मस्त विचार 1814

*”नादान” इंसान ही जिंदगी का* *’आनंद’ लेता है…*

*ज्यादा “होशियार” तो हमेशा* *’उलझा’ हुआ रहता है…!*

मस्त विचार 1813

दिल से ज्यादा उपजाऊ जगह और कोई नहीं हो सकती,

_ निर्भर आप पर करता है कि आप प्यार बोते हैं या नफरत.!!

“हम जो बोते हैं, वही काटते हैं” और ज़िंदगी, अपने अनगिनत रास्तों से गुज़रते हुए, हमें हमेशा वही लौटाती है.. जो हमने दूसरों को दिया था.

मस्त विचार 1812

कहीं होकर भी नही हूँ और कहीं ना होकर भी हूँ..

बड़ी कशमकश मे हूँ ऐ जिंदगी कहाँ हूं और कहाँ नही हूँ…!!!

मस्त विचार 1809

तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ.

तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ.

तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन,

तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ.

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