मस्त विचार 1167

सजा को मैंने रजा पे छोड़ दिया,

हर एक काम को मैंने खुदा पे छोड़ दिया,

वो मुझे याद रखे या भुला दे,

उसी का काम था उसी की रजा पे छोड़ दिया,

उसी की मर्जी बुझा दे या जला दे,

चिराग मैंने जला के हवा पे छोड़ दिया.

मस्त विचार 1165

जब रिश्ता नया होता है, तो लोग बात करने का बहाना ढूंढते है. और

जब वही रिश्ता पुराना हो जाता है….तो लोग दूर होने का बहाना ढूंढते है..

 

मस्त विचार 1164

झाँक रहे है इधर उधर सब, अपने अंदर झांकें कौन ?

ढ़ूंढ़ रहे दुनियाँ में कमियां, अपने मन में ताके कौन ?

सबके भीतर दर्द छुपा है, उसको अब ललकारे कौन ?

दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते, खुद को आज सुधारे कौन ?

पर उपदेश कुशल बहुतेरे,खुद पर आज विचारे कौन ?

हम सुधरें तो जग सुधरेगा, यह सीधी बात उतारे कौन ?

मस्त विचार 1163

याद पुरानी फिर बोने को मन करता है,

फूट फूट कर फिर रोने को मन करता है,

मन पागल है, कुछ भी खोने से डरता है,

जो खोया है फिर पाने को मन करता है.

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