मस्त विचार 1834
हर कोई अपना भाग्य बनाने में लगा है,
और दुर्भाग्य ये कि भाग्य से जो मिला है उसे जी नही पा रहा.
और दुर्भाग्य ये कि भाग्य से जो मिला है उसे जी नही पा रहा.
और इससे पहले तुम्हारी नई माँग की लहर इसको डुबा दे … इसे जी लो.
नाम” खुद कमाना पड़ता है “बदनामी” लोग आपको कमा के देते हैं.
यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.
_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!
_ जो चल रहा है _ जैसा चल रहा है _ सब सही है..
_ ठहरे हुए लोग बस दूसरों पर उंगली उठाना जानते हैं.!!