मस्त विचार 071

तुम चाहो तो शूल को भी फूल बना दो.

तुम चाहो तो प्रतिकूल को अनुकूल बना दो.

चाहने की देर है और बस कुछ भी नहीं.

तुम चाहो तो आसमान को धूल बना दो.

मस्त विचार 070

जब तेरा नाम जबान पर आता है.

पता नहीं मन क्यों मुस्कुराता है.

तसल्ली होती है मेरे मन को

कि चलो, कोई तो है अपना

जो हर वक़्त याद आता है.

मस्त विचार 069

ठोकरें अपना काम करेंगी, तू अपना काम करता चल.

वो गिराएंगी बार बार, तू उठकर फिर से चलता चल..

मस्त विचार 068

निखरती है मुश्किलों से ही शख्सियत यारों,

जो चट्टानों से ही न उलझे वो झरना किस काम का.

 

मस्त विचार 066

तू चाहे तो फिर खिल जाऊँ.

तू चाहे तो फिर बहार आये.

फिर से तू मुझको खिला दे.

फिर से तू जीवन मस्त बना दे.

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