मस्त विचार 644
ना मिला तू, तो मै थक कर आ गया घर में, घर में कदम रखते ही, लगा मेरे पीछे ही आ गया तू, मिला तू मुझे मेरे ही में, मै शायद भूल गया और बेवजह निकल पड़ा बाहर, तू मिल गया मुझे मेरे ही में .
ना मिला तू, तो मै थक कर आ गया घर में, घर में कदम रखते ही, लगा मेरे पीछे ही आ गया तू, मिला तू मुझे मेरे ही में, मै शायद भूल गया और बेवजह निकल पड़ा बाहर, तू मिल गया मुझे मेरे ही में .
जिन्दगी को परवाज कर दो.
फिर खुशियाँ सब साथ होगी, मंजिल भी तुम्हारे पास होगी.
और हम पागल उनकी मर्ज़ी का इंतज़ार करते हैं .!!
क्यों कि……. जिन के पास खुद इज्जत नहीं….. वो किसी और को क्या इज्जत देंगे.
भारी – भारी बातें हैं पर हल्के हल्के लोग हैं. पता नहीं कब दोस्त यहाँ अपना दुश्मन बन जाएगा, गहरे – गहरे वादे हैं पर उथले – उथले लोग हैं. बगुला भगत बने फिरते पर हंस खूब कहलाते हैं, भीतर से काले, ऊपर से उजले – उजले लोग हैं. डांवाडोल लिए दिल फिरते, बातें करते सधी हुयी, जाने किस मद में हैं डूबे बहके – बहके लोग हैं. मेरी मानो तो दुनियाँ की बातों में मत आ जाना, भीतर तो दुर्गंध लिए, पर महके – महके लोग हैं.
मैने उसे इतना पढ़ा, कि मुझे याद हो गया.