पाता.!!
कई बार जान बूझकर भी कुछ चीजों से दूरी बना लेनी चाहिए ताकि उनके साथ बने रहने का भ्रम बना रहे।
_ कुछ भ्रम जीवन में जरूरी होते हैं – जीने के लिए, जीते रहने के लिए.!!
झूठ को सच समझने वाली दुनिया में झूठ चलाया जा रहा है,
_शुरू में चलता है ..फिर भसक जाता है..!!
जब झूठ बोलकर किसी का बुरा करो तो, उसे कर्ज [ Loan ] समझो,
_यह ब्याज [ Interest ] सहित आपके पास वापस आएगा.!!
तारीफ किये बिना कोई इंसान ख़ुश ही नहीं होता है,
और __ झूठ बोले बिना किसी कि _ तारीफ़ ही नहीं होती है ,, अब कोई करे भी तो क्या करे !!!
झूठ की कीमत क्या है ?
ऐसा नहीं है कि हम उन्हें सच समझने की भूल करेंगे. वास्तविक ख़तरा यह है कि, यदि हम पर्याप्त झूठ सुनते हैं, तो हम सत्य को बिल्कुल भी नहीं पहचान पाते हैं.
झूठ दुनिया की सबसे खूबसूरत रचना है..
_ इसमें एक अजीब सा आकर्षण होता है.. जो हमें बिना सोचे-समझे अपनी ओर खींच लेता है.
_ कभी-कभी यह सच्चाई से भी अधिक आकर्षक, ज्यादा चमकदार और ज्यादा पूर्ण लगता है..
_ पर यही खूबसूरती अक्सर धोखे की आड़ में छुपी होती है, और हमें उस जाल में उलझा देती है.. जिसे हम अपनी आंखों से सच मान बैठते हैं.!!
झूठ सुनकर दुःख होता है, और सच सुन कर और ज्यादा दुःख होता है,
_ आदमी बस बकवास कह-सुनकर ही खुश रह सकता है.!!
हम जिनके झूठ का भी मान रख लेते हैं,
_ वो समझते हैं कि हमें बेवकूफ बना दिया.!!
अधिकतर लोग झूठी दुनिया में जीते हैं, _सच को भी समझना चाहिए.. .
इस बात का भरम न पालें कि आपके बिना कहीं भी कुछ भी रुकेगा..!!
सबका सबके बिना काम चल ही जाता है, हम भ्रम में हैं कि हम खास हैं.!!
सच बोलूं तो दुनिया में सबसे अधिक, _ झूठ ही पसंद किया जाता है.
झूठ बोलना पहली बार आसान हो सकता है, पर बाद में सिर्फ परेशानी देता है.
मीठे झूठ का स्वाद हम लोगों को इतना भाता है कि कड़वे सच से दूरियां बना लेते हैं…
मुस्कुराहटें झूठी भी हुआ करती हैं, _ इंसान को देखना नहीं बस समझना सीखो..
अक्सर झूठे इंसान की बातें मीठी होती हैं _ और सच्चे इंसान की बातें कड़वी होती हैं..
ये वो दुनिया है जहां झूठ से तो सबको नफ़रत है, पर सच कोई नहीं बोलता है..
हमारा दिल कभी झूठ नहीं बोलता, _ वो काम तो दिमाग करता है.
झूठ की चमक आज नहीं तो कल फीकी पड़ ही जाती है.
आप उन लोगों से ईमानदारी की उम्मीद नहीं कर सकते, जो खुद से भी झूठ बोलते हैं.!
कुछ लोग कभी नहीं बदलते, वो तो बस झूठ बोलने के नए तरीके ढूँढ लेते हैं.!!
इंसान का सबसे बड़ा भ्रम.. – वो किसी को खुश कर सकता है.!!
“झूठ”.. चुटकियों में फैलता है.
_ ‘हल्का’.. जो होता है.
यह सिर्फ एक वहम है कि हम किसी के बिना जी नहीं सकते ;
_ वक्त गुजरता है और इंसान जीना सीख ही जाता है.!!
झूठ को सच समझने वालों से बहस करना फिजूल है ;
_ अपनी खामोशी को ढाल बनाओ और उन्हें उनकी काल्पनिक दुनिया में ही रहने दो.
चारों तरफ झूठ, लूट, ठगी, बेईमानी का जाल कसा है.
_ आम आदमी किस-किस से बचे.. भरे पड़े हैं बेईमान हर जगह.!!
आज भी लोग बात को वेरिफाई किये बिना ही लड़ने लगते हैं,
_ कोई भी यह पता नहीं लगाना चाहता कि क्या सच है और क्या झूठ.!!
जब हम बार- बार झूठ बोलते हैं, तो खुद ही भीतर ही भीतर इसे सच मानने लगते हैं.
इस तरह हम अपनी ही ग़लत छवि के साथ जीने लगते हैं.
जो लोग झूठ बोलकर बदनाम होते हैं, वे कहते हैं, ‘ जीभ भी जली और स्वाद भी न मिला,
_ जो लोग सच के साथ जीते हैं, वे कहते हैं, ‘ जीभ जली तो क्या हुआ ‘, स्वयं का स्वाद तो पाया !!!
झूठ सुनकर दुःख होता है, और सच सुन कर और ज्यादा दुःख होता है,
_ इंसान बस बकवास कह-सुनकर ही खुश रह सकता है.!!
आज झूठ और बहाने सुकून देंगे,
_ पर कल इन्हीं की वजह से आपको नींद नहीं आएगी.!!
एक झूठी मुस्कराहट बहुत पीड़ा दे जाती है … यह हमें प्रसन्न नहीं करती, _
_ यह सिर्फ हमें यह स्मरण दिलाती है कि हम कितने दुखी हैं.
आजकल के दौर में प्रशंसा किए बिना कोई खुश नहीं होता, _
_ और झूठ बोले बिना किसी की प्रशंसा नहीं होती..
झूठ को आप जितनी बार दोहराते हैं उतनी ही बार उसका अर्थ बदल जाता है.
_ यदि हम जीवन में झूठ का सहारा लेते हैं तो यह मानसिक तनाव का कारण बनकर.. हमारे जीवन की सरलता को समाप्त कर देता है॥
झूठ की इज्जत बढ़ गई है, पहले झूठ बदनाम था.. लोग उससे संपर्क रखने से परहेज करते थे..
_ पर अब झूठ हमारे बीच ही रहता है घुला -मिला हुआ.!!
अगर आपको कोई चीज़ पसंद न हो तो अन्य लोगों को विनम्रतापूर्वक बताएं, लेकिन इस पर झूठ की चादर न डालें,
अधिकांश समय, इस प्रकार से बोला गया झूठ बाद में, जब पलट कर आप पर वापस आता है तो आपको अपमानित होना पड़ता है.
जब आप अपने झूठ से किसी की ज़िंदगी तबाह करते हो तो.. इसे किसी क़र्ज़ की तरह समझो, जो आपके पास सूद समैत वापस आएगा.!!
झूठ बोलने के लिए आपको बहुत रचनात्मक होना पड़ता है, लेकिन सच बोलने के लिए आपको सहज होना पड़ता है ;
सच पवित्र होता है, जो सीधे दिल से आता है.
झूठ बोल कर अपनी बड़ाई करने से कुछ मूर्ख लोग भले ही आपकी हाँ में हाँ मिला लें,
लेकिन समझदार लोग आपसे जरूर दूरी बना लेंगें.
झूठ की रफ्तार भले ही बहुत तेज होती है, _ लेकिन मंजिल तक सच ही पहुंचता है…
झूठा इंसान- अंत में- अपने सिवाय किसी को धोखा नहीं दे सकता.
सत्य कहो, स्पष्ट कहो, कहो ना सुंदर झूठ, _ चाहे कोई खुश रहे, चाहे जाए रुठ…
वे लोग जो झूठ में जी रहे हैं ; _वे ही लोग _सच बोलने के लिए आपसे नाराज़ हैं.!!
झूठ को अच्छे लहजे की ज़रूरत है, _ _सच तो हर लहजे में कड़वा ही होता है.
यकीन तो सबको झूठ पर ही होता है, _ सच तो अकसर साबित करना पड़ता है.
किसी से झूठे वादे करने से अच्छा है कि, _ आप उससे कोई वादा ही ना करो.
जो चाहे वो करना जिंदगी में, _ लेकिन कभी अधूरी बात व झूठ मत बोलना.
कई झूठ इतने बड़े होते हैं कि वो हक़ीक़त को छोटा कर देते हैं.!!
चिल्लाने से ‘ झूठ ‘ कभी ‘ सच ‘ नहीं हो जाता.
_ चिल्लाते वे लोग हैं जिनके पास कोई नई बात नहीं होती,
_ अपनी बात नहीं होती, तर्क नहीं होते, ऑथेंटिसिटी नहीं होती.
हरेक झूठ, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, एक ऐसी खाई का किनारा होता है, _
_ जिसकी गहराई कभी नहीं नापी जा सकती.
झूठ का कोई भविष्य नहीं,, वह आप का आज शायद सुखद कर दे _
_ पर कल तो बिलकुल नहीं ..
झूठ कभी-कभी तो काम आता है, लेकिन जब पकड़ में आता है..
…तो सब कुछ खत्म कर जाता है…
झूठ किसी भी संबंध का अंत करने में अहम भूमिका निभाता है,
क्योंकि सच आज नहीं तो कल ” सामने आ ही जाता है “
बड़े ही बेबस होते हैं वो लोग जो झूठे नहीं होते,
लेकिन दूसरे को तकलीफ ना हो इसलिए सच नहीं कहते.
झूठे व्यक्ति की ऊँची आवाज सच्चे व्यक्ति को चुप करा देती है,
_ परंतु सच्चे व्यक्ति का मौन, झूठे व्यक्ति की जड़ें हिला देता है.
उन लोगों से सावधान रहें.. जो पूरी तरह झूठ बोलते हैं.
_ आप उनसे बहस नहीं कर सकते, आप यह साबित नहीं कर सकते कि वे झूठ बोल रहे हैं ;
_ क्योंकि वे अपने झूठ को साबित करने के लिए हर सबूत इकट्ठा करते हैं.
_ आखिरकार आप खलनायक बन जाते हैं और वे सब कुछ जीत जाते हैं.
_ ऐसे लोगों से सावधान रहें.!!
झूठे व बेईमान लोग ..
..#रो कर अपने को निर्दोष दिखाने मे सबसे अधिक निपुर्ण होते हैं.
जो लोग झूठ में रहने के आदी हो चुके होते हैं,
_ वो सच सुनकर चिढ़ बहुत जल्दी जाते हैं.!!
झूठे मांगे गवाही, सच को हकलाना पड़ेगा ;
_ आप बहुत सच बोलते हो ..आप को पछताना पड़ेगा !!
सच तो हम बहुत पहले से जानते थे, _
_ बस देखना चाहते थे कि लोग झूठ कहां तक बोल सकते हैं ..
मेरे सामने खड़े हो कर, झूठ बोलना आसान नहीं ;
_ ” किताबें ” कम ” चेहरे ” ज्यादा पढ़े हैं मैंने..
दुनिया को झूठे लोग ही पसंद आते हैं, _
_ थोड़ी सी सच्चाई कह देने से आजकल अपने ही रूठ जाते हैं.
हकीकत जानेंगे तो सब पराये हो जायेंगे,
_ भ्रम में ही रहें कि सब अपने हैं !!
झूठ को सच समझने वाली दुनिया में झूठ चलाया जा रहा है,
_शुरू में चलता है फिर भसक जाता है..!!
लोगों को क्या मिलता है झूठ बोलने से ??_
_ बस किसी अपने का भरोसा खो देते हैं ..
अगर आपने मुझसे झूठ बोला और मुझे सच्चाई पता चल गई,
_तो मैं आपको कभी भी उस नजर से नहीं देखूंगा..!!
सच्चे लोगों को शायद झूठ का पता ना हो, _
_ लेकिन झूठे लोगों को सच का पता हमेशा होता है.
” आमतौर पर जो ख़्याल ” ज्यादातर लोगों को अच्छा लगता है,
_ अक्सर वो सबसे बड़ा झूठ° होता है.
झूठ बोलने के लिए आपको बहुत रचनात्मक होना पड़ता है,
लेकिन सच बोलने के लिए आपको सहज होना पड़ता है,
सच पवित्र होता है, जो सीधे दिल से आता है.
कितना गुस्सा आता है ना उस वक़्त जब कोई आपसे झूठ बोले,
_ और आपको सच पता हो…..
कड़वी सच्चाई बोल देने वाले लोग _
_ झूठा दिलासा देने वालों से लाख गुना अच्छे होते हैं..
आज की दुनिया में झूठ धीरे से बोलोगे तो भी सब सुन लेंगे,_
_ और सच चिल्लाने पर भी कोई नहीं सुनता..
सब ठीक हो जाएगा, भरोसा रखो ये इस दुनिया का सबसे सकारात्मक झूठ है,
_ जो दिल को थोड़ी देर के लिए बहला देता है, पर हकीकत को नहीं.!!
सीख नहीं पा रहा हूँ, मीठे झूठ बोलने का हुनर. _
_ कड़वे सच ने हमसे न जाने कितने लोग छीन लिए..
जब तक ..सत्य .घर से बाहर निकलता है _
_ तब तक ..झूठ. आधी दुनिया घूम लेता है..
जरुरी नहीं कि काम से ही इंसान थक जाए, _
_ झूठ, फ़िक्र, धोखे और फरेब भी थका देते हैं जिंदगी में..
एक इंसान उस वक़्त सबसे अच्छा होता है, _
_ जब वह कुबूल कर लेता है उसके भीतर एक झूठ बोलने वाला आदमी भी है.
जीवन में कभी भी पूर्ण संतुष्टि नहीं होगी, संतुष्टि केवल एक भ्रम है.
भ्रम टूट जाते हैं तो निश्चिंत हो जाता है व्यक्ति …जो हो रहा है वो हो रहा है ..उसके ना रहने से कुछ नहीं रुकने वाला..!!
अधिकांश लोग अपना पूरा जीवन झूठ और भ्रम में जीते हैं ;
_ ऐसा लगता है कि वे नसीबवादी और भाग्यवादी हो गये हैं..!!
जो सोचते थे उनके इशारे पर सब चलता था,
_आज उनका भी भ्रम टूट रहा है..!!
ज़िन्दगी में अगर परिस्थिति एक समान बनी रहे तो..
_ हम सबको अपना समझने के भरम में रहेंगे.!!
भ्रम में हर कोई फंस जाता है, क्योंकि यहां हर चीज बेहतरीन तरीके से परोसी जाती है.
भ्रम कोई समाधान नहीं है, हमें वास्तविकताओं को स्वीकार करना होगा और चुनौतियों से बचने और भ्रम में रहने के बजाय चुनौतियों का सामना करने का साहस रखना होगा !!
जब हम ज़रूरत से ज़्यादा कल्पनाएँ करने लगते हैं, तो मन धीरे-धीरे खाली-सा महसूस होने लगता है.
_ हकीकत से दूर अपनी ही सोच में खो जाने के कारण दिमाग उलझ जाता है और फिर वह कुछ अच्छा, सकारात्मक या बेहतर सोच ही नहीं पाता.!!
हम सबसे ज्यादा अपने मन की कल्पनाओं से धोखा खाते हैं,
_ क्योंकि हम उन चीजों को कल्पनाओं में जीते हैं, जैसा कभी नहीं हो सकता.!!
इंसान इतनी आपा धापी में लगा हुआ है, बस कुछ पल का सुकून मिल जाए कहीं से..
_ पर अगले ही पल वो फिर कमर कस लेता है, भागता दौड़ता रहता है..
_ बस एक भ्रम में कि सब कुछ उसे ही करना है..
_ वो नहीं करेगा तो कौन करेगा..!!
_ इंसानों में इतना भय है कि हम हर चीज को पकड़कर रखते हैं.
_ एक छूटा तो हमने दूसरा पकड़ लिया, रिश्तों में भी ऐसे..!!
_ यह विचार नहीं आता कि क्या हम कठपुतली तो नहीं बन रहे.
_ हम किसी पर इतने निर्भर क्यों हैं ?
_ भय लगता है कि सब छूट गया तो क्या जिंदगी रहेगी..
_ जब तक भय है तब तक आपको कुछ भी पता नहीं चल सकेगा..
_ न ही आपके मन का ये डर ख़त्म होगा, जिसने आपको कठपुतली बना दिया है.
_ इंसान अपना पूरा जीवन भय में निकाल देता है.!!
कुछ लोग वास्तव में महान जोड़तोड़ करने वाले होते हैं.
वे झूठ बोल सकते हैं, धोखा दे सकते हैं, आपके साथ बुरा बर्ताव कर सकते हैं और किसी तरह सब कुछ आपकी गलती की तरह दिखा सकते हैं. इसके लिए मत गिरो, बस यही वे करते हैं.
Some people are truly great manipulators.
They can lie, cheat, treat you badly and somehow manage to make it all seem like your fault.
Don’t fall for it, that’s just what they do.
जब हम झूठ बोलते हैं तो हमें बुरा लगता है और जब हम झूठ को स्वीकार करते हैं तो हमें हल्का महसूस होता है.
_ जब हम झूठ बोलते हैं तो हमें बुरा क्यों लगता है और जब हम कबूल करते हैं तो हल्का क्यों महसूस करते हैं ?
_ क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है ?
_ हम जीवन का विश्लेषण क्यों नहीं करते ?
_ जब हम सच बोलते हैं तो हमें अच्छा क्यों लगता है ?
_ मेरे पास जितने भी संपर्क और अनुभव थे, उन सभी के माध्यम से मेरे पास उत्तर आया, — ” स्वभाव से, हम अच्छे इंसान हैं ” हम सामान्य परिस्थितियों में अच्छे लोग हैं.
_ हम अच्छे पैदा होते हैं और सभी गलत चीजें को हमने समय के साथ जमा किया है.
एक व्यक्ति जो खुद से झूठ बोलता है, और अपने झूठ पर विश्वास करता है, वह खुद में या किसी और में सच्चाई को पहचानने में असमर्थ हो जाता है, और वह खुद के लिए और दूसरों के लिए सम्मान खो देता है.
_जब उसके मन में किसी के लिए कोई सम्मान नहीं होता है, तो वह प्यार नहीं कर पाता है, और, खुद को भटकाने के लिए, उसके अंदर कोई प्यार नहीं होता है, वह अपने आवेगों के आगे झुक जाता है, निम्नतम प्रकार के आनंद में लिप्त हो जाता है, और अंत में एक जानवर की तरह व्यवहार करता है.
_और यह सब झूठ बोलने से आता है – दूसरों से और खुद से झूठ बोलना.
-Fyodor Dostoevsky
| Dec 2, 2013 | My Favourite Thoughts, सुविचार
खामोशी की भी आवाज़ होती है और यह बोली गई आवाज़ से ज्यादा धमाकेदार होती है.!!
हौसला कम न होगा, तेरा तूफानों के सामने. _ मेहनत को इबादत में, बदल कर तो देख.
_ खुद ब खुद हल होंगी, ज़िन्दगी की मुश्किलें. _ बस खामोशी को सवालों में, बदल कर तो देख.
” ख़ामोश ” हो जाने का मतलब ” दब जाना ” या ” डर जाना ” नहीं होता,
बल्कि ” कुछ लोग ” हमारी प्रतिक्रिया के योग्य भी नहीं होते..
कुछ लोगों को लगता है उनकी चालाकियाँ मुझे समझ नहीं आती,
मैं बड़ी खामोशी से देखता हूँ…उनको अपनी नजरों से गिरते हुए.
शोर के बीच कुछ ख़ामोश रह गया, जो वह खामोश नहीं है.. वही तो शोर है..
_ अब खैर करना अपनी.. तुम्हारी अब कहीं भी खैर नहीं..!!
अगर आप एक खामोश बुत भी बन जाएं, तब भी लोग आप को नहीं छोड़ेंगे !!
कोई आपको गलत बात बोलता है, बदले मे आप भी गुस्से में उसे खरीखोटी सुनाते हो.
_ फिर घंटो आपका दिमाग खराब रहता है, यही तो वह चाहता है, आपका दिमाग खराब करना, आपको गुस्सा दिलाना.
_ इससे अच्छा है आप चुप ही रहो, उसके बोले गए शब्द ग्रहण ही मत करो, बस मुस्करा के अपने काम मे लग जाओ.
_ याद रखिये.. खामोशी से बड़ा कोई जवाब नही होता.
_ खामोश रहने से गलती होने का भी कोई चांस नही है.
_ जब उसके बोले गए शब्द आप लेने से इनकार कर दोगे तो.. वह खुद ही परेशान हो जाएगा.!
