मस्त विचार 1833

आज तुम्हारे पास वही है, जिसके लिए तुमने प्रयास किया,

और इससे पहले तुम्हारी नई माँग की लहर इसको डुबा दे … इसे जी लो.

मस्त विचार 1832

“नाम” और “बदनाम” में क्या फर्क है ?

नाम” खुद कमाना पड़ता है “बदनामी” लोग आपको कमा के देते हैं.

मस्त विचार 1831

आसमाँ के चाँद के हकदार हैं हम,

यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.

सब्र कर जुल्मी की शामत भी आती होगी,

_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!

मस्त विचार 1830

मन ख्वाहिशों मे अटका रहा, और ज़िन्दगी मुझे जी कर* *चली गई.
लगता है ..जैसे मेरा जीवन ..जिंदगी के किन्ही बहुत खूबसूरत ..बीते हुए पलों में ..अटका हुआ है..!!

मस्त विचार 1829

अब उम्मीदें छोड़ दी हैं मैंने सबसे ; _

_ जो चल रहा है _ जैसा चल रहा है _ सब सही है..

जो चल रहा और आगे बढ़ रहा है, वही कभी ना कभी गिरता भी है,

_ ठहरे हुए लोग बस दूसरों पर उंगली उठाना जानते हैं.!!

मस्त विचार 1828

खुश किस्मत होते है वो जो तलाश बनते है किसी की, _

_ वरना पसंद तो कोई भी किसीको भी कर लेता है..

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