मस्त विचार 3293
जीवन का सफर यूँ ही तनहा बीत गया, _
_ और कहने को कदम – कदम पर अपने थे ..
होश का पानी छिड़को मदहोशी की आँखों पर, _
_ अपनों से कभी ना उलझो ऐरौ गैरों की बातों पर..
_ और कहने को कदम – कदम पर अपने थे ..
_ अपनों से कभी ना उलझो ऐरौ गैरों की बातों पर..
_ पर इंसान को बर्बाद तो हसीन चेहरे करते हैं.
_ तो उन बीजों की जाँच करें, जो आप बो रहे हैं.
_ आप इससे क्या फल लाना चाहते हैं..
_ यह इस बात पर निर्भर करता है कि ..आप आज क्या बोना चाहते हैं.
_ आप की मंजिल की अहमियत जितनी आप जानते हो ” उतनी और कोई नहीं जानता “
_ पर जिंदगी अमीर बन गयी..
मेरी नजर का भी पर्दा उठा गया कोई.