मस्त विचार 050

मै चैन से सोने लगा हूँ.

जिन्दगी ने वो तकलीफ है बख्सी.

मौत का खौफ खोने लगा हूँ.

काबिले भरोसे का कोई,

इन्सान नहीं मिलता.

पत्थरों से मन लगाने लगा हूँ.

लुटा रिश्तों के हाथों में इतना.

और लुटवाने कि हिम्मत खो चुका हूँ.

सच जानने कि जिद अधूरी रहेगी.

आदर्शों को अपनाना न सम्भव हुआ.

बे- परवाह अब मै सोने लगा हूँ.

मस्त विचार 049

अच्छा लगा, तेरा बोलना, बतलाना.

अच्छा लगा, तेरा हँसना, मुस्कुराना.

अच्छा लगा, तेरे संग में चलना.

अच्छा लगा, तेरा मिलना, मिलाना.

पर अब दुःख है तेरे जाने का.

तू जो अब तक साथ रहा.

हर दिन तुमने मुझको कुछ सिखलाया.

सुख- दुःख में भी मेरे साथ रहा.

पर फिर भी कहूँगा, अच्छा लगा.

मस्त विचार 047

सिर्फ एक ही तमन्ना रखते हैं हम अपने दिल में..

बस महोब्बत से याद करो चाहे मुद्दतों न बात करो..

मस्त विचार 046

 क्यों जिन्दगी की राह में मजबूर हो गए,

इतने हुए करीब के हम दूर हो गए,

ऐसा नहीं के हम को कोई भी खुशी नहीं,

लेकिन ये जिन्दगी तो कोई जिन्दगी नहीं,

क्यों इसके फैसले हमे मंजूर हो गए,

पाया तुम्हे तो हम को लगा तुम को खो दिया,

हम दिल पे रोये और ये दिल हम पे रो दिया,

पलकों से ख्वाब क्यों गिरे क्यों चूर हो गए.

मस्त विचार 045

 कभी हंस लिया तेरे बिना, कभी रो लिया तेरे बिना.

कभी जग लिया तेरे बिना, कभी सो लिया तेरे बिना.

भरी दुनिया में अकेला हूँ तेरे बिना.

कभी हंस लिया तेरे बिना, कभी रो लिया तेरे बिना.

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