मस्त विचार 062

पाँव नंगे हैं, मगर मै सफ़र पे निकला हूँ.

कौन- सी राह चलूँगा, चुनाव कर लूँगा.

मुसाफ़िर हूँ, मै भीड़ का हिस्सा नहीं.

खुली फ़िजा में, हवाओं में साँस भर लूँगा.

मस्त विचार 061

मुझे स्थायीत्व पाने में वर्षों लग गये.

इस दौरान मुझे कई कटु अनुभव हुए.

इन्ही संघर्षों ने मुझे बहुत कुछ सीखाया.

जिससे मेरे जीवन को नया आकार मिला.

मस्त विचार 060

ये मेरा कर्त्तव्य है कि मै तेरे समीप जाऊँ.

कुछ सीखूँ, समझूँ और जब लौट कर घर आऊँ

तो हर सीखी हुई बात को अपने जीवन में उतारूँ.

वक्त के साथ बदलने में कोई बुराई नहीं है,

शर्त सिर्फ यह है कि बदलाव बुरा नहीं होना चाहिए.

मस्त विचार 059

तू मुझसे मुहब्बत करता है,

इसलिए तू मेरा इम्तहान लेता है,

और इम्तहान से बाहर आने के लिए,

इम्तहान में पूरा उतरने के लिए,

ताकत भी तू ही देता है.

मस्त विचार 058

मेरे मन में तू बसता था, पर मै तुझको जान न सका.

प्राणों से भी तू समीप था, पर मै ही तुझको पहचान न सका.

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