मस्त विचार 1830
मन ख्वाहिशों मे अटका रहा, और ज़िन्दगी मुझे जी कर* *चली गई.
लगता है ..जैसे मेरा जीवन ..जिंदगी के किन्ही बहुत खूबसूरत ..बीते हुए पलों में ..अटका हुआ है..!!
_ जो चल रहा है _ जैसा चल रहा है _ सब सही है..
_ ठहरे हुए लोग बस दूसरों पर उंगली उठाना जानते हैं.!!
_ वरना पसंद तो कोई भी किसीको भी कर लेता है..
_ लोग वहीं है दुनिया में, पर दिल बदल गए हैं !!
मनाते जो नहीं हो तो सताते क्यों नही हो तुम.
मिला तो रब भी नहीं, पर इबादत कहाँ रुकी हमसे..