मस्त विचार 2194
“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी,
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”
“बङे हो कर क्या बनना है ?”
जवाब अब मिला है, – “फिर से बच्चा बनना है.
वर्ना मेरे वादे भी कभी जंजीर हुआ करते थे.
इससे अच्छी आदत क्या होगी मेरी…
किसी के दिल का दर्द छीन लूँ….
इससे अच्छी नियत क्या होगी मेरी.
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
“माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती…
यहाँ आदमी आदमी से जलता है..