मस्त विचार 2116

मैं बड़ो कि इज़्जत इसलिए करता हुं,

!! क्यूंकि !! उनकी अच्छाइयाँ मुझसे ज़्यादा हैं…

!! और !! छोटो से प्यार इसलिए करता हुं,

!! क्यूंकि !! उनके गुनाह मुझसे कम हैं.

मस्त विचार 2115

खुदगर्जों की इस बस्ती में _ अहसान भी है एक गुनाह,

_ जिसे तैरना सिखाओ _ वही डुबोने को तैयार खड़ा है.

कोई किसी पर यूं ही अहसान नहीं करता…

_ और अपने तो अहसान के बदले गुलामी चाहते हैं..!!

अपनों के खिलाफ चालें चलने वाले भूल जाते हैं कि..
_ अंत में उन्हें गैरों की गुलामी करनी पड़ती है.!!

मस्त विचार 2111

मत खोलना मेरी जिंदगी की पुरानी किताबों को,

“जो था वो मैं रहा नहीं और जो हूँ वो किसीको पता नहीं”

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