मस्त विचार 2110
अपने जीने का बस एक अन्दाज रखो,
जो आपको ना समझे उसको नजरअन्दाज करो !
जो आपको ना समझे उसको नजरअन्दाज करो !
फ़र्क सिर्फ इतना है…कुदरत में पत्ते सूखते हैं…
हक़ीक़त में रिश्ते !!….
जहाँ मैं मिल भी सकता था बस इक वहाँ नहीं गया.
सवाल सारे गलत थे जवाब क्या देते.
बस अगला लम्हा पिछले से बेहतरीन हो…
जिनके “खुद” के बही खाते बिगड़े हैं, वो मेरा हिसाब लिए फिरते हैं.