मस्त विचार 1802
फिर मत कहना चले भी गए और बताया भी नहीं.
रखा करो नजदीकियां, ज़िन्दगी का कुछ भरोसा नहीं.
फिर मत कहना चले भी गए और बताया भी नहीं.
रखा करो नजदीकियां, ज़िन्दगी का कुछ भरोसा नहीं.
पर फिर सोचा, उम्र का तकाज़ा है, मनायेगा कौन……
क्योंकि आजकल लोगों को सुनाई कम और दिखाई ज्यादा देता है.
मेरा जिक्र ही कहाँ था तेरी रहमतों से पहले …
वहाँ तक नहीं पहुँच पाएँगे, जहाँ पहुँचना चाहते हैं.
आगे का रास्ता वहां पहुँचने के बाद, दिखने लगेगा.