मस्त विचार 128

मै पागल तो हूँ ही, लेकिन इसी पागलपन से गीत उठेंगे.

यही पागलपन मेरे मन की वीणा पर, संगीत बन कर नाचेगा.

मस्त विचार 126

मै तो साधारण इन्सान था, तूने इस लोहे को सोना ही नहीं बनाया.

तू ने तो अपनी पारसमणि से छूकर पारस ही बना दिया.

मस्त विचार 124

अक्सर मैं अपनी बात समझाने में नाकाम होता हूँ …

क्यूंकि मैं एहसास लिखता हूँ लोग अलफ़ाज़ पड़ते है………

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