मस्त विचार 2019
एक दिन सागर ने नदी से पुछा – कब तक मिलती रहोगी मुझ खारे पानी से
नदी ने हस कर कहा- जब तक तुझमे मिठास न आ जाये..
नदी ने हस कर कहा- जब तक तुझमे मिठास न आ जाये..
सत्य के दुर्दिनों की मत पूछो, झूठ की आरती उतारी थी.
कुल मिलाकर है बात इतनी सी, सबको अपनी ख़ुशी ही प्यारी थी.
हमने सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ा था, फिर तो उसकी जबाबदारी थी.
राज गद्दी थी किसकी क़िस्मत में, किसकी क़िस्मत में जाँ निसारी थी.
हाय हमको भी क्या भरोसा था, मानते हैं ये भूल भारी थी.
क्योंकि, बहुत सारे लोग आपसे प्यार करते हैं…
देख के तुमको ये जिंदगी मुस्कुराने लगी.
ये इश्क़ की इन्तेहां है या दीवानगी मेरी
हर सूरत में सूरत तेरी नजर आने लगी.
ख्वाहिशें जरा भी आराम नहीं करती.