मस्त विचार 1803
खामोशियाँ जब चीखती हैं ना,
हर शोर खामोश हो जाता है.
हर शोर खामोश हो जाता है.
फिर मत कहना चले भी गए और बताया भी नहीं.
रखा करो नजदीकियां, ज़िन्दगी का कुछ भरोसा नहीं.
पर फिर सोचा, उम्र का तकाज़ा है, मनायेगा कौन……
क्योंकि आजकल लोगों को सुनाई कम और दिखाई ज्यादा देता है.
मेरा जिक्र ही कहाँ था तेरी रहमतों से पहले …
वहाँ तक नहीं पहुँच पाएँगे, जहाँ पहुँचना चाहते हैं.