मस्त विचार 2111
मत खोलना मेरी जिंदगी की पुरानी किताबों को,
“जो था वो मैं रहा नहीं और जो हूँ वो किसीको पता नहीं”
“जो था वो मैं रहा नहीं और जो हूँ वो किसीको पता नहीं”
जो आपको ना समझे उसको नजरअन्दाज करो !
फ़र्क सिर्फ इतना है…कुदरत में पत्ते सूखते हैं…
हक़ीक़त में रिश्ते !!….
जहाँ मैं मिल भी सकता था बस इक वहाँ नहीं गया.
सवाल सारे गलत थे जवाब क्या देते.
बस अगला लम्हा पिछले से बेहतरीन हो…