मस्त विचार 1814
*”नादान” इंसान ही जिंदगी का* *’आनंद’ लेता है…*
*ज्यादा “होशियार” तो हमेशा* *’उलझा’ हुआ रहता है…!*
*ज्यादा “होशियार” तो हमेशा* *’उलझा’ हुआ रहता है…!*
_ निर्भर आप पर करता है कि आप प्यार बोते हैं या नफरत.!!
बड़ी कशमकश मे हूँ ऐ जिंदगी कहाँ हूं और कहाँ नही हूँ…!!!
और थकान शाम को अपना घर मांगती है.
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ.
तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन,
तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ.