मस्त विचार 622

ज़िन्दगी को हम ऎसे जीना सीख जाएँ,

सुख दुःख को छक कर पीना सीख जाएँ,

आए संकट नहीं घबराएँ,

मस्त हो कर जीना हम सीख जाएँ. 

मस्त विचार 621

 मिलती है कहाँ वफा ज़रा हमे भी तो बताओ दोस्तों

यहाँ तो हर कोई वफा की उम्मीद दे कर बेवफाई कर जाता है.

मस्त विचार 620

हर “इंसान” अपनी “जुबां” के “पीछे” “छुपा” हुआ है !!

अगर उसे “समझना” है तो उसे “बोलने” दो….!!!”

मस्त विचार 618

किस लिए गम तेरे घनेरे हैं, मुस्कुराने से किस ने रोका है,

ज़िन्दगी में बहुत सबेरे हैं, और थोड़े से बस अँधेरे हैं.

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