मस्त विचार 038
या रब लीख दी तूने, तक़दीर मेरी, मेरे ही हाथों पर.
और मेरी तक़दीर पर, मेरा ही वश नहीं चलता.
और मेरी तक़दीर पर, मेरा ही वश नहीं चलता.
सुना है ऊपरवाले के घर में कपडे कि कोई दूकान नहीं है…
तो तुम्हारे आंसू बन जाता
जो तुम्हारे गालों पर जीता और होठों पर मर जाता.
और उन्हें सम्भाल कर रखना हमारा हुनर …….
लेकिन मैंने उन लोगों में उसे पाय़ा है ,
जिन्होंने मेरा तब साथ दिया ,
जब बाकि सारी दुनिया ने मेरा साथ नहीं दिया .
आज का दिन खुशनुमा लग रहा है.
कहीं तुम आस पास तो नहीं.
महक उठा हूँ मैं.
कहीं यह तुम ही तो नहीं.