मस्त विचार 2169
संभल कर चलना राह में वही पत्थर सिखाता है.
जो हमारे पैर के आगे ठोकर बन के आता है.
जो हमारे पैर के आगे ठोकर बन के आता है.
_ ना जाने क्यों लोग, मतलब के लिए मेहरबान होते हैं.
_ ग़र कोई हमारी ज़िंदगी में ऐसा है तो यकीं करिए, हम पर ख़ुदा की मेहर है.!!
आज क्यूं बेवजह रोने लगा हूँ मैं.
बरसों से हथेलियां खाली ही रहीं मेरी.
फिर आज क्यों लगा सब खोने लगा हूँ मैं.
वो #रास नहीं आये, जिन्हें #चाहा वो साथ नहीं आये !
हम वक्त की टहनी पर…, बेठे हैं परिंदों की तरह !!
जिंदगी धूप, तुम घना साया
आज फिर दिल ने एक तमन्ना की
आज फिर दिल को हम ने समझाया
तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया हमने क्या पाया
हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गाया.