मस्त विचार 1840
“मनचाहा” बोलने के लिए,
“अनचाहा” सुनने की ताकत होनी चाहिए.
“अनचाहा” सुनने की ताकत होनी चाहिए.
कभी रोते हुए छोड़ देती है ये जिंदगी.
न पूर्ण विराम सुख में, न पूर्ण विराम दुःख में,
बस जहाँ देखो वहाँ अल्पविराम छोड़ देती है ये जिंदगी.
प्यार की डोर सजाये रखो, दिल को दिल से मिलाये रखो,
क्या लेकर जाना है साथ मे इस दुनिया से,
मीठे बोल और अच्छे व्यवहार से रिश्तों को बनाए रखो…
लेकिन असम्भव को सम्भव बना देते है…..
जिंदगी की खूबसूरती है, कुछ रिश्तों में….!!!
पी गए कुछ और कुछ छलका गए.
और जिसने खुद को बदल लिया वो जीत गया…..