सुविचार – सब्र – सबर – 088
_ रब पर छोड़ दिया तो तुम्हारे लिए कहर बन जायेगा..
_ लेकिन जब खुद को पीना पड़ता है तब कतरा कतरा जहर लगता है..
_ मैंने हर शख्स को यहाँ, खुशियों का इंतज़ार करते देखा है !!
_ जब आ जाता है, __ तो किसी की तलब नही रहती..
_ कहने वाले की औकात दो टके की रह जाती है.
_ किसी का सब्र भी आपको बर्बाद कर सकता है,,
_ कोई भी तिनका आखिरी तिनका हो सकता है.
_ ये तो अंदरूनी ताकत है जो केवल मजबूत लोगों में होती है.
_ और अगर मिल जाये तो फ़िर उसकी कद्र नहीं करते.
_ क्यूँकि रोने के बाद हँसने का मजा ही कुछ और होता है.
_ हसी उड़ाने वालो के भी चेहरे उतर जायेंगे..
_ बरसों की सोचते हैं पल की खबर नहीं..
_ तब कहने वाले की अहमियत खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है.!!
_ आज जो तुझे देख के हंसते हैं, वो कल तुझे देखते रह जायेंगे !!
_ सब्र भी अकेला आता हैं, मगर हमें सारी अच्छाई दे जाता हैं !!
_ उनके पास हर चीज़ किसी ना किसी तरीके से पहुँच जाती है.
_ एक आँसू मेरे सब्र की तौहीन कर गया….
सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता !!!
_ यहां तो आसमान के पास खुद की जमीन नहीं ”
_बुरे वक्त के बाद ही अच्छे दिनों की रौशनी आती है.!!
सब्र की जड़ें चाहे जैसी भी हों, इसके फल सदैव मीठे होते हैं.
_ और उसे किसी गवाह की भी जरूरत नहीं पड़ती.!!
_ और दूसरी तरफ कहती है वक़्त किसी का इंतजार नहीं करता…
_क्योंकि समय के साथ सब्र टूट जाता है !!
_ना फिर किसी से मिलने की ख़ुशी रहती है और ना किसी से बिछड़ने का गम.!!
इस सफ़र में सबर रख के चल,
जो कहना है तुझको वो कह के ही उठ,
ना दिल में ज़रा भी कसर रख के चल,
खिंचा आए ”काबा” जहाँ सर झुके,
तू सज़दे’ में इतना असर रख के चल…….