लफ़्ज़ों के बोझ से थक जाती है…’ज़ुबान’ कभी कभी…
_ पता नहीं खामोशी …’मज़बूरी’ है.. या समझदारी…!!
मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन …
_ आवाज़ों के बाज़ारों में खामोशी पहचाने कौन ..!
असलियत तो ख़ामोशी बयां करती है, _
_ अक्सर इंसानों को देख कर अल्फाजों को बदलते देखा है..
ख़ामोशी का मतलब लिहाज़ भी हो सकता है,
_ इसे किसी की कमज़ोरी समझने की भूल ना करें.
दस्तक और आवाज़ तो कानों के लिए है _
_ जो दिल को सुनाई दे, उसे ख़ामोशी कहते हैं !!!
ख़ामोशी में बड़ी राहत है, _
_ लफ़्ज़ों का सफर इंसान को थका देता है ..
कभी-कभी ख़ामोशी ही सबसे सच्चा शब्द होती है —
_ वो जो भीतर बोलता है, वही असल में सुनाई देना चाहिए.
जुबान बोले न भी बोले, तो मुश्किल नहीं,_
_ मुश्किलें तब होती हैं, जब खामोशी, भी बोलना छोड़ दे…
कुछ ही देर की खामोशी है…. फिर कानों में शोर आएगा…
तुम्हारा तो सिर्फ वक्त है…. हमारा दौर आएगा..
मोहब्बत में नुमाइश की ज़रूरत नही होती……
ये वो ज़ज़्बा है जिसमे ख़ामोशी भी गुनगुनाती है……..
मेरी खामोशी से उसे कभी कोई फर्क नहीं पड़ता,
शिकायत में दो लफ़्ज कह दूं तो चुभ जाते हैं…..!!
मेरे रूठ जाने से अब उनको फर्क नहीं पड़ता,
बैचेन कर देती थी, कभी जिनको खामोशी मेरी.
रुतबा तो खामोशियों का होता है ; अल्फ़ाज़ों का क्या है,
वो तो मुकर जाते हैं हालात देख कर..
ख़ामोशी ख़ुद अपनी ज़ुबाँ हो, ऐसा भी हो सकता है ;
सन्नाटा ही गूंज रहा हो, ऐसा भी हो सकता है.
एक नया व्यापार करता हूं ;
_ ख़ामोशी बेच कर _ सकून खरीदता हूं ..
बेवकूफ की सब से बड़ी अक्लमंदी ख़ामोशी है. _
_ अक्लमंद का ज्यादा देर तक खामोश रहना बेवकूफी है…
जितना हो सके ख़ामोश रहना ही अच्छा है, _
_ क्योंकि सबसे ज़्यादा गुनाह इंसान से जुबान ही करवाती है….
हम पर लगे इल्ज़ामों के, जवाब तो बहुत थे ! _
_ मगर खत्म हुए किस्सों की, हमें ख़ामोशी ही बेहतर लगी !!
अच्छी लगने लगी है ये ख़ामोशियाँ भी, _
_ अब हर किसी को जवाब देने का सिलसिला ख़त्म हो गया..!
कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं, _जिन्हे बयान करने के लिए शब्द नहीं, _
_ बस एक खामोशी ही काफी होती है.
अपने खिलाफ बातें मैं अक्सर ख़ामोशी से सुनता हूँ. _
_ जवाब देने का हक मैंने वक्त को दे रखा है….
मेरी ख़ामोशियों को सब पढ़ नहीं पाते, और समझे बिना, उनके उलट कहानियाँ गढ़ लेते हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए,
_ क्योंकि ये मनगढ़ंत बातें धीरे-धीरे सच जैसी बन जाती हैं
_ फिर एक दिन जब अनकही बातें फूटती हैं, तो वो सन्नाटा भी शोर बन जाता है..
_ जिससे कोई नहीं बच पाता..!
खामोशी अक्सर सबसे बड़ा और गहरा जवाब होती है,
_ जब कोई चुप हो जाए, तो समझ लें उसे आपकी हकीकत दिख गई है.
_ अब वक्त सफाई देने या खोखली दलीलें पेश करने का नहीं, बल्कि खुद के भीतर झाँकने और उसे सुधारने का है.
_ सच्चाई की गूँज अक्सर खामोशी में ही सबसे तेज़ सुनाई देती है.!!
जब गिला शिकवा अपनों से हो तो ख़ामोशी भली, _
_ अब हर बात पर जंग हो जरूरी तो नहीं !!!!
चुप थे तो चल रही थी जिंदगी लाजवाब… _
_ खामोशियाँ बोलने लगीं…तो बवाल हो गया…!!
खामोशी की तह में छुपा लो सारी उलझनें, _
_ शोर कभी मुश्किलों को आसान नहीं करता….!!
रिश्तों में शिकायते कर के क्यों घटाया जाए रूतबा अपना;
_ करने दीजिए खामोशियों को खामोशी से काम अपना !!
एक ग़लतफ़हमी है कि खामोश चेहरों को शिकार बनाना आसान है,
_ लेकिन याद रखें कि जब खामोश चेहरे चक्रव्यूह रचते हैं तो कहीं का नहीं छोड़ते.!!
खामोशियाँ इस कदर बढ़ गयी है की, अब जाने पहचाने लोग भी ..!!_
_ अनजाने से लगते हैं …!!
बहुत भारी होता है वो पल, जब इंसान ना रोता है ना शिकायत करता है ;
_ बस खामोशी से सब कुछ सहते-सहते थक कर बैठ जाता है.!!
कुछ ख़ामोशियाँ चीख़ों से भी तेज़ होती हैं —बस सुनने वाला चाहिए.”
तुम्हारी चीखती हुई खामोशी सबको सुनाई देती है.!!
वक़्त रहते सीख ले ख़ामोश रहने का फ़न,
_ एक दिन वरना जुबां की ज़द में सर आ जायेगा.
लाखों हैं मेरे अल्फाज के दीवाने, _
_ मेरी खामोशी सुनने वाला कोई होता तो क्या बात होती.
मेरी खामोशी हज़ारों जवाबों से बेहतर है, _
_ क्योंकि ये अनगिनत सवालों की इज्जत रखती है.
तूने मेरा तकाजा देखा है कभी सब्र देख..
_ मैं इतना खामोश हो जाऊँगा कि तू चिल्ला उठेगा..!!
खामोशी को हमेशा दर्द से जोड़ कर ना देखो, _
_ खामोशी सुकून का दूसरा रूप भी होती है.
ख़ामोशी ग़लत फ़ैसला कर देगी,,
_ जहां जरुरत है वहां बोलिए.. वरना मसला हो जाएगा.!!
कुछ चीज़ों को ख़त्म करने का सबसे बेहतर तरीका है.. उन्हें छोड़ देना.. न रिएक्शन, न एक्शन ;
“बस ख़ामोशी” वहीं असली ताक़त है.!!
हम अपने आसपास चहकते-खिलखिलाते लोगों की ख़ामोशी को नोटिस क्यों नहीं करते…
खामोशियों में रहने का शौक नहीं ! कुछ ऐसी वजह होती !! जो खामोश कर देती है ..!!!
बेवजह शोर मचाने से सुर्खियां नहीं मिलती, _ कर्म करो ख़ामोशी भी अखबारों में छपेगी.
आवाज़ की पहुंच तो बस होती है कान तक, ख़ामोशी पहुंच जाती है दूर आसमान तक..
ख़ामोशी में चाहे जितना बेगानापन हो, _ लेकिन इक आहट जानी-पहचानी होती है…
मेरी ख़ामोशी को मेरी हार मत समझना, _ मैं कुछ फैसले ऊपर वाले पर छोड़ देता हूँ..
*खामोशी से बनाते रहो पहचान अपनी* __ *हवाएँ ख़ुद गुनगुनाएँगी नाम तुम्हारा*..
कुछ बातों का जवाब सिर्फ ख़ामोशी होती है और ख़ामोशी बहुत ख़ूबसूरत जवाब है !
खामोशी का मतलब लिहाज भी होता है, पर कुछ लोग इसे कमजोरी समझ लेते हैं !!
लोग कहते हैं ज्यादा बोलता नहीं मैं, _ पर कहूं ऐसा क्या जो खामोशी से बेहतर हो.
खामोशियाँ भी सुनाई पड़ती है साहब _ बस कान से नहीं दिल से सुनकर देखिये..!!
खामोशी इतनी गहरी होनी चाहिए कि _ बेकद्री करने वालों की चीखें निकल पड़े !!
हजार जवाबों से अच्छी है खामोशी, _ ना जाने कितने सवालों की आबरू रखती है.
रुतबा तो.. ख़ामोशीयों का होता है, _ अलफ़ाज़ तो बदल जाते हैं लोग देखकर.
खामोशी ….कभी खाली नहीं होती _ यह ढेरों जवाबों से लबालब होती है…..!!
जितना ही खामोश रह सकोगे, _ उतना ही तुम सुनने में ज्यादा सछम हो सकोगे.
खामोश जिंदगी जो बसर कर रहे हैं हम, _ गहरे समुन्द्रों में सफर कर रहे हैं हम…
खामोशी का अपना अलग ही मजा है, _ पेड़ों की जड़े फड़फड़ाया नही करती.!
जिन्हें बात करने का सलीका होता है, _ उन्हें खामोशिया ज्यादा पसंद होती हैं.
कोई सुनता नहीं किसी की यहाँ _ अपना खामोश रहना ही बेहतर है यहाँ_.!
जब कोई आपकी बात का यकीन ना करे, तो खामोश रहना बेहतर है..
ख़ामोशी बहुत कुछ कहती है, _ कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो !!
छोड़ दिया सबसे बात करना, _अब खामोश रहना ही अच्छा लगता है…
जिन्हे वाकई बात करना आता है, _ वो लोग अक्सर ख़ामोश रहते हैं…
सम्मान कीजिए हमारी ख़ामोशी का, ..आपकी औकात छुपाए बैठे हैं.!!
एक ख़ामोशी में मिल गई हज़ार खुशियाँ, थक गया था मैं शोर कर कर के !!
जब बाहर शोर हो तो अपने भीतर की खामोशी की शरण लेनी चाहिए.
ख़ामोशी छुपाती है ऐब और हुनर, शख्सियत का अंदाज़ा गुफ़्तगू से होता है.
हर खामोशी अहंकार नहीं होती, कुछ खामोशी सब्र भी होती है.!!
मेरी ख़ामोशी एक दिन शोर… मचाएगी _ आज अकेला हूँ तो क्या…
जिन्हें एक बार खामोशियाँ रास आ जाएँ, फिर वे बोला नहीं करते !!
ये जो तुम मुझ में ख़ामोशी देख रहे हो, दरअसल ये मेरा सुकून है.
मेहनत इतनी खामोशी से करो की _ कामयाबी शोर मचा दे…..
बढ़ती हुई समझदारी, _ जीवन को मौन की तरफ ले जाती है.!!
खामोशियां जिसे अच्छी लग जाएं, वो फ़िर बोला नहीं करते.!!
उनकी खामोशी बता रही है कि … अब उनको बात नहीं करनी !
लफ्ज़ अब बड़े महँगे हो गए, आओ ख़ामोशी का सौदा करें…
खामोशी जरा देर से सुनाई देती है, लेकिन असरदार होती है..
कभी- कभी खामोशी से बेहतर, और कोई जवाब नहीं होता.
शोर की तो उम्र होती है, _ खामोशी तो सदाबहार होती है..
खामोशी की चीख़… चिल्लाने से भी अधिक होती है….!!!
कानों के पर्दे फट जायें, ख़ामोशी में वो धमाका होता है..!!
ख़ामोशी तुम समझ नहीं रहे, _ अल्फ़ाज़ अब बचे नहीं.
शोर की उम्र होती है, ख़ामोशी सदाबहार है..!!
एक शोर है मुझमें, _ जो खामोश बहुत है..
| Nov 21, 2013 | My Favourite Thoughts, सुविचार
कभी-कभी मौन एक विकल्प नहीं, बल्कि आपकी थकी हुई आत्मा का अंतिम सहारा होता है.
Sometimes silence is not a choice, but the last resort of your weary soul.
संसार मे सब स्वतः दिखाई पड़ता है -अपना पराया, सही गलत, किस बात को कैसे समझा गया, किसने किसे क्या समझा, हर चीज एवं बात —
– और फिर इस मोह से आप स्वयं बाहर निकल जाना पसंद करते हैं !
— सत्य तो बस इतना सा होता है — की चिल्लाने के लिए बल नहीं लगते..
— बल्कि मौन रहने मे बेहद बल लगते हैं.!!
— स्मिता सिन्हा
मौन को उसकी ताकत के साथ अपनाएं, अपनी कमजोरी न बनने दें.
_ उसे इस तरह न अपनाएं कि वह आपको दीमक की तरह भीतर ही भीतर खाने लगे और भावनात्मक रूप से खोखला कर दे.
_ बेवजह के टकराव से बचने के लिए चुप्पी एक सटीक तरीका है,
_ लेकिन अगर कोई आप पर प्रहार कर रहा हो, तो उस पर चुप रहने को समझदारी नहीं माना जाएगा.
_ इसलिए मौन को कमजोरी कतई न बनने दें.
कई बार निःशब्द [मौन] होना शब्दों से कहीं आगे का संवाद होता है,
_ जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों पर शायद हम निःशब्द [मौन] ही संवाद करते हैं..!!
_ जो मौन रहता है, उसके पास कुछ देने को है, और वही बोलने का हकदार है.!!
हम लोगों का बोलना बंद नहीं कर सकते, मगर हम किसकी सुनेंगे ये तय कर सकते हैं.!!
हर ताने का जवाब देने में जो खुद को उलझाओगे,
_ तो कैसे “मौन की गूंज” अनंत तक पहुंचाओगे..!
तुम्हारे पास लफ्ज थे, सोच थी.. आवाज़ थी..!
_ तुमने मौन रहने के लिए कितना संघर्ष किया होगा..!!
जो लोग सही बातों के समर्थन में चुप रहते हैं,
_वही लोग गलत होने पर चीखते-चिल्लाते हैं.!!
कभी किसी की चुप्पी को उसकी कमजोरी मत समझो..
_ क्योंकि जिस दिन वो बोलेगा, बहुत कुछ बदल जाएगा.!!
चुप हो जाना शांति नहीं..- शांति में चुप्पी अपने आप उतरती है.!!
“मौन” कभी हमें विनाश से बचाता है तो कभी विनाश का कारण बनता है,
_ हमें यह समझना होगा कि इसका उपयोग कब, कहां और कितना करना है…
_कई बार खामोशी ही अफसोस होती है.
मौन में बड़ी ताकत होती है इसलिए हमें मौन ही रहना चाहिए..
_ और जहां हमें बोलने की आवश्यकता न हो, वहां तो विशेष रूप से चुप रहना ही बेहतर होता है.
_ और वैसे भी ज़िन्दगी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जब हमें मौन रहना ही पड़ता है.
_ जब हम मौन रहते हैं तो अपनी क्षमता से अधिक सोच सकते हैं,
_ जिससे न होने वाले काम भी आसानी से हो जाते हैं.,
— चुप रहना एक ऐसी शक्ति है, जो हमें किसी भी बात को गहराई से समझने की एवं काम करने की ऊर्जा प्रदान करती है.
_ मौन रहने से हमारा मस्तिष्क ज़्यादा काम करता है और हम सही समय पर सही निर्णय लेने में भी सफल होते हैं.
_ जितना हम स्वयं को मौन रख पाते हैं उतना ही हमारा दिल अंदर से अपने को खुश महसूस करता है और यह ख़ुशी ही हमारे जीवन की वास्तविक ख़ुशी होती है.
— किसी भी विवादित स्थान पर चुप रहना हमें विजय दिला सकता है बशर्ते हम मौन रहें.
_यह हमारी मनोवैज्ञानिक शक्तियों को भी मजबूत करता है.
_ मौन हमारे कार्य में एकाग्रता लाता है जिसकी वजह से हम अधिक सोच पाते है.
_ इसलिए हमें अधिक से अधिक मौन रहने का संकल्प लेना चाहिए तथा आवश्यक हो तभी बात करनी चाहिए.
— इस दुनिया में वही व्यक्ति सबसे अधिक सुखी और समृद्ध है, जो क्रोध आने पर भी स्वयं को मौन रखता है.
_ हालांकि मौन रहना कोई आसान कार्य नहीं है,
_ इसके लिए भी साहस और धैर्य की आवश्यकता होती है.
_ यदि हम यही सीख लें कि कब और कहां मौन रहना है,
_ तो हमारे जीवन की आधी समस्याएं स्वतः ही खत्म हो सकती हैं.
“मौन वह भाषा है, जो आत्मा बोलती है”
_ जब शब्द चुप हो जाते हैं, तब भीतर की आवाज़ गूंजने लगती है.
_ यह वही क्षण होता है, जब व्यक्ति स्वयं से संवाद करता है.
_ मौन सिर्फ चुप रहना नहीं, बल्कि चेतना का विस्तार है.!!
जो आदमी मौन रहने में असमर्थ है, उसे जानना चाहिए कि उसके भीतर कुछ न कुछ पागलपन है ;
_ जो आदमी बिना बात किए रहने में असमर्थ है, जानना चाहिए, उसके भीतर कोई रोग है ;
_ सारी दुनिया बात कर रही है, सुबह से शाम तक बात कर रही है,कौन सी बातें हैं ? _शायद हमने कभी खयाल भी न किया हो कि कौन सी बातें कर रहे हैं ! – ओशो
बोलना कम करो, ज्यादा बोलने से एनर्जी और दिमाग दोनों खराब होते हैं,_
_ कोई आप को शांति नहीं दे सकता _ सिवाय आप के दिमाग के..
क्या बोलना है इंसान को ये भले न पता हो,_ लेकिन ये अच्छे से पता होना चाहिए कि क्या नहीं बोलना है.
अफ़सोस ये कि ज्यादातर लोगों ने चुप रहना नहीं सीखा है ; _हर मामले में बोला नहीं जाता है.
शायद चुप्पी हमें अपनी आंतरिक आवाज सुनने को मजबूर करती है, _जिससे हममें से ज्यादातर लोग डरते हैं _और इसलिए हम शोर को अपनाना पसंद करते हैं.
“शांत समय वास्तव में हमारे स्वास्थ्य और विवेक के लिए महत्वपूर्ण है.”
कभी-कभी हम भीतर इतना कुछ कह चुके होते हैं कि शब्द थक जाते हैं, भाव चुप हो जाते हैं..
_ ऐसा लगता है जैसे भीतर की ज़मीन बंजर हो गई हो, न कोई नयी बात उपजती है, न कोई नया जज़्बा,
_ शायद चुप्पी भी एक चरण है रचनात्मक ठहराव का..!!
कुछ सवालों के जवाब नहीं होते, वो बस मन की शांति को तोड़ते हैं, दिल के रिश्तों पर खामोशियाँ छोड़ते हैं..
_ ऐसे सवाल सिर्फ तर्क नहीं मांगते, वो भावनाओं की जड़ों को काटते हैं,
_ कभी-कभी चुप रह जाना ही सही होता है, क्योंकि हर सच कह देने से दिलों का भार हल्का नहीं होता, कई बार वो भार और बढ़ जाता है.!!
लोग बहुत बोलते हैं.
_ यहां खूबसूरत पेड़ हैं, पहाड़ हैं, जंगलों का सन्नाटा है, पक्षियों की आवाजें हैं, धरती की फुसफुसाहट है और उनकी अपनी आवाज है.
_ लेकिन लोग इतना बोलते हैं.
_ मैं चाहता हूं कि एक बार लोग मौन में चल सकें और एक बार इस जादू को महसूस कर सकें.
People speak a lot.
There are beautiful trees, mountains, the silence of forests, the voices of birds, the whisper of earth, and their own voice.
But people speak so much. I wish for once people can walk in silence and feel the magic for once.
एक बार जब आप परिपक्व हो जाते हैं तो आपको एहसास होता है कि किसी बात को साबित करने की तुलना में चुप्पी अधिक शक्तिशाली है.
Once you mature you realize that silence is more powerful than proving a point.
व्यक्ति शब्दों के जाल में फंसा हुआ है.
_ वह दूसरों को भी इस जाल में फंसाने की कोशिश करता है.
_ वह अपना बहुमूल्य समय व्यर्थ की बातों को सोच कर नष्ट कर देता है.
_ किसने किससे क्या कहा ? किस बारे में कहा ? ऐसा क्यों कहा होगा ? आदि.
_ आपको ध्यान रखना है कि आप स्वयं को इस प्रकार की उलझनों से दूर रखें.
