मस्त विचार 1862
लेकिन हम तो अच्छे बनें, हमें किसने रोका है.
लेकिन हम तो अच्छे बनें, हमें किसने रोका है.
तब ज़िन्दगी के असली मायने समझ आते हैं.
थोड़ा “Late” जरूर होगा पर “Latest” होगा.
और, फोटो खिंचवाते वक़्त..*मैं अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ..
क्यूँ नुमाइश करुँ..*अपने माथे पर शिकन की..*
मैं, अक्सर मुस्कुरा के..*इन्हें मिटा दिया करता हूँ..*
क्योंकि..*जब लड़ना है खुद को खुद ही से..
तो, हार-जीत में..*कोई फ़र्क नहीं रखता हूँ..*
हारुँ या जीतूं..* कोई रंज नहीं..*
कभी खुद को जिता देता हूँ..* तो, कभी खुद से जीत जाता हूँ..*
ज़िंदगी तुम बहुत खूबसूरत हो..*
इसलिए मैंने तुम्हें..* सोचना बंद और..* जीना शुरु कर दिया है..*
दुखा के दिल मेरा इतना सोचते क्यों हो,
दिल मेरा जानकार दुखाने वाले सुन,
जो बात सुन नहीं सकते वो सुनाते क्यों हो.
जो घायल भी उम्मीदों से है और जिन्दा भी उम्मीदों पे है.