मस्त विचार 1880
ज़िन्दगी की थकान में, गुम हो गया
वो अल्फ़ाज, जिसे सुकून कहते हैं.
वो अल्फ़ाज, जिसे सुकून कहते हैं.
जो कभी ना खत्म होगी, वो ही दिल की बात हूँ मैं !!
मेरी नजर से देखो हर दिल में खुदा है.
वक़्त की बरसात है कि….थमने का नाम नहीं ले रही…
ये काँच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है.
मैं साथ हूँ उसके जो खुद मेरे खिलाफ हैं.
पर जख्म देने वाला भी कोई मेरा खास है.
तेरा सर पे हाथ रखना याद आता है,
मंजिल ही नहीं दिखती थी सफर में,
तेरा सही पथ दिखलाना याद आता है.