_ अपनी ऊर्जा का उपयोग अनावश्यक बातों अथवा वार्तालाप में न गंवाएं.
_ स्वयं को मौन में जाने का अवसर दें.
_ उतना ही बोलें जितने की जरुरत हो.
_ मौन की गहराई ही आपको सही और गलत को पहचानने में मदद करेगी.
ख़ामोशी की ताकत से अनभिज्ञ हम एक वाचाल दुनिया में रहते हैं.
_ बहुत से लोग खामोशी को अकेलेपन और बोरियत से जोड़ कर देखते हैं,
_ लेकिन हकीकत यह है कि हम अगर दूसरों की नकारात्मकता को लेना नहीं चाहते, तो चुप रहना ही सबसे सही नीति है.
_ दिन में कम- से- कम कुछ देर अपनी खामोशी के साथ रह कर देखें,
_ बेवजह बोलते रहने से बचें, क्रोध के छणों में चुप रहें,
_ आपको कुछ समय बाद जिन्दगी में कई तरह के सकारात्मक बदलाव दिखाई देंगे.
आप बोल कर भी कई बार सामने वाले व्यक्ति को अपनी बात नहीं समझा पाते.
_ लिख कर बताना भी जब असफल रहता है तब मौन रहने का विकल्प बचता है..
_ और अक्सर खामोशी कारगर जरिया साबित होती है.
_ आप चुप रह कर समय देते हैं लोगों को आपकी बात समझ पाने का.
जिसने मौन को साध लिया, उसने धैर्य को पा लिया.
_ बोलने से जीवन की कई मुश्किलें हल हो जाती हैं, मन भी हल्का हो जाता है.
_ लेकिन बिना सोचे- समझे जल्दीबाजी में बोल कर प्रतिक्रिया दे देना उग्रता की निशानी है.
_ अगर आप ऐसी स्थितियों से खामोशी से गुजर जाने की कला सीख जाते हैं,
_ तो आप अपने भीतर धैर्य का गुण विकसित कर पाएंगे,
_ जो कि आपकी जिन्दगी में बहुत काम आएगा.
हम सुबह जागते ही एक शोर भरी दुनिया में प्रवेश कर जाते हैं.
_ घर में सब बोलना शुरू कर देते हैं,
_ टीवी या रेडियो चल पड़ता है,
_ घर से निकलते ही वाहनों के शोर से घिर जाते हैं.
_ इस शोर से हमारी सोचने की छमता प्रभावित ही नहीं होती, कई बार खत्म भी होने लगती है और नये विचारों के आने का क्रम टूट जाता है.
_ अगर आप अपनी दिनचर्या में से थोड़ा सा वक़्त नीरवता के साथ बिताते हैं,
_ तो आपका मौन आपको नये विचारों तक ले जाएगा.
कम से कम बोलें—इतना कम, जितना जरूरी हो— टेलीग्रैफिक.
_ जैसे तारघर में टेलीग्राम करने जाते हैं तो देख लेते हैं कि अब दस अक्षर से ज्यादा नहीं.
_ अब तो आठ से भी ज्यादा नहीं.. तो एक दो अक्षर और काट देते हैं, आठ पर बिठा देते हैं.
_ तो टेलीग्रैफिक !
_ खयाल रखें कि एक—एक शब्द की कीमत चुकानी पड़ रही है.
_ इसलिए एक—एक शब्द बहुत महंगा है; सच में महंगा है.
_इसलिए कम से कम शब्द का उपयोग करें;
_ जो बिलकुल मौन न रह सकें वे कम से कम शब्द का उपयोग करें.
परिपक्वता मौन की ओर ले जाती है..
_ जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है हम मितभाषी बनते जाते हैं..
_ हम बाहरी भावों को नियंत्रण करना सीख लेते हैं…
_ किसी भी बात का फर्क पड़ना बन्द हो जाता है… आँसुओ को पीने लगते हैं,
_ सामयिक लोगों को अपनी जिंदगी से दूर फेंक देते है और सुकून की तलाश में रहते हैं.
मछली पर एक कहावत है..”ना खोलती मुंह, ना होती ये हालत”
_ अनावश्यक अधिक बोलना स्वयं के भेद खोलना है, शत्रु को हावी होने देना होता है.!!
हमारे जीवन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब हम सिर्फ मौन रहना चाहते हैं तो हमे रह-रह कर कुरेदा जाता है, और जब हम कुछ बोलना चाहते हैं तो उसे सुनना कोई नही चाहता.!!
आपके पास कहने के लिए बहुत कुछ हो, लेकिन नासमझ लोगों के सामने आप चुप रहना पसंद करें, तो आप Classy people [उत्तम दर्जे के लोग] की श्रेणी में गिने जाएंगे.!!
जब तक किसी बात की पूरी जानकारी ना हो, तब तक मौन ही रहना चाहिए..
_क्योंकि अधूरा सत्य पूर्ण झूठ से कई गुना ज्यादा खतरनाक होता है.!
बोलना तभी होना चाहिए.. जब बोलने की आवश्यकता हो.
_ मौन तो बड़ी खूबसूरत अनुभूति है,
_ जहां अनावश्यक बोलने से समस्या जन्म लेती है, वहीं मौन समस्या को अजन्मा रहने देता है.
खयाल रखें कि एक एक शब्द की कीमत चुकानी पड़ रही है, इसलिए एक एक शब्द बहुत महंगा है ;
इसलिए कम से कम शब्दों का उपयोग करें ; जो बिलकुल मौन न रह सकें, वे कम से कम शब्दों का उपयोग करें.
“लोगों को तर्क से कभी मत जीतो, बल्कि अपनी चुप्पी से उन्हें हराओ… क्योंकि जो लोग
हमेशा आपसे बहस करना चाहते हैं, वे आपकी चुप्पी बर्दाश्त नहीं कर सकते…”चुप रहो, समझदार बनो”
चुप्पी हमेशा कायरता नहीं होती है. यह तो भावनाओं की भाषा होती है, जो आप शब्दों से नहीं बोल सकते, वह आप अपने मौन से बोल सकते हैं.
वैसे भी जब मौन बोलता है, तो उसकी आवाज भले ही देर में सुनायी दे, पर बहुत दूर तक सुनायी देती है.
जीभ में कोई हड्डी ना होकर भी यह बहुत कुछ तोड़ने की क्षमता रखती है,
_ इसलिए शब्दों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए.!!
इतना मत बोलिए, की लोग चुप होने का इंतजार करें,_ बल्कि इतना बोल कर चुप हो जाइए की लोग आपके दोबारा बोलने का इंतज़ार करें..
चुप्पी को सहनशीलता समझा जाता है लेकिन जब आवाज़ उठती है, तो उसे
विद्रोह कहा जाता है.. यही दुनिया की विडंबना है.!!
जो ऊंचाई चाहते हैं, उन्हें चुप रहना भी आना चाहिए..
_ जैसे चील शांत रहकर भी ऊंचे आसमान की उड़ान भरती है.!!
जरुरत से ज्यादा बोलने वालों के साथ _ जरुरत से कम सम्बन्ध रखना ही उचित समझदारी है..!!
आप जितना कम बात करेंगे, लोग आपकी बातों के बारे में उतना ही अधिक सोचेंगे.
The less you talk the more people think about your words.
मौन का अर्थ यह नहीं होता की हम केवल बाहरी दिखावे के लिए चुप रहें..
..हमे अंतर्मन को भी खामोश करना पड़ता है…!!!
ये बात हमारे लिए अच्छी बात नहीं है कि हम उन मुद्दों को लेकर चुप्पी साध लेते हैं, जो मायने रखते हैं.!!
जहां बात सुनी न जाए, सुन के भी समझी न जाए, वहां चुप रहना ही बेहतर है..!!
जीवन के संघर्ष में यह बात समझनी ज़रूरी है कि कई बार आप सही होते हैं, तब भी चुप रहना बेहतर विकल्प होता है.!!
हर व्यक्ति अपनी स्थिति में संघर्ष कर रहा है,
_ इसीलिए हर मौन अहंकार नहीं है.!!
“मुंह से कुछ ना बोलना ही मौन नहीं है,
भीतर से भी कुछ ना बोला जाए, उसे मौन कहते हैं, “
जो घड़ा आधा भरा होता है, वह ज्यादा बजता है.
जो पूर्णता भरा होता है, वह मौन रहता है..!!
दुखी होने पर हम रोते हैं, ज्यादा दुखी होने पर ज्यादा रोते हैं !
_ पर जब दुःख सीमा लांघ दे, हम चुप हो जाते हैं !!
सुकून, खुशी व जीवन आपके अंदर छिपा है, दुसरो में केवल उलझने ही मिलेंगी,
इसलिए मौन होकर खुद को जानो…
“कभी-कभी चुप रहना मजबूरी नहीं होता, बल्कि हमारी थक चुकी आत्मा का आखिरी बचाव होता है”
बीज बिना किसी आवाज के बढ़ता है, लेकिन एक पेड़ भारी शोर के साथ गिरता है.
विनाश शोर करता है, लेकिन बढ़ने वाला मौन रहता है, यह मौन की शक्ति है !
हमेशा चुप रहना तो कोई हल नहीं है !
_ अपने मन की बात और सही बात कहना भी उतना ही जरूरी है ;
_ क्योंकि अगर आप हमेशा चुप रहेंगे तो गलत चीजें सिर्फ बढ़ती हैं..!
— मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूं जिन्हें जब खुल कर बोलना था, तब उन्होंने चुप्पी का दामन थाम लिया..
_ क्योंकि जिसके खिलाफ बोलना था, उसने उन्हें कुछ ऐसा पकड़ा दिया कि उनकी बोलती बंद हो गई.!!
_ चुप्पियाँ बढ़ती जा रही हैं उन सारी जगहों पर, जहाँ बोलना जरुरी था !!
कुछ लोग जरूरत से ज्यादा बोलते हैं. कुछ लोग जरूरत से कम..!
_ दोनों ही स्थितियां ठीक नहीं हैं.
_ अगर आप चाहते हैं कि आपकी बात सही मायनों में सुनी जाए और असर करे, तो उसे टू द प्वाइंट और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना आना चाहिए.
_ टू द प्वाइंट का यह महत्व हमें रोज़मर्रा की ज़िंदगी से लेकर गंभीर मुद्दों तक हर जगह दिखाई देता है.
_ इसीलिए, संचार में सबसे अहम है – टू द प्वॉइंट रहना..
_ जब आप अपनी बात कहने में बहुत ज्यादा बोलते हैं, तो असली संदेश अक्सर इधर-उधर की बातों में खो जाता है.
_ टू द पॉइंट अपनी बात जो नहीं कह रहे हैं, वास्तव में ये अपने ही व्यक्तित्व का उलझाव होता है.
_ बात बस इतनी सी है, की आपको अपनी बात कहनी आनी चाहिए, और यह तभी हो सकता है, जब आप ही अपने लिए क्लियर कट हो,
_ जो जरा जरा से निर्णय भी पूछ पूछ कर लेते हैं, वह अपनी बात कैसे कह सकते हैं.
_ मुझे भी क्लियर कट अपनी बात रखनी अच्छी लगती है, बहुत कम शब्दों में..!!
किसी बात को ठीक से समझने के लिए सुनने का धैर्य विकसित करना बहुत ज़रूरी है.
_ चुप रहकर सुनना बहुत कठिन होता है, क्योंकि हमारे बोलने का उतावलापन बाधक बन जाता है.
_ सच तो यह है कि मौन ही वह ज़रिया है.. जिससे हम दूसरे व्यक्ति की बात को ठीक से समझ सकते हैं और यह मौन ही खुद को जानने का ज़रिया भी है.!!
कमज़ोर परिस्थितियों में मौन रहना सीख लो और सही वक्त आने पर दुनिया को दिखा दो की तुममें कितनी गर्जना है…!!!
कभी-कभी आपको चुप रहना चाहिए_और लोगों को देखने देना चाहिए कि आप कौन हैं..
.. क्योंकि कार्य शब्दों से अधिक जोर से बोलते हैं..!!
ह्रदय से जो दिया जा सकता है वो हाथों से नहीं, _ और जो मौन से कहा जा सकता है वो शब्दों से नहीं.
कई बार निःशब्द [ मौन ] होना शब्दों से कहीं आगे का संवाद होता है,
_ जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों पर शायद हम निःशब्द [ मौन ] ही संवाद करते हैं..!!
मैं अगर कभी कुछ बना पाया तो ऐसी लिपि बनाऊँगा, _ जिसमें लोगों का मौन पढ़ा जा सके.!
“मौन और चुप्पियों को पढ़ना हर किसी को नहीं आता !!”
मुझे बहुत ज्यादा बोलने वाले लोग पसंद नहीं हैं,
_ मतलब लोगों को समझ ही नहीं आता कि ..कुछ देर चुप रह लूँ,
_ ऐसी बातें करेंगे ..जिसका कोई अर्थ भी नहीं है, बेबुनियाद बात करेंगे,
_ अब तो ऐसा लगता है कि ..जो ज्यादा बोलता है ..वो बकलोल है !!
जहाँ तक मुझे पता है, मैं जवाब देना बखूबी जानता हूँ.. शब्दों की कमी नहीं मुझमें,
_ पर फिर भी अक्सर खामोश रहता हूँ..
_ क्योंकि ये अच्छे से समझता हूँ कि हर किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं होता..
_ कुछ जगहों पर जवाब नहीं, सिर्फ मौन ही सबसे सटीक उत्तर होता है.!!
“सच्चा सहारा तब मिलता है, जब मैं अपने ही मौन को सुनना सीखता हूँ”
भीतर खामोशी इतनी बढ़ी कि बाहर शब्दों का समुद्र उमड़ आया.
_ यूँ मैं बचा मौन के आघात से..!!
अब चुप रहना ही सही लगता है, क्योंकि समझने वाला कोई नहीं है,
_ और जो समझने वाले हैं, वो बातों का अलग मतलब निकाल लेते हैं ..!!
_ अब मैं सिर्फ खामोशी से भरा होता हूँ, कुछ कहने को नहीं, कुछ सुनने को नहीं.. “बस शुद्ध मौन”
मौन स्वयं से खाली होने की प्रक्रिया है.
_ समुद्र जितना गहरा होता है उतना ही शांत होता है.
_ गहरे पानी की तरह रहिए “साफ और चुप”
हर ताने का जवाब देने में जो खुद को उलझाओगे,
_ तो कैसे ‘मौन की गूंज’ अनंत तक पहुंचाओगे.!!
कुछ भी सुनने और समझने के लिए, _ ” मन ” का मौन रहना आवश्यक है !!
मौन होना रूठना नहीं होता _ जैसे नहीं होता _ ढ़ेर सारी बातें करने का अर्थ संवाद …
मै चुप नही हूं, मेरा “मौन” बहुत कुछ कह रहा है, तुम सुन पाने में असमर्थ हो !
मौन एक मित्र है, जिसका साथ आपको पछतावे की आग में कभी जलने नहीं देगा…
मैं केवल इतना समझ पाया हूँ, _ मौन शब्दों से ज्यादा सार्थक है.
” संवाद तो मौन में भी हो जाता है बस, दिल के तार जुड़ना जरूरी है,”
मौन का अर्थ है बाहर से भी चुप हो जाना और भीतर से भी चुप हो जाना.
“कभी-कभी चुप रह जाना हार नहीं होता,
_ वो अपने भीतर की शांति को बचा लेना होता है”
जो मौन हैं वो चिल्ला चुके हैं..
_ जो चिल्ला रहे हैं ..वक्त उन्हें भी खामोश कर देगा.!!
मौन को सुनने वाले कान नहीं मिलते, इसलिए शब्दों से परोसता हूं.
अक्सर बढ़ती हुई समझ…..जीवन को मौन की ओर ले जाती है…
मौन की भाषा वाणी की भाषा की अपेछा अधिक बलवती होती है.
आदमी चुप रहना सीख जाए तो अधिकांश शिकायतें खत्म हो जाएं.
महान लोग प्रायः चुप रहते हैं, बुद्धिमान बोलते हैं, मूर्ख बहस करते हैं.
किसी व्यक्ति को उसकी ऊँची आवाज़ से नहीं, बल्कि उसके मौन की गहराई से जानें.
जो आवश्यकता से ज्यादा बोलता है, उसका कभी मूल्य नहीं बढ़ता.
बात कहने के सौ तरीक़े हैं, कुछ न कहना भी एक तरीका है.!!
वाणी का अफसोस अनेक बार होता है मौन का कभी नहीं.
मौन एक ऐसी भाषा है जो बिना आवाज के ही बोलती है.
मौन जीवन के अनेक कष्टों से सीखा गया सबक है.!!
चुप्पी साध लेना…दुनिया की सबसे बड़ी साधना है.
अप्रिय शब्द बोलने से मौन रहना अच्छा है.
‘जो मौन है’ वो पहले बोल चुका है.!!
दूसरों को चुप करने के लिए, पहले स्वयं चुप हो जाओ.
हर एक शब्दों का तोड़ है, पर मौन का कोई तोड़ नहीं
बेवजह के सवालों का सबसे बड़ा उत्तर है … ” मौन “
कुछ पल मौन रह कर आत्म- निरिछण करना चाहिए.
कभी- कभी मौन रह जाना सबसे कटु आलोचना है.
जब आपका वक्त बुरा चल रहा हो..तो मौन हो जाने से सुंदर और कुछ नहीं..!!!
खुश रहना है तो मौन रहना सीखो, _ क्योंकि खुशियों को शोर पसंद नहीं है.
मौन सबसे कठोर तर्क है, जो आप कभी- कभी अपने शत्रु को देते हैं.
कहने को तो बहुत-सी बातें हैं पर.. चुप रहने में ही सुकून है !!
मौन रहना अच्छा है, परंतु जब अन्याय हो, तब नहीं…
“मौन” क्रोध की सर्वोत्तम चिकित्सा है…!
मूर्ख की बात का उत्तर मौन है.
जब आपके पास कहने को कुछ न हो, तब कुछ मत कहो.
दूरदर्शी व्यक्ति हमेशा मौन की शक्ति धारण कर सकता है.
बोलने लायक हो कुछ तो ही बोलो, _ नहीं तो मौन बहुत सुंदर है.
मौन रहना एक साधना है _ पर सोच समझ कर बोलना एक कला है.
मौन हो जाओ, बहुत कुछ सुनाई देगा और दिखाई भी देगा !!
जुबान का ज्यादा चलना.. अक़्ल कम होने की निशानी है.!
मौन आपको दूसरों को ध्यान से सुनने की छमता देता है..!
शब्द तो छलावा है, पढ़ना है तो किसी का मौन पढ़ो..!!
मौन भी कई मौकों पर संवाद का माध्यम बन जाता है.!
मौन ही बेहतर है, क्योँकि बातों से ही बातें बिगड़ती हैं !
मौन वो मरहम है, जो शोर से उपजे घाव को भरता है..!
मौन के आगे क्रोध की शक्ति असफल हो जाती है..
गहरी पीड़ा आँसू नहीं केवल मौन देकर जाती है.
कम बोलने और ज्यादा समझने में ही भलाई है.
कुछ स्थितियों में चुप रहना ही बेहतर होता है..
In some situations it’s better to remain silent..
मौन मन और शरीर दोनों को आराम देता है..
गहरे दुःख हमेशा निःशब्द और मौन होते हैं.!
मौन बात – चीत की एक महान कला है.!!
बहुत अच्छा नहीं कह सकते तो, चुप रहें.
मौन खाली नहीं है, _ यह उत्तरों से भरा है..
मन की वृत्तियों को रोकने का नाम मौन है.!
गहरे पानी की तरह रहिए_ साफ़ और चुप.!
झूठे आरोपों का सर्वोत्तम उत्तर मौन है.
मौन सबसे शक्तिशाली चीख है, _
_ Silence is the most powerful scream.
एक समझदार आदमी तब बोलता है,
_ जब दूसरे अपने शब्दों का इस्तेमाल कर चुके होते हैं.
अगर आप मौन का अभ्यास शुरू करेंगे _
_ तो पाएंगे कि इसमें मानसिक विकारों को समाप्त करने की शक्ति भी मौजूद है.
मौन भी एक प्रकार का संवाद है, _
_ जो ये जान गया, उसके लिए बोलने या चुप रहने का भेद मिट जाता है.
हर किसी के सामने अपने शब्दों को फ़िज़ूल जाया मत करिए, _
_ मौन रह कर भी आप जवाब दे सकते हैं ..!!!!
चुप रहना ही सही लगता है, क्योंकि समझने वाला कोई नहीं है ;
_और जो समझने वाले हैं, वो बातों का अलग ही मतलब निकाल लेते हैं..!!
एक दिन आपको अपने बोले हुए शब्दों का अफ़सोस हो सकता है..
