मस्त विचार 1791
वर्ना तमन्ना तुमसे मिलने की कभी पूरी न होती.
वर्ना तमन्ना तुमसे मिलने की कभी पूरी न होती.
अपने अंग-अंग के लिए
मैं अपना वर्तमान, भविष्य और इतिहास लिखता हूँ
सुख, दुःख, के साथ प्रेम का अहसास लिखता हूँ
बात जो अनकही है
उसको शब्दों का देकर आकार लिखता हूँ
जो दिलो में घुट गयी सबके, उसे बेज़ार लिखता हूँ
जो नियते छुपाई गई सफ़ेद-पोशी में
उनके कपडे उतार लिखता हूँ
आ गयी जिन अनुभवो से बालो में सफेदी
उन अनुभवो की कालिख उतार लिखता हूँ
कुछ तो लोग कहेंगे, कहने दो
खुदगर्ज हूँ मैं सर झुका नहीं सकता
जीवन जीकर उनको परेशान हर बार करता हूँ.
ये हुनर मुझमें नहीं है मेरे यार,
जिंदगी को आजमाने के बाद बस इतना जाना है,
कि तूने जो कुछ भी किया मेरे भले के लिए किया है.
उन्हें एक दिन हाथ भी पसारने पड़ते हैं.
हम जरा से क्या बदले…सबको हैरत हो गई.
जिन्हें हमारी फ़िक्र होती है.