मस्त विचार 3253
कोई हमदर्द ना था, कोई भी दर्द ना था.
अचानक…एक हमदर्द मिला, फिर उसी से हर दर्द मिला.
अचानक…एक हमदर्द मिला, फिर उसी से हर दर्द मिला.
_ कि बारिश बन्द हो जाए तो छतरी भी बोझ लगने लगती है.
कौवों के टोकने से चील रुका नहीं करते !
अपनी पसन्द बदल लो, परछाई बदल जाएगी !!
क्योंकि हक़ीहत में कोई परवाह नही करता..!
_ वो तो काम पड़ता है, इसलिये मिलना पड़ता है ..!