_______लेकिन चुप रहने का कभी नहीं ..!
हजारों खोखले शब्दों से बड़ा एक मौन होता है,
क्योंकि वह अपने साथ शांति लेकर आता है.
शब्द तो यदा- कदा चुभते ही रहते हैं,
पर किसी का मौन चुभ जाए तो संभल जाना..
सारा दिन मुँह नहीं चलाना चाहिए, बोलने पर नियंत्रण जरुरी है.
_ ज्यादा बोलने से समस्याएं बढ़ती हैं.
जहां अपने शब्दों का कोई महत्व नहीं, _
_ वहां मौन से अच्छा कोई विकल्प नहीं..
व्यक्ति जब मौन को प्राथमिकता देने लग जाता है, _
_ तब उसका एक अलग व्यक्तित्व का निर्माण होता है .!!!
जिस तरह घोंसला सोती हुई चिड़ियों को आश्रय देता है,
_ उसी तरह मौन तुम्हारी वाणी को आश्रय देता है.
कभी – कभी अच्छा लगता है कि किसी से कुछ भी बात न करें…
Sometimes it feels better not to talk at all…about anything, to anyone.
हर इंसान अपनी जगह किसी न किसी जंग से गुजर रहा है, इसलिए हर खामोशी को घमंड समझना ठीक नहीं.
_ कई बार चुप रहना मजबूरी होती है, या फिर टूटा हुआ मन बस आवाज़ नहीं बन पाता.
_ मौन का मतलब हमेशा अहंकार नहीं होता… कभी-कभी वो सहने की हद होती है, या फिर खुद को संभालने की आखिरी कोशिश.!!
मौन का अर्थ है वाणी की पूर्ण शान्ति.
_ मौन का अर्थ केवल चुप रहना नहीं है.
_ मौन एक गहरी साधना है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने भीतर की परतों को हटाकर अपने वास्तविक स्व रूप का परिचय प्राप्त करता है.
_मौन अपने भीतर के सौन्दर्य और गहराई को निहारने की एक अनूठी प्रक्रिया है.
_ वाणी ही एक ऐसा माध्यम है जिससे मनुष्य अपने आप को संसार से योग करके रखता है.
_ जितना ही वह संसार में लिप्त होता है उतना ही वह स्वयं से दूर हटने लगता है.
_ ज्यों ही हम वाणी को विराम देते है, अहिस्ता -अहिस्ता अपने ही समीप पहुँचने लगते हैं और अपनी पहचान प्राप्त करते हैं.
_ मौन में वह शक्ति है जो प्राणों की ऊर्जा के अपव्यय का समापन करती है.
_ मनुष्य अपनी प्रचण्ड ऊर्जा को अनर्गल बोलकर शब्दों के माध्यम से ह्रास कराता है.
_ इसी ऊर्जा को मौन धारण करके एकत्रित किया जा सकता है.
— नब्बे प्रतिशत मुसीबतें संसार से कम हो जायें, यदि लोग थोडा कम बोलें,
_ लेकिन होता यह है कि मनुष अपने भीतर बैठे हर मनोविकार को वाणी के द्वारा बाहर प्रवाहित करता है और तदनुरूप अपने परिवेश का सृजन कर लेता है.
_ जो विषम परिस्थिति जिह्वा उत्पन्न कर सकती है, वैसा तलवार के माध्यम से भी होना कठिन है.
_ जिह्वा द्वारा दिया गया घाव कभी नहीं भरता..
_ आध्यत्मिक जीवन में जिसने भी ऊँचाइयों को छुआ है, उसने मौन का सहारा अवश्य लिया है.
_ महावीर स्वामी ने बारह वर्ष तक मौन रखा और गौतम बुद्ध ने छ:वर्ष तक, जिसके पश्चात उनकी वाणी दिव्य हो गई.
_ हमारे मन में हर पल विचारों का मेला लगा रहता है.
_ हर क्षण एक नये विचार का उदय होता है.
_ ऐसी स्थिति में मौन का पूरा लाभ नहीं लिया जा सकता.
_ बाहर के साथ-साथ अन्दर से मौन रहना कहीं अधिक आवश्यक है.
— इसलिये संसार के कुतूहल से जब मन अत्यधिक विचलित हो जाये,
_ तो प्रयास करना चाहिए कि लोगों के भीड से दूर प्रकृति के बीच में जाकर बैठे.
_ हर समय प्रकृति एक नया सन्देश देती है.
_ उसके कण कण में एक दिव्य संगीत की धुन सुनाई देती है.
_ जितना ही हम भीतर से शान्त होते जाते है, उतना ही हम प्रकृति के हर शब्द को अपने भीतर अनुभव करते हैँ.
_ भ्रमरों के गुंजार में हमें अनन्त की ध्वनि सुनाई देने लगती है.
_ डालों पर बैठे पक्षियों के चहचहाने में हमें राग दीपक या भैरवी के स्वरों का आभास होता है.
_ प्रकृति को यदि समझना है तो अपने भीतर के सुनहरे मौन को जाग्रत करना आवश्यक है.
— मौन वास्तव में वह संजीवनी शक्ति है जिससे व्यक्ति के प्राणों की ऊर्जा का पुन:विकास एवं उत्थान होता है.
_ नित्यप्रति तीन या चार घंटे का मौन रखना अत्यन्त लाभदायक है.
_ मौन के निरन्तर अभ्यास से वाणी पवित्र होने लगती है और उसमें सत्यता जाग्रत होती है.
_ ऐसा व्यक्ति वाणी से जो भी बोलता है, वह सच होने लगता है.
_ उसके व्यक्तित्व में गंभीरता आने लगती है और मन एकाग्रता की ओर वढता है.
— मौन जब पूर्ण रूप से सिद्ध हो जाये तो मन का लय हो जाता है जैसे कोई विचार है ही नहीं है.
_ क्या आपने शान्त सागर को ध्यान से देखा है ?
_ उसमें कभी कोई लहरे नहीं उठती.
_ वह एक रस में बहता चला जाता है.
_ मौन में लहरों की भांति उठने वाले विचार विलीन हो जाते हैं.
_ व्यक्ति को अहसास होता है कि जो ‘मै’ था वह केवल जड की अनुभूति थी.
_ अब मैं एक चेतना का सागर हूँ,
_ परिपूर्ण मौन शान्ति के जल में मन की आहूति है.
‘मौन शान्ति का सन्देश है’
___ यह स्वयं को रब से जुडने का सबसे सरल उपाय है.
_ इसलिए जहाँ भी आप हों जो भी आप कार्य करतें हों,
_ प्रयास कीजिये कि अपने व्यस्त दिनचर्या में से कुछ क्षण निकालकर संकल्पबद्ध होकर मौन में उतरकर परम शान्ति का अनुभव करें.
कब मौन रहना बहुत जरूरी होता है ?
1 😷 मौन रहे — जब तक आप के पास प्रमाण न हो.
2 😷 मौन रहें — जब आप को लगता है कि आप बिना चीखे
कुछ बात नहीं बोल सकते.
3 😷 मौन रहें — अगर आप के शब्दों से, वाणी से त्रुटि पूर्ण भावों का प्रचार प्रसार हो रहा हो.
4 😷 मौन रहें — अगर आप आक्रोश के आवेग में आ रहे हो.
5 😷 मौन रहें — जब आप को लगता है कि कोई महत्वपूर्ण दोस्ती आपके बोलने की वज़ह से टूट सकतीं हैं.
6 😷 मौन रहें — जब आप को लगता है कि किसी व्यक्ति को आपके शब्द चुभेगे.
7 😷 मौन रहें — अगर आप को लगे कि मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था.
8 😷 मौन रहें — जब आप को स्वयं के प्रति आत्म ग्लानि से भरे हुए हो.
9 😷 मौन रहें — जब श्रवण का समय हो.
10 😷 मौन रहें — तब जब आपको लगता है कि निरर्थक शब्दों के उपयोग से बचना ही उचित है.
सब तरफ शोर ही शोर
उठता और चारों ओर पसरता शोर.
आपस में हो रही बातों का शोर
मशीनों के चलने का शोर
दो-पहियों और चार-पहियों के आवागमन का शोर
ऊपर से उनकी हार्न की अनवरत टें-टें
गाजे-बाजे का शोर
उस पर डीजे की कान फोड़ू ध्वनि
कैसे रोकूँ इन्हें ?
किसी को कहो तो सुनता नहीं
सुनता है तो मानता नहीं
बहस में उतारू हो जाता है
कैसे रोकूँ इन्हें ?
क्या करूँ ?
अपने कान में रुई ठूँस लूँ
या कान के परदे फाड़ लूँ
क्या करूं?
या, मौन धारण कर लूँ
जिसमें बाहरी ध्वनियाँ स्वयं मौन हो जाती हैं
केवल अंतर्मन की आवाज़ सुनाई पड़ती है.
चुप रहो
——–
चुप रहने से घुटन हो तो हो
लेकिन टूटन बच जाती है
मुरझाते रिश्ते फिर पनप जाते हैं
इसलिए चुप रहो।
मालूम है?
छुपाना जरूरी है
क्योंकि खुले घाव से बदबू फैलती है
खुला घाव सबको दिखेगा
सब जान जाएंगे
कहेंगे, कुछ करते क्यों नहीं?
घाव अंदर फैलता है तो फैलता रहे
दिखेगा तो कुछ करना होगा
हम कुछ कर नहीं सकते
इसलिए चुप रहो।
लेकिन उसने कुछ नहीं कहा
बस, चुप रह गया
क्योंकि यह उसका खुद का फैसला था
कि किसी से कुछ मत कहो
चुप रहो।
शब्द हर बार हमारे भावों का बोझ नहीं उठा पाते..
_ कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो ज़ुबान से नहीं, सिर्फ़ आत्मा से महसूस किए जा सकते हैं. _ भावनाओं की तीव्रता जब अपनी सीमा पार कर जाती है, तब भीतर एक मौन जन्म लेता है — ऐसा मौन जो बाहर से शांत दिखता है, लेकिन भीतर बहुत कुछ कह रहा होता है.
_ यह मौन कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक थकी हुई आत्मा का चयन है.
_ यह तब आता है जब मन बार-बार टूटने के बाद अब टूटना नहीं चाहता, जब उम्मीदें दम तोड़ देती हैं, और जब समझाने की थकान भीतर तक जम जाती है.
_ मौन तब नहीं आता जब हमें कुछ कहने को नहीं होता, बल्कि तब आता है जब हमने बहुत कुछ कह दिया हो, और अब उस ‘कहने’ में कोई अर्थ नहीं बचा हो.
_ यह चुप्पी एक निर्णय है — लड़ाई बंद करने का, खुद को समझाने का प्रयास छोड़ने का, और उस शांति को चुनने का जिसे अब किसी के जवाब की ज़रूरत नहीं.
_ मौन का यह चरण बदलाव के स्वीकृति से शुरू होता है, जहाँ शिकायतें पिघलने लगती हैं और आत्मा खुद से ही संवाद करने लगती है.
_ अब कोई शिकवा नहीं होता, कोई अपेक्षा नहीं बचती..
_ बस एक गहरा स्वीकार होता है कि जो होना था, वह हो चुका.
_ अब सिर्फ़ आगे बढ़ना है — खुद के साथ, खुद के लिए..
_ और जब आत्मा यह स्वीकार कर लेती है, तब भीतर क्षमा का बीज अंकुरित होता है.
_ यह क्षमा दूसरों के लिए नहीं, सबसे पहले खुद के लिए होती है.
_ हम समझते हैं कि जो किया, उस वक़्त अपनी समझ और हालातों के अनुसार किया. _ आज अगर वह अधूरा लगता है, तो वह आत्मज्ञान का परिणाम है — आत्मग्लानि का नहीं, इस बोध से जन्म लेती है आत्म-मुक्ति.
_ हम खुद को माफ करते हैं, गले लगाते हैं, और धीरे-धीरे अपने ही टूटे हिस्सों को जोड़ते हैं.
_ इस मौन के साथ दिल अब भी वैसा ही बना रहता है — कोमल, संवेदनशील और सच्चा, लेकिन अब वह चयनशील हो जाता है.
_ अब हर कोई उस दिल तक पहुँच नहीं सकता.
_ अब वह हृदय अपनी सीमाएँ जानता है और उन सीमाओं की रक्षा करना सीख चुका है. _ अब वह प्रेम करता है, पर बिना अपने आप को खोए.
_ अब वह भरोसा करता है, पर आँख मूँद कर नहीं.
_ यह हृदय अब अनुभव से सधा हुआ है, आत्मसम्मान से भरा हुआ है.
_ मौन के इस रास्ते पर चलना आसान नहीं होता, लेकिन यही रास्ता आत्मा को सबसे ज़्यादा सुकून देता है.
_ जब बोलना थकाता है, तब चुप रहना संबल देता है.
_ जब बाहर कोई नहीं समझता, तब भीतर की आवाज़ ही मार्गदर्शक बन जाती है..
_ और यही मौन धीरे-धीरे घावों को भरता है, थकान को मिटाता है और हमें सिखाता है कि गरिमा के साथ आगे कैसे बढ़ा जाए.
_ अब मेरा मौन सिर्फ़ चुप्पी नहीं है, यह मेरा उत्तर है — उन सभी प्रश्नों का जो अब अर्थहीन हो चुके हैं.
_ यह मेरे भीतर का संतुलन है, मेरी आत्मा की शांति है.
_ अब मैं कुछ भी साबित नहीं करना चाहता.
_ अब मैं सिर्फ़ जीना चाहता हूँ — पूरे सम्मान, आत्मसम्मान और सच्चाई के साथ.!!
– Rahul Jha
| Nov 19, 2013 | सुविचार

सबसे फालतू चीज क्या है जिस पर लोग पैसे खर्च करते हैं ?
What is the most useless thing people spend money on ????
पैसे कमाने के बारे में तो आपको हर कोई बताता होगा, लेकिन शायद ही कोई आपको खर्च करने के तरीके बताता होगा.
सही फाइनेंशियल मैनेजमेंट में यह जरूरी है कि आप अपने खर्चों को भी मैनेज करें, हमें शांत चित से महीने की कमाई और खर्च का गणित अवश्य मिलाना चाहिए. खर्चे का सही मैनेजमेंट नही होने के कारण ही कमाई से अधिक खर्च कर जाते हैं. इसीलिए हम जो चीजें सस्ती हैं, उसका पीछा करने के लिए हमेशा महंगा भुगतान करते हैं.
_ शॉपिंग को अपनी हॉबी बनाने से बचें, लोन के द्वारा कुछ ना खरीदें, _ ये समझें कि कहां पर पैसे खर्च करने चाहिए और कहां नहीं..!!
सामाजिककरण महंगा नहीं होना चाहिए, जैसे शादी-विवाह, गृह प्रवेश आदि..!!
आगे की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए आज पैसे बचाना जरूरी है.
पैसे खर्च करना सीखने से आपको अपने पैसों का अधिक से अधिक इस्तेमाल आ जाता है ; _ इतना ही नहीं, इससे आपको भी खुशी मिलती है.
अनेक लोग वह धन व्यय करते हैं, जो उनके द्वारा कमाया हुआ नहीं होता. वे चीजें खरीदतें हैं, जिनकी उन्हें जरुरत नहीं होती.
ऐसे लोग _ उनको प्रभावित व दिखावा करना चाहते हैं, जिन्हें वे पसन्द भी नहीं करते.
हमारी ‘चाहत’ चुपके से ‘ज़रूरतों’ में बदल जाती है और ऐसी चीजें जो कभी विलासिता की चीज़ें हुआ करती थीं, ज़रूरतों में बदल जाती है.
यह मानसिकता एक समस्या खड़ी करती है, एक बड़ी समस्या..
इसलिए अपनी आय के आधार पर अपनी चाहत की सीमा निर्धारित करें..
आप अपने चुने हुए तरीके से अपने जीवन का भरपूर ‘आनंद ’लेते रह सकते हैं.
पैसा तो एक साधन मात्र है. आप जहां चाहें यह आपको ले जाएगा, लेकिन यह ड्राइवर के रूप में आपकी जगह नहीं लेगा. – AynRand
बिना किसी को दुख दिए या किसी का हक़ मारे पैसा कमाना सुख की बात है.!!
सही पैसा वो है जिसे कमाने के पश्चात् नींद चैन की आये.!!
पैसे से यदि आप सुविधा, साधन और समय खरीद सकें तो पैसे का इससे बङा सदुपयोग कोई दूसरा नही हो सकता.!!
पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन यह सब कुछ नहीं है… उन सभी चीजों के बारे में सोचें _जो आपके पास पहले से ही हैं _जिन्हें पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.
पैसे से सम्पति का खरीदी जाती है पर कुछ अमूल्य चीजो को पैसा भी नही बचा सकता.. जैसे कि समय, सौंदर्य…!
यदि आपके पास पैसा नहीं है तो आप कुछ और नहीं सोचते हैं, _और यदि आपके पास है तो अन्य चीजों के बारे में सोचते हैं.!!
धन कमाना बहुत कठिन है, और यदि मिल जाए तो ..
“उसकी रक्षा करना और मुश्किल है.”
कुछ लोग निर्धनता प्रकट करके और खुद को निर्धन दिखा के खुश होते हैं.!!
_धनी होना चाहते हैं पर मेहनत किए बिना.!!
भौतिक जगत में जीना है और सुकून से जीना है तो अच्छे पैसे कमाने ही होंगे..
_ क्योंकि बग़ैर पैसे के समाज तो नहीं जीने देगा.!!
पैसा इतना होना चाहिए कि हम जो काम करना चाहे कर सकें..
_ इसके लिए दिन, रात, महीनों, वर्षों तक न सोचना पड़े..
_ और न अपने आप को उस काम को करने के लिए अनैतिक मार्ग और अनुचित साधन का प्रयोग करने के लिए मजबूर होना पड़े.!!
खरीदारी से पहले सोचें कि वह चीज आपके समय और मेहनत से कमाए गए पैसे की असल कीमत के लायक है या नहीं.!!
धन की महिमा उतनी ही ठीक है, जितने से जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे ; _ उससे अधिक की इच्छा करना और उसके लिए कीमती जीवन को नष्ट करना व्यर्थ है !!
” जीवन यापन के लिए धन अर्जित करना उचित है, पर धन के लिए जीवन अर्पित कर देना पागलपन है “
” पर्याप्त पैसा होने की सबसे बड़ी बात यह है कि आप इसके बारे में सोचना बंद कर सकते हैं.” – Tara Westover
धन हमारी क्षमता को बढ़ाकर हमारे जीवन में एक भूमिका निभाता है ; _ लेकिन बहुत अधिक धन वास्तव में इससे वंचित करता है.
किसी व्यक्ति की महानता इस बात में नहीं है कि वह कितना धन अर्जित करता है, बल्कि उसकी ईमानदारी और अपने आसपास के लोगों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की उसकी क्षमता में है.”
The greatness of a man is not in how much wealth he acquires, but in his integrity and his ability to affect those around him positively.”
धन हमें अपने पास होने से उतना प्रसन्न नहीं करता जितना अपने नुकसान से हमें पीड़ा देता है.
Riches do not exhilarate us so much with their possession as they torment us with their loss.
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास बहुत कुछ है या थोड़ा, धन प्रबंधन के पांच सरल नियम याद रखें:
1. नकद राजा है.
2. आपके पास जितना है उससे अधिक खर्च न करें.
3. जब आप अधिक कमाते हैं तो अपने खर्च में वृद्धि न करें.
4. आप पैसे बचाने में कभी गलत नहीं हो सकते.
5. अपना पैसा काम पर लगाएं.
It doesn’t matter If you’ve a lot or a little, remember five simple rules of money management: Cash is king. Don’t spend more than you have. Don’t increase your spending when you make more. You can never go wrong saving money. Put your money to work.
अपने जीवन और कार्य को प्रबंधित करें ताकि पैसा आपका वफादार सेवक बन जाए, न कि आपका अथक स्वामी..!!
Manage your life and work so that money becomes your faithful servant, not your relentless master.
अधिकतर झगडे पैसों को लेकर होते हैं. बेहतर होगा कि अपने खर्च, बचत, निवेश की योजना पहले से ही बना लें और फिजूल के खर्चों से बचें.
यदि आप किसी से पैसा उधार लेते हैं तो उसे समय पर अवश्य लौटाएं.
_ जो भी तारीख दो उस तारीख को चाहे किसी से भी पैसे लेकर देने पड़े लेकिन उस तारीख को कभी मत चूकना..!!
पैसे को सफलता से जोड़ना गलत हो सकता है, पर अफ़सोस यह है कि सफलता को आँकने के लिए पैसा ही सब से अच्छा थर्मामीटर है.
