मस्त विचार 1895
किस्मत ने जैसा चाहा वैसे ढल गए हम,
बहुत संभल के चले फिर भी फिसल गए हम,
किसी ने विश्वास तोड़ा तो किसी ने दिल,
और लोगों को लगा की बदल गए हम.
बहुत संभल के चले फिर भी फिसल गए हम,
किसी ने विश्वास तोड़ा तो किसी ने दिल,
और लोगों को लगा की बदल गए हम.
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए.
जिसे जी लिया उसे ज़िंदगी कहिए..
जब तक रिश्ते हैं, “घाव” मिलता रहेगा.
पीठ पीछे जो बोलते हैं, उन्हें पीछे ही रहने दें,
अगर हमारे कर्म, भावना और रास्ता सही है.
तो गैरों से भी “लगाव” मिलता रहेगा.
_ किरदार काबिल हुए तो याद रखे जाएंगे ..