मस्त विचार 1851
उदास होने के लिए उम्र पड़ी है,
नज़र उठाओ सामने ज़िंदगी खड़ी है.
नज़र उठाओ सामने ज़िंदगी खड़ी है.
नदियों को बहने के लिए किसी, पथ की जरूरत नहीं होती.
जो बढ़ते हैं जमाने में, अपने मजबूत इरादों के बल,
उन्हें अपनी मंजिल पाने के लिए, किसी रथ की जरूरत नहीं होती.
चिरागों के जलते ही…बुझा दी जाती हैं “तीलियाँ”.
सुना है दोस्तों के भी दोस्त होते हैं.
क्योंकि धूप कितनी भी तेज क्यों न हो, समंदर कभी सूखा नहीं करते.
ज़मीनों की ज़रूरत न रहेगी तुझे..,