धनी और कंगाल के मध्य का अन्तर कितना नगण्य है. एक ही दिन की भूख या एक ही घण्टे की प्यास दोनों को समान बना देती है.
जिनके पास सही में दौलत होती है उन्हें बताने की आवश्यकता नहीं होती..
_ क्योंकि जिनके पास कुछ नहीं होता वही सबसे ज़्यादा हवा में बातें करते हैं.!!
#धन आवश्यक है, _ आजीविका और अच्छा जीवन को जीने के लिए,
_ पर इस से अधिक धन को महत्व देना वाले व्यक्ति के जीवन से प्रेम विदा हो जाता है,
_ क्योंकि धन के लिए जितना कठोर होना होता है , प्रेम इतना कठोर नही हो पाता..!!
इतना पैसा तो होना ही चाहिए कि दुख दूर हो जाए,
_ पर इतना नहीं कि पैसे से ही दुख पास आ जाए.!!
यदि आप कम धन में सुख का अनुभव करना नहीं जानते, _
_ तो अनंत धन राशि भी आप को सुखी नहीं बना सकती.
पैसा सिर्फ जमा करने की चीज नहीं है, यह जीवन को सहज बनाने का साधन है.
_ धन का असली मूल्य तब है, जब वह सुरछित भी हो और शांत भी रखे.
_ कितना रखना है, से ज्यादा जरुरी है “कितना पर्याप्त है”
_ जरुरत से ज्यादा रखा हुआ धन, सुरछा नहीं,,, अक्सर एक नया बोझ बन जाता है
_ बहुत से लोग ये गलती करते हैं : – पहले पैसा कमाते हैं, फिर उसे बचाने की चिंता में जीवन जीना ही भूल जाते हैं.
पैसा सिर्फ एक हद तक ख़ुशियाँ खरीद सकता है, स्टडीज बताती है कि _
_ करीब ४९ लाख प्रति वर्ष इनकम की बाद भी ख़ुशियों में बहुत कम ही इज़ाफ़ा होता है.
ईमानदारी से धन कमाना सर्वश्रेष्ठ नीति है तथा मेहनत से कमाए धन से जो संतोष और ख़ुशी मिलती है _ वह अनैतिक तरीको से कमाई में नहीं मिलती हैं.
“पैसा कमाना महत्वपूर्ण है” लेकिन पैसे को सुरछित रखना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है.
धनार्जन के लिए प्रयतनशील रहना उत्तम है, _
_ किन्तु धन की धुन में ही धधकते हुए धराशायी हो जाना उचित नहीं है.
धन का मोह छोड़ने पर ही मालूम होता है कि उस से भी बड़ी चीज कुछ होती है.
अक्सर, जीवन में सबसे कीमती चीजें वे चीजें होती हैं _ जिन्हें पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.
“सही जगह रखा पैसा ही कमाई करता है,
_ सिर्फ जमा किया पैसा नहीं”
पैसा डेटॉल [Dettol] की तरह है..
_क्योंकि यह 99.9% समस्याओं [Problem] को ख़त्म कर देता है.!!
कम पूंजी के बढ़ने की गति बहुत धीमी होती है..
_ इसलिए उसे बचाए रखने के लिए अपने खर्च पर निर्मम नियंत्रण रखना जरूरी है.
जैसे धुन बदलने पर लोगों का नृत्य बदल जाता है,
_ वैसे ही धन के आगमन पर लोगों का पूरा दृश्य बदल जाता है ..
पैसा वो माध्यम है जो समस्या को खत्म तो नहीं करता..
_लेकिन इतनी सुविधा देता है कि समस्या ‘महसूस’ नहीं होती.!!
जिन्दगी में जीवन से बड़ा पैसे को मत समझ लेना _
_ वरना जिंदगी बड़ी ही बेकार सी लगने लगेगी.
खुश रहना एवं खुशहाल रहना दोनों ही आप पर निर्भर करता है. पैसा एक साधन मात्र है.
_ जीवन को योजनाबद्ध तरीके से जीया जाए तो आप कम में भी खुश रह सकते हैं.!!
आप ने पैसे कितने कमाए, इस बात की कोई अहमियत नहीं होगी,
_ “कैसे कमाए, इस बात की हमेशा अहमियत रहेगी.”
अमीरी के बाद, जो मान- सम्मान मिलता है, वह अमीर का सम्मान नहीं, _
_ अमीरी का सम्मान है.
एक प्रश्न आदमी को खुद से जरूर पूछ लेना चाहिए “जो सिर्फ पैसों की वजह से आपको इज्जत दें, मान सम्मान दें, अपना मानें, आपकी बात सुनें, क्या वो सच में आपके अपने हैं ?”
अपने आसपास आपको जितने भी उपद्रव होते दिखेंगे,
_ उसकी जड़ में कहीं ना कहीं पैसें या सम्मान पाने का लालच ही नजर आएगा,
_ व्यक्ति को पैसा और सम्मान जितना मिले उतना कम लगता है, इसलिए आखिरी सांस तक व्यक्ति के जीवन में उपद्रव चलते रहते हैं.
अगर आप जितना पाते हो, उस से कम खर्च करना जानते हो, तो आपके पास पारस पत्थर है.
यदि आप अपनी मेहनत से कमाए गए पैसे की कद्र नहीं करेंगे तो..
..कोई भी आपके पैसे की कद्र नहीं करेगा..!!
पैसा आपको ख़ुशी के अतिरिक्त, सब कुछ दे सकता है. _
_ उस में आपको सुखों में भी दुःखी बनाने की शक्ति है.
किसी के धन- ऐश्वर्य से उसके सुखी होने की परिकल्पना न कीजिये, वह अपने हिस्से के जाल में घिरा है.
_ उसका ऐश्वर्य एक सुसज्जित प्रयोगशाला (lab) की तरह है, जहाँ उसे अपने हिस्से के सबक़ सीखने के लिए भेजा गया है.
“ ऐसा मत सोचो कि पैसा सब कुछ करता है _
_ वरना आप पैसे के लिए सब कुछ करने लग जाओगे ”
अपनी आर्थिक स्थिति को गंभीरता से लो,
_ पैसा कई चुनौतियों का बचाव है और इससे कई समस्याएं हल हो सकती हैँ.
पैसे के बिना आपकी बातें अनसुनी हो जाती हैं और पैसे के साथ आपकी खामोशी भी काबिलियत बन जाती है.!!
पैसे की कीमत को मैंने इतना ही जाना है, _ अमीर चाहे जितना हो जाओ, दाल – रोटी ही खाना है..
पैसा एक कीमती वस्तु है; आपके पास है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसे बर्बाद कर दें.
पैसा खुशी नहीं देता पर आपके दुःखों को कम जरूर कर देता है.
धन, जीवन, स्त्री और भोजन के विषय में, सब प्राणी अतृप्त हो कर गए, जाते हैं और जाएंगे.
हराम की दौलत आराम दे सकती है, लेकिन सुकून नहीं !
पैसा हमारे व्यक्तित्व में तभी सही चमक पैदा कर सकता है, जब हमारे मानवीय गुण बने रहें.
हमें प्रतिस्पर्धा में तो नहीं जीना, पर साथ ही आवश्यक धन का अभाव भी हमारे पास नहीं रहना चाहिए.
धन का सही इस्तेमाल समझदार ही करता है, और लोग उससे ईर्ष्या करते हैं कि वो संतुष्ट कैसे है.
पैसे के लिए काम करना और पैसों को काम पर लगाना ; इन दोनों में फर्क है.
ईमानदारी से कमाया हुआ पैसा बरकत भी देता है और सुकून भी.!!
ये दबदबा, ये दौलतें सब किरायेदार हैं, घर बदलते रहते हैं.!
छोटी धनराशि ऋणी बनाती है और बड़ी धनराशि शत्रु.
पैसा आपका सेवक है, यदि आप उसका उपयोग जानते हैं, तो आप उसके स्वामी हैं.
पैसा हमारा सेवक ही बना रहे, न कि यह हमारा स्वामी बन बैठे.
ऐसा मत सोचो कि पैसा सब कुछ करता है वरना आप पैसे के लिए सब कुछ करने लग जाओगे.
पैसा जरूरी हो सकता है, लेकिन इतना भी जरूरी नहीं कि वो हमें इंसान से कुछ और बना दे.
जीवन में धन कमाना जरुरी है.. ताकि ये दुनियावी सिस्टम अपने स्वरूप में चलता रहे.!!
धन के मद में मतवाला मनुष्य, गिरे बिना होश में नहीं आता !!
कई बार लोगों के पास पैसा तो आ जाता है पर गंभीरता नहीं आती व्यवहार में..
_ कहते हैं न, जिस पेड़ पर जितने ज्यादा फल, वो उतना ही ज्यादा झुका रहता है.!!
जीवन में खुश रहने में पैसे का बहुत बड़ा योगदान है, इसलिए पैसे का सम्मान करें, पर इस तरह से कि यह आप की चिन्ताएं दूर करे न कि चिन्ता का कारण बने.
धन हमारी आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा करे, हमारी प्रतिभा को निखारे, हमारी छमता को बढ़ाए, तो इसके लिए बेहद जरुरी है कि हम पैसे का सम्मान करें.
हमारी शिछा में कमी ये नहीं है कि पैसा खर्च करना नहीं सिखाया गया.
_ बल्कि कमी यह है कि पैसा बनाने के बाद उसका किस तरह इस्तेमाल किया जाए और उसे किस तरह संभाला जाए, इसे पैसे की समझ कहते हैं.
मेहनत से कमाए धन की फसलें जब बढ़ती हुई नजर आती है तो.. संतोष होता है.
_ मेहनत की कमाई, थोड़ी कम ही क्यों ना हो, वो जीवन में खुशी और शांति देती है,
_ लेकिन गलत तरीके से आई धन की फसलें लहराती तो हैं.. लेकिन कम समय तक..
_ और फिर उसमें उग आए खरपतवार के कांटे आपको चुभने लगते है..
_ और समय के साथ इसका दर्द और भी बदतर हो जाता है..!!
गलत काम से पैसे तो कमाए जा सकते हैं, लेकिन वो पैसे इच्छा पूरी नहीं कर पाते,
क्योंकि इच्छा लगातार बढ़ती चली जाती है की इसके बाद ये ये शौक पूरे करना है.
और ईमानदारी की कमाई, थोड़ी कम ही क्यों ना हो, वो जीवन में खुशी और शांति देती है,
अपना लछ्य अमीर बनना जरूर रखो, लेकिन जल्दी अमीर बनने के चक्कर में गलत रास्ते पर मत जाओ,
वरना आप मानसिक रोगी बन जाओगे.
निश्चल हृदय का कोई मोल नहीं, प्रेम तो ठीक है कर लेंगे __ पर जीवन भर साथ निभाने वाला कोई नहीं,
धन हो तो प्रेम, साथ, यार दोस्त, रिश्तेदार इस संसार का हर संबंध खरीद सकते हो _ हर बेगाना भी आपका अपना हो जाता है…!!!
पैसे का प्रभाव अपने चरम पर पहुंच गया है और हर जगह इसका बोलबाला है.
_ जिसके पास पैसा है.. वह बुद्धिमान और शक्तिशाली है, बाकी दुनिया उनकी नजर में मूर्ख है.
_ ये भी सच है कि पैसा कमाने का ये आसान सा दिखने वाला काम ..हर कोई क्यों नहीं कर पाता ?
_ दरअसल, ‘आसान’ दिखने वाला ये काम ..इतना आसान नहीं है.
पैसा इंसान के चरित्र की असली परीक्षा लेता है,
_ कई बार जो लोग सच्चे और अच्छे लगते हैं, वो पैसे के सामने खुद को बदल लेते हैं,
_ और वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं.. जो पैसा आने के बाद भी अपनी असलियत और इंसानियत नहीं छोड़ते, खैर..!
…पैसा इंसान को नहीं बदलता, वो तो सिर्फ उसकी असली पहचान सामने लाता है…!
पैसों की अन्धी लालसा में जब हम बेईमानी, चोरी और भ्रष्टाचार से पैसा कमाने लगते हैं, तो हम पैसे का घोर निरादर कर रहे होते हैं.
जब हम पैसा धोखा, बेईमानी, शोषण, भ्रष्टाचार या अपराध के द्वारा हासिल करते हैं, तो इसका सीधा- सा अर्थ है कि हम पैसे की अस्मिता और उसकी गरिमा को अपमानित कर रहे हैं — ऎसा पैसा कभी भी सच्ची ख़ुशी नहीं देता.
पैसा कमाने की होड़ ने हमें पागल कर दिया है, अमानवीय बना दिया है.
_ धन कमाना और उसे बढ़ाना- प्रशंसनीय है..
_ लेकिन इसके लिए छल-बल, प्रपंच, बेईमानी, घूसख़ोरी कतई ज़रूरी नहीं है.
_ ये कमाई के वे ‘शार्टकट’ हैं, जिसे केवल आलसी और लालची लोग अपनाते हैं।
_ मेहनत करने वाला अपनी बुद्धि-चातुर्य और परिश्रम से, ईमानदारी से धनोपार्जन करता है और सीना तान कर अपने व्यक्तित्व का विकास करता है.
_ रात को मीठी नींद सोता है, शारीरिक व्याधियों से दूर रहता है और अपनी आगामी पीढ़ियों को प्रकाशपुंज बनकर प्रकाशित करता है.
– द्वारिका प्रसाद अग्रवाल
आपके पास जितना भी धन हो, अगर आपका मन शांत और खुश नहीं है, तो आप जीवन का सच्चा आनंद नहीं ले सकते.
_ पैसा कमाना जरूरी है, लेकिन अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
_ काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखें और एक सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाएं.!!
“जिस तरह गंदगी में बना भोजन खाने में स्वादिष्ट होता है, लेकिन शरीर को नुकसान पहुंचाता है,
_ वैसे ही गलत तरीके से कमाया पैसा आपको क्षणिक सुख ज़रूर देता है, लेकिन वो इसी तरह बाहर भी निकलता है.
_ इसलिए पैसे कमाने में ईमान का ध्यान रखें, नहीं तो वो संताप के रूप में सामने आएगा.
“- “पैसा कितना कमाया, इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि पैसा कैसे कमाया”
लोग धन जमा करने में समय गंवा देते हैं.
_ जिस समय को वो जी सकते थे, उसे जीने की तैयारी में खर्च कर देते हैं.
_ सोचते हैं कि एक दिन जी लेंगे.
_ जब कागज के ढेरों नोट वो जमा कर लेते हैं और सोचते हैं कि अब जी लेंगे तो समय नहीं बचता, जीने के लिए..
_ सबसे बड़ी करेंसी खत्म हो चुकी होती है.
_ बचता है, बस कागज का टुकड़ा..!!
दुनिया की सारी सुविधाएं पाने और पैसा कमाने की होड़ में हम इंसान मशीन बन गये हैं.
_ मिलना जुलना आपसी सुख दुख सब दूर हो चले हैं..!!
बेईमानों, धोखेबाजों और भ्रष्टाचारियों से धन अपने अपमान का बदला जरूर लेता है, जब ऎसे लोग मुसीबत में घिरते हैं, तो पैसा भी अपना मुँह मोड़ लेता है.
कमाना एक बुद्धिमता हो सकती है, लेकिन उस से बड़ी बुद्धिमता इसमें है कि अपनी कमाई का सदुपयोग करना सीख जाए.
पैसा कमाने की होड़ ने हमें पागल कर दिया है, अमानवीय बना दिया है.
_ धन कमाना और उसे बढ़ाना- प्रशंसनीय है लेकिन इसके लिए छल-बल, प्रपंच, बेईमानी कतई ज़रूरी नहीं है.
_ ये कमाई के वे ‘शार्टकट’ हैं जिसे केवल आलसी और लालची लोग अपनाते हैं.
छोटे-छोटे लोभ, बङे लाभों से वंचित करते हैं, लेकिन लोग फिर भी समझते नहीं हैं, और शोर्ट कट रास्ता चुनते हैँ !!
मेहनत करने वाला अपनी बुद्धि-चातुर्य और परिश्रम से, ईमानदारी से धनोपार्जन करता है और सीना तान कर अपने व्यक्तित्व का विकास करता है.
_रात को मीठी नींद सोता है, शारीरिक व्याधियों से दूर रहता है और अपनी आगामी पीढ़ियों को प्रकाशपुंज बनकर प्रकाशित करता है.
मनुष्य धन के अभाव से उतना कष्ट नहीं पाता, जितना वह अपनी फ़ुजूलखर्ची के कारण पाता है.
मजाक और पैसा सोच समझकर उड़ाओ..
_क्योंकि असली बुद्धिमान वो है.. जो जरूरत पड़ने पर खुद को भी थोड़ा नासमझ दिखा सके.!!
जिस पैसे में अपने पसीने की महक न हो, वह पैसा सुख के सारे साधन तो दे सकता है, परन्तु मन की शान्ति नहीं.
यदि धन को आप पहचानते हैं तो वह आप का दास है, यदि नहीं पहचानते तो आप उस के दास हैं.
जिस व्यक्ति की यह राय हो की पैसा सब कुछ कर सकता है,
उस पर ये संदेह किया जा सकता है की वो पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है.
पैसा इनसान के लिए जरुरी है लेकिन पैसा सब कुछ नहीं है, जिस के लिए आदमी सारे रिश्तों को आग लगाने के लिए तैयार हो जाए.
पैसों के लिए इतना अंधा भी नहीं होना चाहिए कि वह अपनों को ही नुकसान पहुंचा कर अपने स्वार्थ की पूर्ति करे.
जो इंसान अपनी आमदनी के अनुसार खर्च करता और बचत करता है, अपने आने वाले कल के लिए सोच कर चलता है, वह कभी परेशान नहीं होता.
पैसा हर सवाल का हल नहीं है.. लेकिन आज की दुनिया में यह हर दरवाज़े की चाबी ज़रूर बन चुका है.!!
पैसों को सही ढंग से बचत करना कंजूसी नहीं, _ बल्कि समझदारी कहलाता है…
कमाने में बहुत श्रम लगता है _उसे यूँ जाया जाते देख पीड़ा होती है.
_ पर समझदारी से खर्च करने और कंजूस होने में फर्क होता है..!!
पैसा कमाने के लिए इतना वक़्त खर्च ना करो कि _ पैसा खर्च करने के लिए ज़िन्दगी में वक़्त ही ना मिले !
जो खर्च कर सके, वही धन का वास्तविक मालिक है, _ बाकि तो सभी सम्पति के चौकीदार हैं.
खुद के लिए पैसा कमाना अच्छी बात है, और उससे किसी और का भी भला हो तो बहुत अच्छी बात है.
किसी भी तरह से पैसा प्राप्त करना न पैसे से प्यार है, न यह पैसे का सम्मान है.
पैसा सब कुछ नहीं होता,_ बाकी पैसे से सब कुछ होता है..!!
पैसे होना सुखी होने की नहीं संपन्नता की निशानी है.
धनसंपदा आप को बिना उच्चतर मूल्यों के स्थायी सुख संतोष नहीं दे सकती.
पैसा, शोहरत या स्टेटस सिर्फ हमारी जरुरत है, ख़ुशी का मूलमन्त्र नहीं.
-पैसा कितना कमाओगे इसकी अहमियत नहीं है _बल्कि पैसे कैसे कमाए _यह महत्वपूर्ण होता है.
धन के भी पर होते हैं. कभी- कभी वे स्वयं उड़ते हैं और कभी- कभी अधिक धन लाने के लिए उन्हें उड़ाना पड़ता है.
“उन चीज़ों पर अत्यधिक पैसा खर्च करें जिन्हें आप पसंद करते हैं,
_ और उन चीज़ों पर निर्दयतापूर्वक कटौती करें जिन्हें आप पसंद नहीं करते हैं”
बेशक पैसे से हम कुछ भी ख़रीद सकते है पर पैसे से कई चीज़ें नही ख़रीद सकते
जैसे – माँ-बाप, मन की शांति, बुद्धि, समझ, प्रतिभा.
धन से हम जीवन की सारी सुख सुविधा तो हासिल कर सकते हैं,
पर जीवन में सुकून केवल अच्छे कर्मों से ही आता है.
सत्य से कमाया धन हर प्रकार से सुख देता है और
छल कपट से कमाया हुआ धन दुःख ही दुःख देता है.
आप कितना कमाते हैँ और आप के पास कितना धन है,
_ यह बातें किसी को भी सीधे – सीधे ना बताएं..
शराब से ज्यादा नशा धन का होता है,
शराब का नशा तो दो- चार घंटे बाद ही उतर जाता है,
लेकिन धन का नशा तो
जिंदगी बरबाद करने के बाद ही उतरता है.
