मस्त विचार 1458
मैं लोगों से मुलाकातों का लम्हा याद रखता हूँ,
_ बातें भूल भी जाऊँ पर लहजा याद रखता हूँ..!!
लफ्ज़ भुलाए जा सकते हैं, लहजा घर कर जाता है..!!
_ बातें भूल भी जाऊँ पर लहजा याद रखता हूँ..!!
नज़र उसे ही पसंद करती है जो नसीब में नही होता.
लेकिन कुछ लोग हमें बेजुबां समझ लेते हैं.
लेकिन हर कोई उसे देख नहीं पाता.
यदि आप हर भोकने वाले कुत्ते को पत्थर मारेंगें.
सुल्तान भी बन जाए तो दिल में फ़क़ीर ज़िंदा रख,
लालच डिगा न पाए तुझे आंखो का नीर ज़िंदा रख,
इन्सानियत सिखाती जो मन में वो पीर ज़िंदा रख,
हौसले के तरकश में कोशिश का तीर ज़िंदा रख !!