मस्त विचार 059
तू मुझसे मुहब्बत करता है,
इसलिए तू मेरा इम्तहान लेता है,
और इम्तहान से बाहर आने के लिए,
इम्तहान में पूरा उतरने के लिए,
ताकत भी तू ही देता है.
इसलिए तू मेरा इम्तहान लेता है,
और इम्तहान से बाहर आने के लिए,
इम्तहान में पूरा उतरने के लिए,
ताकत भी तू ही देता है.
प्राणों से भी तू समीप था, पर मै ही तुझको पहचान न सका.
मतलब
जीवन का नाश होना.
कोई अच्छा लगा बस लगता चला गया.
इन्हें चलने दो ऐसे ही… इल्ज़ाम ना देना तुम.
ऐसे ही रहने दो तुम… तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में…
के अल्फ़ाज़ों को मेरे… अंज़ाम ना देना तुम.
कभी न कभी तो बुझ जाऊँगा.
आज शिकायत है लोगों को मेरी रोशनी से.
कल अँधेरे में उन्हें बहोत याद आऊँगा.