क्या चीज बनायी है “धन”,
लगभग सभी अपने “निधन” तक इकठ्ठा करने में लगे रहते हैं.
हर किसी को लगता है सफ़ल होने के बाद ज़िंदगी आसान होगी…पैसे होंगे और मन पसन्द सब कुछ होगा, _
_ देखो यार, _ ऐसा है यदि तुम्हारा मन शांत नहीं है और तुम परेशान हो…तब जीवन की कोई भी अवस्था रास नहीं आनी…!!!
लोग कहते हैं कि पैसा सिर्फ़ बेईमानी से, धोखाधड़ी से, गरीबों का शोषण करके ही कमाया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है !!
_यह कामचोर और आलसी लोगों की फैलाई हुई भ्रांति है.
_यदि आपमें श्रम करने की ताकत है, दिन-रात काम में जुटे रहने का जज़्बा है, सोच-विधार करने की शक्ति है तो ..आपके पास पैसे को आने से कोई नहीं रोक सकता.
_पैसे के साथ आपके चेहरे पर मेहनत की चमक भी आएगी, सफ़लता का आत्मविश्वास भी झलकेगा.
_मेहनत और लगन के रास्ते पर चलना तो शुरू कीजिए.
धन….
अपनी जरूरतों के लिए धन कमाना, भौतिक साधन एकत्र करना बहुत अच्छी बात है किन्तु धन दौलत जमा करने की भूख होना, लालसा होना, लालच होना उसके लिए अनैतिक कार्य करना, दुसरो का हक़ मारना उचित नहीं है !!! याद रखिये धन की तीन गतियाँ प्रसिद्ध है, पहला उपभोग, दूसरा दान तीसरा स्वतः नष्ट हो जाना !!!
पैसा अकेला एक साधन है; यह एक आदमी को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति देता है. अमीर आदमी जहां चाहे जा सकता है, लेकिन शायद खुद को कहीं खुश नहीं करता ; _ वह एक पुस्तकालय खरीद सकता है या पूरी दुनिया की यात्रा कर सकता है, लेकिन शायद न तो पढ़ने का धैर्य है और न ही देखने की बुद्धि…. बटुआ भरा हो सकता है और दिल खाली.
_हो सकता है उसने संसार को पा लिया हो और स्वयं को खो दिया हो; और उसके चारों ओर उसकी सारी दौलत के साथ .. वह किसी भी जीर्ण-शीर्ण खाई की तरह खाली जीवन जी सकता है.
हमारे पैसे का असली मूल्य इसमें नहीं है कि हम अपने लिए क्या खरीद सकते हैं, बल्कि इस बात में निहित है कि हम दूसरों के जीवन में क्या बदलाव ला सकते हैं.
_ भौतिक संपत्ति की तुलना में हमारे पैसे खर्च करने के लिए हमेशा बेहतर चीजें होती हैं.
_ हमारा पैसा केवल उतना ही मूल्यवान है जितना हम इसे खर्च करने के लिए चुनते हैं ; _ जब हम भौतिक सामान चुनते हैं, जैसे बड़ी स्क्रीन वाला टीवी या नया वार्डरोब, तो यही वह मूल्य है जो हमने प्राप्त किया है—क्षणभंगुर मनोरंजन या हमेशा बदलते रहने वाला फैशन.
लेकिन आइए एक अलग दृष्टिकोण पर विचार करें ; __ क्या होगा अगर हम उस पैसे को परिवार की छुट्टी – जैसे साझा अनुभवों पर खर्च करना चुनते हैं ? हमारे धन का मूल्य तब भौतिक से परे होता है.
उसी तर्ज पर, क्या होगा अगर हम उन्हीं संसाधनों को समस्याओं को हल करने और दुनिया में परिवर्तन को प्रभावित करने के लिए निर्देशित करें ?
एक अनाथ बच्चे के लिए एक परिवार या एक गांव को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए ? अचानक, हमारे पैसे का मूल्य कई गुना अधिक हो जाता है !
अगर आप को पैसे बचाने हैं तो बैंक में एक आरडी अकाउंट जरूर खुलवाएं.
ऐसा करने से आप हर महीने कुछ पैसे जरूर बचा सकेंगे और साथ ही, आप को बैंक से ब्याज भी मिलेगा.
यदि रूपया उधार लेने की नौबत आ जाय, तो वायदे के अनुसार उसका ब्याज देते रहिये और उसे उतार कर ही दम लीजिये.
धन उत्तम कर्मों से उत्पन्न होता है, प्रगल्भता [ साहस, योग्यता व दृढ़ निश्चय ] से बढ़ता है, चतुराई से फलताफूलता है और संयम से सुरछित होता है.
सिर्फ इसलिए कि आपके पास पैसा है, बहुत सी नई चीजें ख़रीदना बंद करें, जिनकी आपको जरुरत नहीं है.
पैसे की असल कीमत हमें तभी समझ आती है,
_ जब हमें किसी चीज़ की जरूरत होती है और अगर वही पैसा हमारे पास होते हुए भी हम उसे अपनी ज़रूरत के लिए इस्तेमाल ना कर पाएं, तो वो सिर्फ कागज़ के टुकड़ों जैसा रह जाता है.. शायद रद्दी से भी ज़्यादा बेकार.!!
क्या जीवन में भोजन ही प्रधान है ?
सामाजिक खर्च, दैनिक जीवन हेतु उपयोगी वस्तुएँ, सामाजिक लेन-देन,
आपके रोजाना आने-जाने का खर्च, रोज का ड्रेस-अप,
आगे चलकर कुछ आकस्मिकताओं का वित्तीय प्रबंधन….
इस विषय में क्या सोचा आपने ?
पैसे सिर्फ आपकी लाइफ़ स्टाइल बदलते हैं और
आपकी जरूरतों को पूरा करते हैं.
अपनी खुशी के लिए पूरी तरह से पैसे पर आश्रित ना रहें.
धन न हो तो चिंता मोटी होती है और
धन ज़्यादा हो तो भी चिंता तंदुरुस्त होती है,
इसलिए धन के साथ ध्यान को जोड़ना जरुरी है.
जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ..
.. जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रहे ….
खरीद लो साहब पैसों से संसार के सारे ऐशो आराम,
बस हमें इतना बता देना __ सुकून क्या भाव ख़रीदा..
“हम पैसे से वो चीज़ें खरीदते हैं जिनकी हमें ज़रूरत नहीं होती
हमें उन लोगों को प्रभावित करने की ज़रूरत नहीं है जिन्हें हम पसंद नहीं करते”
“We buy things we don’t need with money
we don’t have to impress people we don’t like”
धन का अभाव होने पर मलाल की स्थिति में या धन का भरपूर आनंद लेने के बाद ऊबने की स्थिति में.. यह कहा जाता है कि खुशी पाने के लिए धन की ज़रूरत नहीं है.
एक वक़्त होता है, जब हम कुछ बनना चाहते हैं..
_ किसी को देख के.. उसके रुतबे को या ओहदे को देख के.. टीचर, डॉक्टर, इंजीनियर या फिर पायलट, खैर !…
_ फिर बाद में मुझे पता चला कि पैसेवाला बनना ज्यादा जरूरी है…!!
१. लोगों को यह दिखाने के लिए पैसा खर्च करना कि आपके पास कितना पैसा है, कम पैसे रखने का सबसे तेज़ तरीका है.
2. पैसे का सबसे बड़ा आंतरिक मूल्य– यह आपको अपने समय पर नियंत्रण देने की क्षमता रखता है.
3. मेरे लिए स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि आप काम करना बंद कर देंगे. _ इसका मतलब है कि आप केवल उन लोगों के साथ काम करते हैं जिन्हें आप पसंद करते हैं, जब आप चाहते हैं _तब तक आप चाहते हैं.
४. कम खर्च कर बचत की जा सकती है. यदि आप चाहते हैं तो आप कम खर्च कर सकते हैं.. और आप कम इच्छा करेंगे ;
यदि आप इस बात की कम परवाह करते हैं कि दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं.
पैसा जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज क्यों है ?
पैसा कितना महत्वपूर्ण है, यह आपकी जरूरतों और इच्छाओं पर निर्भर करता है।
सर ढकने के लिए छत, शरीर पर आरामदायक कपड़े, और भूख शांत करने वाला भोजन। इन 3 चीजों के लिए 10,000 भी काफी है ,_
और 10,00,000 भी कम है – जब तक इच्छाएं हैं, तब तक पैसे का जीवन में अतिमहत्वपूर्ण स्थान है.
” कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना “
अगर कोई व्यक्ति दिन रात मेहनत करता है तो लोग कहते हैं,
पैसों के लिए मरा जा रहा है और मेहनत ना करे तो निकम्मा है,
पैसा खर्च करो तो उसे फिजूलखर्ची व दिखावा कहा जाता है
और पैसा खर्च ना करे तो उसे कंजूस व मक्खीचूस कहा जाता है,
अगर आपके पास पैसा बहुत है तो कहेंगे कि दो नम्बर का होगा
और अगर पैसा कम है तो कहेंगे कि थोड़ी सूझबूझ होती तो यह हाल नहीं होता,
और जिंदगी भर मेहनत से जमा किये गये पैसों के बारे में कहा जाता है कि
पैसे का सुख नहीं भोगा, ” तो कमाया ही क्यों था ”
बहुत पैसा है माना, तुम सब कुछ खरीद लोगे,
बताओ जरा मुस्कुराहट की कीमत क्या दोगे,
क्या भाव लगाओगे तुम भावनाओं का,
रिश्तों को निभाने की कीमत क्या दोगे,
माना ख़रीद लोगे तुम जमीं बहुत,
क्या आसमाँ जरा सा भी ख़रीद पाओगे,
पानी भी खरीद सकते हो पैसो से मगर,
क्या प्यास की कीमत लगा पाओगे,
बहुत पैसा है माना मगर,
क्या खुशियाँ खरीद सकते हो,
क्या खरीद सकते हो तुम सुकूँ थोड़ा,
क्या वो बचपन खरीद सकते हो,
बहुत महँगा सा बेड भी खरीद लोगें यूँ तो तुम,
मगर क्या तुम नींद का भाव लगाओगे,
डॉक्टर भी रख लोगे महँगे से महँगा,
मगर स्वस्थ शरीर क्या पुनः पाओगे..
बहुत पैसा है माना मगर क्या खोये हुए दोस्त खरीद सकते हो,
क्या भाव लगाओगे उन यादों का, उन लम्हों का बताओ तो,
क्या वो चौराहें वाली मुलाक़ातें ख़रीद सकते हो ,
बहुत पैसा है माना मगर..
खरीद तो लोगे तुम घर भी बड़ा,
क्या परिवार जुटा पाओगे,
बिन परिवार क्या सिर्फ पैसों से,
घर को घर भी बना पाओगें,
बहुत पैसा है माना मगर, क्या दिन-रातें खरीद सकते हो,
क्या अंतिम क्षण में पैसों से कुछ साँसे खरीद सकते हो..
बहुत पैसा है माना मगर ???
असल में पैसे की इस भागा – दौड़ी में मनुष्य जीवन को जीना भूल गए है, जीवन को धीरे-धीरे पैसे के जैसे ही खर्च किये जा रहे है,
लोगो के पास भाइयों- बहनों तथा उन दोस्तों जिन्होंने हर परेशानी में साथ दिया है उनसे ही बात करने के लिए समय नही है..
अरे क्या करोगें इतना पैसा कमाकर,
एक बार रोज़ शाम को इस झूठी दुनिया से बाहर निकलो और भाइयों – बहनों और उन बिछड़े दोस्तों को कॉल कर बात करना शुरू करो,
देखो जीवन कितना सुन्दरमय उपहार है..
आज की दुनिया में, हम पैसे वाले लोगों की प्रशंसा करते हैं और उनका जश्न मनाते हैं.
पत्रिकाएँ उन्हें रैंक करती हैं, टेलीविज़न नेटवर्क और वेबसाइटें उनकी सफलता का जश्न मनाती हैं; – उनसे जुड़ने के तरीके के बारे में किताबें लिखी गई हैं.
पैसे वाले लोगों के साथ अक्सर हमारी डिनर पार्टियों में अलग तरह से व्यवहार किया जाता है ; _ मुझे ऐसा लगता है कि अधिकांश लोग उनसे जुड़ना चाहते हैं.
वास्तव में, यदि आपको एक कमरे में बैठे लोगों से पूछा जाए, “आपमें से कितने लोग अमीर बनना चाहेंगे ?” लगभग हर हाथ ऊपर उठेगा.
हमारे समाज में ढेर सारा पैसा होना एक उपलब्धि का प्रतीक है, _जिसे हासिल करने की चाहत ज्यादातर लोग रखते हैं.
यहां तक कि छोटी उम्र से ही, _हममें से कई लोगों ने यह कल्पना की थी कि जब हम बड़े होंगे तो हमारे पास ढेर सारा पैसा होगा और यह कितना अद्भुत होगा.
_ और जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, यह कुछ ऐसा है जिसे हासिल करने के लिए हम कड़ी मेहनत करते हैं.
लेकिन आइए एक पल के लिए रुकें और एक नए ढंग से विचार करें: ->
क्या बहुत सारा पैसा होना सचमुच ऐसी चीज़ है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए ?
हम इसका इतना पीछा क्यों कर रहे हैं ? शायद यह गर्व करने की बात नहीं है…
निःसंदेह, यह बात कड़ी मेहनत कर के जो धन अर्जित करता है, उसको कमतर आंकने के लिए नहीं है.!!
_यह सिर्फ एक स्वीकृति है कि इसके अलावा और भी कुछ है, जिसका हमें पीछा करना चाहिए.
हमारे लिए भविष्य के लिए तैयारी करना बुद्धिमानी है, _ लेकिन कोई ऐसा बिंदु भी है _ जिसको आवश्यकता के मुकाबले _अधिक महत्व दिया जाना चाहिए.
मैं कम कमाई के लिए नहीं कह रहा हूं. _प्रत्येक व्यक्ति को उसकी मेहनत का पैसा मिलना चाहिए,
_मैं बस सोच रहा हूं कि हमने जो पैसा कमाया है, उस पर हमें कहां गर्व होना चाहिए.!!
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
हर इन्सान कमाता है यहाँ, खुद को सूकून देने के लिए,
उस पर फिर आ जाते हो तुम, उससे उधार लेने के लिए,
फिर रिश्तो को बना देते हो तुम, पैसे माँग माँग कर,
कभी न चलने वाला यहाँ, इक उजङा हुआ कारोबार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
दिन रात मेहनत कर कर ईंसान, कुछ पैसे कमा कर लाता है,
इस शख्स से पैसे माँगते हुए, माँगने वाले का कुछ नहीं जाता है,
माँगने वाला तो पा लेता है खुशियाँ, उन पैसों से यहाँ,
और पैसे देने वाला पैसो की, फिर करता रहता है ईंतजार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
जरा सोचो उधार किसी ने यहाँ, कितनी जरूरतें मार कर दिया होगा,
फिर खुद की जरूरत पङने पर पैसे, आने का ईंतेजार किया होगा,
फिर उधार देने वाला शख्स पैसे, अपने पाने के लिए,
आता रहा आपकी चौखट पर, खाली लौटता रहा हर बार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार..
Lekhak MAHESH KUMAR CHALIA.
कमाल के लोग हैं…
_ पैसे लेते हुए आपको सिर्फ अपने जरूरतों का ख्याल रहता है, जब पैसा देना होता है अपनी मजबूरियों का ख्याल रहता है….
_ ये भी सोचा करें कि.. जिनसे हम उधार पैसे लेते हैं..
_ वो अपने जरूरतों को कम कर पैसा देता है..
_ और जब वो अपने पैसे मांगता है तो.. उसे उसकी जरूरत होती है….
— इनमें से ज्यादातर लोग उधार लेकर अपने सारे शौक पूरा करते हैं,
_ ऐसा नहीं होता कि उन्हें खाने के फांके पड़े हैं या पहनने को कपड़े नहीं है या रूम का किराया देना है…
_ आप ऐसा ना करें.. जिससे किसी जरूरतमंद को उधार पैसे देते हुए भी दस बार सोचना पड़ें….
– हेसाम
इंसान के पास जब जरूरत से ज्यादा पैसे आ जाते हैं तो उसे लगता है कि वो दुनियां की हर चीज खरीद सकता है.
_ लहज़े में नर्मी की जगह वो घमंड दिखने लगता है.
_ इस गुरूर में वो रिश्ते नाते सभी को रौंदना शुरू कर देते हैं,
_ लेकिन शायद ये हम भूल जाते हैं कि पैसे जिस तेजी से.. जिस तरीके से आते हैं..
_ उसी तेजी से वो पैसे आने बंद भी हो सकते हैं.
_ पैसे हैं लेकिन जरूरी तो नहीं कि कल हों..
_ लेकिन जो प्यार, इज्जत और अपनापन होता है वो हमेशा ही रहता है,
_ जब पैसे दूर होते हैं तो झूठे रिश्ते भी दूर होते चले जाते हैं और जब पैसे होते हैं तो सच्चे रिश्ते दूर जाते हैं.
_ शायद पैसों का नशा ही ऐसा होता है जो सर चढ़ कर बोलता है.!!
– हेसाम
“क्या पैसा ही सब कुछ है ?”
_ कहना आसान है – “पैसा सब कुछ नहीं होता,”
_ पर हकीकत में यह मानना सबसे कठिन होता.
_ इस समाज में बिना पैसे के कोई पहचान नहीं,
_ जिसके पास धन नहीं, उसकी कोई जुबान नहीं.
_ जिसकी जेब खाली है, उसकी बातें अनसुनी जाती हैं,
_ उसकी पीड़ा, उसकी चीखें भी बेमानी कहलाती हैं.
_ ज़रूरतें ही नहीं छिनती उससे,
_ बल्कि समाज उसे ताने देता है, उपेक्षा की दृष्टि से देखता है.
_ पैसे के बिना— न दवा मिलती है, न राहत,
_ न संतान की मुस्कान, न माता-पिता की चाहत.
_ कई माँ-बाप इलाज न करवा पाने की मजबूरी में
_ चुपचाप दुनिया छोड़ जाते हैं—गरीबी की चादर ओढ़कर.
_ बिना पैसे— न रिश्ते टिकते हैं, न सम्मान,
_ तुम चाहो लाख निभाना,
_ लेकिन वक़्त के साथ साथ, वो सब हो जाते हैं अनजान.
_ कहते हैं—पैसे से प्यार नहीं खरीदा जा सकता,
_ पर प्यार को निभाने के लिए भी जेब भारी होना ज़रूरी लगता.
_ यह दुनिया सपनों को देखती है,
_ पर उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता.
_ जो पैसे के पीछे भागते हैं, उन्हें मत कोसो—
_ वो जानते हैं अभाव का दर्द, वो समझते हैं संघर्ष का अर्थ.
_ वो मुस्कान के पीछे की तकलीफ़ जानते हैं,
_ हर दिन अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हैं.
_ पैसा सब कुछ नहीं होता—सच है.
_ मगर यही वो ज़मीन है,
_ जिस पर खड़े होते हैं रिश्ते, जिम्मेदारी, सम्मान और सपने.
_ जो कहते हैं—पैसे से सुख नहीं आता,
_ उन्हें समझना होगा—
_ सुख तक पहुँचने की राह भी.. पैसे की सीढ़ी से ही जाती है.
_ इसलिए… पैसे से नफरत नहीं,
_ईमानदारी से कमाने की आदत बनाओ.
_ संवेदनाओं के साथ-साथ सक्षम बनो—
_ क्योंकि ज़िंदगी केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि ज़रूरतों की पूर्ति से चलती है.!!
— Rahul
लोग कहते हैं कि पैसा सिर्फ़ बेईमानी से, धोखाधड़ी से, गरीबों को कुचल कर, गरीबों का शोषण करके ही कमाया जाता है.
_ मैं इस बात से सहमत नहीं.
_ यह कामचोर और आलसी लोगों की फैलाई हुई भ्रांति है.
_ यदि आपमें श्रम करने की ताकत है, दिन-रात काम में जुटे रहने का जज़्बा है, सोच-विचार करने की शक्ति है तो आपके पास पैसे को आने से कोई नहीं रोक सकता.
_ पैसे के साथ आपके चेहरे पर मेहनत की चमक भी आएगी, सफ़लता का आत्मविश्वास भी झलकेगा.
_ मेहनत और लगन के रास्ते पर चलना तो शुरू कीजिए.!!
