मस्त विचार 3178
आता ही नहीं उस नादान के बगैर जीना मुझको,
काश उस शख्स ने मरना भी सिखा दिया होता.
काश उस शख्स ने मरना भी सिखा दिया होता.
_ ख्वाइशें सूखती रही और पलकें भीगती रही.
ये साल तो पिछले साल से भी बत्तर निकला !
हम वक्त को ऐसे खर्च कर रहे हैं..
आज उसी ने सिखा दिया हद में रहना…
बस इंसान उन्हें छुपाने के हुनर सीख जाता है.