मस्त विचार 1857
उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान,
जो घायल भी उम्मीदों से है और जिन्दा भी उम्मीदों पे है.
जो घायल भी उम्मीदों से है और जिन्दा भी उम्मीदों पे है.
*””I m Possible””*
बस, देखने का नजरिया बदल दो और नामुमकिन को मुमकिन करो.
तू आजा मुझमे….फिर तू ही तू रह जाएगा…
गम चाहे कैसा भी हो मै आकर भूल जाता हूँ.
इश्क़ एक इबादत है, कारोबार नहीं….
सब ने सोच लिया मुझे तकलीफ़ नहीं होती.