मस्त विचार 077
रोज़ कोई ना कोई नाराज हो जाता है !!
रोज़ कोई ना कोई नाराज हो जाता है !!
पर दुःख अच्छा भी होता है,
जब आता है, कुछ- ना- कुछ सीखा जाता है .
बेवजह हर समय ना शिकायत कीजिये .
दुश्मनी का सफ़र तय ना हो पायेगा,
प्रेम से मन का आँगन सजा लीजिये .
निकल ही आएगा , कोई ना कोई रास्ता .
अब किसी शख्श की आदत नहीं होती मुझको.
कोई खुशी बन कर ग़म में, क्यों बदल जाता है.
कोई मन में बस कर, ज़िन्दगी से दूर क्यों हो जाता है.
कोई जीवन को रंगों से भर कर, उजाड़ क्यों देता है.
कोई हमराह बन कर, राह में छोड़ क्यों जाता है.
क्यों और क्यों कोई ऎसा करता है.
कि इतना ख़ास हो कर, बेगाना बन जाता है.
क्यों कोई हमारा साथ छोड़कर, दूसरों का हो जाता है.
क्यों कोई हमें बताये बिना,
अपने दिल से बाहर निकाल देता है.
क्या हम इतने बुरे हैं.
कि उसे हमारे दर्द का, एहसास भी नहीं होता.
_ बेहद हुए करीब तो किस्सा हुआ ख़तम..!!
_ अब जब हम उनसे दूर हो गए हैं तो, अब वो निश्चित सुखी होंगे..!!
_ जब बिना किसी किंतु-परंतु के आपके द्वारा पूछे गए सवाल उसे परेशान करने लगें..!!