मस्त विचार 1812
कहीं होकर भी नही हूँ और कहीं ना होकर भी हूँ..
बड़ी कशमकश मे हूँ ऐ जिंदगी कहाँ हूं और कहाँ नही हूँ…!!!
बड़ी कशमकश मे हूँ ऐ जिंदगी कहाँ हूं और कहाँ नही हूँ…!!!
और थकान शाम को अपना घर मांगती है.
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ.
तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन,
तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ.