मस्त विचार 1493

स्वाद और विवाद दोनों को छोड़ देना चाहिए, _

_ स्वाद छोड़ो तो शरीर को फायदा, और विवाद छोड़ो तो संबंधों को फायदा ..

मस्त विचार 1492

लोग कहते हैं की इस पागल का कोई भरोसा नहीं,

जनाब, कोई ये नहीं समझता की भरोसे ने ही पागल किया है.

मस्त विचार 1490

मगन था मैं…सब्जी में कमी निकालने में,

और कोई खुदा से…सूखी रोटी का शुक्र मना रहा था.

सारे वजन उठा कर देख लिए, दाल रोटी ही सबसे भारी है..!!
कोई कितनी भी चालें चले, पर आज भी दुनियाँ का बहुत बड़ा वर्ग ईमानदारी की रोटी पर ही जिंदा है.

मस्त विचार 1489

ज़िन्दगी जाने कब से गुनगुना रही है …कुछ कानों में….

ज़िम्मेदारियों के शोर में, ….कुछ सुनाई नहीं देता.

कभी- कभी जल्दबाजी और ज़िम्मेदारियों में _ हम खुद को खो देते हैं और हमें ख़बर भी नहीं होती..

_खैर, खुद को खोकर, फिर खुद को पा लेने की जद्दोजहद का नाम ही ज़िंदगी है..!!

अधिकांश लोग _अपनी ज़िम्मेदारियों, संघर्षों और चिंता में _इतने फँसे हुए हैं कि _किसी और से क्या पूछे कि _वे क्या कर रहे हैं.
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