मस्त विचार 1857

उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान,

जो घायल भी उम्मीदों से है और जिन्दा भी उम्मीदों पे है.

मस्त विचार 1856

*”Impossible”* को गौर से देखो , वो खुद कहता है

*””I m Possible””*

बस, देखने का नजरिया बदल दो और नामुमकिन को मुमकिन करो.

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