मस्त विचार 1878
मेरी इबादत का अंदाज कुछ जुदा है,
मेरी नजर से देखो हर दिल में खुदा है.
मेरी नजर से देखो हर दिल में खुदा है.
वक़्त की बरसात है कि….थमने का नाम नहीं ले रही…
ये काँच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है.
मैं साथ हूँ उसके जो खुद मेरे खिलाफ हैं.
पर जख्म देने वाला भी कोई मेरा खास है.
तेरा सर पे हाथ रखना याद आता है,
मंजिल ही नहीं दिखती थी सफर में,
तेरा सही पथ दिखलाना याद आता है.
कि वो तुम्हारे बगैर ही जीना सीख जाए.
गम देने वाला अपना ही हरदम होता है.