मस्त विचार 062
पाँव नंगे हैं, मगर मै सफ़र पे निकला हूँ.
कौन- सी राह चलूँगा, चुनाव कर लूँगा.
मुसाफ़िर हूँ, मै भीड़ का हिस्सा नहीं.
खुली फ़िजा में, हवाओं में साँस भर लूँगा.
कौन- सी राह चलूँगा, चुनाव कर लूँगा.
मुसाफ़िर हूँ, मै भीड़ का हिस्सा नहीं.
खुली फ़िजा में, हवाओं में साँस भर लूँगा.
इस दौरान मुझे कई कटु अनुभव हुए.
इन्ही संघर्षों ने मुझे बहुत कुछ सीखाया.
जिससे मेरे जीवन को नया आकार मिला.
कुछ सीखूँ, समझूँ और जब लौट कर घर आऊँ
तो हर सीखी हुई बात को अपने जीवन में उतारूँ.
शर्त सिर्फ यह है कि बदलाव बुरा नहीं होना चाहिए.
इसलिए तू मेरा इम्तहान लेता है,
और इम्तहान से बाहर आने के लिए,
इम्तहान में पूरा उतरने के लिए,
ताकत भी तू ही देता है.
प्राणों से भी तू समीप था, पर मै ही तुझको पहचान न सका.
मतलब
जीवन का नाश होना.