मस्त विचार 1868

हर एक शख्स ने अपने अपने तरीके से इस्तेमाल किया हमें..

और हम समझते रहे लोग हमें पसंद करते हैं…

मस्त विचार 1865

तेरे मन के आँगन की मिट्टी में कुछ यादें बो आया हूँ,

फूल बन महकूँगा तुम मुझे पहचान लेना !!

मस्त विचार 1864

खुशियों से नाराज़ है मेरी जिंदगी,

प्यार की मोहताज़ है मेरी जिंदगी,

हस लेता हूँ लोगों को दिखाने के लिए,

वर्ना दर्द की किताब है मेरी जिंदगी.

मस्त विचार 1863

रिश्तों का एहसास अभी रहने दो,

थोड़ी सी तो प्यास अभी रहने दो.

चन्द चोटों से क्या घबराना,

मनुहार की आस अभी रहने दो.

तपते है कड़ी धूप में, झुलसते हैं,

तब डाल पर फूल कहीं खिलते हैं.

इन फूलों की खुशबु को,

फ़िजा में अभी तुम बिखरने दो.

बेशकीमती है ये आँसुओं के मोती,

अभी न इनको पलकों से बहने दो.

माना खुशी देती है, यादों की अविरल धारा,

क्या हासिल होता है, अतीत में डूबकर,

यादों के काफिलों को शहर से गुजरने दो.

खालीपन में अपनों से मिलकर,

प्रेम के मोती सजने दो.

कोरी आँखों मे ख्वाब भी नहीं आते,

इन आँखों की नमीं अभी रहने दो.

क्या पता कब आ जाये कोई थामने वाला,

काँधे पे सिर रख कर, फुट फुट कर,

गम का समन्दर बहने दो,

एहसास रहने दो, प्यास रहने दो ।।

।। पीके ।।

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