मस्त विचार 1506
लोग उठाते ही रहते हैं.
लोग उठाते ही रहते हैं.
जब मुश्किलों ने मेरी मुश्किल देखी.
तू मत बना सहारों को, ये सहारे छूट जाते हैं.
मुसीबत में कहां कोई काम आता है,
ये आदत है जहां वालों की, ये अक्सर रूठ जाते हैं.
तूने ही मुझको जीना सीखाया.
ऎसा ज्ञान तूने दिया है.
बदल दिया जीवन मेरा सारा.
कैसे उतारूँ ये कर्जा तुम्हारा.
भीड़ है इतनी पर, कोई, किसी से,
मिलता क्यूँ नही है।
साथ चलते, टकराते,
घूम कर, आड़े तिरछे निकल जाना,
एक दूजे को देख कर,
झुठमुठ में मुस्कुराना,
कोई खुल कर हँसता क्यों नहीं है।
कोलाहल है, पर बोल नहीं है,
मेला है पर मेल नहीं है,
साथ चलते चलते किसी से हाथ मिलाना,
कोई दिल से अतरंग मिलता क्यों नहीं है।
Whatsapp पर है होली दीवाली,
पर फूलझड़ी,पटाखा,गुलाल नही है,
बड़ों का आशीर्वाद नहीं है।
जन्मदिन,वर्षगाँठ और दुनिया का ज्ञान,
Facebook पर है चेहरा, पर कोई भाव नहीं है।
कोई आकर इनको आईना,
दिखाता क्यों नहीं है,
खो गयी मिट्टी की खुशबू,
इस महँगे इत्र के बाजार में,
बिक रही चांदनी अब, रोशनी के बाजार में,
रिश्ते हैं सारे मगर, अब प्यार नही है ।
।।पीके ।।
तूने ऐसी पिलाई निखर गया हूँ.
दुःख और गम सब भूल गया हूँ.
तेरे हाथों में पड़ कर खिल गया हूँ.