मस्त विचार 1887

भाग्य लिखने वाले तुझे एक मशवरा है मेरा..!!

कुछ अच्छा ही लिख दिया कर, बुरे के लिए तो अपने ही बहुत हैं..!!

मस्त विचार 1884

खुद की तलाश में क्युं दूर भटकता हूं,

खुद के अंदर झांकने में क्युं अटकता हूं,

बाँध के झूले भ्रम के क्युं लटकता हूं,

क्या वजह है जो मैं खुद को यू खटकता हूं..

error: Content is protected