मस्त विचार 1839

कभी हँसते हुए छोड़ देती है ये जिंदगी,

कभी रोते हुए छोड़ देती है ये जिंदगी.

न पूर्ण विराम सुख में, न पूर्ण विराम दुःख में,

बस जहाँ देखो वहाँ अल्पविराम छोड़ देती है ये जिंदगी.

प्यार की डोर सजाये रखो, दिल को दिल से मिलाये रखो,

क्या लेकर जाना है साथ मे इस दुनिया से,

मीठे बोल और अच्छे व्यवहार से रिश्तों को बनाए रखो…

मस्त विचार 1834

हर कोई अपना भाग्य बनाने में लगा है,

और दुर्भाग्य ये कि भाग्य से जो मिला है उसे जी नही पा रहा.

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