मस्त विचार 064

मेरी असलियत से अनजान हैं ज़माने वाले.

सभी राज़ नहीं होते बताने वाले.

कभी पास आकर देखो हमें.

कैसे रोते हैं दूसरों को हंसाने वाले.

रिश्ता बनाया है तो निभाएंगे.

हर पल सबको यों ही हंसाएंगे.

मस्त विचार 063

पलकों पे अपने बैठाया है तुम्हे, बड़ी दुआओं के बाद पाया है तुम्हे.

_ आसानी से नहीं मिले हो तुम, वक़्त काफी लगा कर पाया है तुम्हे.!!

मस्त विचार 062

पाँव नंगे हैं, मगर मै सफ़र पे निकला हूँ.

कौन- सी राह चलूँगा, चुनाव कर लूँगा.

मुसाफ़िर हूँ, मै भीड़ का हिस्सा नहीं.

खुली फ़िजा में, हवाओं में साँस भर लूँगा.

मस्त विचार 061

मुझे स्थायीत्व पाने में वर्षों लग गये.

इस दौरान मुझे कई कटु अनुभव हुए.

इन्ही संघर्षों ने मुझे बहुत कुछ सीखाया.

जिससे मेरे जीवन को नया आकार मिला.

मस्त विचार 060

ये मेरा कर्त्तव्य है कि मै तेरे समीप जाऊँ.

कुछ सीखूँ, समझूँ और जब लौट कर घर आऊँ

तो हर सीखी हुई बात को अपने जीवन में उतारूँ.

वक्त के साथ बदलने में कोई बुराई नहीं है,

शर्त सिर्फ यह है कि बदलाव बुरा नहीं होना चाहिए.

error: Content is protected