मस्त विचार 1542
अब फ़ोन वायर से आज़ाद है और आदमी बंधा है.
अब फ़ोन वायर से आज़ाद है और आदमी बंधा है.
धार वक़्त की बड़ी प्रबल है, इसमें लय से बहा करो,
जीवन कितना क्षणभंगुर है, मिलते जुलते रहा करो.
यादों की भरपूर पोटली, क्षणभर में न बिखर जाए,
दोस्तों की अनकही कहानी, तुम भी थोड़ी कहा करो.
हँसते चेहरों के पीछे भी, दर्द भरा हो सकता है,
यही सोच मन में रखकर के, हाथ दोस्त का गहा करो.
सबके अपने-अपने दुःख हैं, अपनी-अपनी पीड़ा है,
यारों के संग थोड़े से दुःख, मिलजुल कर के सहा करो.
किसका साथ कहाँ तक होगा, कौन भला कह सकता है,
मिलने के कुछ नए बहाने, रचते-बुनते रहा करो.
मिलने जुलने से कुछ यादें, फिर ताज़ा हो उठती हैं,
इसीलिए यारों नाहक भी, मिलते जुलते रहा करो.
हमें कुछ अच्छे लोगों से मिलवाने के लिए भी आता है.
उन्हें दूसरों में ग़लतियों के अलावा कुछ नज़र नहीं आता.
जीत लो सबके दिलों को, बस यही जीवन का गहना है !!
खींच क्या दी दो तीन लकीर तूने हाथों मे..,
ये भोला इन्सान उसे तक़दीर समझने लगा…!!!