मस्त विचार 3204

कभी कभी देर से सही _ पर खोई हुई चाभी मिल जाती है,

लेकिन अफसोस _ तब तक हम अपना ताला बदल चुके होते हैं…

मस्त विचार 3202

हथेली तब भी छोटी थी, हथेली अब भी छोटी है, _ पहले खुशियाँ बटोरने में चीजें,

छूट जाती थीं, _ अब चीजें बटोरने में खुशियाँ छूट जाती हैं.!!

मस्त विचार 3201

हम जैसे लोग ही दोहरा अज़ाब { पीड़ा } झेलते हैं,

_ हमें सोचते रहने की लत जो लगी हुई है..

पीड़ा का स्रोत अगर कोई अपना हो तो..

_ हम खुल कर विलाप भी नहीं कर पाते हैं…

मस्त विचार 3200

जो धोखा दे गया, उसकी यादों में हज़ार गुना मरने से अच्छा है _

_ जो साथ है, उसके साथ सुकून से जी लिया जाए.

मस्त विचार 3199

*जिम्मेदारियां भी खुब इम्तिहान लेती है..*

*जो निभाता है उसी को परेशान करती है.!!!*

Responsibilities also take a lot of test..

* He troubles the one who plays.

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