मस्त विचार 2019

एक दिन सागर ने नदी से पुछा – कब तक मिलती रहोगी मुझ खारे पानी से

नदी ने हस कर कहा- जब तक तुझमे मिठास न आ जाये..

मस्त विचार 2017

हमने रिश्तों पे जान वारी थी, सच कहा है खता हमारी थी.

सत्य के दुर्दिनों की मत पूछो, झूठ की आरती उतारी थी.

कुल मिलाकर है बात इतनी सी, सबको अपनी ख़ुशी ही प्यारी थी.

हमने सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ा था, फिर तो उसकी जबाबदारी थी.

राज गद्दी थी किसकी क़िस्मत में, किसकी क़िस्मत में जाँ निसारी थी.

हाय हमको भी क्या भरोसा था, मानते हैं ये भूल भारी थी.

मस्त विचार 2016

कुछ लोग तो आपसे सिर्फ. इसलिए भी नफरत करते हैं

क्योंकि, बहुत सारे लोग आपसे प्यार करते हैं…

मस्त विचार 2015

हसरतें दिल की सब मेरी जुबां पर आने लगी.

देख के तुमको ये जिंदगी मुस्कुराने लगी.

ये इश्क़ की इन्तेहां है या दीवानगी मेरी

हर सूरत में सूरत तेरी नजर आने लगी.

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