मस्त विचार 1806
टूटा जो वो कोई दिल न था,
बस उम्मीद थी….
बस उम्मीद थी….
जैसे “बर्फ के पास शीतलता” “अग्नि के पास गरमाहट” और “गुलाब के पास सुगंध”.
हर शोर खामोश हो जाता है.
फिर मत कहना चले भी गए और बताया भी नहीं.
रखा करो नजदीकियां, ज़िन्दगी का कुछ भरोसा नहीं.
पर फिर सोचा, उम्र का तकाज़ा है, मनायेगा कौन……