मस्त विचार 1836
ज़िंदगी इक आँसुओं का जाम था,
पी गए कुछ और कुछ छलका गए.
पी गए कुछ और कुछ छलका गए.
और जिसने खुद को बदल लिया वो जीत गया…..
और दुर्भाग्य ये कि भाग्य से जो मिला है उसे जी नही पा रहा.
और इससे पहले तुम्हारी नई माँग की लहर इसको डुबा दे … इसे जी लो.
नाम” खुद कमाना पड़ता है “बदनामी” लोग आपको कमा के देते हैं.
यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.
_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!