मस्त विचार 044
ऐ यार, अब तो फासले मिटा दे,
नामुमकिन को मुमकिन बना दे,
तुम से ही एक रिश्ता है यारी का,
इन्तजार की घड़ियां मिटा दे.
नामुमकिन को मुमकिन बना दे,
तुम से ही एक रिश्ता है यारी का,
इन्तजार की घड़ियां मिटा दे.
रहो तो फूलों की तरह और बिखरो तो खुशबू की तरह.
एक दिन मुरझा जाओगे, और दफ़ना दिए जाओगे.
जीना है तो पत्थर बन के जीओ.
कभी तराशे गए तो, हीरा कहलाओगे.
मुझे अब अच्छा लगने लगा है
अपने ही भीतर खो जाना
क्योंकि वहाँ तुम चले आते हो हर बार.
तू मिल गया मुझे, मिल गया ठिकाना.
ऐ यार, तुम कहीं बदल न जाना.
मेरी ये दुनिया, आबाद है तुम्ही से.
आबाद मेरी दुनिया, बरबाद न बनाना.
मुझे भा गया है, तेरे पास आना.
हमे मिटा के मुकद्दर को भी सुकूं न मिला……