मस्त विचार 2108
मैं अपनी ही तलाश में कहाँ-कहाँ नहीं गया,
जहाँ मैं मिल भी सकता था बस इक वहाँ नहीं गया.
जहाँ मैं मिल भी सकता था बस इक वहाँ नहीं गया.
सवाल सारे गलत थे जवाब क्या देते.
बस अगला लम्हा पिछले से बेहतरीन हो…
जिनके “खुद” के बही खाते बिगड़े हैं, वो मेरा हिसाब लिए फिरते हैं.
वे तो आपकी सरलता, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ ही जन्म ले चुके होते हैं…
हाँ हमें इनके बारे में पता तनिक देर से चलता है.
खुद तरक्की कर लो तो दुश्मनों का काफिला खड़ा हो जाएगा.
“कुछ ने दिये जलाये”…”और कुछ ने घर.”.