— Manika Mohini
यदि आपके पास बहुत सारा पैसा है तो आप अच्छा खाना खा सकते हो,
_ अच्छे आलीशान सारी सुख सुविधाओं के साथ अच्छे घर में रह सकते हो,
_ अच्छी कार में चल सकते हो, ट्रेन में फर्स्ट एसी में चल सकते हो, यात्राएँ कर सकते हो, दुनिया घूम सकते हो, मनपसंद किताबें पढ़ सकते हो, बच्चों को अच्छी परवरिश के साथ अच्छी शिक्षा दिला सकते हो, मेडिकल इमरजेंसी में अच्छे से अच्छा इलाज करवा सकते हो,
_ इसके अलावा भी बहुत कुछ है.. जो आप पैसे होने पर कर सकते हो.
_ बिना पैसे के आपका जीवन कीड़े मकोड़े जैसा हो जायेगा, न आप अच्छा खा पाओगे, न अच्छी सुख सुविधा ले पाओगे, यात्रा करने से पहले सौ बार सोचोगे, कोई सम्मान नहीं करेगा, कोई साथ नहीं बैठेगा, मेडिकल इमरजेंसी में सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटोगे और भ्रष्ट सिस्टम के हाथों मारे जाओगे, बच्चों को अच्छी शिक्षा और परवरिश नहीं दे पाओगे और एक दिन कीड़े मकोड़े की तरह यह भ्रष्ट सिस्टम आपको कुचलकर मार देगा.!!
– Mayank Mishra
तुम बिलकुल नहीं कमाओगे तो भी लोग कहेंगे नाकारा है.
_ तुम कम कमाओगे तो भी लोग कहेंगे कि क्या ही कमाता है ?
_ तुम लोगों की उम्मीद से ज़्यादा कमाओगे, आलीशान ज़िन्दगी जिओगे तो ही लोग कहेंगे कि नंबर दो की कमा रहा होगा, हराम का पैसा आ रहा होगा.
_ कहने का तात्पर्य यह है कि तुम कुछ भी कर लो.. मगर लोगों का मुंह बंद नहीं करवा पाओगे,
_ इसलिए सबसे बेहतर है कि अपना जीवन मस्ती के साथ आनंदमय होकर जिओ और इस बात कि बिलकुल भी चिंता मत करो कि कौन क्या सोचेगा और कौन क्या कहेगा ? _ तुम्हारा जन्म लोगों को खुश रखने के लिए नहीं.. बल्कि अपना जीवन खुशहाल बनाने के लिए हुआ है.. तो लोगों की परवाह करना ही छोड़ दो.!!
– Mayank Mishra
धन संचय के लियें सबसे कारगर उपाय हैं की आप धन कमाने के अधिक से अधिक रास्ते बनाये.
_ ऐसा देखा गया हैं एक परिवार जिसकी आय के पाँच या पाँच से अधिक नियमित स्रोत हैं वो अमीर हो जाता हैं.
_ और ये भी याद रखे, आपकी आयु जैसे जैसे बढ़ती जायगी आपके लियें नौकरी करना मुश्किल होता जायेगा तो आप आपने पाँच नियमित स्रोत बनाये रख पाये..
_ इसके लियें ज़रूरी हैं आप 40–45 की आयु तक आपके पास सात स्रोत होने ज़रूरी हैं.
_ आय के स्रोत कैसे बनते हैं, वो बताती हूँ.
1. आपकी नौकरी या व्यपार – सबसे पहले आपको एक नियमित आय का स्रोत बनाना हैं ये नौकरी व्यापार कुछ भी हो सकता हैं.. तो आपका वेतन पहला स्रोत है.
2. आपकी हॉबी को आपके अपनी आय के माध्यम में विकसित करना होगा.
आरम्भ में आय कम भी हैं तो चलेगा लेकिन आय नियमित करने का प्रयास करे और ये ज़रूरी हैं की ये स्रोत आपकी हॉबी हो.
3. इन दोनो के माध्यम से अपने परिवार के लियें एक आपातकाल फ़ण्ड बनाये..
और इस फ़ण्ड पर प्राप्त होने वाला ब्याज आपका तीसरा आय का स्रोत होगा.
4. आपातकाल के प्रावधान के बाद आप अपने तीनो स्रोत से होने वाली आय को निवेश करे और ये निवेश आपका चौथा स्रोत बनेगा.
5. अपने जीवन साथी को रोज़गार से जोड़े, (ये व्यक्तिगत विषय हैं, लेकिन स्वस्थ संवाद करे इस विषय पर)
6. 40–45 आयु तक रेंटल प्रॉपर्टी से आय का स्रोत बनाया जा सकता है.
7. इस आयु तक बच्चें भी बड़े हो जाते हैं, तो जीवन साथी की हॉबी को भी आय के स्रोत की तरह विकसित करे.. और ये होगा आपका सातवाँ स्रोत.
_ आरम्भ में स्रोत से कमाई कितनी होती हैं, इसकी परवाह अधिक ना करके सिर्फ़ सुनिश्चहित करें की कमाई नियमित हो और धीरे धीरे आगे बढ़े.
_ इतना सब आय के साधन बना लियें, तो एक स्रोत समाज को वापिस देने का भी बनाये.
_ समाज में या तो ख़ुद कुछ योगदान दे या उन लोगों को आर्थिक योगदान दे जो समाज में बदलाव के लियें काम कर रहे है.
_ अमीर होने का ये आख़री और ज़रूरी पड़ाव है.
– Neha Chandra
हमने बचपन से एक वाक्य बार-बार सुना है पैसा कुछ नहीं होता,
_ लेकिन ज़रा ईमानदारी से पूछिए, क्या यह वाक्य आज की दुनिया में सच है ?
_ अगर पैसा सच में कुछ नहीं होता, तो इंसान की पूरी ज़िंदगी उसी के पीछे क्यों भाग रही होती ?
_ आज अगर हम अपने आस-पड़ोस, अपने रिश्तों और अपने समाज को ध्यान से देखें, तो एक कड़वा सच साफ दिखाई देता है..- जहाँ पैसा है, वहीं खुशी का अभिनय है ; और जहाँ पैसा नहीं है, वहाँ मजबूरी का शोर है.
_ पैसा सिर्फ ज़रूरत नहीं रह गया है, वह अब पहचान, रुतबा और अधिकार बन चुका है..
_ जिसके पास पैसा है, उसके आगे-पीछे लोग घूमते हैं.
_ उसकी बात सुनी जाती है, उसकी गलती भी नज़रअंदाज़ कर दी जाती है.
_ वह समाज में सम्मान पाता है, परिवार में निर्णय लेता है, और रिश्तों में शर्ते रखता है
यानी पैसा अब केवल साधन नहीं, सत्ता है.
_ आज के रिश्तों को ही देख लीजिए..
_ गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का रिश्ता हो या पति-पत्नी का भावनाओं की जगह अब लेन-देन ने ले ली है.
_ जो ज़्यादा खर्च करता है, वही ज़्यादा प्यार करने वाला कहलाता है.
_ महंगे गिफ्ट, महंगे होटल, महंगी लाइफ, यही आज के प्रेम के प्रमाण बन चुके हैं.
_ और सच तो यह है कि जब एक व्यक्ति दूसरे पर जरूरत से ज़्यादा पैसा खर्च करता है
तो रिश्ता बराबरी का नहीं रहता..
_ वह धीरे-धीरे आश्रित और कभी-कभी गुलाम बन जाता है.
_ क्योंकि आज खुशी का मतलब आज़ादी नहीं, सुविधा है,
और सुविधा बिना पैसे के संभव नहीं.
_ लोग कहते हैं प्यार चाहिए, पैसा नहीं..
_ लेकिन सवाल यह है कि बिना पैसे के प्यार कब तक जिंदा रहता है ?
_ भूख, इलाज, शिक्षा, घर, सम्मान इन सबके सामने प्रेम अक्सर हार मान लेता है.
_ इसलिए आज का यथार्थ यही है कि प्यार भी तभी सांस ले पाता है जब उसके पीछे पैसा खड़ा हो.
_ आज की दुनिया में रिश्ते खुद-ब-खुद नहीं बनते, उन्हें बनाए रखने के लिए साधन चाहिए और वह साधन है पैसा.
_ दोस्ती भी वहीं टिकती है.. जहाँ जेब बराबर हो.
_ गरीब की दोस्ती सलाह बन जाती है और अमीर की दोस्ती संपर्क.
_ परिवार में भी वही सदस्य महत्वपूर्ण माना जाता है जो आर्थिक रूप से मजबूत हो.
_ जिसके पास पैसा नहीं.. उसकी राय भावनात्मक कहकर टाल दी जाती है.
_ आज आप यह लेख पढ़ पा रहे हैं, क्योंकि आपके मोबाइल में रिचार्ज है, बिजली है, इंटरनेट है, सिस्टम है.
_ इन सबके पीछे भी पैसा ही खड़ा है.
_ यानी सच यह है कि हम पैसे की वजह से ही दुनिया को देख समझ और महसूस कर पा रहे हैं.
_ यह कहना गलत नहीं होगा कि.. आज पैसा सबसे बड़ा रिश्ता बन चुका है.
_ पिता से बड़ा, मित्र से बड़ा, प्रेम से बड़ा..
_ क्योंकि वही तय करता है कि आपकी आवाज़ कितनी दूर तक सुनी जाएगी.
_ यह लेख पैसे की पूजा नहीं करता.. लेकिन इस झूठे आदर्शवाद को जरूर तोड़ता है
कि पैसा कुछ नहीं होता.
_ पैसा सब कुछ नहीं है.. लेकिन पैसे के बिना आज लगभग कुछ भी नहीं है.
_ यही आज की दुनिया का सबसे कड़वा, सबसे सच्चा और सबसे अनकहा सच है.!!
– लेखक की दुनिया
पैसे की ताकत से अभिभूत हूं, हालांकि ये कुछ नहीं करता है, करता आदमी ही है, पैसा को बनाया भी आदमी ने ही है, पर फिर भी ये आदमी की दुनिया में अद्भुत शक्ति बनकर उभरा है.
_ पैसा विरोधी मानसिकता भी मूर्ख होने का सबूत है, बिल्कुल पैसे की दीवानगी की तरह ही.
_ किसी भी दूसरे महत्वपूर्ण आविष्कार की तरह पैसा भी अपना सही उपयोग चाहता है.
_ अच्छी मात्रा में पैसा हो तो आदमी कितना आश्वस्त रहता है कि किसी भी सिचुएशन से डील किया जा सकता है.
_ पैसा न हो तो आदमी लगातार आशंकित रहता है.
_ पैसे का अभाव आदमी को सिकोड़ देता है.
_ पैसे को सबकुछ मानना और पैसे को गाली देना दोनों ही दो अतियां है.
_ पैसे का सच कहीं बीच में है.
– Shailendra Sudharma
| Nov 14, 2013 | सुविचार

आगे बढ़ने के लिए यह जरुरी है कि हम गलतियों को दोहराएं नहीं. उनसे सबक लें
और खुद से वादा करें कि यह गलती दोबारा बिल्कुल नहीं होगी.
कनाडा के प्रसिद्ध लेखक रॉबिन शर्मा ने कहा था — “गलती जैसा कुछ होता ही नहीं, सब कुछ एक नई सीख है.”
अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा — “अगर कोई कहता है कि उसने कभी गलती नहीं की, तो इसका मतलब उसने कभी कोई कोशिश ही नहीं की.”
बेंजामिन फ्रैंकलिन कहते हैं — “प्रगति एक सतत प्रक्रिया है — प्रयास और गलतियों का मिश्रण.”
रिचर्ड ब्रानसन के अनुसार, “कोई भी नियमों को पढ़कर चलना नहीं सीखता, चलना सीखने के लिए लड़खड़ाना और गिरना ज़रूरी है.”
‘जो गलत है’ हम उसे अलग कहते, उससे अलग हो जाते तो कोई बात न थी,
_ पर न जाने क्यूं, जो हमसे अलग है, ‘हम उसे भी गलत ठहराने लगे.!!
गलत लोग, गलत परिस्थितियाँ, और इनसे मिला अनुभव, सही निर्णय लेना सिखा ही देता है..!!
अपने द्वारा की गई गलतियों के लिए स्वयं को क्षमा करें ; _ कल की असफलताओं और निराशाओं को जाने दें और नई और नई शुरुआत करें.
” आप कहाँ जा रहे हैं यह कहीं अधिक महत्वपूर्ण है न कि आप कहाँ थे.”
Forgive yourself for the mistakes you’ve made. Let go of the setbacks and disappointments of yesterday and start fresh and new. Where you’re going is much more important than where you’ve been.
आप की ग़लती हो या ना हो आप तुरंत आगेवाले की बात मान जाते हो.
_ और माफ़ी माँगने से भी पीछे नहीं हटते ..तो “ये आप को और भी श्रेष्ठ बना देता है”
गलतियाँ मानव विकास के विस्तार का आधार हैं, गलतियों के बिना हम कभी महसूस नहीं कर पाएंगे कि हम वास्तव में कौन हैं ; _ अगर हमें गलत होने का हुनर नहीं दिया गया होता, तो हम जीवन की अनंत संभावनाओं को कभी महसूस नहीं कर पाते.
हम सही और गलत विकल्पों के बीच चयन करके अपने तरीके से सोचते हैं, और गलत विकल्पों को उतनी ही बार बनाना पड़ता है जितनी बार सही विकल्प. हम जीवन में इस तरह से साथ चलते हैं ;
हम गलतियाँ करने के लिए बने हैं, एक तरह से गलतियाँ करने और असफल होने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं.
हम सीखते हैं, जैसा कि हम कहते हैं, “परीक्षण और त्रुटि” से अपनी गलतियों को सही ठहराने के लिए, हम अपनी और दूसरों की गलतियों को खुले तौर पर स्वीकार क्यों नहीं कर सकते.
_ अगर हम अपनी (अपनी या आपकी ) गलतियों को उसी सम्मान के साथ स्वीकार करना सीख लें, तो शायद हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं, जहां ज्यादा से ज्यादा लोगों में वह जीने का साहस हो, जो उनका दिल उन्हें बताता है.
Mistakes are at the very base of expansion of human growth, without mistakes we will never realise who we really are. If we were not provided with the knack of being wrong, we could never realise the infinite possibilities of life.
We think our way along by choosing between right and wrong alternatives, and the wrong choices have to be made as frequently as the right ones. We get along in life this way.
We are built to make mistakes, in a way, designed to commit errors and fail.
We learn, as we say, by “trial and error”to justify our mistakes, Why we cannot openly accept ours and others mistakes.
Only if we learn to accept mistakes (mine or yours) with the same reverence, then maybe, we might create a world where more people have the courage to live what their heart tells them to.
‘गलत’ गलत होता है.
_ कोई भले न रोके, न टोके ..लेकिन आत्मा का लालन-पालन ऐसा होना चाहिए कि ..वही आपको रोक ले.
सामने से आकर यदि कोई हमसे पूछे, तभी हमें उसे उसकी गलतियाँ बतानी चाहिए;
_ उन्हें उनकी गलतियाँ बताने से बेहतर है कि.. हम शांत और चुप रहें,
_ क्योंकि आजकल लगभग हर व्यक्ति अपने अहंकार भाव से संचालित हो रहा है.
_ अगर आप किसी का भला करेंगे, तो भी आपको ही दोषी ठहराया जाएगा.!!
लोगों को बार-बार बताना छोड़ दीजिए कि वो ग़लत क्या कर रहे हैं..
_ शांत रहकर अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ जाओ.. इससे बेहतर उन लोगों के लिए दूसरा कोई जवाब नहीं.!!
गलतियाँ करते-करते इतने गलत हो गए हैं कि ..हम किसी भी चीज़ को सही नहीं मानते..
_ और जो सही कर रहे हैं उनमें भी गलतियाँ निकालने लगते हैं.!!
मन का ना होना बुरा नहीं लगता..
_ ‘जो सही है’ उसके साथ गलत होना बुरा लगता है.!!
इस दुनिया में कौन है जो अपनी गलती सहजता से स्वीकार करता है ?
_ आदमी अपनी गलती के बचाव के लिए तर्क तलाश लेता है.
यदि कोई आपकी गलती को सुधारता है..तब भी आपको बुरा लगता है तो..
_ आपको अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने की जरुरत है.!!
गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन किसी को धोखा देना और उससे झूठ बोलना.. गलती नहीं मर्जी होती है.!!
अब अपने साथ ग़लतियों का बोझ लेकर घूमना छोड़ दीजिए, _ गुज़रे हुए वक्त की गलतियों के लिए बार-बार अफसोस करना बंद कीजिए, _
_ जिसके लिए आपको अभी भी अफ़सोस है, शायद पहले आप इतना अनुभवी और परिपक्व नहीं थे.
हर बार बात सही गलत की नही होती..
_ कई बार ऐसा होता है कि हम किसी ऐसी बात पर असहमत हो रहे होते हैं, जिसको समझने के लिए हम उस समय योग्य नही होते.!!
आपके साथ ग़लत करने वालों से बदला लेने की बजाय..
_ आपको उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए,
_ क्योंकि ऐसे लोग अंत में ख़ुद को ख़ुद से ही तबाह कर लेते हैं.!!
उन लोगों से सदैव दूरी बना कर रखें.. जो कभी ख़ुद की गलती नहीं मानते..
_ और हर गलती का दोष आपके माथे मढ़ देते है.!!
गलत करना नहीं और गलत सहना नहीं, मैं तो वही करते आया हूँ.
_हाँ गलत का साथ देना भी गलत करने के बराबर ही है.!!
बहुत से लोग गलत चीज़ चुनते हैं, हमें उन्हें सही चीज़ चुनने में मदद करनी चाहिए.!!
इंसान हैं तो गलतियां लाज़िमी हैं.
_ अपनी गलतियों से सीखना चाहिए.
_ इंसान सोच समझ के सही ही फैसला लेता है ..अब वो आगे जाकर गलत निकल जाए तो उसके लिए ख़ुद को कोसना सही नहीं है.
_ ज़िंदगी सुकून से बीते उसके लिए ज़रूरी है ..दूसरों से माफी मांगने के साथ ख़ुद को माफ़ करना सीखना.
_ इंसान सब करता है ..लेकिन खुद को माफ़ नहीं करता.
अ-कृतज्ञ [ungrateful] व्यक्ति अपने घमंड तले दबकर मर जाएगा और पूरे जीवन भर कुछ भी उल्लेखनीय नहीं कर पाएगा…
कृतज्ञ [grateful] होना, विनम्र होना, धन्यवाद देना और गलती की माफ़ी मांगना मनुष्य होने की पहली शर्त है,
_ जो इनसे हीन है वह अभागा है जो मनुष्य होते हुए भी मनुष्यता से परे है..
हर व्यक्ति में सही और गलत की समझ होनी चाहिए और सही का समर्थन करने की क्षमता भी होनी चाहिए.!!
” हमेशा याद रखें कि _ इस तरह से बोलना असंभव है कि आपको गलत न समझा जाए : हमेशा कुछ ऐसे होंगे जो _ आप को गलत समझेंगे ही “
कई बार किसी को बार – बार समझाने से अच्छा, उसे उसकी गलतियों के साथ अकेला छोड़ देना होता है..!!
जब लोग आपको गलत बोलते हैं तब परेशान होने की जरूरत नहीं ;
_ वास्तव में आप परेशान तो तब हो, _ जब लोग आपको देख ही न रहे हों ;
क्योंकि आज नही कल आप गलतियां तो सुधार ही लेंगे..!!
इंसान में गलत साबित होने से बचने की प्रबल इच्छा होती है.
कुछ समय के लिए, उनका पूरा अस्तित्व स्वयं को सही साबित करने और आत्म-संतुष्टि के इर्द-गिर्द घूमता है.!!
लोग आपमें सिर्फ खामियां और गलतियां ढूंढते हैं, इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके साथ आपने कभी अच्छा व्यवहार किया था,
_ लेकिन जब मौका निकल जाता है तो वे भी आपकी अच्छाइयों को भूल जाते हैं.!!
उन लोगों से दूरी बनाए रखें, जो कभी स्वीकार नहीं करते कि वे गलत हैं ; और
हमेशा आप को यह महसूस कराने की कोशिश करते हैं कि यह सब आप की गलती है.
उन गलतियों की कोई माफ़ी नहीं होती, जहां आप जानते हैं,
_ क्या सही है ; क्या गलत है ; लेकिन जान- बूझकर गलत का चुनाव करे.
समझदार इनसान तो वही है, जो दूसरों की गलती से भी सबक ले ले.
जरुरी नहीं कि सुधार के लिए खुद ही गलतियां की जाएं.
बहुत सी बातों की, हमें लगता है, कोई वजह नहीं है लेकिन फिर भी वे ‘बेवजह’ नहीं होतीं.
