मस्त विचार 2565
ये वक़्त भी कितना अजीब है,
पहले मिलता नहीं था, अब गुजरता नहीं है..
पहले मिलता नहीं था, अब गुजरता नहीं है..
तेरी एक झलक ही काफी है, मेरे ठीक हो जाने के लिये.
देखा ये भी जाता है की पुकारा किसने है.
आज उसी घर में रहने से बैचेन है इंसान…
तुम भी उठाओ “हाथ” के मौसम “दुआ” का है.
मिली तो इस “शर्त” पे कि किसी से ना मिलो..!!