मस्त विचार 3950
वो जान गया था हमें दर्द में मुस्कुराने की आदत है,
_देता था नया ज़ख्म वो रोज मेरी ख़ुशी के लिए..!!
_देता था नया ज़ख्म वो रोज मेरी ख़ुशी के लिए..!!
रोज़ लिया करते हम थोड़ा थोड़ा..
वे सभी आपकी गलतियाँ नोटिस करते हैं..
_पर वो ‘काश’ जब सच में तब्दील होता है तो लगता है कि वो काश ‘काश’ ही रह जाता.
_ “पार” करना है या “इंतेज़ार” करना है..
दर्द की ज़िद है की दुनिया को खबर हो जाए..!
_मगर सबके पास खबर है..!
_ क्योंकि ये वही लोग हैं, जो आपको छलांग लगाना सिखाएंगे..
_ मैं गुजरा वक्त नहीं हूँ जो वापस ना आ सकूँ !!?