_ उनके होने की वजह उनके सही या गलत हो चुकने के बाद समझ आती है.!!
गलत, गलत होता है और सही, सही होता है.
_ गलत को सही साबित करने के लिए कोई दलील नहीं दी जा सकती.!!
इस बात से मत डरिए कि लोग आपकी पीठ पीछे आपके बारे में क्या कहते हैं,
_ क्योंकि ये वही लोग हैं जो अपनी कमियों को सुधारने की बजाय दूसरों में गलतियाँ निकालने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.
हक़ पर रहना सीखा है, सीखा है कि गलत हर हाल में गलत होता है,
_ सीखा है कि सही बोलने से कभी न हिचको.
जब किसी को अपने किए कामों को सही साबित करने का कोई सही तरीका/तर्क नहीं मिलता..
_ तो ऐसे लोग गलत तरीकों पर उतर आते हैं.
कोई गलत को गलत कह दे तो भी हजम नहीं होता है लोगों से..
_ गलत को गलत क्या “खाक” मानेंगे ?
_शायद हमें पहले सही-गलत को समझने और मानने की आदत डालनी होगी.
अपनी गलती मानना अच्छी बात है. लेकिन उतना ही जरुरी है खुद को जल्दी से माफ़ कर देना.
गलती से सीख ले कर उसे भूल जाना सही है.
सही और गलत की असली परीक्षा आपके मन के भीतर होती है.
_ आप मन में खूब जानते हैं कि आप जो कर रहे हैं वो सही है या गलत ?
_आज आप किसी के आदेश पर गलत कर रहे हैं तो _मन की आवाज़ एक बार ज़रूर सुनें..
किसी के साथ भी ना होना,
_ किसी ग़लत इंसान के साथ होने से तो बेहतर ही होता है.!!
यदि आप सोचते हैं कि आपने कुछ गलत किया है, तब अपने आप को दोष न दें !
_ जीवन में प्रत्येक अनुभव एक सीढ़ी है, उन ‘गलतियों’ सहित, जिन्हें आपने कभी किया था.
_ अपने को प्रत्येक गलती के लिए प्यार करें, वे आप के लिए बहुत बहुमूल्य रहीं हैं.
_ उन्होंने आप को बहुत सी बातें सिखाई हैं.
_ अपने आप को दोषी ठहराना बंद करें.
_ इसी प्रकार से आप सीखते हैं.
_ अपने आप को सिखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेम करें.
कुछ गलतियों की माफियां शब्दों में तो मिल जाती हैं, पर अंतर्मन नहीं दे पाता !!
_ फिर सौंप दिया जाता है उसको, प्रकृति और रब के हवाले !!
_ क्योंकि जब इंसान खामोश हो जाता है, फैसले ऊपर से होते हैं.!!
शायद ही हममें से कोई हो, जिसने अपनी जिंदगी में गलतियां न की हों, मैंने भी की हैं, _लोगों का दिल दुखाया है, उन्हें कष्ट पहुंचाया है.
_ पर आज मैं बस इतना जानता हूँ कि विषाद कितना भी गहरा हो, उससे बीता हुआ कल कभी बदल नहीं सकता.
_ आज बस यही किया जा सकता है कि बीते हुए कल की सीख लेकर आगे बेहतर इंसान बनने की कोशिश की जाए.
_ बस यह याद रखते हुए…. कि जो बीत गया, वो जिंदगी का एक छोटा सा किस्सा था – पूरी जिंदगी नहीं.
कभी अगर गलती हुई है, तो पछताओ, सुधारो..
_ दूसरों को नीचा दिखाकर, धोखा देकर कभी आत्मिक शांति नहीं मिलती.
_ किसी का हक मत छीनो, किसी का विश्वास मत तोड़ो..
_ जीवन यही है, एक बार ही मिलता है – इसे सुंदर बनाओ..
_ दूसरों को जिता कर हारो, तुम्हारी वही हार असली जीत होगी.!!!
अपने मन में झाँक कर बताओ,
_ क्या आप सचमुच नहीं जानते ?
_आप कहां सही हैं और कहां गलत..!!
एक छोटी-सी भूल, पूरे दिन की मुस्कान छीन लेती है और मन में एक खामोश-सी बेचैनी छोड़ जाती है.. जो बिना कुछ कहे, हर पल अंदर ही अंदर हलचल करती रहती है.!!
षड्यंत्र करने वाले को देर-सबेर अपनी गलती समझ आती है,
_पर तब तक देर हो जाती है..!!
आपको ‘सही’ बताने वाले तमाम लोग आपके एक ‘ग़लत’ के इन्तिज़ार में बैठे हैं.!!
कुछ लोग इसलिए भी आपको गलत ठहराते रहते हैँ,
_ ताकि खुद गलत होते हुए भी ..उन्हें खुद की नजरों में शर्मिंदगी महसूस ना हो..!!
यदि आप किसी की गलतियों की हद नहीं बताएंगे,
_ तो एक दिन आपको अपनी माफियों पर शर्मिंदा होना होगा..!!
हमारी खूबियों का बखान कोई नहीं करेगा,
_ लेकिन हमारी गलतियों का बही खाता सबके पास है..!!
आजकल लोग गलत काम करने पर माफ़ी नहीं मांगते, बल्कि हम कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, इसके लिए वे हमें दोषी ठहराते हैं.
अपनी ग़लतियों को दूसरों पर न थोपें, इस तरह आप खुद के साथ धोखा करते हैं और दूसरों का विश्वास भी खोते हैं.
परिस्थितियां कैसी भी हों, तुरन्त प्रतिक्रिया न दें. आपकी जल्दबाजी, गलत निर्णय करवाती है.
खुद को कुछ समय अकेला छोड़ दें और चिंतन करें.
गलती कौन नहीं करता है. जो व्यक्ति काम करता है, वही गलतियां भी करता है.
इसलिए खुद पर विश्वास बनाये रखें और सतर्क रहें.
समय रहते गलत जगह से निकल जाना हार नहीं बल्कि आशीर्वाद है,
_ जो आपको भविष्य में किसी भी बड़ी तबाही से सुरक्षित रखता है.!!
यदि आप किसी को गलत समझने की इच्छा रखते हैं,
_ तो आप उन्हें गलत समझने के हजारों तरीके ढूंढ लेंगे.!!
अपने बीते हुए कल की गलतियां जानकार उनमें सुधार करें, फिर उस पर कफन ओढ़ा दें;
_ क्योंकि भूतकाल बुरा नहीं है बल्कि वह मर चुका है.
रबर की तरह घिसने वाले लोग दूसरों की गलतियाँ मिटाते-मिटाते..
खुद भी मिट जाते हैं और किसी को याद भी नहीं रहते.!!
दूसरों की गलतियाँ माफ़ करने से कभी पोछे नहीं हटना, यह आपके बड़प्पन की निशानी है
किन्तु अपनी गलतियों को कभी छमा नहीं करना, यह भी बड़प्पन की निशानी है.
इंसान वही होता है जो खुद की गलती माने और सुधारें,_ गलती न मानने वाला इंसान,
_ चाहे हमारा कितना भी करीबी और खास क्याें न हो, _ दिल से दूर चला ही जाता है.
कितने अजीब होते हैं लोग, गलत साबित होने पर माफ़ी नहीं मांगते ;
_ बल्कि आप को गलत साबित करने में अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं !!
खुद को माफ़ करना सीखो, आपकी हर गलती इस बात का सबूत है कि आप ‘कोशिश’ कर रहे हो.!!
हमें अपनी गलतियों की सज़ा भले ही तुरंत न मिले,
परंतु समय के साथ कभी न कभी सज़ा अवश्य मिलती है.
जो शख्श गलती करके उसका अहसास कर लेता है और भविष्य में गलती ना करने का निर्णय कर लेता है,
_ वह जीवन में बुलंदियों को छूता है.
सुधर वही सकता है, जिसे पता है कि वह गलत कहाँ है ;_ यही कारण है की लोग माफ़ी भी मांगते हैं,
गलती न करने के वादे भी करते हैं और फिर भी वही गलतियां दुहराते हैं.
किसी कि कही हुई बातों पर पूरा भरोसा मत करो ; अपनी बुद्धि का भी प्रयोग करो.
क्यूंकि कोई भी व्यक्ति आपको वह कहानी नहीं सुनाएगा, जिसमें वह खुद गलत हो !!
गलत को सही कहने की आदत.._ आपको इतने गहरे गर्त में ले जाएगी कि
_जिसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते.
जब हम सही करते हैं तो कोई याद नहीं रखता ;
_ जब हम गलत करते हैं तो कोई नहीं भूलता.!!
ग़लत को ग़लत कहेंगे तो बहुत सारे लोग छूट जायेंगे,
_मतलब छोड़ देंगे आपको..!!
जब आप एक बार तय कर लेंगे कि गलत का साथ नहीं देना है,
_ तो उसका मुकाबला नहीं करना होता है, उसे छोड़ देना होता है.!!
कोई व्यक्ति ,,,एक बार गलती करे तो – कोई बात नहीं !!
दो बार गलती करे तो – होता है, इंसान है !!
तीसरी बार गलती करे तो – इनसे दूर ही रहना !!
क्योंकि ये उसकी गलती नहीं आदत है !
अगर तुम्हे किसी की कोई बात गलत लगती है तो तुरन्त प्रतिक्रिया दो _
_ क्योंकि उस समय का मौन बाद का पछतावा या कुण्ठा बनता है..
भूल जाना भी ग़र कोई हुनर होता …
_ ख़ुदा क़सम उससे हुनरमंद दुनिया में कोई होता ही नहीं !
गलत जानकारी को मन में बिठा कर जीवन जीना गलत है..
_जीवन में सच अवश्य जानना चाहिए..!!
आप अपनी गलतियों को सुधारने के लिए कितनी मेहनत करते हैं,
_इससे आपके बारे में पता चलता है.
किसी सही व्यक्ति को बार-बार आजमाने की गलती मत करना,
_क्योंकि हर बार हार आपकी ही होगी..!!
बात सही गलत की नही होती..
_ कई बार ऐसा होता है, कि हम किसी ऐसी बात पर असहमत हो रहे होते है.
_ जिनको समझने के हम उस वक्त योग्य नही होते…!
कई बार हम सही होते हैं.. फिर भी समय के गलत फेर की वजह से गलत साबित हो जाते हैं.!
जब कोई गलत को पनपने देता है तो..वो भी उसकी चपेट में आएगा ही..!!
सब कुछ जानते हुए भी _ अगर आप _ गलत को गलत नहीं कह सकते तो ; आप भी गलत हो..
होते वक़्त गलतियाँ कष्टकारी होती है, लेकिन सालों बाद इन्हीं गलतियों के संग्रह को हम अनुभव कहते हैं !!
” हो जाती हैं गलतियां,” पता चल जाये तो सुधार लेना चाहिए, _ जीवन फिर से सहज़ जीने के लिए..
अगर हमारी स्थिति में कोई कमी हो, तो एक बार अपने मन में झांकना चाहिए कि कहीं…भूल कर कोई भूल तो नहीं हुई न ?
अगर आप किसी का भला चाहते हैँ तो सही को सही, और गलत को गलत, बताने की छमता रखो..!!
यदि आप गलतियां नहीं कर रहे हैं तो इसका मतलब है आप शत- प्रतिशत प्रयास नहीं कर रहे हैं.
आप चाहे जितने भी होशियार हो. आप गलतियाँ करेगे हीं. _ और इससे आप बेहतर हीं बनेंगे.
गलतियां हमेशा छमा की जा सकती हैं, यदि आपके पास उन्हें स्वीकारने का साहस हो.
जो लोग हमेशा अपनी गलतियों पर ध्यान देते हैं, एक दिन वे ही बुद्धिमान कहलाते हैं..
ग़लती करने के बाद ही खुद को सुधारने और अधिक बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है.
गलतियां कीजिए वो तो सबसे होती है,,,,पर कभी किसी के साथ गलत ना कीजिए.
गलतियां करना गलत नहीं है; _ लेकिन किसी के साथ गलत करना; बहुत गलत है..
आप हज़ार गलतियां कीजिये.._ पर ध्यान रहे किसी के साथ गलत मत कीजिये…
कहा गया है कि _ गलतियों से मत घबराइए, गलती वही करेगा जो काम करेगा …
अगर आप अपनी गलतियों से सीख़ लेते हैं तो गलतियाँ आपके लिए सीढ़ी है.
इन्सान अपने को चाहे कितना ही समझदार क्यों न कहे, पर गलतियाँ तो करता ही है.
विवेकशील मनुष्य दूसरों की ग़लतियों से अपनी गलतियाँ सुधारते रहते हैं.
भूल भी ठीक की तरफ ले जाने का मार्ग है ;_ इसलिए भूल करने से डरना नहीं चाहिए.
अपनी ग़लतियों को इसलिए बताएँ ताकि होश सँभालने वाले लोग उन ग़लतियों से कुछ सबक लें.
दूसरों की भूलों से बुद्धिमान लोग अपनी भूलें सुधारते हैं.
होती हैं गलतियां हर एक से मगर, _ कुछ जानते नहीं, कुछ मानते नहीं.
गलतियां सबूत हैं इस बात की, आप ने जीतने की कोशिश ख़ूब की है..
” गलती को स्वीकारना, आदमी को दोबारा गलती करने से रोकता है,”
कुछ तो गलत है हमारे जीने में, नमक कुछ कम हो गया लगता है पसीने में..
सब कुछ ठीक होने से पहले, बहुत कुछ ग़लत भी ज़रूर होता है.!!
ग़लतियों से सीख लें और उसी के अनुसार आगे का रास्ता प्लान करें.
ग़लती होने के डर से अपने कदम आगे नहीं बढ़ाना – समझदारी नहीं.
गलत को गलत और सही को सही कहने वाले लोग..
_ जल्दी किसी को सहन नहीं होते.!!
जो अपनी गलती मानने की बजाय आपको गलत ठहराए ; उससे दूर रहने में ही शांति है.!!
गलत होते देख कर बर्दाश्त नहीं करना, यह एक स्वभाव होता है.
गलती चाहे भूल जाओ, लेकिन उससे मिला सबक़ हमेशा याद रखो..
होती है गलतियां हर एक से, मगर कुछ जानते नहीं कुछ मानते नहीं !!
गलत की हिमायत अज्ञानी या गलत इंसान ही कर सकता है.
जो लोग अपनी गलती खुद नहीं मानते, _ वक़्त मनवा लेता है.
गलतियां होती रहती है, बस इरादे गलत नहीं होने चाहिए..!!
दूसरों को ग़लत कहने से पहले आपका सही होना ज़रूरी है.
गलती करना बुरा नहीं है, _ गलती से सीख ना लेना बुरा है.!
किसी को मत समझो, लेकिन गलत मत समझो..!!
गलत को गलत कह सको, बस इतने सही रहो..!!
स्वीकार की हुई गलती एक विजय है ….!
| Nov 14, 2013 | सुविचार
सफल लोगों के तमाम नुस्खों में से एक नुस्खा है, अपने साथ हमेशा एक डायरी व पेन रखना, तो आप पायेँगे कि हर सफल व्यक्ति ऎसा करता है, यह सही तरीका है.
ये डायरी लिखना न मेरे लिए बहुत शानदार रहता है, _ मैं दिनचर्या में कुछ वक्त निकाल कर कुछ ऐसे चीजों को लिख लेता हूँ, _
_ जो मैं कभी किसी को कह नहीं सकता ; लेकिन मैं यहां लिखकर अपने मस्तिष्क के असीम बोझ को हल्का कर लेता हूँ..!!
विचारों को कागज़ पर आकार दें, क्योंकि आकार मिल जाने के बाद आप उनका अध्ययन कर सकते हैं, उनकी कमियाँ देख सकते हैं और फिर उनमे सुधार कर सकते हैं.
हर चीज सिस्टमेटिक तरीके से करें. अपनी योजनाएँ डायरी में लिखें, मुख्य चीजों की सूची बनाएँ, चेक करें कि कौन- कौन सा काम हो गया है.
एक छोटी डायरी रखें और प्रत्येक जरुरी काम उस में लिख लें, इससे आप कुछ भूलेंगे नहीं और याद रखने का तनाव भी नहीं झेलना पड़ेगा. कार्य पूरे करते जाएँ उसे काटते जाएँ, आप पायेंगे कि आपके सभी काम आसानी से हो रहे हैं.
अपने डेली प्लान को डायरी में नोट करें, डेली प्लानर का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि आप किसी भी कार्य के लिए पहले से मानसिक रूप से तैयार होते हैं. सो, सफलता मिलना लगभग तय हो जाता है.
मैं अपने अनुभवों को शब्द देना पसन्द करता हूँ, जिसे साधारण भाषा में डायरी लिखना कह देते हैं. _
_ अक्सर मन की बात जबान तक आते- आते या औरों तक जाते- जाते अपने मायने बदल लेती है._
_ डायरी ही वह दोस्त है, जो हमारी अंतरंग सचाइयों को हूबहू खुद में सम्भाले रखती है.
व्यक्ति को हर रोज दिन पूरा होने पर लिखना चाहिये कि आज उसने क्या-क्या किया? क्या खोया, क्या पाया? आपने अगर कुछ नया किया है, तो उसे डायरी में लिखें.
डायरी लिखने के जो फायदे हैं, वो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं. क्योंकि आपकी पर्सनल डायरी आपका आइना बनकर उभरती है. आपने कहां गलती की, कहां समझदारी, कब किसी का दिल दु:खाया, कब किसी को खुश किया, कहां फेल हुए कहां पास और जीवन में आज क्या नया किया, यह सब आप पर्सनल डायरी में लिखते हैं.
डायरी लिखने से इंसान का स्वयं का विकास होता है। इसलिए आप कहीं भी जाइये.. अपने अनुभव आकर जरूर डायरी में लिखिये. फिर जब कुछ दिनों बाद आप उन पन्नों पर पलटेंगे तोआप को ही अच्छा लगेगा और आपके दिमाग में नये विचार आयेंगे. डायरी लिखना एक खूबसूरत आदत है.
डायरी लिखने का सबसे बड़ा फायदा है कि इंसान के पास हर चीज का रिकार्ड मेंटेन रहता है, अपने और अपनों से जुड़ी बातें अगर आप रोज डायरी में लिखेंगे तो आप कभी भी चीजों को भूल नहीं पायेंगे.
दिन भर भाग-दौड़ करने के बाद जब आप रात में डायरी लिखने बैठते हैं तो लिखते-लिखते ही आप को प्यारी सी नींद आ जाती है और आपको किसी भी दवा की जरूरत नहीं, यानी दूसरे दिन आप तरो-ताज़ा महसूस करते हैं.
आजकल भागम भाग भरी लाइफ में इंसान के पास अपनों के लिए वक्त ही नहीं होता है, ऐसे में डायरी की वजह से इंसान को अकेलापन महसूस नहीं होता, उसकी खुद से दोस्ती हो जाती है और वो कभी अवसाद ग्रसित नहीं होता.
डायरी के कारण आप स्वयं का आंकलन कर सकते हैं, आप अपनी क्षमता का ब्यौरा देखकर खुद को सुधारने का मौका दे सकते हैं और आगे बढ़ने के लिये तय कर सकते हैं कि आगे आपको क्या करना है.
अगर आप डायरी लिखते हैं तो आपकी याददाश्त हमेशा मजबूत रहेगी, ना तो आप अपने किसी क्लोज का बर्थेडे भूलेंगे और ना ही एनिवर्सरी.
रोज़ाना अपनी टू डू लिस्ट अपडेट करें यानी दिनभर में आपको जो भी काम करना हो, उसकी लिस्ट बनाएं.
डायरी में लिखीं आपकी भावनाएं आपको सुख-दुख का एहसास कराती हैं और इसी कारण आप मानसिक रूप से मजबूत होते हैं.
डायरी लिखने से इंसान के अंदर एक नियम बद्ध काम करने की आदत पड़ती है जो कि सफलता का मूल मंत्र है.
डायरी लिखने से आप के लेखन में सुधार होता है जो कि आपको भीड़ से अलग करता है, यानी भाषा में आपकी पकड़ मजबूत होती है. अच्छे शब्द भी जहन में आते हैं.
इंसान दिन भर में बहुत कुछ सोचता है लेकिन उन विचारों को गति दे नहीं पाता, अगर आप अपने विचारों को रोज डायरी में लिखेंगे तो आप जरूर अपनी सोच और विचार को आकार दे पायेंगे.
डायरी में आप दूसरे लोगों के अनुभव भी लिखें जिससे कि आपके अंदर दूसरों के अनुभवों से भी सीखने की आदत डेवलप होगी जो कि सफलता का मूल मंत्र हैं.