मस्त विचार 1168
परन्तु पहली चोट भी व्यर्थ नहीं जाती.
परन्तु पहली चोट भी व्यर्थ नहीं जाती.
हर एक काम को मैंने खुदा पे छोड़ दिया,
वो मुझे याद रखे या भुला दे,
उसी का काम था उसी की रजा पे छोड़ दिया,
उसी की मर्जी बुझा दे या जला दे,
चिराग मैंने जला के हवा पे छोड़ दिया.
जिंदगी तेरे इश्क़ ने हमें सुल्तान बना दिया.
जब वही रिश्ता पुराना हो जाता है….तो लोग दूर होने का बहाना ढूंढते है..
ढ़ूंढ़ रहे दुनियाँ में कमियां, अपने मन में ताके कौन ?
सबके भीतर दर्द छुपा है, उसको अब ललकारे कौन ?
दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते, खुद को आज सुधारे कौन ?
पर उपदेश कुशल बहुतेरे,खुद पर आज विचारे कौन ?
हम सुधरें तो जग सुधरेगा, यह सीधी बात उतारे कौन ?
फूट फूट कर फिर रोने को मन करता है,
मन पागल है, कुछ भी खोने से डरता है,
जो खोया है फिर पाने को मन करता है.